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(साचो इस्लाम)

Q.S अस-सफत (اَلصَّافَّات) - 182 छंदां री गिणती

(ओळी)

Qari

Murottal Audio

1

وَالصّٰۤفّٰتِ صَفًّاۙ

waṣ-ṣāffāti ṣaffā(n).

(देवदूतां रा साथी) पंक्तियां रै मांय सज्योड़ा है,


2

فَالزّٰجِرٰتِ زَجْرًاۙ

faz-zājirāti zajrā(n).

(साथी) रै द्वारा जो ईमानदारी सूं रोकै है,


3

فَالتّٰلِيٰتِ ذِكْرًاۙ

fat-tāliyāti żikrā(n).

चेतावनी सुणावण आळा (साथी) रै द्वारा,


4

اِنَّ اِلٰهَكُمْ لَوَاحِدٌۗ

inna ilāhakum lawāḥid(un).

साची, थारो प्रभु एक है।


5

رَبُّ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ الْمَشَارِقِۗ

rabbus-samāwāti wal-arḍi wa mā bainahumā wa rabbul-masyāriq(i).

आकास अर धरती अर बां रै बिचाळै री चीजां रो स्वामी अर उदय रो स्वामी।


6

اِنَّا زَيَّنَّا السَّمَاۤءَ الدُّنْيَا بِزِيْنَةِ ِۨالْكَوَاكِبِۙ

innā zayyannas-samā'ad-dun-yā bizīnatinil-kawākib(i).

साची, म्हे दुनिया रै (सबसूं नजीक) स्वर्ग नै तारां री सजावट सूं सजायो है।


7

وَحِفْظًا مِّنْ كُلِّ شَيْطٰنٍ مَّارِدٍۚ

wa ḥifẓam min kulli syaiṭānim mārid(in).

अर (म्हे) इणनै हरेक विद्रोही शैतान सूं बचायो है।


8

لَا يَسَّمَّعُوْنَ اِلَى الْمَلَاِ الْاَعْلٰى وَيُقْذَفُوْنَ مِنْ كُلِّ جَانِبٍۖ

lā yassammā‘ūna ilal-mala'il-a‘lā wa yuqżafūna min kulli jānib(in).

वे (शैतान) स्वर्गदूतां री बातचीत नै नीं सुण सकै अर बांनै हरेक कानी सूं फेंक दिया जावै है।


9

دُحُوْرًا وَّلَهُمْ عَذَابٌ وَّاصِبٌ

duḥūraw wa lahum ‘ażābuw wāṣib(un).

बांनै भगाबा तांई, अर बांनै सदा रै वास्तै सजा मिलसी।


10

اِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَاَتْبَعَهٗ شِهَابٌ ثَاقِبٌ

illā man khaṭifal-khaṭfata fa'atba‘ahū syihābun ṡāqib(un).

सिवाय (शैतान) रै जिको (बातचीत) चोरी करै है; क्यूंकै उणनै एक ज्वलंत तारो भगावै है।


11

فَاسْتَفْتِهِمْ اَهُمْ اَشَدُّ خَلْقًا اَمْ مَّنْ خَلَقْنَا ۗاِنَّا خَلَقْنٰهُمْ مِّنْ طِيْنٍ لَّازِبٍ

fastaftihim ahum asyaddu khalqan am man khalaqnā, innā khalaqnāhum min ṭīnil lāzib(in).

तो बां सूं (मक्का रा मुशरक) पूछो, "कांई बां री रचना ज्यादा कठिन है या आपां जिकी बणाई है?" साची, म्हे बांनै माटी सूं बणाया।


12

بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُوْنَ ۖ

bal ‘ajibta wa yaskharūn(a).

थै (मुहम्मद) भी हैरान हो (उणां री अवज्ञा माथै) अर बां थानै अपमानित कर दियो।


13

وَاِذَا ذُكِّرُوْا لَا يَذْكُرُوْنَ ۖ

wa iżā żukkirū lā yażkurūn(a).

अर जद बांनै चेतावनी दी जावै है तो बै बां री बात मानै कोनी।


14

وَاِذَا رَاَوْا اٰيَةً يَّسْتَسْخِرُوْنَۖ

wa iżā ra'au āyatay yastaskhirūn(a).

अर जद वे (अल्लाह री महानता) री कोई निशानी देखै है तो वे उणरो मजाक उड़ावै है।


15

وَقَالُوْٓا اِنْ هٰذَآ اِلَّا سِحْرٌ مُّبِيْنٌ ۚ

wa qālū in hāżā illā siḥrum mubīn(un).

अर बां कैयो, “ओ असली जादू रै अलावा और कीं कोनी है।


16

ءَاِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَّعِظَامًا ءَاِنَّا لَمَبْعُوْثُوْنَۙ

a'iżā mitnā wa kunnā turābaw wa ‘iẓāman a'innā lamab‘ūṡūn(a).

जे आपां मरग्या अर माटी अर हाड बणग्या तो कांई ओ साच है कै आपां जीवता होस्यां (फेर)?


17

اَوَاٰبَاۤؤُنَا الْاَوَّلُوْنَۗ

awa ābā'unal-awwalūn(a).

अर कांई म्हारा पैला रा पूर्वज (भी जीवित हो जावैला)?”


18

قُلْ نَعَمْ وَاَنْتُمْ دٰخِرُوْنَۚ

qul na‘am wa antum dākhirūn(a).

(मुहम्मद) कैवो, “हां, अर थै अपमानित हो जावोला।”


19

فَاِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَّاحِدَةٌ فَاِذَا هُمْ يَنْظُرُوْنَ

fa'innamā hiya zajratuw wāḥidatun fa'iżā hum yanẓurūn(a).

तो साची में पुनरुत्थान फगत एक ई चिल्लाहट रै साथै है; फेर तुरंत ही बांनै ओ देख्यो।


20

وَقَالُوْا يٰوَيْلَنَا هٰذَا يَوْمُ الدِّيْنِ

wa qālū yā wailanā hāżā yaumud-dīn(i).

अर बां कैयो, "आप कित्ता दुखी हां! (म्हैं चावूं कै) ओ बदलो रो दिन हो।"


21

هٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِيْ كُنْتُمْ بِهٖ تُكَذِّبُوْنَ ࣖ

hāżā yaumul-faṣlil-lażī kuntum bihī tukażżibūn(a).

