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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)

Q.S अन-नजम (اَلنَّجْم) - 62 पदों की संख्या

(तारा)

Qari

Murottal Audio

1

وَالنَّجْمِ اِذَا هَوٰىۙ

wan-najmi iżā hawā.

डूबला पर तारा सभक द्वारा,


2

مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوٰىۚ

mā ḍalla ṣāḥibukum wa mā gawā.

अहाँक मित्र (मुहम्मद) ने भटकल अछि आ ने (ओहो) गलती,


3

وَمَا يَنْطِقُ عَنِ الْهَوٰى

wa mā yanṭiqu ‘anil-hawā.

आ ओ अपन इच्छाक अनुसार (कुरान) नहि बजैत अछि |


4

اِنْ هُوَ اِلَّا وَحْيٌ يُّوْحٰىۙ

in huwa illā waḥyuy yūḥā.

(कुरान) के अलावा कुछ भी नै (ओकरा पर) प्रकट करलऽ गेलऽ खुलासा छै,


5

عَلَّمَهٗ شَدِيْدُ الْقُوٰىۙ

‘allamahū syadīdul-quwā.

जे हुनका बहुत शक्तिशाली (जिब्रिल) द्वारा सिखाओल गेल छलनि,


6

ذُوْ مِرَّةٍۗ فَاسْتَوٰىۙ

Żū mirrah(tin), fastawā.

जेकरा अडिग छै; तखन (जिब्रिल) अपन मूल रूप (एकटा नीक आ पराक्रमी रूप) मे प्रकट भेलाह |


7

وَهُوَ بِالْاُفُقِ الْاَعْلٰىۗ

wa huwa bil-ufuqil-a‘lā.

जखन कि ओ उच्च क्षितिज पर छथि।


8

ثُمَّ دَنَا فَتَدَلّٰىۙ

Ṡumma danā fa tadallā.

तखन ओ नजदीक आबि गेलाह (मुहम्मद के), फेर नजदीक आबि गेलाह,


9

فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ اَوْ اَدْنٰىۚ

fa kāna qāba qausaini au adnā.

ताकि दूरी (लगभग) दू धनुष या (पुनः) नजदीक हो |


10

فَاَوْحٰىٓ اِلٰى عَبْدِهٖ مَآ اَوْحٰىۗ

fa auḥā ilā ‘abdihī mā auḥā.

तखन ओ अपन सेवक (मुहम्मद) केँ अल्लाह जे किछु उतारने छलाह से पहुँचा देलनि।


11

مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَاٰى

mā każabal-fu'ādu mā ra'ā.

ओकर मोन जे देखलकै ओकरा नकारलकै।


12

اَفَتُمٰرُوْنَهٗ عَلٰى مَا يَرٰى

afa tumārūnahū ‘alā mā yarā.

त की अहाँ (मक्का के मुश्रिक) हुनका सं विवाद करय चाहैत छी जे ओ जे देखलनि?


13

وَلَقَدْ رَاٰهُ نَزْلَةً اُخْرٰىۙ

wa laqad ra'āhu nazlatan ukhrā.

आ सचमुच, ओ (मुहम्मद) एकरा (अपन मूल रूप मे) दोसर समय मे देखने छलाह,


14

عِنْدَ سِدْرَةِ الْمُنْتَهٰى

‘inda sidratil-muntahā.

(अर्थात) सिद्रतुल मुन्ताहा में, 1999।


15

عِنْدَهَا جَنَّةُ الْمَأْوٰىۗ

‘indahā jannatul-ma'wā.

लग मे निवासक स्वर्ग अछि,


16

اِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشٰىۙ

iż yagsyas-sidrata mā yagsyā.

(मुहम्मद जीब्रिल के देखलखिन) जखन सिद्रतिल उल्टी केलक आ ओकरा ढकने कोनो चीज स अभिभूत भ गेल,


17

مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغٰى

mā zāgal-baṣaru wa mā ṭagā.

हुनक (मुहम्मदक) दृष्टि जे देखलनि ताहि सँ नहि विचलित भेलनि आ नहिये (नहि) ओहि सँ आगू बढ़लनि ।


18

لَقَدْ رَاٰى مِنْ اٰيٰتِ رَبِّهِ الْكُبْرٰى

laqad ra'ā min āyāti rabbihil-kubrā.

