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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)

Q.S अल-मुरसलात (اَلْمُرْسَلَات) - 50 छंदां री गिणती

(भेज्यो गयो परी)

Qari

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1

وَالْمُرْسَلٰتِ عُرْفًاۙ

wal-mursalāti ‘urfā(n).

(स्वर्गदूतां) रै द्वारा जिका भलाई ल्याबा रै वास्तै भेज्या गया हा,


2

فَالْعٰصِفٰتِ عَصْفًاۙ

fal-‘āṣifāti ‘aṣfā(n).

अर (देवदूत) जका तेज उड़ै है,


3

وَّالنّٰشِرٰتِ نَشْرًاۙ

wan-nāsyirāti nasyrā(n).

अर (देवदूत) जिका (परमेश्बर री किरपा) नै जतरो हो सके फैलाया,


4

فَالْفٰرِقٰتِ فَرْقًاۙ

fal-fāriqāti farqā(n).

अर (देवदूत) जका (अच्छे अर बुरे रै बीच) नै जित्तो हो सके साफ-साफ भेद करै है,


5

فَالْمُلْقِيٰتِ ذِكْرًاۙ

fal-mulqiyāti żikrā(n).

अर (देवदूत) जका रहस्योद्घाटन करै है,


6

عُذْرًا اَوْ نُذْرًاۙ

‘użran au nużrā(n).

कारणां नै खारिज करणो या चेतावनी देणी।


7

اِنَّمَا تُوْعَدُوْنَ لَوَاقِعٌۗ

innamā tū‘adūna lawāqi‘(un).

साची, थारै सूं जो वचन दियो गयो है वो निश्चित रूप सूं होसी।


8

فَاِذَا النُّجُوْمُ طُمِسَتْۙ

fa iżan-nujūmu ṭumisat.

तो जद तारा मिट जावैला,


9

وَاِذَا السَّمَاۤءُ فُرِجَتْۙ

wa iżas-samā'u furijat.

अर जद आकास खुल जावै है,


10

وَاِذَا الْجِبَالُ نُسِفَتْۙ

wa iżal-jibālu nusifat.

अर जद पहाड़ धूळ बण जावै है,


11

وَاِذَا الرُّسُلُ اُقِّتَتْۗ

wa iżar-rusulu uqqitat.

अर जद प्रेरितां रो बगत तय हुयो।


12

لِاَيِّ يَوْمٍ اُجِّلَتْۗ

li'ayyi yaumin ujjilat.

(निस्संदेह बांनै कैयो जावेला) "कफिर करण आळा री सजा किण दिन तांई टाळ दी जावैला?"


13

لِيَوْمِ الْفَصْلِۚ

liyaumil-faṣl(i).

निर्णय रै दिन तांई।


14

وَمَآ اَدْرٰىكَ مَا يَوْمُ الْفَصْلِۗ

wa mā adrāka mā yaumul-faṣl(i).

अर कांई थनै ठा है कै निर्णय रो दिन कांई हुवै है?


15

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


16

اَلَمْ نُهْلِكِ الْاَوَّلِيْنَۗ

alam nuhlikil-awwalīn(a).

कांई आपां पैली रा लोगां नै नास नीं करिया?


17

ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ الْاٰخِرِيْنَ

Ṡumma nutbi‘uhumul-ākhirīn(a).

फेर म्हे बां नै (आपणी सजा) दी जिका बाद मांय आया।


18

كَذٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِيْنَ

każālika naf‘alu bil-mujrimīn(a).

आपां पापियां रै सागै इणी भांत रो व्यवहार करां।


19

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


20

اَلَمْ نَخْلُقْكُّمْ مِّنْ مَّاۤءٍ مَّهِيْنٍۙ

alam nakhluqkum mim mā'im mahīn(in).

कांई म्हे थानै नीच पाणी (वीर्य) सूं कोनी बणायो?


21

فَجَعَلْنٰهُ فِيْ قَرَارٍ مَّكِيْنٍ

fa ja‘alnāhu fī qarārim makīn(in).

फेर म्हे उणनै एक पक्की जगै (गर्भ) माथै राख दियो।


22

اِلٰى قَدَرٍ مَّعْلُوْمٍۙ

ilā qadarim ma‘lūm(in).

निर्दिष्ट बगत तांई,


23

فَقَدَرْنَاۖ فَنِعْمَ الْقٰدِرُوْنَ

fa qadarnā, fani‘mal-qādirūn(a).

फेर आपां (इणरो रूप) तय करां, फेर (आप) तय करण आळा सबसूं चोखा हां।


24

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


25

اَلَمْ نَجْعَلِ الْاَرْضَ كِفَاتًاۙ

alam naj‘alil-arḍa kifātā(n).

कांई म्हे धरती नै सभा री जगां कोनी बणाई?


26

اَحْيَاۤءً وَّاَمْوَاتًاۙ

aḥyā'aw wa amwātā(n).

जीवता अर मरेड़ा लोगां रै वास्तै?


27

وَّجَعَلْنَا فِيْهَا رَوَاسِيَ شٰمِخٰتٍ وَّاَسْقَيْنٰكُمْ مَّاۤءً فُرَاتًاۗ

wa ja‘alnā fīhā rawāsiya syāmikhātiw wa asqainākum mā'an furātā(n).

