Qari
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اَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَۙ
alam nasyraḥ laka ṣadrak(a).
की हम अहाँक छाती (मुहम्मद) के विस्तार नहि केने छी?
وَوَضَعْنَا عَنْكَ وِزْرَكَۙ
wa waḍa‘nā ‘anka wizrak(a).
आ हम अहाँ सभक भार अहाँ सभ पर सँ दूर कऽ देलहुँ।
الَّذِيْٓ اَنْقَضَ ظَهْرَكَۙ
allażī anqaḍa ẓahrak(a).
जे अहाँक पीठ पर तौलैत अछि,
وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَۗ
wa rafa‘nā laka żikrak(a).
आ हम तोहर नाम तोहर लेल बढ़ौने छी।
فَاِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًاۙ
fa'inna ma‘al-‘usri yusrā(n).
तेँ सत्ते कष्टक संग सहजता होइत छैक,
اِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًاۗ
inna ma‘al-‘usri yusrā(n).
सचमुच, हर कठिनाई के संग सहजता सेहो होइत छैक।
فَاِذَا فَرَغْتَ فَانْصَبْۙ
fa iżā faragta fanṣab.
तेँ जखन अहाँ (किछु सँ) समाप्त क' लेब तखन मेहनति करैत रहू (आन बात पर),
وَاِلٰى رَبِّكَ فَارْغَبْ ࣖ
wa ilā rabbika fargab.
आ अहाँ सभ मात्र अपन परमेश् वरक आशा करैत छी।