Qari
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يُسَبِّحُ لِلّٰهِ مَا فِى السَّمٰوٰتِ وَمَا فِى الْاَرْضِۗ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُۖ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ
yusabbiḥu lillāhi mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ(i), lahul-mulku wa lahul-ḥamdu wa huwa ‘alā kulli syai'in qadīr(un).
आकाश मे जे अछि आ धरती पर जे अछि से सदिखन अल्लाह केर महिमा करैत अछि; सब राज्य हुनके छै आ सब स्तुति हुनके छै; आ ओ सभ वस्तु पर सर्वशक्तिमान छथि।
هُوَ الَّذِيْ خَلَقَكُمْ فَمِنْكُمْ كَافِرٌ وَّمِنْكُمْ مُّؤْمِنٌۗ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ بَصِيْرٌ
huwal-lażī khalaqakum fa minkum kāfiruw wa minkum mu'min(un), wallāhu bimā ta‘malūna baṣīr(un).
ई वैह छथि जे अहाँ सभ केँ बनौलनि, तखन अहाँ सभ मे काफिर सेहो छथि आ अहाँ सभ मे (ओहो) मुसलमान सेहो छथि। आ अल्लाह अहाँक काजक सर्वदर्शी छथि।
خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّ وَصَوَّرَكُمْ فَاَحْسَنَ صُوَرَكُمْۚ وَاِلَيْهِ الْمَصِيْرُ
khalaqas-samāwāti wal-arḍa bil-ḥaqqi wa ṣawwarakum fa'aḥsana ṣuwarakum, wa ilaihil-maṣīr(u).
ओ आकाश आ पृथ्वी के सही (उद्देश्य) के साथ बनौलनि, ओ अहाँक रूप के निर्माण केलनि आ फेर अहाँक रूप के परिष्कृत केलनि, आ हुनका लग वापसी अछि |
يَعْلَمُ مَا فِى السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُسِرُّوْنَ وَمَا تُعْلِنُوْنَۗ وَاللّٰهُ عَلِيْمٌ ۢبِذَاتِ الصُّدُوْرِ
ya‘lamu mā fis-samāwāti wal-arḍi wa ya‘lamu mā tusirrūna wa mā tu‘linūn(a), wallāhu ‘alīmum biżātiṣ-ṣudūr(i).
स्वर्ग मे की अछि आ पृथ्वी पर की अछि से ओ जनैत छथि आ अहाँ की नुकाबैत छी आ की प्रकट करैत छी से ओ जनैत छथि | आ अल्लाह हृदय मे जे किछु अछि ओकर सर्वज्ञ छथि।
اَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَؤُا الَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْ قَبْلُ ۖفَذَاقُوْا وَبَالَ اَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَلِيْمٌ
alam ya'tikum naba'ul-lażīna kafarū min qabl(u), fa żāqū wabāla amrihim wa lahum ‘ażābun alīm(un).
की पहिने अहाँ (अविश्वासी) धरि काफिरक खबरि नहि पहुँचल अछि? तेँ हुनका लोकनि केँ अपन एहि काजक अधलाह परिणामक अनुभूति भेलनि अछि आ हुनका लोकनि केँ एकटा कष्टदायक सजाय भोगलनि अछि |
ذٰلِكَ بِاَنَّهٗ كَانَتْ تَّأْتِيْهِمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنٰتِ فَقَالُوْٓا اَبَشَرٌ يَّهْدُوْنَنَاۖ فَكَفَرُوْا وَتَوَلَّوْا وَّاسْتَغْنَى اللّٰهُ ۗوَاللّٰهُ غَنِيٌّ حَمِيْدٌ
Żālika bi'annahū kānat ta'tīhim rusuluhum bil-bayyināti fa qālū abasyaruy yahdūnanā, fa kafarū wa tawallau wastagnallāh(u), wallāhu ganiyyun ḥamīd(un).
एकरऽ कारण छै कि जब॑ प्रेरित सिनी हुनका सिनी के पास (सूचना लानी क॑) ऐलै, त॑ हुनी कहलकै, "की ई (उचित) छै कि मनुष्य हमरा सिनी के मार्गदर्शन करै?" तखन ओ सभ अस्वीकार कऽ कऽ घुमि गेल। भले ही अल्लाह के (ओकरा सब के) जरूरत नै छै। आ अल्लाह परम धनी, परम प्रशंसनीय छथि।
زَعَمَ الَّذِيْنَ كَفَرُوْٓا اَنْ لَّنْ يُّبْعَثُوْاۗ قُلْ بَلٰى وَرَبِّيْ لَتُبْعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُنَّ بِمَا عَمِلْتُمْۗ وَذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَسِيْرٌ
za‘amal-lażīna kafarū allay yub‘aṡū, qul balā wa rabbī latub‘aṡunna ṡumma latunabba'unna bimā ‘amiltum, wa żālika ‘alallāhi yasīr(un).