सचमुच, ओ अपन प्रभुक किछु पैघ चिन्ह देखने छथि ।


19

اَفَرَءَيْتُمُ اللّٰتَ وَالْعُزّٰى

afa ra'aitumul-lāta wal-‘uzzā.

त की अहाँ (मशरिक) के लेल (मूर्ति) अल-लता आ अल-उज्जा पर विचार करब उचित अछि,


20

وَمَنٰوةَ الثَّالِثَةَ الْاُخْرٰى

wa manātaṡ-ṡāliṡatal-ukhrā.

आ मनत, तेसर (जे) बाद मे (अल्लाहक बेटीक रूप मे) छथि |


21

اَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْاُنْثٰى

alakumuż-żakaru wa lahul-unṡā.

की ई अहाँक लेल (उपयुक्त) जे पुरुष छी आ हुनका लेल जे स्त्री छथि?


22

تِلْكَ اِذًا قِسْمَةٌ ضِيْزٰى

tilka iżan qismatun ḍīzā.

जे निश्चित रूप स अनुचित विभाजन अछि।


23

اِنْ هِيَ اِلَّآ اَسْمَاۤءٌ سَمَّيْتُمُوْهَآ اَنْتُمْ وَاٰبَاۤؤُكُمْ مَّآ اَنْزَلَ اللّٰهُ بِهَا مِنْ سُلْطٰنٍۗ اِنْ يَّتَّبِعُوْنَ اِلَّا الظَّنَّ وَمَا تَهْوَى الْاَنْفُسُۚ وَلَقَدْ جَاۤءَهُمْ مِّنْ رَّبِّهِمُ الْهُدٰىۗ

in hiya illā asmā'un sammaitumūhā antum wa ābā'ukum mā anzalallāhu bihā min sulṭān(in), iy yattabi‘ūna illaẓ-ẓanna wa mā tahwal-anfus(u), wa laqad jā'ahum mir rabbihimul-hudā.

ई सब नामक अतिरिक्त किछु नहि अछि जे अहाँ आ अहाँक पूर्वज द्वारा आविष्कार कयल गेल अछि; अल्लाह हुनका सब लेल कोनो अधिकार नहि पठौने छथि। ओ सभ मात्र अनुमानक पालन करैत छथि आ जे किछु हुनकर इच्छा चाहैत अछि । मुदा हुनका सभक प्रभुक मार्गदर्शन भेटल छनि।


24

اَمْ لِلْاِنْسَانِ مَا تَمَنّٰىۖ

am lil-insāni mā tamannā.

आकि मनुक्खकेँ ओ सभ किछु भेटत जकर आकांक्षा अछि?


25

فَلِلّٰهِ الْاٰخِرَةُ وَالْاُوْلٰى ࣖ

fa lillāhil-ākhiratu wal-ūlā.

(नहि!) त परलोक के जीवन आ दुनिया के जीवन अल्लाह के छै।


26

۞ وَكَمْ مِّنْ مَّلَكٍ فِى السَّمٰوٰتِ لَا تُغْنِيْ شَفَاعَتُهُمْ شَيْـًٔا اِلَّا مِنْۢ بَعْدِ اَنْ يَّأْذَنَ اللّٰهُ لِمَنْ يَّشَاۤءُ وَيَرْضٰى

wa kam mim malakin fis-samāwāti lā tugnī syafā‘atuhum syai'an illā mim ba‘di ay ya'żanallāhu limay yasyā'u wa yarḍā.

आरू आकाश में कतेक फरिश्ता छै, ओकरऽ बिनती (मदद) केरऽ कोनो फायदा नै छै सिवाय जब॑ अल्लाह न॑ अनुमति (आरू केवल) जेकरा लेली वू चाहै छै आरू ओकरा स॑ खुश छै ।


27

اِنَّ الَّذِيْنَ لَا يُؤْمِنُوْنَ بِالْاٰخِرَةِ لَيُسَمُّوْنَ الْمَلٰۤىِٕكَةَ تَسْمِيَةَ الْاُنْثٰى

innal-lażīna lā yu'minūna bil-ākhirati layusammūnal-malā'ikata tasmiyatal-unṡā.