अर म्हे बांनै ऊंचा पहाड़ बणाया अर थानै पीबा तांई ताजा पाणी दियो?


28

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


29

اِنْطَلِقُوْٓا اِلٰى مَا كُنْتُمْ بِهٖ تُكَذِّبُوْنَۚ

inṭaliqū ilā mā kuntum bihī tukażżibūn(a).

(इणनै कैयो जावैला) “जा अर उण चीज नै ले ल्यो जिणनै थै पैली मना कर दियो हो।


30

اِنْطَلِقُوْٓا اِلٰى ظِلٍّ ذِيْ ثَلٰثِ شُعَبٍ

inṭaliqū ilā ẓillin żī ṡalāṡi syu‘ab(in).

जावो, एक छाया ले आओ (नरक री आग रो धुआं) जिणरी तीन शाखावां है,


31

لَا ظَلِيْلٍ وَّلَا يُغْنِيْ مِنَ اللَّهَبِۗ

lā ẓalīliw wa lā yugnī minal-lahab(i).

जो न तो नरक री ज्वाला री रक्षा करै है अर न ही भगावै है।"


32

اِنَّهَا تَرْمِيْ بِشَرَرٍ كَالْقَصْرِۚ

innahā tarmī bisyararin kal-qaṣr(i).

साचाणी, (नरक) आग री चिंगारी (जितरी मोटी अर ऊंची) महल काढै है,


33

كَاَنَّهٗ جِمٰلَتٌ صُفْرٌۗ

ka'annahū jimālatun ṣufr(un).

पीळा ऊंठां री जुलूस री तरै।


34

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


35

هٰذَا يَوْمُ لَا يَنْطِقُوْنَۙ

hāżā yaumu lā yanṭiqūn(a).

यो वो दिन है, जद वे बोल नीं सकै,


36

وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُوْنَ

wa lā yu'żanu lahum fa ya‘tażirūn(a).

अर बांनै बहाना बणाबा री इजाजत कोनी है जिणसूं बांनै माफ कर दियो जा सकै।


37

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


38

هٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ جَمَعْنٰكُمْ وَالْاَوَّلِيْنَ

hāżā yaumul-faṣli jama‘nākum wal-awwalīn(a).

यो निर्णय रो दिन है; (आज रै दिन) म्हे थानै अर बां लोगां नै एकठ करांला जका पैली हा।


39

فَاِنْ كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيْدُوْنِ

fa'in kāna lakum kaidun fakīdūn(i).

तो जे थारै कनै कोई चाल है तो म्हारै खिलाफ धोखो करो।


40

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ ࣖ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


41

اِنَّ الْمُتَّقِيْنَ فِيْ ظِلٰلٍ وَّعُيُوْنٍۙ

innal-muttaqīna fī ẓilāliw wa ‘uyūn(in).

साचाणी, जका लोग पुण्यवान है, वै छाया (जन्नत रा छायादार पेड़) अर (आसपास) झरणां रै मांय है,


42

وَّفَوَاكِهَ مِمَّا يَشْتَهُوْنَۗ

wa fawākiha mimmā yasytahūn(a).

अर बांनै पसंद रा फल।


43

كُلُوْا وَاشْرَبُوْا هَنِيْۤـًٔا ۢبِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُوْنَ

kulū wasyrabū hanī'am bimā kuntum ta‘malūn(a).

(उणां नै बताओ) "थै जो करियो है उण रै बदलै में आनंद सूं खाओ अर पीओ।"


44

اِنَّا كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ

innā każālika najzil-muḥsinīn(a).

साचाणी, आपां भलाई करण आळा नै इण भांत इनाम देवां हां।


45

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


46

كُلُوْا وَتَمَتَّعُوْا قَلِيْلًا اِنَّكُمْ مُّجْرِمُوْنَ

kulū wa tamatta‘ū qalīlan innakum mujrimūn(a).

(काफिरां नै कैवो) "खाओ अर थोड़ी ताळ तांई (दुनिया मांय) मस्ती करो, साचाणी थै आज्ञाकारी लोग हो!"


47

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, बां लोगां रै वास्तै जका (सच) नै नकार देवै।


48

وَاِذَا قِيْلَ لَهُمُ ارْكَعُوْا لَا يَرْكَعُوْنَ

wa iżā qīla lahumurka‘ū lā yarka‘ūn(a).

अर जद बांनै कैयो जावैला, “ब्रुक” तो बै झुकैला कोनी।


49

وَيْلٌ يَّوْمَىِٕذٍ لِّلْمُكَذِّبِيْنَ

wailuy yauma'iżil lil-mukażżibīn(a).

हाय उण दिन री, जका (सच) नै नकारै है!


50

فَبِاَيِّ حَدِيْثٍۢ بَعْدَهٗ يُؤْمِنُوْنَ ࣖ ۔

fa bi'ayyi ḥadīṡim ba‘dahū yu'minūn(a).

तो वे किण शिक्षा (कुरान रै अलावा) माथै विश्वास करैला?