इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)

Q.S अध-धारियात (اَلذَّارِيَات) - 60 छंदां री गिणती

(चालण आळी हवा)

Qari

Murottal Audio

1

وَالذّٰرِيٰتِ ذَرْوًاۙ

waż-żāriyāti żarwā(n).

धूळ नै उड़ाबा आळी (हवा) सूं,


2

فَالْحٰمِلٰتِ وِقْرًاۙ

fal-ḥāmilāti wiqrā(n).

अर बादळां मांय (बारिश),


3

فَالْجٰرِيٰتِ يُسْرًاۙ

fal-jāriyāti yusrā(n).

अर (जहाज) जका आसानी सूं चालै है,


4

فَالْمُقَسِّمٰتِ اَمْرًاۙ

fal-muqassimāti amrā(n).

अर (देवदूत) जका बातां नै बांटै है,


5

اِنَّمَا تُوْعَدُوْنَ لَصَادِقٌۙ

innamā tū‘adūna laṣādiq(un).

साची, थारै सूं जको वचन दियो गयो हो वो साच होणो चाइजै।


6

وَّاِنَّ الدِّيْنَ لَوَاقِعٌۗ

wa innad-dīna lawāqi‘(un).

अर साचाणी, (प्रतिशोध रो दिन) जरूर आवैला।


7

وَالسَّمَاۤءِ ذَاتِ الْحُبُكِۙ

was-samā'i żātil-ḥubuk(i).

आभै री कसम जिण ​​मांय रास्तै है,


8

اِنَّكُمْ لَفِيْ قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍۙ

innakum lafī qaulim mukhtalif(in).

साची, थारी राय साची में न्यारी-न्यारी है,


9

يُّؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ اُفِكَۗ

yu'faku ‘anhu man ufik(a).

उणसूं (कुरान अर रसूल) मुड़ग्या जिका मुड़ग्या।


10

قُتِلَ الْخَرَّاصُوْنَۙ

qutilal-kharrāṣūn(a).

श्रापित है वे लोग जका घणा झूठ बोलै है।


11

الَّذِيْنَ هُمْ فِيْ غَمْرَةٍ سَاهُوْنَۙ

allażīna hum fī gamratin sāhūn(a).

(अर्थात) अज्ञानता अर लापरवाही रै मांय डूब्योड़ा लोग,


12

يَسْـَٔلُوْنَ اَيَّانَ يَوْمُ الدِّيْنِۗ

yas'alūna ayyāna yaumud-dīn(i).

बां पूछ्यो, "न्याय रो दिन कद है?"


13

يَوْمَ هُمْ عَلَى النَّارِ يُفْتَنُوْنَ

yauma hum ‘alan-nāri yuftanūn(a).

(प्रतिशोध रो दिन) वो दिन है (जद) बांनै नरक री आग मांय सजा दी जावैला।


14

ذُوْقُوْا فِتْنَتَكُمْۗ هٰذَا الَّذِيْ كُنْتُمْ بِهٖ تَسْتَعْجِلُوْنَ

Żūqū fitnatakum, hāżal-lażī kuntum bihī tasta‘jilūn(a).

(उणां सूं कैयो गयो हो) "आपरी सजा रो स्वाद लेवो। आ वा सजा है जिणनै थै पैली जल्दी करण सारू कैयो हो।"


15

اِنَّ الْمُتَّقِيْنَ فِيْ جَنّٰتٍ وَّعُيُوْنٍۙ

innal-muttaqīna fī jannātiw wa ‘uyūn(in).

साचाणी, जका लोग पुण्यवान है, वै बागां (स्वर्ग) अर पाणी रा झरणां मांय है,


16

اٰخِذِيْنَ مَآ اٰتٰىهُمْ رَبُّهُمْ ۗ اِنَّهُمْ كَانُوْا قَبْلَ ذٰلِكَ مُحْسِنِيْنَۗ

Ākhiżīna mā ātāhum rabbuhum, innahum kānū qabla żālika muḥsinīn(a).

वे वो ले लिया जो भगवान बांनै दियो हो। साची, इणसूं पैली (दुनिया मांय) वै लोग भलाई करता हा;


17

كَانُوْا قَلِيْلًا مِّنَ الَّيْلِ مَا يَهْجَعُوْنَ

kānū qalīlam minal-laili mā yahja‘ūn(a).

