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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Sejarah Sejarah Di Madinah Peperangan Perang Badar Hasil perang Badar
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कुल आयत : 6
13
Q.S अली इमरान (3:13)

قَدْ كَانَ لَكُمْ اٰيَةٌ فِيْ فِئَتَيْنِ الْتَقَتَا ۗفِئَةٌ تُقَاتِلُ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَاُخْرٰى كَافِرَةٌ يَّرَوْنَهُمْ مِّثْلَيْهِمْ رَأْيَ الْعَيْنِ ۗوَاللّٰهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهٖ مَنْ يَّشَاۤءُ ۗ اِنَّ فِيْ ذٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّاُولِى الْاَبْصَارِ

qad kāna lakum āyatun fī fi'atainil taqatā, fi'atun tuqātilu fī sabīlillāhi wa ukhrā kāfiratuy yaraunahum miṡlaihim ra'yal-‘ain(i), wallāhu yu'ayyidu binaṣrihī may yasyā'(u), inna fī żālika la‘ibratal li'ulil-abṣār(i).

सचमुच, दुनू समूह मे एक दोसराक सामना करय मे अहाँक लेल एकटा संकेत भेटल अछि। एक समूह अल्लाह के रास्ता में लड़ैत अछि आ दोसर (समूह) काफिर के अपन आँखि स देखैत अछि जे ओ (मुस्लिम समूह) ओकरा स दुगुना मजबूत अछि। अल्लाह जेकरा चाहै छै ओकरा अपनऽ मदद स॑ मजबूत करै छै । सचमुच, एहि मे जे दृष्टि (हृदय के आँखि) रखैत छथि हुनका लेल एकटा पाठ अछि।


123
Q.S अली इमरान (3:123)

وَلَقَدْ نَصَرَكُمُ اللّٰهُ بِبَدْرٍ وَّاَنْتُمْ اَذِلَّةٌ ۚ فَاتَّقُوا اللّٰهَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

wa laqad naṣarakumullāhu bibadriw wa antum ażillah(tun), fattaqullāha la‘allakum tasykurūn(a).

आ सच मे अल्लाह बदर के लड़ाई मे अहाँक मदद केलनि, भले अहाँ कमजोर रही। तेँ अल्लाह सँ डरू, जाहि सँ अहाँ हुनकर आभारी रही।


165
Q.S अली इमरान (3:165)

اَوَلَمَّآ اَصَابَتْكُمْ مُّصِيْبَةٌ قَدْ اَصَبْتُمْ مِّثْلَيْهَاۙ قُلْتُمْ اَنّٰى هٰذَا ۗ قُلْ هُوَ مِنْ عِنْدِ اَنْفُسِكُمْ ۗ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ

awa lammā aṣābatkum muṣībatun qad aṣabtum miṡlaihā, qultum annā hāżā, qul huwa min ‘indi anfusikum, innallāha ‘alā kulli syai'in qadīr(un).

आ जखन कोनो विपत्ति (उहुद मे हार) अहाँ पर आबि जाइत अछि तखन अहाँ केँ आश्चर्य किएक होइत अछि, जखन कि अहाँ बदर मे अपन दुश्मन पर दू गुना बेसी विपत्ति पहुँचा देने छी? अहाँ कहैत छी, “ई (हार) कतय सँ आयल?” कहू, “ई अहाँ सभ सँ अछि।” सचमुच अल्लाह के सब चीज पर अधिकार छै।


8
Q.S अल-अनफल (8:8)

لِيُحِقَّ الْحَقَّ وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُوْنَۚ

liyuḥiqqal-ḥaqqa wa yubṭilal-bāṭila wa lau karihal-mujrimūn(a).

ताकि अल्लाह जे सही छै (इस्लाम) के मजबूत करतै आरू जे झूठ छै (शिर्क) ओकरा समाप्त करी दै छै भले ही पापी लोग (शरीक) के पसंद नै छै।


17
Q.S अल-अनफल (8:17)

فَلَمْ تَقْتُلُوْهُمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ قَتَلَهُمْۖ وَمَا رَمَيْتَ اِذْ رَمَيْتَ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ رَمٰىۚ وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِنِيْنَ مِنْهُ بَلَاۤءً حَسَنًاۗ اِنَّ اللّٰهَ سَمِيْعٌ عَلِيْمٌ

falam taqtulūhum wa lākinnallāha qatalahum, wa mā ramaita iż ramaita wa lākinallāha ramā, wa liyubliyal-mu'minīna minhu balā'an ḥasanā(n), innallāha samī‘un ‘alīm(un).

त (वास्तव में) अहाँ नै छलौं जे ओकरा सब के मारलौं, बल्कि अल्लाह छलौं जे ओकरा सब के मारलौं, आ अहाँ नै छलौं जे फेकला पर फेंकलौं, बल्कि अल्लाह छलौं जे फेंकलौं। (अल्लाह हुनका सब के नष्ट करय लेल ई काज केलनि) आ मुसलमान के जीत देबय लेल, नीक जीत के संग। सचमुच अल्लाह सर्वश्री, सर्वज्ञ छथि।


45
Q.S अल-कमर (54:45)

سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّوْنَ الدُّبُرَ

sayuhzamul-jam‘u wa yuwallūnad-dubur(a).

ओ समूह अवश्य पराजित होयत आ ओ सब पाछू हटि जायत।