ओ उण फैसले रो दिन है जिणनै थै एक बार खारिज कर दियो हो।


22

اُحْشُرُوا الَّذِيْنَ ظَلَمُوْا وَاَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوْا يَعْبُدُوْنَ ۙ

uḥsyurul-lażīna ẓalamū wa azwājahum wa mā kānū ya‘budūn(a).

(दूत नै हुकम दियो) "दुष्ट लोगां नै अर बांका साथियां नै अर बां री पूजा करण आळा नै भेळा कर दो।


23

مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ فَاهْدُوْهُمْ اِلٰى صِرَاطِ الْجَحِيْمِ

min dūnillāhi fahdūhum ilā ṣirāṭil-jaḥīm(i).

अल्लाह रै अलावा, फेर बांनै नरक रो मारग दिखाओ।


24

وَقِفُوْهُمْ اِنَّهُمْ مَّسْـُٔوْلُوْنَ ۙ

waqifūhum innahum mas'ūlūn(a).

बांनै (विश्राम स्थल माथै) पकड़ो, साची में बांनै पूछ्यो जावेला,


25

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُوْنَ

mā lakum lā tanāṣarūn(a).

“थै मदद क्यूं कोनी करो?”


26

بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُوْنَ

bal humul-yauma mustaslimūn(a).

उण दिन भी वे (अल्लाह रै फैसले रै आगे) आत्मसमर्पण कर दिया।


27

وَاَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلٰى بَعْضٍ يَّتَسَاۤءَلُوْنَ

wa aqbala ba‘ḍuhum ‘alā ba‘ḍiy yatasā'alūn(a).

अर बां मांय सूं केई लोगां रो सामनो करणो पड़्यो अर आपस मांय बहस करी।


28

قَالُوْٓا اِنَّكُمْ كُنْتُمْ تَأْتُوْنَنَا عَنِ الْيَمِيْنِ

qālū innakum kuntum ta'tūnanā ‘anil-yamīn(i).

साची, बांका (अनुयायी) (बांका नेतावां नै) कैयो, "थै वै ई हा जका दांई सूं म्हारै कनै आया हा।"


29

قَالُوْا بَلْ لَّمْ تَكُوْنُوْا مُؤْمِنِيْنَۚ

qālū bal lam takūnū mu'minīn(a).

(नेतावां) बां जबाब दियो, "(नीं), थै भी वै लोग हो जका बिश्वासी कोनी बणणो चावो हो।


30

وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُمْ مِّنْ سُلْطٰنٍۚ بَلْ كُنْتُمْ قَوْمًا طٰغِيْنَ

wa mā kāna lanā ‘alaikum min sulṭān(in), bal kuntum qauman ṭāgīn(a).

जदकै म्हारै कनै थारै माथै कोई अधिकार कोनी है, असल मांय थै एक अस्या लोग बणग्या हो जका अपराध करै है।


31

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖاِنَّا لَذَاۤىِٕقُوْنَ

fa ḥaqqa ‘alainā qaulu rabbinā, innā lażā'iqūn(a).

तो यो उचित है कै परमेश्बर रो न्याय (प्रलय) आपां माथै आवै; निश्चित रूप सूं आपां (दंड) नै महसूस करस्यां।


32

فَاَغْوَيْنٰكُمْ اِنَّا كُنَّا غٰوِيْنَ

fa agwainākum innā kunnā gāwīn(a).

इण वास्तै म्हे थानै भटकायो है, साचाणी म्हे खुद ई भटकग्या हां।"


33

فَاِنَّهُمْ يَوْمَىِٕذٍ فِى الْعَذَابِ مُشْتَرِكُوْنَ

fa innahum yauma'iżin fil-‘ażābi musytarikūn(a).

तो, उण दिन, वे एक साथै सजा भोगैला।


34

اِنَّا كَذٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِيْنَ

innā każālika naf‘alu bil-mujrimīn(a).

साचाणी, पाप करण आळा लोगां रै सागै आपां इणी भांत रो व्यवहार करां।


35

اِنَّهُمْ كَانُوْٓا اِذَا قِيْلَ لَهُمْ لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ يَسْتَكْبِرُوْنَ ۙ

innahum kānū iżā qīla lahum lā ilāha illallāhu yastakbirūn(a).

साची, जद बांनै कैयो गयो, "ला इलाहा इल्लाह" (अल्लाह रै अलावा कोई भगवान कोनी है), तो बां घमंड करियो,


36

وَيَقُوْلُوْنَ اَىِٕنَّا لَتَارِكُوْٓا اٰلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُوْنٍ ۗ

wa yaqūlūna a'innā latārikū ālihatinā lisyā‘irim majnūn(in).

अर बां कैयो, “कांई आपां किणी पागल कवि रै कारण आपणी पूजा छोड़ देवांला?”


37

بَلْ جَاۤءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِيْنَ

bal jā'a bil-ḥaqqi wa ṣaddaqal-mursalīn(a).

भलांई वो (मुहम्मद) साच रै साथै आयो हो अर (पैला) प्रेरितां नै सही ठहरायो हो।


38

اِنَّكُمْ لَذَاۤىِٕقُوا الْعَذَابِ الْاَلِيْمِ ۚ

innakum lażā'iqul-‘ażābil-alīm(i).

साची, थनै निश्चित रूप सूं एक दर्दनाक सजा रो एहसास होसी।


39

وَمَا تُجْزَوْنَ اِلَّا مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُوْنَۙ

wa mā tujzauna illā mā kuntum ta‘malūn(a).

अर थानै सिवाय फल कोनी मिलसी, सिवाय थारै करियोड़ा कामां रै।


40

اِلَّا عِبَادَ اللّٰهِ الْمُخْلَصِيْنَ

illā ‘ibādallāhil-mukhlaṣīn(a).

पण अल्लाह रा सेवक जिका पाप सूं शुद्ध हुया है,


41

اُولٰۤىِٕكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُوْمٌۙ

ulā'ika lahum rizqum ma‘lūm(un).

बांनै वो भाग्य मिलै है जको तय कर दियो गयो है,


42

فَوَاكِهُ ۚوَهُمْ مُّكْرَمُوْنَۙ

fawākihu wa hum mukramūn(a).

(अर्थात) फल। अर वे महिमावान लोग है,


43

فِيْ جَنّٰتِ النَّعِيْمِۙ

fī jannātin na‘īm(i).