वे रात नै घणा कम सोवै है;


18

وَبِالْاَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُوْنَ

wa bil-asḥāri hum yastagfirūn(a).

अर रात रै आखरी बगत बां (अल्लाह सूं) माफी मांगी।


19

وَفِيْٓ اَمْوَالِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّاۤىِٕلِ وَالْمَحْرُوْمِ

wa fī amwālihim ḥaqqul lis-sā'ili wal-maḥrūm(i).

अर इनकी सम्पत्ति मैं मांगण आळे गरीब अर ना मांगण आळे गरीब का हक सै।


20

وَفِى الْاَرْضِ اٰيٰتٌ لِّلْمُوْقِنِيْنَۙ

wa fil-arḍi āyātul lil-mūqinīn(a).

अर धरती माथै (अल्लाह री महानता) रा निशान है, जिका इमान करै है, बां रै वास्तै।


21

وَفِيْٓ اَنْفُسِكُمْ ۗ اَفَلَا تُبْصِرُوْنَ

wa fī anfusikum, afalā tubṣirūn(a).

अर (भी) खुद नै। फेर कांई थै ध्यान कोनी दे रिया हो?


22

وَفِى السَّمَاۤءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوْعَدُوْنَ

wa fis-samā'i rizqukum wa mā tū‘adūn(a).

अर आकास रै मांय थारी जीविका अर थारै सूं वचन दियोड़ा (कारण) है।


23

فَوَرَبِّ السَّمَاۤءِ وَالْاَرْضِ اِنَّهٗ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَآ اَنَّكُمْ تَنْطِقُوْنَ ࣖ

fa wa rabbis-samā'i wal-arḍi innahū laḥaqqum miṡla mā annakum tanṭiqūn(a).

तो आकाश अर धरती रै प्रभु री कसम, साची, जो वचन दियो गयो है वो निश्चित रूप सूं आपरै कैवण मुजब होसी।


24

هَلْ اَتٰىكَ حَدِيْثُ ضَيْفِ اِبْرٰهِيْمَ الْمُكْرَمِيْنَۘ

hal atāka ḥadīṡu ḍaifi ibrāhīmal-mukramīn(a).

कांई इब्राहिम (देवदूत) रै मेहमानां री कहाणी थारै (मुहम्मद) तांई पूगगी है जिका महिमामंडित हुया हा?


25

اِذْ دَخَلُوْا عَلَيْهِ فَقَالُوْا سَلٰمًا ۗقَالَ سَلٰمٌۚ قَوْمٌ مُّنْكَرُوْنَ

iż dakhalū ‘alaihi fa qālū salāmā(n), qāla salām(un), qaumum munkarūn(a).

(याद राखजो) जद वे उणरी जगां मांय दाखिल हुया अर "सलामान" (नमस्कार) कह्यो, तो इब्राहिम जवाब दियो, "सलामुन" (नमस्कार)। (वे) लोग हा जिणनै वो नीं जाणतो हो।


26

فَرَاغَ اِلٰٓى اَهْلِهٖ فَجَاۤءَ بِعِجْلٍ سَمِيْنٍۙ

farāga ilā ahlihī fa jā'a bi‘ijlin samīn(in).

तो वो (इब्राहिम) आपरै परिवार सूं मिलबा नै चुपचाप गयो, फेर उणरै वास्तै एक मोटो (जळ्योड़ो) बछड़ो रो मांस ल्यायो,


27

فَقَرَّبَهٗٓ اِلَيْهِمْۚ قَالَ اَلَا تَأْكُلُوْنَ

fa qarrabahū ilaihim, qāla alā ta'kulūn(a).

फेर बो बांनै परोस दियो (पण बां खाणो कोनी चायो)। इब्राहिम बोल्यो, “थै क्यूं कोनी खावो।”


28

فَاَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيْفَةً ۗقَالُوْا لَا تَخَفْۗ وَبَشَّرُوْهُ بِغُلٰمٍ عَلِيْمٍ

fa aujasa minhum khīfah(tan), qālū lā takhaf, wa basysyarūhu bigulāmin ‘alīm(in).