जे अविश्वास करै छै, ओकरा ई लगै छै कि हम्में जिंदा नै होय जैतै। (हे मुहम्मद) कहू, "नहि, हमर प्रभुक कसम, अहाँ निश्चित रूप सँ जीबि उठब, तखन अहाँ केँ ओ सब किछु बताओल जायत जे अहाँ केलहुँ।" आ से अल्लाह के लेल आसान अछि।
فَاٰمِنُوْا بِاللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖ وَالنُّوْرِ الَّذِيْٓ اَنْزَلْنَاۗ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ خَبِيْرٌ
fa āminū billāhi wa rasūlihī wan-nūril-lażī anzalnā, wallāhu bimā ta‘malūna khabīr(un).
त अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह पर आ ओहि रोशनी (कुरान) पर विश्वास करू जे हम सब उतारने छी। आ अल्लाह अहाँ जे काज करैत छी ताहि मे बहुत सावधान रहैत छथि।
يَوْمَ يَجْمَعُكُمْ لِيَوْمِ الْجَمْعِ ذٰلِكَ يَوْمُ التَّغَابُنِۗ وَمَنْ يُّؤْمِنْۢ بِاللّٰهِ وَيَعْمَلْ صَالِحًا يُّكَفِّرْ عَنْهُ سَيِّاٰتِهٖ وَيُدْخِلْهُ جَنّٰتٍ تَجْرِيْ مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهٰرُ خٰلِدِيْنَ فِيْهَآ اَبَدًاۗ ذٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيْمُ
yauma yajma‘ukum liyaumil-jam‘i żālika yaumut-tagābun(i), wa may yu'mim billāhi wa ya‘mal ṣāliḥay yukaffir ‘anhu sayyi'ātihī wa yudkhilhu jannātin tajrī min taḥtihal-anhāru khālidīna fīhā abadā(n), żālikal-fauzul-‘aẓīm(u).
(याद राखू) ओ दिन (जखन) अल्लाह अहाँ सब के सभा के दिन एक ठाम जमा करैत छथि, ओ दिन अछि जखन गलती उजागर होइत अछि। आ जे कियो अल्लाह पर विश्वास करत आ नीक काज करत, अल्लाह ओकर गलती मेटा देत आ ओकरा जन्नत मे प्रवेश करत जकर नीचा नदी बहैत छैक, ओ ओहि मे सदा-सदा लेल रहत। जे एकटा पैघ जीत अछि।
وَالَّذِيْنَ كَفَرُوْا وَكَذَّبُوْا بِاٰيٰتِنَآ اُولٰۤىِٕكَ اَصْحٰبُ النَّارِ خٰلِدِيْنَ فِيْهَاۗ وَبِئْسَ الْمَصِيْرُ ࣖ
wal-lażīna kafarū wa każżabū bi'āyātinā ulā'ika aṣḥābun-nāri khālidīna fīhā, wa bi'sal-maṣīr(u).
आ जे हमरा सभक निशानी केँ अविश्वास करैत अछि आ नकारैत अछि, ओ सभ नरकक निवासी अछि, ओ सभ ओतहि सदिखन रहत। आ ओहि ठाम घुरबाक लेल सबसँ खराब जगह अछि।
مَآ اَصَابَ مِنْ مُّصِيْبَةٍ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِ ۗوَمَنْ يُّؤْمِنْۢ بِاللّٰهِ يَهْدِ قَلْبَهٗ ۗوَاللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيْمٌ
mā aṣāba mim muṣībatin illā bi'iżnillāh(i), wa may yu'mim billāhi yahdi qalbah(ū), wallāhu bikulli syai'in ‘alīm(un).