सचमुच, जे परलोक में विश्वास नै करै छै, सचमुच वू स्वर्गदूत के नाम महिला के नाम पर रखै छै।


28

وَمَا لَهُمْ بِهٖ مِنْ عِلْمٍۗ اِنْ يَّتَّبِعُوْنَ اِلَّا الظَّنَّ وَاِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِيْ مِنَ الْحَقِّ شَيْـًٔاۚ

wa mā lahum bihī min ‘ilm(in), iy yattabi‘ūna illaẓ-ẓann(a), wa innaẓ-ẓanna lā yugnī minal-ḥaqqi syai'ā(n).

आ हुनका सभकेँ एहि विषयमे कोनो ज्ञान नहि छनि । ई सब अनुमानक पालन करब सँ बेसी किछु नहि थिक, आ वास्तव मे एहि अनुमान सभक सत्य केँ कनिको लाभ नहि होइत छैक ।


29

فَاَعْرِضْ عَنْ مَّنْ تَوَلّٰىۙ عَنْ ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ اِلَّا الْحَيٰوةَ الدُّنْيَاۗ

fa a‘riḍ ‘am man tawallā, ‘an żikrinā wa lam yurid illal-ḥayātad-dun-yā.

त (मुहम्मद) के छोड़ू जे हमर चेतावनी स मुँह मोड़ि लैत अछि, आ ओ केवल एहि दुनिया के जीवन के इच्छा करैत अछि |


30

ذٰلِكَ مَبْلَغُهُمْ مِّنَ الْعِلْمِۗ اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَبِيْلِهٖۙ وَهُوَ اَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدٰى

Żālika mablaguhum minal-‘ilm(i), inna rabbaka huwa a‘lamu biman ḍalla ‘an sabīlih(ī), wa huwa a‘lamu bimanihtadā.

हुनका लोकनिक ज्ञानक स्तर यैह छनि। सचमुच, अहाँक प्रभु, ओ बेसी सँ बेसी जनैत छथि जे केकरा अपन मार्ग सँ भटकैत अछि आ ओ इहो जनैत छथि जे केकरा मार्गदर्शन कयल जाइत अछि |


31

وَلِلّٰهِ مَا فِى السَّمٰوٰتِ وَمَا فِى الْاَرْضِۗ لِيَجْزِيَ الَّذِيْنَ اَسَاۤءُوْا بِمَا عَمِلُوْا وَيَجْزِيَ الَّذِيْنَ اَحْسَنُوْا بِالْحُسْنٰىۚ

wa lillāhi mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ(i), liyajziyal-lażīna asā'ū bimā ‘amilū wa yajziyal-lażīna aḥsanū bil-ḥusnā.

आ जे किछु आकाश मे अछि आ जे किछु धरती पर अछि से अल्लाह केर अछि। (एहि तरहें) ओ जे अधलाह काज केने छथि ओकर हिसाबे ओ अधलाह के इनाम देथिन आ नीक काज करय बला के ओ नीक इनाम (स्वर्ग) सँ पुरस्कृत करताह।


32

اَلَّذِيْنَ يَجْتَنِبُوْنَ كَبٰۤىِٕرَ الْاِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ اِلَّا اللَّمَمَۙ اِنَّ رَبَّكَ وَاسِعُ الْمَغْفِرَةِۗ هُوَ اَعْلَمُ بِكُمْ اِذْ اَنْشَاَكُمْ مِّنَ الْاَرْضِ وَاِذْ اَنْتُمْ اَجِنَّةٌ فِيْ بُطُوْنِ اُمَّهٰتِكُمْۗ فَلَا تُزَكُّوْٓا اَنْفُسَكُمْۗ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنِ اتَّقٰى ࣖ

allażīna yajtanibūna kabā'iral-iṡmi wal-fawāḥisya illal-lamam(a), inna rabbaka wāsi‘ul-magfirah(ti), huwa a‘lamu bikum iż ansya'akum minal-arḍi wa iż antum ajinnatun fī buṭūni ummahātikum, falā tuzakkū anfusakum, huwa a‘lamu bimanittaqā.