सो उणनै (इब्राहिम) बां सूं डर लाग्यो। बां कैयो, "डरो मत" अर बां उणनै एक धर्मी टाबर (इसहाक) रै जलम री खुशखबरी दी।


29

فَاَقْبَلَتِ امْرَاَتُهٗ فِيْ صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوْزٌ عَقِيْمٌ

fa aqbalatimra'atuhū fī ṣarratin fa ṣakkat wajhahā wa qālat ‘ajūzun ‘aqīm(un).

फेर उणरी घरआळी चिल्लाती आई अर आपरै चेहरै नै थपथपायो अर कैयो, "(मैं) एक बांझ बूढ़ी लुगाई हूं।"


30

قَالُوْا كَذٰلِكِۙ قَالَ رَبُّكِ ۗاِنَّهٗ هُوَ الْحَكِيْمُ الْعَلِيْمُ ۔

qālū każālik(i), qāla rabbuk(i), innahū huwal-ḥakīmul-‘alīm(u).

बां कैयो, "थारो प्रभु आ ई कैवै है। साचाणी, वो सर्वज्ञ अर सर्वज्ञ है।"


31

۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ اَيُّهَا الْمُرْسَلُوْنَۚ

qāla famā khaṭbukum ayyuhal-mursalūn(a).

उण (इब्राहिम) कह्यो, "हे दूतों, थारो कांई जरूरी काम है?"


32

قَالُوْآ اِنَّآ اُرْسِلْنَآ اِلٰى قَوْمٍ مُّجْرِمِيْنَۙ

qālū innā ursilnā ilā qaumim mujrimīn(a).

बे जबाब दियो, “म्हानै तो पापी लोगां रै कनै भेज्यो गयो है।


33

لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّنْ طِيْنٍۙ

linursila ‘alaihim ḥijāratam min ṭīn(in).

ताकि म्हे बांनै (कठोर) माटी रा पत्थर सूं मार सकां।


34

مُّسَوَّمَةً عِنْدَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِيْنَ

musawwamatan ‘inda rabbika lil-musrifīn(a).

सीमा नै पार करण आळा नै (नष्ट) करण सारू थारै प्रभु री तरफ सूं चिन्हित करियो गयो है।"


35

فَاَخْرَجْنَا مَنْ كَانَ فِيْهَا مِنَ الْمُؤْمِنِيْنَۚ

fa akhrajnā man kāna fīhā minal-mu'minīn(a).

फेर म्हे बां लोगां नै बारै काढिया जिका बिश्वास करै हा जका उण (लूत रै लोगां री धरती) मांय हा।


36

فَمَا وَجَدْنَا فِيْهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ الْمُسْلِمِيْنَۚ

famā wajadnā fīhā gaira baitim minal-muslimīn(a).

तो म्हांनै इण मांय (भूमि) मुसलमानां रै एक घर (लूत) रै अलावा नीं मिल्यो।


37

وَتَرَكْنَا فِيْهَآ اٰيَةً لِّلَّذِيْنَ يَخَافُوْنَ الْعَذَابَ الْاَلِيْمَۗ

wa taraknā fīhā āyatal lil-lażīna yakhāfūnal-‘ażābal-alīm(a).

अर म्हे उण मांय (उण धरती) एक संकेत छोड़ दियो जिका लोगां नै दर्दनाक सजा रो डर है।


38

وَفِيْ مُوْسٰىٓ اِذْ اَرْسَلْنٰهُ اِلٰى فِرْعَوْنَ بِسُلْطٰنٍ مُّبِيْنٍ

wa fī mūsā iż arsalnāhu ilā fir‘auna bisulṭānim mubīn(in).

अर मूसा रै मांय (अल्लाह री शक्ति रा संकेत हा) जद म्हे उणनै असली चमत्कार रै साथै फिरौन कनै भेज्यो।


39

فَتَوَلّٰى بِرُكْنِهٖ وَقَالَ سٰحِرٌ اَوْ مَجْنُوْنٌ

fa tawallā biruknihī wa qāla sāḥirun au majnūn(un).