सुख सूं भरेड़ा आकास मांय,


44

عَلٰى سُرُرٍ مُّتَقٰبِلِيْنَ

‘alā sururim mutaqābilīn(a).

(वे बैठग्या) सोफा माथै आमने-सामने।


45

يُطَافُ عَلَيْهِمْ بِكَأْسٍ مِّنْ مَّعِيْنٍۢ ۙ

yuṭāfu ‘alaihim bika'sim mim ma‘īn(in).

वे झरना (स्वर्ग) सूं गिलास (पाणी सूं भरेड़ा) रै आसै-पासै पास करया गया,


46

بَيْضَاۤءَ لَذَّةٍ لِّلشّٰرِبِيْنَۚ

baiḍā'a lażżatil lisy-syāribīn(a).

(रंग) शुद्ध सफेद है, ओ पीबाळा लोगां नै चोखो लागै है।


47

لَا فِيْهَا غَوْلٌ وَّلَا هُمْ عَنْهَا يُنْزَفُوْنَ

lā fīhā gauluw wa lā hum ‘anhā yunzafūn(a).

इण मांय कोई भी चीज नशीली कोनी है अर वे इण सूं नशे में कोनी है।


48

وَعِنْدَهُمْ قٰصِرٰتُ الطَّرْفِ عِيْنٌ ۙ

wa ‘indahum qāṣirātuṭ-ṭarfi ‘īn(un).

अर बां रै कनै (अप्सरा) है जिणरी आंख्यां सुंदर है अर बांरी दृष्टि सीमित है,


49

كَاَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَّكْنُوْنٌ

ka'annahum baiḍum maknūn(un).

जाणै वे भली-भांति राख्या अंडा हो।


50

فَاَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلٰى بَعْضٍ يَّتَسَاۤءَلُوْنَ

fa'aqbala ba‘ḍuhum ‘alā ba‘ḍiy yatasā'alūn(a).

फेर बात करता थकां वे एक दूजा रो सामनो करियो।


51

قَالَ قَاۤىِٕلٌ مِّنْهُمْ اِنِّيْ كَانَ لِيْ قَرِيْنٌۙ

qāla qā'ilum minhum innī kāna lī qarīn(un).

बां मांय सूं एक बोल्यो, "साचैई, म्हारो एक बार (दुनिया मांय) एक दोस्त हो,


52

يَّقُوْلُ اَءِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِيْنَ

yaqūlu a'innaka laminal-muṣaddiqīn(a).

जिका कह्यो, "कांई थूं साचाणी बां लोगां मांय सूं एक है जका (पुनरुत्थान रै दिन) री पुष्टि करै है?


53

ءَاِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَّعِظَامًا ءَاِنَّا لَمَدِيْنُوْنَ

a'iżā mitnā wa kunnā turāban a'innā lamadīnūn(a).

जे आपां मर चुक्या हां अर धूळ अर हाड बणग्या हां तो कांई आपां साचाणी (जीवित हो जावांला) जिणसूं आपां नै बदला ले सकां?"


54

قَالَ هَلْ اَنْتُمْ مُّطَّلِعُوْنَ

qāla hal antum muṭṭali‘ūn(a).

बो बोल्यो, “कांई थै (म्हारा दोस्त) री समीक्षा करणी चावो हो?”


55

فَاطَّلَعَ فَرَاٰهُ فِيْ سَوَاۤءِ الْجَحِيْمِ

faṭṭala‘a fa ra'āhu fī sawā'il-jaḥīm(i).

तो बो देख्यो, फेर बो आपरै (मित्र) नै एक जलता नरक रै मांय देख्यो।


56

قَالَ تَاللّٰهِ اِنْ كِدْتَّ لَتُرْدِيْنِ ۙ

qāla tallāhi in kitta laturdīn(i).

बो बोल्यो, "अल्लाह री कसम, थूं म्हनै नुकसान पूगाबा रै करीब है।


57

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّيْ لَكُنْتُ مِنَ الْمُحْضَرِيْنَ

wa lau lā ni‘matu rabbī lakuntu minal-muḥḍarīn(a).

अर जे म्हारै प्रभु री किरपा नीं हुवती तो म्हैं निश्चित रूप सूं बां लोगां मांय सूं होवतो जिका (नरक) मांय घसीटिया गया हा।"


58

اَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِيْنَۙ

afamā naḥnu bimayyitīn(a).

फेर कांई आपां नीं मरस्यां?


59

اِلَّا مَوْتَتَنَا الْاُوْلٰى وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِيْنَ

illā mautatunal-ūlā wa mā naḥnu bimu‘ażżabīn(a).

जद तांई म्हारी मौत (इण दुनिया मांय) पैली नीं हुवै, अर आपां नै (परलोक मांय) सजा नीं मिलैला?”


60

اِنَّ هٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيْمُ

inna hāżā lahuwal-fauzul-‘aẓīm(u).

साची, आ साची में एक गौरवशाली जीत ही।


61

لِمِثْلِ هٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعٰمِلُوْنَ

limiṡli hāżā falya‘malil-‘āmilūn(a).

इण भांत री (जीत) रै वास्तै, जिका दान करण में सक्षम है, वै दान करै।


62

اَذٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا اَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّوْمِ

ażālika khairun nuzulan am syajaratuz-zaqqūm(i).

कांई (स्वर्ग रो भोजन) एक चोखो पकवान है या जक्कुम रो पेड़।


63

اِنَّا جَعَلْنٰهَا فِتْنَةً لِّلظّٰلِمِيْنَ

innā ja‘alnāhā fitnatal liẓ-ẓālimīn(a).

साची, म्हे इणनै (जक्कम पेड़) नै गलत काम करणियां री सजा बणाई।


64

اِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِيْٓ اَصْلِ الْجَحِيْمِۙ

innahā syajaratun takhruju fī aṣlil-jaḥīm(i).

साची, ओ एक असो पेड़ है जको नरक री गहराई सूं निकळै है।


65

طَلْعُهَا كَاَنَّهٗ رُءُوْسُ الشَّيٰطِيْنِ

Ṭal‘uhā ka'annahū ru'ūsusy-syayāṭīn(i).

ओ शैतानां रा सिर लागै है।


66

فَاِنَّهُمْ لَاٰكِلُوْنَ مِنْهَا فَمَالِـُٔوْنَ مِنْهَا الْبُطُوْنَۗ

fa innahum la'ākilūna minhā fa māli'ūna minhal-buṭūn(a).