अर्थात्) जे छोट-छोट पाप छोड़ि पैघ पाप आ अशोभनीयता सँ परहेज करैत छथि | सचमुच, अहाँक प्रभु क्षमा मे सर्वव्यापी छथि। ओ अहाँकेँ ओहि दिनसँ चिन्हैत छथि जहिया ओ अहाँकेँ धूरासँ बनौने छलाह , आ जखन अहाँ सभ अपन मायक कोखिमे भ्रूण छलहुँ । तेँ पवित्रता अपना केँ नहि मानू। पुण्य के ओ जनैत छथि।


33

اَفَرَءَيْتَ الَّذِيْ تَوَلّٰىۙ

afa ra'aital-lażī tawallā.

त की अहाँ एहन लोक नहि देखैत छी जे (कुरान सँ) मुँह मोड़ि लैत अछि?


34

وَاَعْطٰى قَلِيْلًا وَّاَكْدٰى

wa a‘ṭā qalīlaw wa akdā.

आ कनि-मनि (जे प्रतिज्ञा कयल गेल छल) दैत छथि आ शेष केँ रोकि दैत छथि |


35

اَعِنْدَهٗ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرٰى

a‘indahū ‘ilmul-gaibi fahuwa yarā.

की ओकरा अदृश्यक ज्ञान छैक जाहि सँ ओ (ओकरा) देखि सकय?


36

اَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِيْ صُحُفِ مُوْسٰى

am lam yunabba' bimā fī ṣuḥufi mūsā.

या की (ओकरा) ई रिपोर्ट नै करलऽ गेलऽ छै कि (पवित्र पुस्तक जे मूसा के सामने प्रकट करलऽ गेलऽ छेलै) के पन्ना में की छै?


37

وَاِبْرٰهِيْمَ الَّذِيْ وَفّٰىٓ ۙ

wa ibrāhīmal-lażī waffā.

आ (चादर) अब्राहम जे सदिखन प्रतिज्ञा पूरा करैत अछि?


38

اَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِّزْرَ اُخْرٰىۙ

allā taziru wāziratuw wizra ukhrā.

(अर्थात) जे पापी दोसरक पाप नहि सहत,


39

وَاَنْ لَّيْسَ لِلْاِنْسَانِ اِلَّا مَا سَعٰىۙ

wa al laisa lil-insāni illā mā sa‘ā.

आ ओहि आदमी केँ मात्र ओहि चीज भेटैत छैक जकरा लेल ओ काज केने अछि,


40

وَاَنَّ سَعْيَهٗ سَوْفَ يُرٰىۖ

wa anna sa‘yahū saufa yurā.

आ सत्ते ओकर प्रयास (ओकरा) देखाओल जायत,


41

ثُمَّ يُجْزٰىهُ الْجَزَاۤءَ الْاَوْفٰىۙ

Ṡumma yujzāhul-jazā'al-aufā.

तखन ओकरा सबसँ सिद्ध उत्तरक पुरस्कार भेटतैक,


42

وَاَنَّ اِلٰى رَبِّكَ الْمُنْتَهٰىۙ

wa anna ilā rabbikal-muntahā.

आ निश्चय अहाँक प्रभुक लेल (सब वस्तुक) अंत अछि,


43

وَاَنَّهٗ هُوَ اَضْحَكَ وَاَبْكٰى

wa annahū huwa aḍḥaka wa abkā.

आ सच मे ओ छथि जे लोक सभ केँ हँसाबैत छथि आ कानबैत छथि।


44

وَاَنَّهٗ هُوَ اَمَاتَ وَاَحْيَاۙ

wa annahū huwa amāta wa aḥyā.

आ सच मे ओएह छथि जे मृत्यु आ जीवनक कारण बनैत छथि।


45

وَاَنَّهٗ خَلَقَ الزَّوْجَيْنِ الذَّكَرَ وَالْاُنْثٰىۙ

wa annahū khalaqaz-zaujainiż-żakara wal-unṡā.

आ सच मे ओएह छथि जे स्त्री-पुरुष युग्मक सृजन केलनि,


46

مِنْ نُّطْفَةٍ اِذَا تُمْنٰىۙ

min nuṭfatin iżā tumnā.

वीर्य सँ, जखन उत्सर्जित होइत अछि, २.