पण वो (फिरौन) अर उणरी सेना पाछी मुड़गी अर बोल्यो, "ओ एक जादूगर है या पागल है।"


40

فَاَخَذْنٰهُ وَجُنُوْدَهٗ فَنَبَذْنٰهُمْ فِى الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيْمٌۗ

fa akhażnāhu wa junūdahū fanabażnāhum fil-yammi wa huwa mulīm(un).

तो म्हे उणनै अर उणरी सेना नै यातनावां दी, पछै म्हे उणनै समंदर मांय फेंक दियो, एक बेइज्जती री हालत मांय।


41

وَفِيْ عَادٍ اِذْ اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيْحَ الْعَقِيْمَۚ

wa fī ‘ādin iż arsalnā ‘alaihimur-rīḥal-‘aqīm(a).

अर (इणरै अलावा) (आद रै लोगां री कहाणी) रै मांय, जद म्हे बां माथै एक विनाशकारी हवा भेजी,


42

مَا تَذَرُ مِنْ شَيْءٍ اَتَتْ عَلَيْهِ اِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيْمِۗ

mā tażaru min syai'in atat ‘alaihi illā ja‘alathu kar-ramīm(i).

(हवा) किणी भी चीज नै टकराबा कोनी देवै, वा इणनै पाउडर में भी बदल देवै है।


43

وَفِيْ ثَمُوْدَ اِذْ قِيْلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوْا حَتّٰى حِيْنٍ

wa fī ṡamūda iż qīla lahum tamatta‘ū ḥattā ḥīn(in).

अर (सामूद रै लोगां री कथा) रै मांय, जद बांनै कैयो गयो हो, "निर्धारित बगत तांई सुखी रैवो।"


44

فَعَتَوْا عَنْ اَمْرِ رَبِّهِمْ فَاَخَذَتْهُمُ الصّٰعِقَةُ وَهُمْ يَنْظُرُوْنَ

fa‘atau ‘an amri rabbihim fa akhażathumuṣ-ṣā‘iqatu wa hum yanẓurūn(a).

फेर वे आपरै प्रभु रै हुकम रै खिलाफ घमंड सूं काम करियो, इण वास्तै वे देखतां ई बिजली गिरगी।


45

فَمَا اسْتَطَاعُوْا مِنْ قِيَامٍ وَّمَا كَانُوْا مُنْتَصِرِيْنَۙ

famastaṭā‘ū min qiyāmiw wa mā kānū muntaṣirīn(a).

इण वास्तै वे उठ नीं सक्या अर मदद भी कोनी मिली,


46

وَقَوْمَ نُوْحٍ مِّنْ قَبْلُ ۗ اِنَّهُمْ كَانُوْا قَوْمًا فٰسِقِيْنَ ࣖ

wa qauma nūḥim min qabl(u), innahum kānū qauman fāsiqīn(a).

अर इणसूं पैली (म्हैं नूह रै लोगां नै नास कर दियो। साची, वे एक दुष्ट लोग है।


47

وَالسَّمَاۤءَ بَنَيْنٰهَا بِاَيْىدٍ وَّاِنَّا لَمُوْسِعُوْنَ

was-samā'a banaināhā bi'aidiw wa innā lamūsi‘ūn(a).

अर आकाश नै म्हे (आपणी) शक्ति सूं बणायो अर म्हे बांनै साची में फैलाया।


48

وَالْاَرْضَ فَرَشْنٰهَا فَنِعْمَ الْمٰهِدُوْنَ

wal-arḍa farasynāhā fa ni‘mal-māhidūn(a).

अर म्हे धरती नै फैलाया; फेर (म्हे) सबसूं चोखा हां जिका फैलाया गया है।


49

وَمِنْ كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُوْنَ

wa min kulli syai'in khalaqnā zaujaini la‘allakum tażakkarūn(a).

अर म्हे हरेक चीज नै दो-दो बणाई है ताकि थै (अल्लाह री महानता) नै याद राख सको।


50

فَفِرُّوْٓا اِلَى اللّٰهِ ۗاِنِّيْ لَكُمْ مِّنْهُ نَذِيْرٌ مُّبِيْنٌۚ

fa firrū ilallāh(i), innī lakum minhu nażīrum mubīn(un).

