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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)

Q.S अल-बलाद (اَلْبَلَد) - 20 छंदां री गिणती

(देस)

Qari

Murottal Audio

1

لَآ اُقْسِمُ بِهٰذَا الْبَلَدِۙ

lā uqsimu bihāżal-balad(i).

मैं इण शहर (मक्का) री कसम खाऊं,


2

وَاَنْتَ حِلٌّۢ بِهٰذَا الْبَلَدِۙ

wa anta ḥillum bihāżal-balad(i).

अर थै (मुहम्मद), इण शहर (मक्का) रै मांय रैवो हो


3

وَوَالِدٍ وَّمَا وَلَدَۙ

wa wālidiw wa mā walad(a).

अर पिता अर बेटै रै (रिश्ते) रै जरियै।


4

لَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ فِيْ كَبَدٍۗ

laqad khalaqnal-insāna fī kabad(in).

साची, आपां मिनख नै कठिनाई रै मांय बणायो है।


5

اَيَحْسَبُ اَنْ لَّنْ يَّقْدِرَ عَلَيْهِ اَحَدٌ ۘ

ayaḥsabu allay yaqdira ‘alaihi aḥad(un).

कांई वो (मिनख) सोचै है कै उण माथै कोई भी चीज रो अधिकार कोनी है?


6

يَقُوْلُ اَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًاۗ

yaqūlu ahlaktu mālal lubadā(n).

वो केवे है, "मैं घणो खर्चो कर दियो है।"


7

اَيَحْسَبُ اَنْ لَّمْ يَرَهٗٓ اَحَدٌۗ

ayaḥsabu allam yarahū aḥad(un).

कांई वो सोचै है कै उणनै कीं भी नीं देखै?


8

اَلَمْ نَجْعَلْ لَّهٗ عَيْنَيْنِۙ

alam naj‘al lahū ‘ainain(i).

कांई म्हे उणरै वास्तै दो आंख्यां नीं बणाई?


9

وَلِسَانًا وَّشَفَتَيْنِۙ

wa lisānaw wa syafatain(i).

अर एक जीभ अर दो होठ?


10

وَهَدَيْنٰهُ النَّجْدَيْنِۙ

wa hadaināhun-najdain(i).

अर म्हे उणनै दो मारग (धर्म अर बुराई) दिखाया है।


11

فَلَا اقْتَحَمَ الْعَقَبَةَ ۖ

falaqtaḥamal-‘aqabah(ta).

पण वो खड़ी अर कठिन रास्तो कोनी लेवै?


12

وَمَآ اَدْرٰىكَ مَا الْعَقَبَةُ ۗ

wa mā adrāka mal-‘aqabah(tu).

अर कांई थनै ठा है कै खड़ी अर कठिन मारग कांई है?


13

فَكُّ رَقَبَةٍۙ

fakku raqabah(tin).

(ओ) एक गुलाम नै आजाद करणो है,


14

اَوْ اِطْعَامٌ فِيْ يَوْمٍ ذِيْ مَسْغَبَةٍۙ

au iṭ‘āmun fī yaumin żī masgabah(tin).

या अकाल रै दिनां मांय भोजन करणो,


15

يَّتِيْمًا ذَا مَقْرَبَةٍۙ

yatīman żā maqrabah(tin).

खून सूं संबंधित अनाथ नै,


16

اَوْ مِسْكِيْنًا ذَا مَتْرَبَةٍۗ

au miskīnan żā matrabah(tin).

या फेर कोई गरीब अर जरूरतमंद आदमी।


17

ثُمَّ كَانَ مِنَ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا بِالْمَرْحَمَةِۗ

Ṡumma kāna minal-lażīna āmanū wa tawāṣau biṣ-ṣabri wa tawāṣau bil-marḥamah(ti).

फेर वो बां लोगां मांय सूं एक है जका एक दूजा नै धीरज अर करुणा री सलाह देवै है।


18

اُولٰۤىِٕكَ اَصْحٰبُ الْمَيْمَنَةِۗ

ulā'ika aṣḥābul-maimanah(ti).

वे (जो लोग एक दूजा नै विश्वास करै है अर संदेश देवै है) सही समूह है।


19

وَالَّذِيْنَ كَفَرُوْا بِاٰيٰتِنَا هُمْ اَصْحٰبُ الْمَشْـَٔمَةِۗ

wal-lażīna kafarū bi'āyātinā hum aṣḥābul-masy'amah(ti).

अर जो लोग म्हारी श्लोकां माथै अविश्वास करै है, वै वामपंथी है।


20

عَلَيْهِمْ نَارٌ مُّؤْصَدَةٌ ࣖ

‘alaihim nārum mu'ṣadah(tun).

वे एक बंद नरक रै मांय है।