47

وَاَنَّ عَلَيْهِ النَّشْاَةَ الْاُخْرٰىۙ

wa anna ‘alaihin nasy'atal-ukhrā.

आ सच मे ओएह छथि जे दोसर सृष्टि (मृत्युक बाद पुनरुत्थान) निर्धारित करैत छथि,


48

وَاَنَّهٗ هُوَ اَغْنٰى وَاَقْنٰىۙ

wa annahū huwa agnā wa aqnā.

आ सत्ते ओ धन आ पर्याप्तता देनिहार छथि |


49

وَاَنَّهٗ هُوَ رَبُّ الشِّعْرٰىۙ

wa annahū huwa rabbusy-syi‘rā.

आ सचमुच ओ शि'रा के तारा के मालिक छैथ


50

وَاَنَّهٗٓ اَهْلَكَ عَادًا ۨالْاُوْلٰىۙ

wa annahū ahlaka ‘ādanil-ūlā.

आ सच मे ओएह छलाह जे 'बहुत पहिने,


51

وَثَمُوْدَا۟ فَمَآ اَبْقٰىۙ

wa ṡamūda famā abqā.

आ समुदक लोक सभ केँ, ओ एकोटा (जीवित) नहि छोड़लनि,


52

وَقَوْمَ نُوْحٍ مِّنْ قَبْلُۗ اِنَّهُمْ كَانُوْا هُمْ اَظْلَمَ وَاَطْغٰىۗ

wa qauma nūḥim min qabl(u), innahum kānū hum aẓlama wa aṭgā.

आ (ओहो) तकर पहिने नूहक लोक। सचमुच, ओ सभसँ बेसी अन्यायी आ सभसँ बेसी अवज्ञाकारी लोक छथि ।


53

وَالْمُؤْتَفِكَةَ اَهْوٰىۙ

wal-mu'tafikata ahwā.

आ हवाक तूफान (लूतक लोकक देश) केँ नष्ट कऽ देलक।


54

فَغَشّٰىهَا مَا غَشّٰىۚ

fa gasysyāhā mā gasysyā.

तखन ओ ओहि जमीन केँ (दण्डक रूप मे) ओहि (मलबा) सँ झाँपि देलनि जे ओहि पर खसल छल |


55

فَبِاَيِّ اٰلَاۤءِ رَبِّكَ تَتَمَارٰى

fa bi'ayyi ālā'i rabbika tatamārā.

तखन अहाँक प्रभुक कोन आशीर्वाद पर अहाँ केँ एखनो संदेह अछि?


56

هٰذَا نَذِيْرٌ مِّنَ النُّذُرِ الْاُوْلٰى

hāżā nażīrum minan-nużuril-ūlā.

पहिने आयल चेतावनी देबय वाला मे ई (मुहम्मद) एकटा चेतावनी देबय वाला छथिन्ह.


57

اَزِفَتِ الْاٰزِفَةُ ۚ

azifatil-āzifah(tu).

निकट (न्याय के दिन) नजदीक आबि गेल अछि।


58

لَيْسَ لَهَا مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ كَاشِفَةٌ ۗ

laisa lahā min dūnillāhi kāsyifah(tun).

अल्लाह के अलावा कियो (ओहि दिन के घटना) के खुलासा नै क सकैत अछि।


59

اَفَمِنْ هٰذَا الْحَدِيْثِ تَعْجَبُوْنَۙ

afamin hāżal-ḥadīṡi ta‘jabūn(a).

त की अहां एहि खबर सं आश्चर्यचकित छी?


60

وَتَضْحَكُوْنَ وَلَا تَبْكُوْنَۙ

wa taḍḥakūna wa lā tabkūn(a).

आ अहाँ हँसैत छी आ कानैत नहि छी,


61

وَاَنْتُمْ سٰمِدُوْنَ

wa antum sāmidūn(a).

जखन कि अहाँ (ओहि पर) ध्यान नहि द' रहल छी।


62

فَاسْجُدُوْا لِلّٰهِ وَاعْبُدُوْا ࣖ ۩

fasjudū lillāhi wa‘budū.

त अल्लाह के सामने प्रणाम करू आ (हुनकर इबादत करू)।