तो तुरंत अल्लाह रै कनै पाछो जावो। साची, मैं थारै वास्तै अल्लाह री तरफ सूं एक साफ चेतावनी हूं।


51

وَلَا تَجْعَلُوْا مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَۗ اِنِّيْ لَكُمْ مِّنْهُ نَذِيْرٌ مُّبِيْنٌ

wa lā taj‘alū ma‘allāhi ilāhan ākhar(a), innī lakum minhu nażīrum mubīn(un).

अर अल्लाह रै अलावा दूजा देवता मत बणाओ। साची, मैं थारै वास्तै अल्लाह री तरफ सूं एक साफ चेतावनी हूं।


52

كَذٰلِكَ مَآ اَتَى الَّذِيْنَ مِنْ قَبْلِهِمْ مِّنْ رَّسُوْلٍ اِلَّا قَالُوْا سَاحِرٌ اَوْ مَجْنُوْنٌ

każālika mā atal-lażīna min qablihim mir rasūlin illā qālū sāḥirun au majnūn(un).

इण वास्तै, जद भी कोई दूत बां सूं पैली रै लोगां कनै आतो, तो वै (उणरा लोग) कैवता, "वो एक जादूगर है या पागल।"


53

اَتَوَاصَوْا بِهٖۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُوْنَۚ

atawāṣau bih(ī), bal hum qaumun ṭāgūn(a).

कांई वे एक दूजा नै संदेश भेज्या कै कांई कैयो गयो हो। असल म्हं, वे एक अस्या लोग है जका सीमा सूं परे जावै है।


54

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ اَنْتَ بِمَلُوْمٍ

fa tawalla ‘anhum famā anta bimalūm(in).

तो बां सूं मुँह फेरो, अर थै कोई निंदा कोनी कर सकोला।


55

وَذَكِّرْ فَاِنَّ الذِّكْرٰى تَنْفَعُ الْمُؤْمِنِيْنَ

wa żakkir fa innaż-żikra tanfa‘ul-mu'minīn(a).

अर चेतावनी देता रैवो, क्यूंकै चेतावनी विश्वासियां ​​रै वास्तै फायदेमंद है।


56

وَمَا خَلَقْتُ الْجِنَّ وَالْاِنْسَ اِلَّا لِيَعْبُدُوْنِ

wa mā khalaqtul-jinna wal-insa illā liya‘budūn(i).

मैं जिन्न अर मिनख नीं बणाया पण इण वास्तै बणाया कै वै म्हारी पूजा करै।


57

مَآ اُرِيْدُ مِنْهُمْ مِّنْ رِّزْقٍ وَّمَآ اُرِيْدُ اَنْ يُّطْعِمُوْنِ

mā urīdu minhum mir rizqiw wa mā urīdu ay yuṭ‘imūn(i).

मैं बां सूं कोई जीविका नीं चावूं अर नीं चावूं कै बै म्हनै खिलावै।


58

اِنَّ اللّٰهَ هُوَ الرَّزَّاقُ ذُو الْقُوَّةِ الْمَتِيْنُ

innallāha huwar-razzāqu żul-quwwatil-matīn(u).

साची अल्लाह, वो रोजी रोटी देवण आळो है जिणरै कनै ताकत है अर बो घणो ताकतवर है।


59

فَاِنَّ لِلَّذِيْنَ ظَلَمُوْا ذَنُوْبًا مِّثْلَ ذَنُوْبِ اَصْحٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُوْنِ

fa inna lil-lażīna ẓalamū żanūbam miṡla żanūbi aṣḥābihim falā yasta‘jilūn(i).

तो साचाणी, गलत काम करण आळा रै वास्तै एक हिस्सो (दंड रो) है जियां कै बांरै दोस्तां रो हिस्सो (पैली); तो बांनै मन्नै इणनै जल्दी करण सारू मत कैवणो चाइजै।


60

فَوَيْلٌ لِّلَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْ يَّوْمِهِمُ الَّذِيْ يُوْعَدُوْنَ ࣖ

fa wailul lil-lażīna kafarū miy yaumihimul-lażī yū‘adūn(a).

तो हाय बां लोगां माथै जिका बां सूं वचन दियो गयो हो (कयामत रै दिन) माथै काफिर करैला।