وَلَمَّا بَرَزُوْا لِجَالُوْتَ وَجُنُوْدِهٖ قَالُوْا رَبَّنَآ اَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَّثَبِّتْ اَقْدَامَنَا وَانْصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكٰفِرِيْنَ ۗ
wa lammā barazū lijālūta wa junūdihī qālū rabbanā afrig ‘alainā ṣabraw wa ṡabbit aqdāmanā wanṣurnā ‘alal-qaumil-kāfirīn(a).
आ जखन ओ सब जलुत आ ओकर सेना के खिलाफ आगू बढ़ल त ओ सब प्रार्थना केलक, "हमर प्रभु, हमरा सब के धैर्य प्रदान करू, हमर सबहक डेग के मजबूत करू आ हमरा सब के काफिर के सामना करय में मदद करू।"
اِذْ هَمَّتْ طَّۤاىِٕفَتٰنِ مِنْكُمْ اَنْ تَفْشَلَاۙ وَاللّٰهُ وَلِيُّهُمَا ۗ وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُوْنَ
iż hammat-ṭā'ifatāni minkum an tafsyalā, wallāhu waliyyuhumā, wa ‘alallāhi falyatawakkalil-mu'minūn(a).
जखन अहाँ मे सँ दू टा समूह डर सँ हटय चाहैत छल, जखन कि अल्लाह हुनकर सहायक छलाह, तखन मुसलमान लोकनि केँ अल्लाह पर भरोसा राखय दियौक।
وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِاَعْدَاۤىِٕكُمْ ۗوَكَفٰى بِاللّٰهِ وَلِيًّا ۙوَّكَفٰى بِاللّٰهِ نَصِيْرًا
wallāhu a‘lamu bi'a‘dā'ikum, wa kafā billāhi waliyyaw wa kafā billāhi naṣīrā(n).
आ अल्लाह अहाँक दुश्मनक बारे मे बेसी नीक जकाँ जनैत छथि। अल्लाह रक्षक बनय लेल पर्याप्त छथि आ अल्लाह (अहाँक लेल) सहायक बनय लेल पर्याप्त छथि |
قَالَ رَجُلَانِ مِنَ الَّذِيْنَ يَخَافُوْنَ اَنْعَمَ اللّٰهُ عَلَيْهِمَا ادْخُلُوْا عَلَيْهِمُ الْبَابَۚ فَاِذَا دَخَلْتُمُوْهُ فَاِنَّكُمْ غٰلِبُوْنَ ەۙ وَعَلَى اللّٰهِ فَتَوَكَّلُوْٓا اِنْ كُنْتُمْ مُّؤْمِنِيْنَ
qāla rajulāni minal-lażīna yakhāfūna an‘amallāhu ‘alaihimadkhulū ‘alaihimul-bāb(a), fa iżā dakhaltumūhu fa innakum gālibūn(a), wa ‘alallāhi fa tawakkalū in kuntum mu'minīn(a).
धर्मपरायण लोक मे सँ दू गोटे कहलनि, जिनका अल्लाह केर अनुग्रह भेटल छलनि, "(देशक) फाटक सँ हुनका सभ पर हमला करू। जँ अहाँ ओहि मे प्रवेश करब त' अवश्य जीतब। आ असगर अल्लाह पर भरोसा राखू, जँ अहाँ मुसलमान छी।"
وَاِنْ يَّمْسَسْكَ اللّٰهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهٗٓ اِلَّا هُوَ ۗوَاِنْ يَّمْسَسْكَ بِخَيْرٍ فَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ
iy yamsaskallāhu biḍurrin falā kāsyifa lahū illā huw(a), wa iy yamsaska bikhairin fa huwa ‘alā kulli syai'in qadīr(un).
आरू अगर अल्लाह तोरा पर कोनो आपदा आबी जाय छै त॑ ओकरा छोड़ी क॑ कोय भी आपदा नै हटाय सकै छै । आ जँ ओ अहाँकेँ नीक अनैत छथि तँ हुनका सभ किछु पर अधिकार छनि ।
قُلْ اَرَءَيْتَكُمْ اِنْ اَتٰىكُمْ عَذَابُ اللّٰهِ اَوْ اَتَتْكُمُ السَّاعَةُ اَغَيْرَ اللّٰهِ تَدْعُوْنَۚ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ
qul ara'aitakum in atākum ‘ażābullāhi au atatkumus-sā‘atu agairallāhi tad‘ūn(a), in kuntum ṣādiqīn(a).
(मुहम्मद) कहू, "हमरा बुझा दियौ जे अल्लाह के सताब अहाँ तक पहुँचि गेल, या कयामत के दिन अहाँ तक पहुंच गेल, की अहाँ अल्लाह के अलावा अन्य (देवता) के पुकार करब, जँ अहाँ सच्चा छी!"