(व्यक्ति) पर कोनो विपत्ति नहिं होइत छैक, सिवाय अल्लाह के अनुमति के; आ जे कियो अल्लाह पर विश्वास करत, ओकर दिल के अल्लाह जरूर मार्गदर्शन करत। आ अल्लाह सब किछु के सर्वज्ञ छथि।
وَاَطِيْعُوا اللّٰهَ وَاَطِيْعُوا الرَّسُوْلَۚ فَاِنْ تَوَلَّيْتُمْ فَاِنَّمَا عَلٰى رَسُوْلِنَا الْبَلٰغُ الْمُبِيْنُ
wa aṭī‘ullāha wa aṭī‘ur-rasūl(a), fa'in tawallaitum fa innamā ‘alā rasūlinal-balāgul-mubīn(u).
आ अल्लाह के आज्ञा मानू आ रसूलुल्लाह के आज्ञा मानू। यदि अहाँ मुँह घुमा लेब तखन सचमुच हमर रसूलुल्लाह के फर्ज केवल (अल्लाह के जनादेश) के स्पष्ट रूप स पहुंचाबय के अछि |
اَللّٰهُ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَۗ وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُوْنَ
allāhu lā ilāha illā huw(a), wa ‘alallāhi falyatawakkalil-mu'minūn(a).
(ओ छथि) अल्लाह, हुनका छोड़ि कोनो देवता नहि छथि। आ मुसलमान अल्लाह पर भरोसा करथि।
يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اِنَّ مِنْ اَزْوَاجِكُمْ وَاَوْلَادِكُمْ عَدُوًّا لَّكُمْ فَاحْذَرُوْهُمْۚ وَاِنْ تَعْفُوْا وَتَصْفَحُوْا وَتَغْفِرُوْا فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ
yā ayyuhal-lażīna āmanū inna min azwājikum wa aulādikum ‘aduwwal lakum faḥżarūhum, wa in ta‘fū wa taṣfaḥū wa tagfirū fa innallāha gafūrur raḥīm(un).
हे विश्वास करनिहार! सत्ते, अहाँक पत्नी आ बच्चा मे एहन लोक छथि जे अहाँक दुश्मन छथि, तेँ हुनका सभ सँ सावधान रहू। आ जँ अहाँ माफ करैत छी आ शिष्ट छी आ माफ करैत छी (हुनका सभ) तँ सचमुच अल्लाह परम क्षमाशील, परम दयालु छथि।
اِنَّمَآ اَمْوَالُكُمْ وَاَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ ۗوَاللّٰهُ عِنْدَهٗٓ اَجْرٌ عَظِيْمٌ
innamā amwālukum wa aulādukum fitnah(tun), wallāhu ‘indahū ajrun ‘aẓīm(un).
सचमुच, अहाँक धन आ अहाँक संतान मात्र (अहाँक लेल) एकटा परीक्षा अछि, आ अल्लाहक संग एकटा पैघ इनाम अछि।
فَاتَّقُوا اللّٰهَ مَا اسْتَطَعْتُمْ وَاسْمَعُوْا وَاَطِيْعُوْا وَاَنْفِقُوْا خَيْرًا لِّاَنْفُسِكُمْۗ وَمَنْ يُّوْقَ شُحَّ نَفْسِهٖ فَاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْمُفْلِحُوْنَ
fattaqullāha mastaṭa‘tum wasma‘ū wa aṭī‘ū wa anfiqū khairal li'anfusikum, wa may yūqa syuḥḥa nafsihī fa ulā'ika humul-mufliḥūn(a).
त अपन क्षमता के अनुसार अल्लाह स डरू आ सुनू आ आज्ञा मानू; आ अपना लेल नीक धन लगाउ। आ जे कंजूससँ अपनाकेँ रोकैत अछि, ओ सभ भाग्यशाली छथि ।
اِنْ تُقْرِضُوا اللّٰهَ قَرْضًا حَسَنًا يُّضٰعِفْهُ لَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْۗ وَاللّٰهُ شَكُوْرٌ حَلِيْمٌۙ
in tuqriḍullāha qarḍan ḥasanay yuḍā‘ifhu lakum wa yagfir lakum, wallāhu syakūrun ḥalīm(un).
जँ अहाँ अल्लाह केँ नीक उधार देब तँ निश्चित रूप सँ ओ अहाँक लेल गुणा-भाग (बदली) करताह आ अहाँ केँ माफ करताह। आ अल्लाह परम कृपालु, परम दयालु छथि।
عٰلِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْعَزِيْزُ الْحَكِيْمُ ࣖ
‘Ālimul-gaibi wasy-syahādatil-‘azīzul-ḥakīm(u).
अदृश्य आ असली के जाने। सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ।