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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)

Q.S अल-लेल के ह (اَلَّيْل) - 21 श्लोक के संख्या के बारे में बतावल गइल बा

(सांझि)

Qari

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1

وَالَّيْلِ اِذَا يَغْشٰىۙ

wal-laili iżā yagsyā.

रात तक जब ऊ ढंक लेला (दिन के रोशनी),


2

وَالنَّهَارِ اِذَا تَجَلّٰىۙ

wan-nahāri iżā tajallā.

जवना दिन उज्जवल होई, ओकरा खातिर,


3

وَمَا خَلَقَ الذَّكَرَ وَالْاُنْثٰىٓ ۙ

wa mā khalaqaż-żakara wal-unṡā.

नर आ नारी के सृष्टि खातिर,


4

اِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتّٰىۗ

inna sa‘yakum lasyattā.

सचहूँ राउर प्रयास वाकई में विविधता वाला बा.


5

فَاَمَّا مَنْ اَعْطٰى وَاتَّقٰىۙ

fa ammā man a‘ṭā wattaqā.

त जे (अल्लाह के राह में आपन धन) देके धर्मात्मा होखे,


6

وَصَدَّقَ بِالْحُسْنٰىۙ

wa ṣaddaqa bil-ḥusnā.

आ सबसे बढ़िया इनाम (जन्नत) के पुष्टि करेला,


7

فَسَنُيَسِّرُهٗ لِلْيُسْرٰىۗ

fa sanuyassiruhū lil-yusrā.

तब हमनी के ओकरा खातिर सहज (सुख) के रास्ता आसान बना देब जा,


8

وَاَمَّا مَنْۢ بَخِلَ وَاسْتَغْنٰىۙ

wa ammā man bakhila wastagnā.

आ रहल बात अइसन लोग के जे कंजूस बाड़े आ अपना के पर्याप्त महसूस करत बाड़े (भगवान के मदद के जरूरत नइखे),


9

وَكَذَّبَ بِالْحُسْنٰىۙ

wa każżaba bil-ḥusnā.

आ बेहतरीन (इनाम) से इनकार करेला,


10

فَسَنُيَسِّرُهٗ لِلْعُسْرٰىۗ

fa sanuyassiruhū lil-‘usrā.

तब हमनी के ओकरा खातिर कठिनाई (संकट) के रास्ता आसान बना देब जा,


11

وَمَا يُغْنِيْ عَنْهُ مَالُهٗٓ اِذَا تَرَدّٰىٓۙ

wa mā yugnī ‘anhu māluhū iżā taraddā.

आ जब ऊ नाश हो गइल बा त ओकर धन ओकरा कवनो फायदा नइखे.


12

اِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدٰىۖ

inna ‘alainā lal-hudā.

सचमुच, हमनी के ही मार्गदर्शन देवेनी जा,


13

وَاِنَّ لَنَا لَلْاٰخِرَةَ وَالْاُوْلٰىۗ

wa inna lanā lal-ākhirata wal-ūlā.

आ साँचहू, परलोक आ दुनिया हमनी के ह।


14

فَاَنْذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظّٰىۚ

fa anżartukum nāran talaẓẓā.

त हम तोहरा के जरत आग के बारे में चेतावत बानी,


15

لَا يَصْلٰىهَآ اِلَّا الْاَشْقَىۙ

lā yaṣlāhā illal-asyqā.

जवना में खाली सबसे दरिद्र लोग प्रवेश करेला,


16

الَّذِيْ كَذَّبَ وَتَوَلّٰىۗ

allażī każżaba wa tawallā.

जे (सत्य के) नकार देला आ (विश्वास से) मुँह मोड़ देला।


17

وَسَيُجَنَّبُهَا الْاَتْقَىۙ

wa sayujannabuhal-atqā.

आ ओकरा में से सबसे पुण्यात्मा के एकरा (नरक) से दूर राखल जाई,


18

الَّذِيْ يُؤْتِيْ مَالَهٗ يَتَزَكّٰىۚ

allażī yu'tī mālahū yatazakkā.

जे आपन धन (अल्लाह के राह में) (अपना के साफ करे) में खरच करेला,


19

وَمَا لِاَحَدٍ عِنْدَهٗ مِنْ نِّعْمَةٍ تُجْزٰىٓۙ

wa mā li'aḥadin ‘indahū min ni‘matin tujzā.

आ केहू ओकरा पर कवनो एहसान नइखे कइले जवना के ओकरा चुकावे के पड़ी.


20

اِلَّا ابْتِغَاۤءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْاَعْلٰىۚ

illabtigā'a wajhi rabbihil-a‘lā.

लेकिन (उ एकरा के खाली एह से देले रहले) काहे कि उ अपना परमात्मा परमेश्वर के प्रसन्नता के तलाश में रहले।


21

وَلَسَوْفَ يَرْضٰى ࣖ

wa lasaufa yarḍā.

आ निश्चित रूप से भविष्य में ओकरा (परफेक्ट) सुख मिली।