بَلْ اِيَّاهُ تَدْعُوْنَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُوْنَ اِلَيْهِ اِنْ شَاۤءَ وَتَنْسَوْنَ مَا تُشْرِكُوْنَ ࣖ
bal iyyāhu tad‘ūna fa yaksyifu mā tad‘ūna ilaihi in syā'a wa tansauna mā tusyrikūn(a).
(नहि), मात्र हुनका सँ अहाँ मददि माँगैत छी । जँ ओ चाहथि तँ ओ जे (खतरा) अहाँ हुनकासँ माँगैत छी से दूर कऽ देताह, आ अहाँ जे किछु (अल्लाहसँ) जोड़ैत छी से छोड़ि दैत छी ।
فَلَوْلَآ اِذْ جَاۤءَهُمْ بَأْسُنَا تَضَرَّعُوْا وَلٰكِنْ قَسَتْ قُلُوْبُهُمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطٰنُ مَا كَانُوْا يَعْمَلُوْنَ
falau lā iż jā'ahum ba'sunā taḍarra‘ū wa lākin qasat qulūbuhum wa zayyana lahumusy-syaiṭānu mā kānū ya‘malūn(a).
मुदा जखन हमरा सभक यातना हुनका सभ पर आबि गेल छल तखन ओ सभ नम्रताक संग (अल्लाह सँ) दुआ किएक नहि केलनि? असल मे हुनका लोकनिक हृदय कठोर भ' गेल छनि आ शैतान हुनका सभ केँ सदिखन जे काज करैत छथि से सुन्दर बुझाइत छनि।
اُدْعُوْا رَبَّكُمْ تَضَرُّعًا وَّخُفْيَةً ۗاِنَّهٗ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِيْنَۚ
ud‘ū rabbakum taḍarru‘aw wa khufūyah(tan), innahū lā yuḥibbul-mu‘tadīn(a).
विनम्र हृदय आ मृदु आवाज सँ अपन भगवान सँ प्रार्थना करू। सचमुच, सीमा के उल्लंघन करय वाला के हुनका पसिन्न नै छैन्ह।
قَالُوْٓا اِنَّآ اِلٰى رَبِّنَا مُنْقَلِبُوْنَۙ
qālū innā ilā rabbinā munqalibūn(a).
ओ सभ (जादूगर) उत्तर देलथिन, “सत्ते हम सभ अपन प्रभु लग घुरि जायब।
وَلَمَّا سُقِطَ فِيْٓ اَيْدِيْهِمْ وَرَاَوْا اَنَّهُمْ قَدْ ضَلُّوْاۙ قَالُوْا لَىِٕنْ لَّمْ يَرْحَمْنَا رَبُّنَا وَيَغْفِرْ لَنَا لَنَكُوْنَنَّ مِنَ الْخٰسِرِيْنَ
wa lammā suqiṭa fī aidīhim wa ra'au annahum qad ḍallū, qālū la'il lam yarḥamnā rabbunā wa yagfir lanā lanakūnanna minal-khāsirīn(a).
आ जखन हुनका लोकनि केँ अपन एहि काज पर पछतावा भेलनि आ बुझि गेलनि जे ओ सभ भटकल छथि तखन ओ सभ कहलनि, “जँ हमर प्रभु हमरा सभ पर दया नहि करताह आ हमरा सभ केँ क्षमा नहि करताह त’ हम सभ अवश्य हारि गेल लोक मे शामिल भ’ जायब।”
وَاخْتَارَ مُوْسٰى قَوْمَهٗ سَبْعِيْنَ رَجُلًا لِّمِيْقَاتِنَا ۚفَلَمَّآ اَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ قَالَ رَبِّ لَوْ شِئْتَ اَهْلَكْتَهُمْ مِّنْ قَبْلُ وَاِيَّايَۗ اَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ السُّفَهَاۤءُ مِنَّاۚ اِنْ هِيَ اِلَّا فِتْنَتُكَۗ تُضِلُّ بِهَا مَنْ تَشَاۤءُ وَتَهْدِيْ مَنْ تَشَاۤءُۗ اَنْتَ وَلِيُّنَا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَاَنْتَ خَيْرُ الْغٰفِرِيْنَ
wakhtāra mūsā qaumahū sab‘īna rajulal limīqātinā, falammā akhażathumur-rajfatu qāla rabbi lau syi'ta ahlaktahum min qablu wa iyyāy(a), atuhlikunā bimā fa‘alas-sufahā'u minnā, in hiya illā fitnatuk(a), tuḍillu bihā man tasyā'u wa tahdī man tasyā'(u), anta waliyyunā fagfir lanā warḥamnā wa anta khairul-gāfirīn(a).
आ मूसा अपन लोक मे सँ सत्तर लोक केँ चुनलनि जे (हमरा सभ सँ पश्चाताप माँगब) ओहि समय मे जखन हम सभ निर्धारित केने रही। जखन हुनका लोकनि केँ भूकम्प आबि गेलनि त' मूसा कहलनि, "हे हमर प्रभु, जँ अहाँ चाहैत रहितहुँ त' अहाँ एहि सँ पहिने हुनका सभ केँ आ हमरा सभ केँ नष्ट क' दैतहुँ। की अहाँ हमरा सभक बीच समझदारी'क अभाव मे रहनिहार सभक काजक कारणेँ हमरा सभ केँ नष्ट क' देब? से मात्र अहाँक दिस सँ एकटा परीक्षा अछि, अहाँ एहि परीक्षा सँ ओकरा गुमराह करैत छी जकरा अहाँ चाहब आ अहाँ जकरा मार्गदर्शन करब। अहाँ हमरा सभक नेता छी, तेँ हमरा सभ केँ क्षमा करू आ हमरा सभ पर दया करू। अहाँ सभ सँ नीक छी।" क्षमाकर्ता।"
۞ وَاكْتُبْ لَنَا فِيْ هٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةً وَّفِى الْاٰخِرَةِ اِنَّا هُدْنَآ اِلَيْكَۗ قَالَ عَذَابِيْٓ اُصِيْبُ بِهٖ مَنْ اَشَاۤءُۚ وَرَحْمَتِيْ وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍۗ فَسَاَكْتُبُهَا لِلَّذِيْنَ يَتَّقُوْنَ وَيُؤْتُوْنَ الزَّكٰوةَ وَالَّذِيْنَ هُمْ بِاٰيٰتِنَا يُؤْمِنُوْنَۚ
waktub lanā fī hāżihid-dun-yā ḥasanataw wa fil-ākhirati innā hudnā ilaik(a), qāla ‘ażābī uṣību bihī man asyā'(u), wa raḥmatī wasi‘at kulla syai'(in), fa sa'aktubuhā lil-lażīna yattaqūna wa yu'tūnaz-zakāta wal-lażīna hum bi'āyātinā yu'minūn(a).
आ हमरा सभक लेल एहि संसार आ परलोक मे भलाई निर्धारित करू। सचमुच, हम अहाँक पास वापस (पश्चाताप) करैत छी। (अल्लाह) कहैत छथि, "हम जकरा चाहब ओकरा पर अपन सजा देब आ हमर दया सब किछु केँ झाँपि दैत अछि। तेँ हम अपन दया ओहि लोक पर सौंपब जे धर्मात्मा छथि, जे जकात दैत छथि आ जे हमर आयत पर विश्वास करैत छथि।"
وَاِمَّا يَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطٰنِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ ۗاِنَّهٗ سَمِيْعٌ عَلِيْمٌ
wa immā yanzagannaka minasy-syaiṭāni nazgun fasta‘iż billāh(i), innahū samī‘un ‘alīm(un).
आ जँ शैतान अहाँ सभ केँ प्रलोभन देबय लेल आबय तऽ अल्लाह केर शरण मे रहू। सचमुच, ओ सर्वश्रवण, सर्वज्ञ छथि।
اِذْ يَقُوْلُ الْمُنٰفِقُوْنَ وَالَّذِيْنَ فِيْ قُلُوْبِهِمْ مَّرَضٌ غَرَّ هٰٓؤُلَاۤءِ دِيْنُهُمْۗ وَمَنْ يَّتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ فَاِنَّ اللّٰهَ عَزِيْزٌ حَكِيْمٌ
iż yaqūlul-munāfiqūna wal-lażīna fī qulūbihim maraḍun garra hā'ulā'i dīnuhum, wa may yatawakkal ‘alallāhi fa innallāha ‘azīzun ḥakīm(un).
(याद राखू), जखन पाखंडी आ जिनकर हृदय मे बीमारी छनि ओ कहैत छथि जे "ओ सभ (विश्वासी) अपन धर्म मे धोखा खा गेल छथि |" (अल्लाह कहैत छथि) "जे कियो अल्लाह पर भरोसा रखैत अछि, ओकरा ई जानि लिअ जे अल्लाह सर्वशक्तिमान, सर्वबुद्धिमान छथि।"
قُلْ لَّنْ يُّصِيْبَنَآ اِلَّا مَا كَتَبَ اللّٰهُ لَنَاۚ هُوَ مَوْلٰىنَا وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُوْنَ
qul lay yuṣībanā illā mā kataballāhu lanā, huwa maulānā wa ‘alallāhi falyatawakkalil-mu'minūn(a).
(मुहम्मद) कहू, "हमरा सब के सिवाय किछु नै होयत जे अल्लाह हमरा सब लेल निर्धारित केने छथि। ओ हमर सबहक रक्षक छथि, आ मुसलमान केवल अल्लाह पर भरोसा करैत छथि।"
وَلَوْ اَنَّهُمْ رَضُوْا مَآ اٰتٰىهُمُ اللّٰهُ وَرَسُوْلُهٗۙ وَقَالُوْا حَسْبُنَا اللّٰهُ سَيُؤْتِيْنَا اللّٰهُ مِنْ فَضْلِهٖ وَرَسُوْلُهٗٓ اِنَّآ اِلَى اللّٰهِ رٰغِبُوْنَ ࣖ
wa lau annahum raḍū mā ātāhumullāhu wa rasūluh(ū), wa qālū ḥasbunallāhu sayu'tīnallāhu min faḍlihī wa rasūluhū innā ilallāhi rāgibūn(a).
आरू अगर वू सचमुच में अल्लाह आरू ओकरऽ रसूलुल्लाह द्वारा ओकरा सिनी क॑ देलऽ गेलऽ चीजऽ स॑ प्रसन्न होय गेलऽ छेलै, आरू कहै छेलै कि "हमरा लेली अल्लाह काफी छै, त॑ अल्लाह आरू ओकरऽ रसूलुल्लाह हमरा सिनी क॑ अपनऽ कुछ इनाम देतै। सचमुच हम्में वू लोग छियै जे अल्लाह के आशा रखै छै।"
وَّعَلَى الثَّلٰثَةِ الَّذِيْنَ خُلِّفُوْاۗ حَتّٰٓى اِذَا ضَاقَتْ عَلَيْهِمُ الْاَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ وَضَاقَتْ عَلَيْهِمْ اَنْفُسُهُمْ وَظَنُّوْٓا اَنْ لَّا مَلْجَاَ مِنَ اللّٰهِ اِلَّآ اِلَيْهِۗ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ لِيَتُوْبُوْاۗ اِنَّ اللّٰهَ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيْمُ ࣖ
wa ‘alaṡ-ṡalāṡatil-lażīna khullifū, ḥattā iżā ḍāqat ‘alaihimul-arḍu bimā raḥubat wa ḍāqat ‘alaihim anfusuhum wa ẓannū allā malja'a minallāhi illā ilaih(i), ṡumma tāba ‘alaihim liyatūbū, innallāha huwat-tawwābur-raḥīm(u).
आ जे तीनू गोटे पाछू रहि गेल छलाह। जाबे तक धरती हुनका सब के लेल तंग नै बुझायल, भले ही ओ विशाल अछि, आ हुनकर आत्मा हुनका सब के लेल तंग भ गेल छल, आ हुनका सब के बुझायल जे अल्लाह के सिवाय हुनकर कोनो शरण नै छै, तखन तक अल्लाह हुनकर पश्चाताप के स्वीकार क लेलखिन ताकि ओ सब अपन पश्चाताप में बनल रहथि। सचमुच अल्लाह पश्चाताप के स्वीकार करय वाला, परम दयालु छैथ।
فَاِنْ تَوَلَّوْا فَقُلْ حَسْبِيَ اللّٰهُ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ ۗ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيْمِ ࣖ
fa in tawallau faqul ḥasbiyallāhu lā ilāha illā huw(a), ‘alaihi tawakkaltu wa huwa rabbul-‘arsyil-‘aẓīm(i).
त जँ ओ सभ (ईमान सँ) मुँह मोड़ि लैत छथि तँ (हे मुहम्मद) कहब जे "हमरा लेल अल्लाह पर्याप्त छथि; हुनका छोड़ि कोनो देवता नहि छथि। हम हुनका पर भरोसा करैत छी, आ ओ महान सिंहासनक स्वामी छथि।"
هُوَ الَّذِيْ يُسَيِّرُكُمْ فِى الْبَرِّ وَالْبَحْرِۗ حَتّٰٓى اِذَا كُنْتُمْ فِىْ الْفُلْكِۚ وَجَرَيْنَ بِهِمْ بِرِيْحٍ طَيِّبَةٍ وَّفَرِحُوْا بِهَا جَاۤءَتْهَا رِيْحٌ عَاصِفٌ وَّجَاۤءَهُمُ الْمَوْجُ مِنْ كُلِّ مَكَانٍ وَّظَنُّوْٓا اَنَّهُمْ اُحِيْطَ بِهِمْۙ دَعَوُا اللّٰهَ مُخْلِصِيْنَ لَهُ الدِّيْنَ ەۚ لَىِٕنْ اَنْجَيْتَنَا مِنْ هٰذِهٖ لَنَكُوْنَنَّ مِنَ الشّٰكِرِيْنَ
huwal-lażī yusayyirukum fil-barri wal-baḥr(i), ḥattā iżā kuntum fil-fulk(i), wa jaraina bihim birīḥin ṭayyibatiw wa fariḥū bihā jā'athā rīḥun ‘āṣifuw wa jā'ahumul-mauju min kulli makāniw wa ẓannū annahum uḥīṭa bihim, da‘awullāha mukhliṣīna lahud-dīn(a), la'in anjaitanā min hāżihī lanakūnanna minasy-syākirīn(a).
ओ परमेश् वर छथि जे अहाँ सभ केँ जमीन पर चलय मे, (आ समुद्र पर चलय मे) सक्षम बनौलनि। जाहि सं जखन अहाँ जहाज में छी, आ ओ (जहाज) नीक हवा बहैत ओकरा (ओहि में लोक कें) ल' क' सरकैत अछि, आ ओकर कारणेँ ओ सभ खुश भ' जाइत छथि; अचानक एकटा तूफान आबि गेलै आ चारू कात सँ लहरि ओकरा सभ पर आबि गेलैक, आ ओकरा सभ केँ लागल जे ओ सभ घेरल (खतरा) अछि, तेँ ओ सभ असगर अल्लाह सँ ईमानदारी सँ दुआ केलक। (कहैत) "जँ अहाँ हमरा सभ केँ एहि (खतरा) सँ बचा लेब तँ हम सभ अवश्य ओहि मे सँ रहब जे कृतज्ञ छथि |"
اِنِّيْ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللّٰهِ رَبِّيْ وَرَبِّكُمْ ۗمَا مِنْ دَاۤبَّةٍ اِلَّا هُوَ اٰخِذٌۢ بِنَاصِيَتِهَا ۗاِنَّ رَبِّيْ عَلٰى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيْمٍ
innī tawakkaltu ‘alallāhi rabbī wa rabbikum, mā min dābbatin illā huwa ākhiżum bināṣiyatihā, inna rabbī ‘alā ṣirāṭim mustaqīm(in).
सचमुच हम अपन भरोसा अल्लाह, हमर प्रभु आ अहाँक प्रभु पर रखने छी। एकोटा चलैत प्राणी के जीवन नै छै मुदा ओ छै जे फोरलॉक पकड़ै छै (ओकरा पर राज करै छै)। सचमुच, हमर प्रभु सोझ (न्याय्य) मार्ग पर छथि।
قَالَ لَوْ اَنَّ لِيْ بِكُمْ قُوَّةً اَوْ اٰوِيْٓ اِلٰى رُكْنٍ شَدِيْدٍ
qāla lau anna lī bikum quwwatan au āwī ilā ruknin syadīd(in).
ओ (लुत) कहलनि, "जँ हमरा मे ताकत रहैत (अहाँ केँ अस्वीकार करबाक) वा हम कोनो मजबूत परिवार मे शरण मे ल' सकितहुँ (ओना त' हम करितहुँ)."
وَلِلّٰهِ غَيْبُ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ وَاِلَيْهِ يُرْجَعُ الْاَمْرُ كُلُّهٗ فَاعْبُدْهُ وَتَوَكَّلْ عَلَيْهِۗ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُوْنَ ࣖ
wa lillāhi gaibus-samāwāti wal-arḍi wa ilaihi yurja‘ul-amru kulluhū fa‘budhu wa tawakkal ‘alaih(i), wa mā rabbuka bigāfilin ‘ammā ta‘malūn(a).
आरू आकाश आरू धरती केरऽ रहस्य अल्लाह केरऽ छै आरू सब काम हुनकऽ वापस होय जाय छै । तेँ हुनकर पूजा करू आ हुनका पर भरोसा राखू। आ अहाँक प्रभु अहाँ जे काज करैत छी ताहि सँ अनभिज्ञ नहि रहताह।
وَقَالَ يٰبَنِيَّ لَا تَدْخُلُوْا مِنْۢ بَابٍ وَّاحِدٍ وَّادْخُلُوْا مِنْ اَبْوَابٍ مُّتَفَرِّقَةٍۗ وَمَآ اُغْنِيْ عَنْكُمْ مِّنَ اللّٰهِ مِنْ شَيْءٍۗ اِنِ الْحُكْمُ اِلَّا لِلّٰهِ ۗعَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَعَلَيْهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُتَوَكِّلُوْنَ
wa qāla yā baniyya lā tadkhulū mim bābiw wāḥidiw wadkhulū min abwābim mutafarriqah(tin), wa mā ugnī ‘ankum minallāhi min syai'(in), inil-ḥukmu illā lillāh(i), ‘alaihi tawakkaltu wa ‘alaihi falyatawakkalil-mutawakkilūn(a).
आ ओ (याकूब) कहलनि, "हे हमर बच्चा सभ! एक फाटक सँ प्रवेश नहि करू, आ अलग-अलग फाटक सँ प्रवेश करू; तथापि, हम अहाँ सभक अल्लाह (नियति) सँ कनिको बचा नहि सकैत छी। ओ निर्णय मात्र अल्लाह लेल अछि। हम हुनका पर भरोसा करैत छी आ हुनका पर सेहो भरोसा करैत छी जे अपन भरोसा रखैत अछि।"
قَالَ اِنَّمَآ اَشْكُوْا بَثِّيْ وَحُزْنِيْٓ اِلَى اللّٰهِ وَاَعْلَمُ مِنَ اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُوْنَ
qāla innamā asykū baṡṡī wa ḥuznī ilallāhi wa a‘lamu minallāhi mā lā ta‘lamūn(a).
ओ (याकूब) कहलनि, “हम अपन परेशानी आ दुखक शिकायत मात्र अल्लाह सँ करैत छी, आ हम अल्लाह सँ ओ सब जनैत छी जे अहाँ नहि जनैत छी।
كَذٰلِكَ اَرْسَلْنٰكَ فِيْٓ اُمَّةٍ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهَآ اُمَمٌ لِّتَتْلُوَا۟ عَلَيْهِمُ الَّذِيْٓ اَوْحَيْنَآ اِلَيْكَ وَهُمْ يَكْفُرُوْنَ بِالرَّحْمٰنِۗ قُلْ هُوَ رَبِّيْ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَاِلَيْهِ مَتَابِ
każālika arsalnāka fī ummatin qad khalat min qablihā umamul litatluwa ‘alaihimul-lażī auḥainā ilaika wa hum yakfurūna bir-raḥmān(i), qul huwa rabbī lā ilāha illā huw(a), ‘alaihi tawakkaltu wa ilaihi matāb(i).
एहि तरहें, हम अहाँ (मुहम्मद) केँ एकटा एहन लोक लग पठेने छी, जाहि सँ कतेको लोकक निधन भ’ गेल अछि, जाहि सँ अहाँ हुनका (कुरान) पढ़ू जे हम अहाँ पर उतारने छी, भले ओ सभ परम दयालु परमात्मा पर अविश्वास करैत होथि। कहब, "ओ हमर प्रभु छथि, हुनका छोड़ि कोनो देवता नहि छथि; हम मात्र हुनका पर भरोसा करैत छी आ मात्र हुनका पर पश्चाताप करैत छी।"
وَمَا بِكُمْ مِّنْ نِّعْمَةٍ فَمِنَ اللّٰهِ ثُمَّ اِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فَاِلَيْهِ تَجْـَٔرُوْنَۚ
wa mā bikum min ni‘matin fa minallāhi ṡumma iżā massakumuḍ-ḍurru fa ilaihi taj'arūn(a).
आरू जे सब बरकत तोरा पर छै, वू अल्लाह के तरफ स॑ (आबै छै), तखनिये जब॑ तोरा विपत्ति स॑ पीड़ित होय जाय छै, त॑ ओकरा स॑ ही आप मदद माँगै छियै ।
وَاتْلُ مَآ اُوْحِيَ اِلَيْكَ مِنْ كِتَابِ رَبِّكَۗ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمٰتِهٖۗ وَلَنْ تَجِدَ مِنْ دُوْنِهٖ مُلْتَحَدًا
watlu mā ūḥiya ilaika min kitābi rabbik(a), lā mubaddila likalimātih(ī), wa lan tajida min dūnihī multaḥadā(n).
आ जे किछु अहाँ पर उतारल गेल छल से (मुहम्मद) पढ़ू, अर्थात अहाँक प्रभुक किताब (कुरान) । हुनकर वाक्य मे कोनो चीज नहि बदलि सकैत अछि। आ हुनका छोड़ि अहाँ शरण नहि पाबि सकब
وَاَعْتَزِلُكُمْ وَمَا تَدْعُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ وَاَدْعُوْا رَبِّيْۖ عَسٰٓى اَلَّآ اَكُوْنَ بِدُعَاۤءِ رَبِّيْ شَقِيًّا
wa a‘tazilukum wa mā tad‘ūna min dūnillāhi wa ad‘ū rabbī, ‘asā allā akūna bidu‘ā'i rabbī syaqiyyā(n).
आ हम अहाँ स आ अल्लाह के अलावा अहाँ सब जे पूजा करैत छी ताहि स दूरी बना लेब, आ हम अपन प्रभु स प्रार्थना करब, आशा अछि जे हम अपन प्रभु स प्रार्थना क निराश नहि होयब।”
قٰلَ رَبِّ احْكُمْ بِالْحَقِّۗ وَرَبُّنَا الرَّحْمٰنُ الْمُسْتَعَانُ عَلٰى مَا تَصِفُوْنَ ࣖ
qāla rabbiḥkum bil-ḥaqq(i), wa rabbunar-raḥmānul-musta‘ānu ‘alā mā taṣifūn(a).
ओ (मुहम्मद) कहलनि, "हे हमर प्रभु, निर्णय निष्पक्ष रूप सँ दियौक। आ हमर प्रभु परम दयालु छथि, जिनका सँ अहाँक हर बात मे हम सभ मददि माँगैत छी।"
قَالَ رَبِّ انْصُرْنِيْ بِمَا كَذَّبُوْنِ
qāla rabbinṣurnī bimā każżabūn(i).
ओ (नूह) प्रार्थना केलनि, “हे हमर प्रभु, हमर सहायता करू, कारण ओ सभ हमरा सँ झूठ बाजल।”
وَقُلْ رَّبِّ اَنْزِلْنِيْ مُنْزَلًا مُّبٰرَكًا وَّاَنْتَ خَيْرُ الْمُنْزِلِيْنَ
wa qur rabbi anzilnī munzalam mubārakaw wa anta khairul-munzilīn(a).