तो साचाणी, बां इण मांय सूं कीं खायो (पेड़ रो फल), अर बां आपरा पेट नै इणरै फल सूं भर दियो (जक्कुम)।


67

ثُمَّ اِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيْمٍۚ

Ṡumma inna lahum ‘alaihā lasyaubam min ḥamīm(in).

फेर साचाणी, खाबा रै बाद (जक्कुम फल) बांनै एक पेय पदार्थ मिल्यो जिण मांय घणो गरम पाणी मिलायो गयो हो।


68

ثُمَّ اِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَاِلَى الْجَحِيْمِ

Ṡumma inna marji‘ahum la'ilal-jaḥīm(i).

फेर वांरी पाछी जाबा री जगां निश्चित रूप सूं जाहिम रो नरक होसी।


69

اِنَّهُمْ اَلْفَوْا اٰبَاۤءَهُمْ ضَاۤلِّيْنَۙ

innahum alfau ābā'ahum ḍāllīn(a).

साची, बां आपरा पुरखां नै भूल री हालत मांय पाया,


70

فَهُمْ عَلٰٓى اٰثٰرِهِمْ يُهْرَعُوْنَ

fahum ‘alā āṡārihim yuhra‘ūn(a).

फेर वे आपरै (पुरखां) रै नक्शेकदम माथै चालबा री जल्दबाजी करी।


71

وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ اَكْثَرُ الْاَوَّلِيْنَۙ

wa laqad ḍalla qablahum akṡarul-awwalīn(a).

अर साचाणी, बां सूं पैली (कुरैश) घणकरा प्राचीन लोग भटकग्या हा,


72

وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا فِيْهِمْ مُّنْذِرِيْنَ

wa laqad arsalnā fīhim munżirīn(a).

अर साची, म्हे बां रै मांय चेतावनी देवण आळा (प्रेरित) भेज्या है।


73

فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنْذَرِيْنَۙ

fanẓur kaifa kāna ‘āqibatul-munżarīn(a).

तो चेतावनी दी गई लोगां रै अंत माथै ध्यान देवो।


74

اِلَّا عِبَادَ اللّٰهِ الْمُخْلَصِيْنَ ࣖ

illā ‘ibādallāhil-mukhlaṣīn(a).

सिवाय अल्लाह रै सेवकां रै जिका (पाप सूं) शुद्ध है।


75

وَلَقَدْ نَادٰىنَا نُوْحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيْبُوْنَۖ

wa laqad nādānā nūḥun falani‘mal-mujībūn(a).

अर साचाणी, नूह म्हारै सूं प्रार्थना करी, सो साचाणी, म्हे सबसूं चोखा हां जका प्रार्थना री इजाजत देवां।


76

وَنَجَّيْنٰهُ وَاَهْلَهٗ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيْمِۖ

wa najjaināhu wa ahlahū minal-karbil-‘aẓīm(i).

आपां उणनै अर उणरै अनुयायियां नै एक मोटी आपदा सूं बचायो है।


77

وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهٗ هُمُ الْبَاقِيْنَ

wa ja‘alnā żurriyyatahū humul-bāqīn(a).

अर म्हे बांरा टाबरां अर पोतां नै अस्या बणाया जिका बांरी वंशज नै आगै बधावैला।


78

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى الْاٰخِرِيْنَ ۖ

wa taraknā ‘alaihi fil-ākhirīn(a).

अर म्हे पाछै आबाळा लोगां रै मांय नुह (प्रशंसा) रै वास्तै राखी;


79

سَلٰمٌ عَلٰى نُوْحٍ فِى الْعٰلَمِيْنَ

salāmun ‘alā nūḥin fil-‘ālamīn(a).

समृद्धि (आपनै दी) नूह नै पूरी दुनिया रै मांय।


80

اِنَّا كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ

innā każālika najzil-muḥsinīn(a).

साचाणी, आपां भलाई करण आळा नै इण भांत इनाम देवां हां।


81

اِنَّهٗ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِيْنَ

innahū min ‘ibādinal-mu'minīn(a).

साचाणी, वो म्हारै विस्वासी सेवकां मांय सूं एक है।


82

ثُمَّ اَغْرَقْنَا الْاٰخَرِيْنَ

Ṡumma agraqnal-ākharīn(a).

फेर म्हे दूजा नै डूबो दियो।


83

۞ وَاِنَّ مِنْ شِيْعَتِهٖ لَاِبْرٰهِيْمَ ۘ

wa inna min syī‘atihī la'ibrāhīm(a).

अर साचाणी, अब्राहम आपरै दल (नूह) रै मांय हो।


84

اِذْ جَاۤءَ رَبَّهٗ بِقَلْبٍ سَلِيْمٍۙ

iż jā'a rabbahū biqalbin salīm(in).

(याद राखजो) जद बो आपरै प्रभु कनै शुद्ध मन सूं आयो हो,


85

اِذْ قَالَ لِاَبِيْهِ وَقَوْمِهٖ مَاذَا تَعْبُدُوْنَ ۚ

iż qāla li'abīhi wa qaumihī māżā ta‘budūn(a).

(याद करो) जद बो आपरै पिता अर आपरै लोगां नै कैयो, “थे कांई पूजा करो हो?


86

اَىِٕفْكًا اٰلِهَةً دُوْنَ اللّٰهِ تُرِيْدُوْنَۗ

a'ifkan ālihatan dūnallāhi turīdūn(a).

कांई थै अल्लाह रै अलावा किणी दूजा भगवान रै सागै झूठ बोलणो चावो हो?


87

فَمَا ظَنُّكُمْ بِرَبِّ الْعٰلَمِيْنَ

famā ẓannukum birabbil-‘ālamīn(a).

तो थै सगळा जगत रा भगवान रै बारै मांय कांई सोचो हो?"


88

فَنَظَرَ نَظْرَةً فِى النُّجُوْمِۙ

fa naẓara naẓratan fin-nujūm(i).

फेर बो तारां कानी देख्यो,


89

فَقَالَ اِنِّيْ سَقِيْمٌ

fa qāla innī saqīm(un).

फेर वो (इब्राहिम) बोल्यो, "वास्तव में मैं बीमार हूँ।"


90

فَتَوَلَّوْا عَنْهُ مُدْبِرِيْنَ

fa tawallau ‘anhu mudbirīn(a).