आ प्रार्थना करू, "हे हमर प्रभु, हमरा धन्य स्थान पर राखू, आ अहाँ दाता मे श्रेष्ठ छी।"
نُسَارِعُ لَهُمْ فِى الْخَيْرٰتِۗ بَلْ لَّا يَشْعُرُوْنَ
nusāri‘u lahum fil-khairāt(i), bal lā yasy‘urūn(a).
हम तुरंत हुनका सब के नीक चीज द दैत छी? (नहि), मुदा हुनका सभकेँ एकर बोध नहि होइत छनि।
قُلْ لِّمَنِ الْاَرْضُ وَمَنْ فِيْهَآ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُوْنَ
qul limanil-arḍu wa man fīhā in kuntum ta‘lamūn(a).
कहू (मुहम्मद), "पृथ्वी केकर छै, आरू ओकरा में जे कुछ छै, अगर तोरा पता छै?"
وَقَالَ الرَّسُوْلُ يٰرَبِّ اِنَّ قَوْمِى اتَّخَذُوْا هٰذَا الْقُرْاٰنَ مَهْجُوْرًا
wa qālar-rasūlu yā rabbi inna qaumittakhażū hāżal-qur'āna mahjūrā(n).
आ रसूलुल्लाह (मुहम्मद) कहलनि, "हे हमर प्रभु, सचमुच हमर लोक एहि कुरान केँ उपेक्षित क' देलक अछि।"
وَالَّذِيْنَ يَقُوْلُوْنَ رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَۖ اِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا ۖ
wal-lażīna yaqūlūna rabbanaṣrif ‘annā ‘ażāba jahannam(a), inna ‘ażābahā kāna garāmā(n).
आ जे कहैत छथि जे "हे हमर प्रभु, हमरा सभ सँ नरकक यातना दूर करू, कारण वास्तव मे एकर यातना अनन्त विनाश आनत।"
قَالَ رَبِّ اِنِّيْٓ اَخَافُ اَنْ يُّكَذِّبُوْنِ ۗ
qāla rabbi innī akhāfu ay yukażżibūn(i).
ओ (मूसा) कहलनि, “हे हमर प्रभु, हमरा डर अछि जे ओ सभ हमरा संग झूठ बाजत।
قَالَ كَلَّا ۗاِنَّ مَعِيَ رَبِّيْ سَيَهْدِيْنِ
qāla kallā, inna ma‘iya rabbī sayahdīn(i).
ओ (मूसा) उत्तर देलथिन, "हमरा कहियो (हमरा नहि पकड़ल जायत); सचमुच हमर प्रभु हमरा संग छथि, ओ हमरा मार्गदर्शन करताह।"
قَالَ رَبِّ اِنَّ قَوْمِيْ كَذَّبُوْنِۖ
qāla rabbi inna qaumī każżabūn(i).
ओ (नूह) कहलनि, “हे हमर प्रभु, सचमुच हमर लोक हमरा सँ झूठ बाजल अछि;
اَمَّنْ يُّجِيْبُ الْمُضْطَرَّ اِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ السُّوْۤءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَاۤءَ الْاَرْضِۗ ءَاِلٰهٌ مَّعَ اللّٰهِ ۗقَلِيْلًا مَّا تَذَكَّرُوْنَۗ
am may yujībul-muḍṭarra iżā da‘āhu wa yaksyifus-sū'a wa yaj‘alukum khulafā'a fil-arḍ(i), a'ilāhum ma‘allāh(i), qalīlam mā tażakkarūn(a).
की ओ (अल्लाह) नहि छथि जे हुनका सँ प्रार्थना करबा काल मुसीबत मे पड़ल लोक केँ (दुआ) स्वीकार करैत छथि, आ संकट केँ दूर करैत छथि आ अहाँ केँ (मनुष्य केँ) धरती पर खलीफा (नेता) बना दैत छथि? की अल्लाह के अलावा (कोनो अन्य) भगवान छैथ? अहाँ केँ (अल्लाह केर एहसान) बहुत कम मोन पड़ैत अछि।
فَخَرَجَ مِنْهَا خَاۤىِٕفًا يَّتَرَقَّبُ ۖقَالَ رَبِّ نَجِّنِيْ مِنَ الْقَوْمِ الظّٰلِمِيْنَ ࣖ
fakharaja minhā khā'ifay yataraqqab(u), qāla rabbi najjinī minal-qaumiẓ-ẓālimīn(a).
अस्तु, ओ (मूसा) डरैत-डरैत शहर सँ बाहर निकललाह, सतर्क (जँ कियो ओकरा पार क' गेल वा पकड़ि लेलक त'), ओ प्रार्थना केलनि, "हे हमर प्रभु, हमरा अन्यायी लोक सभ सँ बचाउ।"
وَلَمَّا تَوَجَّهَ تِلْقَاۤءَ مَدْيَنَ قَالَ عَسٰى رَبِّيْٓ اَنْ يَّهْدِيَنِيْ سَوَاۤءَ السَّبِيْلِ
wa lammā tawajjaha tilqā'a madyana qāla ‘asā rabbī ay yahdiyanī sawā'as-sabīl(i).
आ जखन ओ मदयन भूमि दिस बढ़लाह तखन फेर प्रार्थना केलनि, "हमर भगवान हमरा सही बाट पर ल' जाथि |"
فَسَقٰى لَهُمَا ثُمَّ تَوَلّٰىٓ اِلَى الظِّلِّ فَقَالَ رَبِّ اِنِّيْ لِمَآ اَنْزَلْتَ اِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيْرٌ
fasaqā lahumā ṡumma tawallā ilaẓ-ẓilli faqāla rabbi innī limā anzalta ilayya min khairin faqīr(un).
अस्तु, ओ (मूसा) दुनू स्त्री (मवेशी) केँ पानि देलनि, तखन ओ एकटा छायादार जगह पर वापस आबि प्रार्थना केलनि, "हे हमर प्रभु, हमरा सचमुच किछु नीक (भोजन) चाही जे अहाँ हमरा लग पठौने छी।"
قَالَ رَبِّ اِنِّيْ قَتَلْتُ مِنْهُمْ نَفْسًا فَاَخَافُ اَنْ يَّقْتُلُوْنِ
qāla rabbi innī qataltu minhum nafsan fa'akhāfu ay yaqtulūn(i).
ओ (मूसा) कहलनि, “हे हमर प्रभु, हम सचमुच हुनकर समूहक ककरो मारि देने छी, तेँ हमरा डर अछि जे ओ हमरा मारि देत।
قَالَ رَبِّ انْصُرْنِيْ عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِيْنَ ࣖ
qāla rabbinṣurnī ‘alal-qaumil-mufsidīn(a).
ओ (लुत) प्रार्थना केलनि, "हे हमर प्रभु, हमरा (दण्ड द' क') ओहि समूह पर मदद करू जे नुकसान पहुँचेलक।"
وَاِذَا مَسَّ النَّاسَ ضُرٌّ دَعَوْا رَبَّهُمْ مُّنِيْبِيْنَ اِلَيْهِ ثُمَّ اِذَآ اَذَاقَهُمْ مِّنْهُ رَحْمَةً اِذَا فَرِيْقٌ مِّنْهُمْ بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُوْنَۙ
wa iżā massan-nāsa ḍurrun da‘au rabbahum munībīna ilaihi ṡumma iżā ażāqahum minhu raḥmatan iżā farīqum minhum birabbihim yusyrikūn(a).
आरू जब॑ लोगऽ क॑ कोनो खतरा स॑ ग्रस्त होय जाय छै त॑ वू अपनऽ रब क॑ हुनका पास वापस (पश्चाताप) करै के आह्वान करै छै, तखनिये जब॑ वू ओकरा अपनऽ कनी-मनी कृपा दै छै त॑ अचानक ओकरा म॑ स॑ कुछ लोग अल्लाह के साथ साथी करी दै छै ।
وَّتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ ۗوَكَفٰى بِاللّٰهِ وَكِيْلًا
wa tawakkal ‘alallāh(i), wa kafā billāhi wakīlā(n).
आ अल्लाह पर भरोसा राखू। आ अल्लाह रक्षक के रूप में पर्याप्त छथि।
لِّيَسْـَٔلَ الصّٰدِقِيْنَ عَنْ صِدْقِهِمْ ۚوَاَعَدَّ لِلْكٰفِرِيْنَ عَذَابًا اَلِيْمًا ࣖ
liyas'alaṣ-ṣādiqīna ‘an ṣidqihim, wa a‘adda lil-kāfirīna ‘ażāban alīmā(n).
जाहि सँ ओ धर्मी लोकनि सँ हुनकर धार्मिकताक विषय मे पूछथि। ओ काफिर के लेल एकटा कष्टदायक सजा के प्रावधान करैत छथि |
وَاِنِّيْ عُذْتُ بِرَبِّيْ وَرَبِّكُمْ اَنْ تَرْجُمُوْنِۚ
wa innī ‘użtu birabbī wa rabbikum an tarjumūn(i).
आ सच मे हम अपन प्रभु आ अहाँक प्रभु मे शरण लैत छी, अहाँक धमकी सँ जे हमरा पाथर मारब।
فَفِرُّوْٓا اِلَى اللّٰهِ ۗاِنِّيْ لَكُمْ مِّنْهُ نَذِيْرٌ مُّبِيْنٌۚ
fa firrū ilallāh(i), innī lakum minhu nażīrum mubīn(un).
अतः जल्दबाजी में अल्लाह के पास (आज्ञा मानना) वापस आ जाओ। सचमुच हम अल्लाह के तरफ स अहाँ के लेल एकटा स्पष्ट चेतावनी देबय वाला छी।