फेर वे उणसूं मुड़ग्या अर चाल पड़्या।


91

فَرَاغَ اِلٰٓى اٰلِهَتِهِمْ فَقَالَ اَلَا تَأْكُلُوْنَۚ

farāga ilā ālihatihim faqāla alā ta'kulūn(a).

फेर वो (इब्राहिम) चुपचाप बांरी मूरतियां कनै गयो; फेर बो बोल्यो, “थै क्यूं कोनी खावो हो?


92

مَا لَكُمْ لَا تَنْطِقُوْنَ

mā lakum lā tanṭiqūn(a).

थै जवाब क्यूं कोनी देवो?


93

فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًا ۢبِالْيَمِيْنِ

farāga ‘alaihim ḍarbam bil-yamīn(i).

फेर बांनै आपरै दांया हाथ सूं मारता थकां बांनै (मूर्तियां) सामनो करियो।


94

فَاَقْبَلُوْٓا اِلَيْهِ يَزِفُّوْنَ

fa aqbalū ilaihi yaziffūn(a).

फेर वे (उणरा लोग) उणरै कनै दौड़ता आया।


95

قَالَ اَتَعْبُدُوْنَ مَا تَنْحِتُوْنَۙ

qāla ata‘budūna mā tanḥitūn(a).

उण (इब्राहिम) कह्यो, “कांई थै उण मूरतियां री पूजा करो हो जिणनै थै उकेरी है?


96

وَاللّٰهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُوْنَ

wallāhu khalaqakum wa mā ta‘malūn(a).

असल म्हं, अल्लाह ही थानै बणायो है अर थै कांई करो हो।"


97

قَالُوا ابْنُوْا لَهٗ بُنْيَانًا فَاَلْقُوْهُ فِى الْجَحِيْمِ

qālubnū lahū bun-yānan fa'alqūhu fil-jaḥīm(i).

वे कह्यो, "इब्राहीम नै जळावण रै वास्तै उणरै वास्तै एक इमारत (अंगीठी) बणाओ अर उणनै जळती आग रै मांय फेंक दो।"


98

فَاَرَادُوْا بِهٖ كَيْدًا فَجَعَلْنٰهُمُ الْاَسْفَلِيْنَ

fa arādū bihī kaidan faja‘alnāhumul-asfalīn(a).

सो बां उणनै (जला'र) धोखो देवण री मंशा राखी, (पण अल्लाह उणनै बचायो), फेर म्हे बांनै घृणित लोग बणा दिया।


99

وَقَالَ اِنِّيْ ذَاهِبٌ اِلٰى رَبِّيْ سَيَهْدِيْنِ

wa qāla innī żāhibun ilā rabbī sayahdīn(i).

अर बो (इब्राहिम) बोल्यो, “वास्तव में, म्हनैं आपरै प्रभु रै साम्हीं जाणो पड़सी, वो म्हारो मार्गदर्शन करेला।


100

رَبِّ هَبْ لِيْ مِنَ الصّٰلِحِيْنَ

rabbi hab lī minaṣ-ṣāliḥīn(a).

हे म्हारा प्रभु, म्हनै (एक टाबर) प्रदान करो जो पुण्यवान लोगां मांय सूं एक है।"


101

فَبَشَّرْنٰهُ بِغُلٰمٍ حَلِيْمٍ

fa basysyarnāhu bigulāmin ḥalīm(in).

तो म्हे उणनै एक घणै धीरजवान टाबर (इस्माइल) री (जन्म) री आछी खबर दी।


102

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يٰبُنَيَّ اِنِّيْٓ اَرٰى فِى الْمَنَامِ اَنِّيْٓ اَذْبَحُكَ فَانْظُرْ مَاذَا تَرٰىۗ قَالَ يٰٓاَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُۖ سَتَجِدُنِيْٓ اِنْ شَاۤءَ اللّٰهُ مِنَ الصّٰبِرِيْنَ

falammā balaga ma‘ahus-sa‘ya qāla yā bunayya innī arā fil-manāmi annī ażbaḥuka fanẓur māżā tarā, qāla yā abatif‘al mā tu'mar(u), satajidunī in syā'allāhu minaṣ-ṣābirīn(a).

तो जद टाबर (उम्र) पूगग्यो तो बो उणरै साथै कोशिश कर सक्यो, (इब्राहिम) बोल्यो, "ओ म्हारा बेटा! साची, म्हैं सुपनो देख्यो हो कै म्हैं थानै काट रैयो हो। तो सोचो कै थूं कांई सोचै है!" उण (इस्माइल) जवाब दियो, "हे म्हारा पिताजी! (अल्लाह) थानै जो हुकम देवै है, वो करो; भगवान करैला, थै म्हनै धीरज राखण आळा लोगां रै मांय पाओला।"


103

فَلَمَّآ اَسْلَمَا وَتَلَّهٗ لِلْجَبِيْنِۚ

falammā aslamā wa tallahū lil-jabīn(i).

जद दोनूं आत्मसमर्पण कर दिया अर उण (इब्राहिम) आपरै बेटै नै (आपरै) मिंदर माथै बिछा दियो, (अल्लाह रै हुकम नै पूरा करण रै वास्तै)।


104

وَنَادَيْنٰهُ اَنْ يّٰٓاِبْرٰهِيْمُ ۙ

wa nādaināhu ay yā ibrāhīm(u).

फेर म्हे उणनै बुलाया, “हे इब्राहिम!


105

قَدْ صَدَّقْتَ الرُّءْيَا ۚاِنَّا كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ

qad ṣaddaqtar-ru'yā, innā każālika najzil-muḥsinīn(a).

साची, थै उण सुपनै नै सही ठहरायो है। साचाणी, आपां भलाई करण आळा नै इण भांत इनाम देवां हां।


106

اِنَّ هٰذَا لَهُوَ الْبَلٰۤؤُا الْمُبِيْنُ

inna hāżā lahuwal-balā'ul-mubīn(u).

असल म्हं, यो एक असली परीक्षा है।


107

وَفَدَيْنٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيْمٍ

wa fadaināhu biżibḥin ‘aẓīm(in).

अर म्हे टाबर नै एक मोटै बलिदान सूं छुड़ायो।


108

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى الْاٰخِرِيْنَ ۖ

wa taraknā ‘alaihi fil-ākhirīn(a).

अर म्हे अब्राहम रै वास्तै प्रशंसा राखी जिका उणरै पछै आया हा।


109

سَلٰمٌ عَلٰٓى اِبْرٰهِيْمَ

salāmun ‘alā ibrāhīm(a).

इब्राहिम नै शुभकामनावां।


110

كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ

każālika najzil-muḥsinīn(a).

इण भांत आपां भलाई करणियां नै ईनाम देवां।


111

اِنَّهٗ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِيْنَ

innahū min ‘ibādinal-mu'minīn(a).

साचाणी, वो म्हारै विस्वासी सेवकां मांय सूं एक है।


112

وَبَشَّرْنٰهُ بِاِسْحٰقَ نَبِيًّا مِّنَ الصّٰلِحِيْنَ

wa basysyarnāhu bi'isḥāqa nabiyyam minaṣ-ṣāliḥīn(a).

अर म्हे उणनै इसहाक री (जन्म) री आछी खबर दी, एक नबी जिको धर्मात्मा लोगां मांय सूं एक हो।


113

وَبٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلٰٓى اِسْحٰقَۗ وَمِنْ ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَّظَالِمٌ لِّنَفْسِهٖ مُبِيْنٌ ࣖ

wa bāraknā ‘alaihi wa ‘alā isḥāq(a), wa min żurriyyatihimā muḥsinuw wa ẓālimul linafsihī mubīn(un).

अर म्हे उणनै अर इसहाक नै आशीर्वाद दियो। अर दोनूं रै वंशजां मांय अैड़ा लोग है जका भलाई करै है अर अैड़ा लोग है जका खुद रै सागै खुल्लै-खुल्लै गलत काम करै है।


114

وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلٰى مُوْسٰى وَهٰرُوْنَ ۚ

wa laqad manannā ‘alā mūsā wa hārūn(a).

अर साचाणी, म्हे मूसा अर हारून माथै वरदान दियो है।


115

وَنَجَّيْنٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيْمِۚ

wa najjaināhumā wa qaumahumā minal-karbil-‘aẓīm(i).

अर म्हे बांनै अर बांरै लोगां नै एक मोटी आपदा सूं बचायो।


116

وَنَصَرْنٰهُمْ فَكَانُوْا هُمُ الْغٰلِبِيْنَۚ

wa naṣarnāhum fakānū humul-gālibīn(a).

अर म्हे बांरी मदद करी ताकि वे जीत सकै।


117

وَاٰتَيْنٰهُمَا الْكِتٰبَ الْمُسْتَبِيْنَ ۚ

wa ātaināhumal-kitābal-mustabīn(a).

अर म्हे बां दोनूं नै एक साफ-सुथरी किताब दी,


118

وَهَدَيْنٰهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيْمَۚ

wa hadaināhumaṣ-ṣirāṭal-mustaqīm(a).

अर म्हे बां दोनूं नै सीधो मारग दिखायो।


119

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى الْاٰخِرِيْنَ ۖ

wa taraknā ‘alaihimā fil-ākhirīn(a).

अर म्हे बां दोनूं रै वास्तै (प्रशंसा) बां लोगां रै मांय अमर कर दियो जिका बां रै पछै आया हा।


120

سَلٰمٌ عَلٰى مُوْسٰى وَهٰرُوْنَ

salāmun ‘alā mūsā wa hārūn(a).

मूसा अर हारून नै शुभकामनावां।


121

اِنَّا كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ

innā każālika najzil-muḥsinīn(a).

इण भांत आपां भलाई करणियां नै ईनाम देवां।


122

اِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِيْنَ

innahumā min ‘ibādinal-mu'minīn(a).

साचाणी, वै दोनूं ई म्हारै विस्वासी सेवकां मांय सूं है।


123

وَاِنَّ اِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِيْنَۗ

wa inna ilyāsa laminal-mursalīn(a).

अर साचाणी, इलियास साचाणी प्रेरितां मांय सूं एक हो।


124

اِذْ قَالَ لِقَوْمِهٖٓ اَلَا تَتَّقُوْنَ

iż qāla liqaumihī alā tattaqūn(a).

(याद करो) जद बो आपरै लोगां नै कैयो हो, “थै धर्मी क्यूं कोनी हो?


125

اَتَدْعُوْنَ بَعْلًا وَّتَذَرُوْنَ اَحْسَنَ الْخٰلِقِيْنَۙ

atad‘ūna ba‘law wa tażarūna aḥsanal-khāliqīn(a).

कांई थनै बाल री पूजा करणी चाइजै अर (अल्लाह) नै श्रेष्ठ रचनाकारां नै छोड़णो चाइजै?


126

اللّٰهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ اٰبَاۤىِٕكُمُ الْاَوَّلِيْنَ

allāha rabbakum wa rabba ābā'ikumul-awwalīn(a).

(मतलब) अल्लाह थारो प्रभु है अर थारै पूर्वजां रो प्रभु है?”


127

فَكَذَّبُوْهُ فَاِنَّهُمْ لَمُحْضَرُوْنَۙ

fakażżabūhu fa'innahum lamuḥḍarūn(a).

पण वे इणनै नकार देवै है (इल्यास), फेर वाकई, वे (नरक) रै मांय घसीट लिया जावैला,


128

اِلَّا عِبَادَ اللّٰهِ الْمُخْلَصِيْنَ

illā ‘ibādallāhil-mukhlaṣīn(a).

सिवाय अल्लाह रा वां सेवकां रै जिका (पाप सूं) शुद्ध हुयग्या है।


129

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى الْاٰخِرِيْنَ ۙ

wa taraknā ‘alaihi fil-ākhirīn(a).

अर म्हे इणनै बाद रै आबाळा लोगां रै मांय इलियास (प्रशंसा) रै वास्तै अमर कर दियो।


130

سَلٰمٌ عَلٰٓى اِلْ يَاسِيْنَ

salāmun ‘alā ilyāsīn(a).

इलियास नै शुभकामनावां।


131

اِنَّا كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ

innā każālika najzil-muḥsinīn(a).

इण भांत आपां भलाई करणियां नै ईनाम देवां।


132

اِنَّهٗ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِيْنَ

innahū min ‘ibādinal-mu'minīn(a).

साचाणी, वो म्हारै विस्वासी सेवकां मांय सूं एक है।


133

وَاِنَّ لُوْطًا لَّمِنَ الْمُرْسَلِيْنَۗ

wa inna lūṭal laminal-mursalīn(a).

अर साचाणी, लूत साचाणी प्रेरितां मांय सूं एक हो।


134

اِذْ نَجَّيْنٰهُ وَاَهْلَهٗٓ اَجْمَعِيْنَۙ

iż najjaināhu wa ahlahū ajma‘īn(a).

(याद राखजो) जद म्हे उणनै अर उणरै सगळा अनुयायियां नै बचायो हो,


135

اِلَّا عَجُوْزًا فِى الْغٰبِرِيْنَ

illā ‘ajūzan fil-gābirīn(a).

सिवाय एक बूढ़ी लुगाई (उणरी घरआळी) रै साथै जिका लोग (शहर रै मांय) रैवता हा।


136

ثُمَّ دَمَّرْنَا الْاٰخَرِيْنَ

Ṡumma dammarnal-ākharīn(a).

फेर म्हे दूजा लोगां नै तबाह कर दिया।


137

وَاِنَّكُمْ لَتَمُرُّوْنَ عَلَيْهِمْ مُّصْبِحِيْنَۙ

wa innakum latamurrūna ‘alaihim muṣbiḥīn(a).

अर साचाणी थै (मक्का रा लोग) साचाणी सवेरै बां रै (अवशेषां) सूं गुजरस्यो,


138

وَبِالَّيْلِۗ اَفَلَا تَعْقِلُوْنَ ࣖ

wa bil-lail(i), afalā ta‘qilūn(a).

अर रात नै। तो थै क्यूं कोनी समझो?


139

وَاِنَّ يُوْنُسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِيْنَۗ

wa inna yūnusa laminal-mursalīn(a).

अर साचाणी योना साचाणी प्रेरितां मांय सूं एक हो।


140

اِذْ اَبَقَ اِلَى الْفُلْكِ الْمَشْحُوْنِۙ

iż abaqa ilal-fulkil-masyḥūn(i).

(याद राखजो) जद बो भागग्यो हो, भरेड़ा जहाज माथै,


141

فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِيْنَۚ

fa sāhama fakāna minal-mudḥaḍīn(a).

फेर वो लॉटरी रै मांय दाखिल हुयो अर ओ साबित हुयो कै वो बां लोगां मांय सूं एक हो जका (लॉटरी रै मांय) हार गिया हा।


142

فَالْتَقَمَهُ الْحُوْتُ وَهُوَ مُلِيْمٌ

faltaqamahul-ḥūtu wa huwa mulīm(un).

तो उणनै एक मोटी मछली बेइज्जती री हालत में निगलगी।


143

فَلَوْلَآ اَنَّهٗ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِيْنَ ۙ

falau lā annahū kāna minal-musabbiḥīn(a).

तो जे वो अल्लाह सूं घणी ज़िकर (प्रार्थना) करण आळा लोगां मांय सूं कोनी है, तो


144

لَلَبِثَ فِيْ بَطْنِهٖٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَۚ

lalabiṡa fī baṭnihī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).

निश्चित रूप सूं वो जी उठबा रै दिन तांई (मछली रै) पेट रै मांय रैसी।


145

۞ فَنَبَذْنٰهُ بِالْعَرَاۤءِ وَهُوَ سَقِيْمٌ ۚ

fa nabażnāhu bil-‘arā'i wa huwa saqīm(un).

फेर जद बो बीमार हो जणा म्हे उणनै बंजर जमीन माथै फेंक दियो।


146

وَاَنْۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّنْ يَّقْطِيْنٍۚ

wa ambatnā ‘alaihi syajaratam miy yaqṭīn(in).

फेर बां रै वास्तै म्हे लौकी री किस्म रो एक पेड़ उगाया।


147

وَاَرْسَلْنٰهُ اِلٰى مِائَةِ اَلْفٍ اَوْ يَزِيْدُوْنَۚ

wa arsalnāhu ilā mi'ati alfin au yazīdūn(a).

अर म्हे उणनै एक लाख या इणसूं बेसी लोगां कनै भेज दियो।


148

فَاٰمَنُوْا فَمَتَّعْنٰهُمْ اِلٰى حِيْنٍ

fa'āmanū famatta‘nāhum ilā ḥīn(in).

जद तांई वे विश्वास नीं कर लिया, अर इण वास्तै म्हे बांनै थोड़ी ताळ तांई आनंद दियो।


149

فَاسْتَفْتِهِمْ اَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُوْنَۚ

fastaftihim alirabbikal-banātu wa lahumul-banūn(a).

तो बां सूं (मक्का रै काफिरां सूं) पूछो, "कांई बेटियां थारै प्रभु रै वास्तै अर बेटा बां रै वास्तै है?"


150

اَمْ خَلَقْنَا الْمَلٰۤىِٕكَةَ اِنَاثًا وَّهُمْ شٰهِدُوْنَ

am khalaqnal-malā'ikata ināṡaw wa hum syāhidūn(a).

या फेर कांई आपां देवदूतां नै मादा रै रूप मांय बणाया जद बै देख रैया हा?


151

اَلَآ اِنَّهُمْ مِّنْ اِفْكِهِمْ لَيَقُوْلُوْنَۙ

alā innahum min ifkihim layaqūlūn(a).

याद राखजो, बां रै झूठां रै मांय बां असल मांय कैयो हो,


152

وَلَدَ اللّٰهُ ۙوَاِنَّهُمْ لَكٰذِبُوْنَۙ

waladallāh(u), wa innahum lakāżibūn(a).

भगवान रो एक बेटो हो। अर साची, वे पूरा झूठा है,


153

اَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِيْنَۗ

aṣṭafal-banāti ‘alal-banīn(a).

कांई वो (अल्लाह) छोरां री बजाय छोरियां नै चुणै है?


154

مَا لَكُمْۗ كَيْفَ تَحْكُمُوْنَ

mā lakum, kaifa taḥkumūn(a).

थै अठै क्यूं हो? थै कियां तय करो हो?


155

اَفَلَا تَذَكَّرُوْنَۚ

afalā tażakkarūn(a).

तो थै क्यूं कोनी सोचो?


156

اَمْ لَكُمْ سُلْطٰنٌ مُّبِيْنٌۙ

am lakum sulṭānum mubīn(un).

या फेर थारै कनै साफ सबूत है?


157

فَأْتُوْا بِكِتٰبِكُمْ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

fa'tū bikitābikum in kuntum ṣādiqīn(a).

(फेर) फेर आपरी किताब लेय आवो जे थै साच बोलबा आळा मिनख हो।


158

وَجَعَلُوْا بَيْنَهٗ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۗوَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ اِنَّهُمْ لَمُحْضَرُوْنَۙ

wa ja‘alū bainahū wa bainal-jinnati nasabā(n), wa laqad ‘alimatil-jinnatu innahum lamuḥḍarūn(a).

अर बां उणरै (अल्लाह) अर जिन्न रै बिचाळै एक नसाब (परिवार) संबंध स्थापित कर दियो। अर साचाणी, जिन्न नै ठाह है कै बांनै निश्चित रूप सूं (नरक) तांई घसीट दियो जावेला,


159

سُبْحٰنَ اللّٰهِ عَمَّا يَصِفُوْنَۙ

subḥānallāhi ‘ammā yaṣifūn(a).

वे जो जोड़ै है, उणसूं अल्लाह री महिमा होवै।


160

اِلَّا عِبَادَ اللّٰهِ الْمُخْلَصِيْنَ

illā ‘ibādallāhil-mukhlaṣīn(a).

सिवाय अल्लाह रै सेवकां रै जिका (पाप सूं) शुद्ध है।


161

فَاِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُوْنَۙ

fa'innakum wa mā ta‘budūn(a).

तो साची में थै अर थै जिणरी पूजा करो हो,


162

مَآ اَنْتُمْ عَلَيْهِ بِفٰتِنِيْنَۙ

mā antum ‘alaihi bifātinīn(a).

(किणी नै) अल्लाह रै खिलाफ भटकाव नीं कर सकैला,


163

اِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ الْجَحِيْمِ

illā man huwa ṣālil-jaḥīm(i).

सिवाय बां रै जिका नरक जाहिम जावैला।


164

وَمَا مِنَّآ اِلَّا لَهٗ مَقَامٌ مَّعْلُوْمٌۙ

wa mā minnā illā lahū maqāmum ma‘lūm(un).

अर म्हारै मांय सूं कोई भी (दूत) कोनी पण हरेक रो एक खास पद है,


165

وَّاِنَّا لَنَحْنُ الصَّۤافُّوْنَۖ

wa innā lanaḥnuṣ-ṣāffūn(a).

अर साचाणी आपां हमेशा व्यवस्थित रैवां हां (अल्लाह रै हुकम नै निभाबा रै वास्तै)।


166

وَاِنَّا لَنَحْنُ الْمُسَبِّحُوْنَ

wa innā lanaḥnul-musabbiḥūn(a).

अर साचाणी, आपां साचाणी (अल्लाह री) महिमा करता रैवांला।


167

وَاِنْ كَانُوْا لَيَقُوْلُوْنَۙ

wa in kānū layaqūlūn(a).

अर साचाणी बां (मक्का रा काफिर) असल मांय कैयो,


168

لَوْ اَنَّ عِنْدَنَا ذِكْرًا مِّنَ الْاَوَّلِيْنَۙ

lau anna ‘indanā żikram minal-awwalīn(a).

अगर आपां कनै पुराणा लोगां तांई कोई किताब हुवती तो


169

لَكُنَّا عِبَادَ اللّٰهِ الْمُخْلَصِيْنَ

lakunnā ‘ibādallāhil-mukhlaṣīn(a).

हां, आपां अल्लाह रा सेवक होस्यां जका पाप सूं शुद्ध हो जावांला।"


170

فَكَفَرُوْا بِهٖۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُوْنَ

fa kafarū bih(ī), fasaufa ya‘lamūn(a).

पण जाहिर तौर माथै बां इणनै (कुरान) नकार दियो; फेर पाछै बांनै ठाह लाग जासी (उणरी अवज्ञा रा परिणाम)।


171

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا الْمُرْسَلِيْنَ ۖ

wa laqad sabaqat kalimatunā li‘ibādinal-mursalīn(a).

अर साचाणी, म्हारो वचन म्हारै सेवकां रै वास्तै बण्योड़ो है, जका दूत बण जावै है।


172

اِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنْصُوْرُوْنَۖ

innahum lahumul-manṣūrūn(a).

(अर्थात) बांनै निश्चित रूप सूं मदद मिलसी।


173

وَاِنَّ جُنْدَنَا لَهُمُ الْغٰلِبُوْنَ

wa inna jundanā lahumul-gālibūn(a).

अर साचाणी आ म्हारी सेना है जकी जरूर जीत जावैला।


174

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتّٰى حِيْنٍۙ

fatawalla ‘anhum ḥattā ḥīn(in).

सो एक निश्चित बगत तांई बां सूं (मुहम्मद) मुड़ जावो,


175

وَّاَبْصِرْهُمْۗ فَسَوْفَ يُبْصِرُوْنَ

wa abṣirhum, fa saufa yubṣirūn(a).

इण भांत आपां भलाई करणियां नै ईनाम देवां।


176

اَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُوْنَ

afabi‘ażābinā yasta‘jilūn(a).

तो कांई वे म्हारी सजा नै जल्दी करण री अरज कर रैया है?


177

فَاِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاۤءَ صَبَاحُ الْمُنْذَرِيْنَ

fa iżā nazala bisāḥatihim fa sā'a ṣabāḥul-munżarīn(a).

तो जद (यातना) बां रै आंगणै मांय उतरैला, तो बां लोगां रै वास्तै भोर घणी बुरी हुवैला जिका चेतावणी दीरीजी ही।


178

وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتّٰى حِيْنٍۙ

wa tawalla ‘anhum ḥattā ḥīn(in).

अर एक निश्चित बगत तांई बां सूं दूर रैवो।


179

وَّاَبْصِرْۗ فَسَوْفَ يُبْصِرُوْنَ

wa abṣir, fasaufa yubṣirūn(a).

अर दिखाओ, फेर एक दिन वे (सजा) देख लेंगे।


180

سُبْحٰنَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُوْنَۚ

subḥāna rabbika rabbil-‘izzati ‘ammā yaṣifūn(a).

थारै प्रभु री महिमा है, जो वे कैवै है बां री प्रकृति रो सर्वशक्तिमान प्रभु है।


181

وَسَلٰمٌ عَلَى الْمُرْسَلِيْنَۚ

wa salāmun ‘alal-mursalīn(a).

अर प्रेरितां नै शुभकामनावां।


182

وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَ ࣖ

wal-ḥamdu lillāhi rabbil-‘ālamīn(a).

अर सगळी स्तुति अल्लाह री है, जो सगळी दुनियां रो स्वामी है।