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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Al-Qur'an Mukjizat Al-Qur'an Tantangan Al-Qur'an

आयत खोज परिणाम :
कुल आयत : 36
1
Q.S अल-बकराह के ह (2:1)

الۤمّۤ ۚ

alif lām mīm.

अलिफ लम मिम के ह


23
Q.S अल-बकराह के ह (2:23)

وَاِنْ كُنْتُمْ فِيْ رَيْبٍ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلٰى عَبْدِنَا فَأْتُوْا بِسُوْرَةٍ مِّنْ مِّثْلِهٖ ۖ وَادْعُوْا شُهَدَاۤءَكُمْ مِّنْ دُوْنِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

wa in kuntum fī raibim mimmā nazzalnā ‘alā ‘abdinā fa'tū bisūratim mim miṡlih(ī), wad‘ū syuhadā'akum min dūnillāhi in kuntum ṣādiqīn(a).

आ अगर रउरा (कुरान) पर शक बा कि हमनी के अपना सेवक (मुहम्मद) के लगे उतरले बानी जा, त ओकरा जइसन सूरा बनाईं आ अल्लाह के अलावा अपना मददगार के बोलाईं, अगर रउरा सच्चा बानी।


1
Q.S अली इमरान के ह (3:1)

الۤمّۤ

alif lām mīm.

अलिफ लम मिम के ह।


1
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:1)

الۤمّۤصۤ ۚ

alif lām mīm ṣād.

अलिफ लम मिम शाद के बा।


1
Q.S योना के ह (10:1)

الۤرٰ ۗتِلْكَ اٰيٰتُ الْكِتٰبِ الْحَكِيْمِ

alif lām rā, tilka āyātul-kitābil-ḥakīm(i).

अलिफ लम रा के बा। इहे कुरान के आयत ह जवन बुद्धि से भरल बा।


38
Q.S योना के ह (10:38)

اَمْ يَقُوْلُوْنَ افْتَرٰىهُ ۗ قُلْ فَأْتُوْا بِسُوْرَةٍ مِّثْلِهٖ وَادْعُوْا مَنِ اسْتَطَعْتُمْ مِّنْ دُوْنِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

am yaqūlūnaftarāh(u), qul fa'tū bisūratim miṡlihī wad‘ū manistaṭa‘tum min dūnillāhi in kuntum ṣādiqīn(a).

का उ लोग के इ कहल ठीक बा कि उहे (मुहम्मद) एकर आविष्कार कईले बाड़े? कहऽ कि, “एह (कुरान) जइसन एगो अध्याय पैदा करीं, आ अपना में से केहू के भी बोलाईं जे अल्लाह के अलावा सक्षम होखे, अगर रउआ सच्चा बानी।”


1
Q.S ओढ़नी (11:1)

الۤرٰ ۗ كِتٰبٌ اُحْكِمَتْ اٰيٰتُهٗ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِنْ لَّدُنْ حَكِيْمٍ خَبِيْرٍۙ

alif lām rā, kitābun uḥkimat āyātuhū ṡumma fuṣṣilat mil ladun ḥakīmin khabīr(in).

अलिफ लम रा के बा। (ई) एगो अइसन किताब ह जवना के आयत के सलीका से व्यवस्थित कइल गइल बा आ ओकरा बाद विस्तार से समझावल गइल बा, (जवन प्रकट भइल बा) (अल्लाह) परम ज्ञानी, परम गहन,


13
Q.S ओढ़नी (11:13)

اَمْ يَقُوْلُوْنَ افْتَرٰىهُ ۗقُلْ فَأْتُوْا بِعَشْرِ سُوَرٍ مِّثْلِهٖ مُفْتَرَيٰتٍ وَّادْعُوْا مَنِ اسْتَطَعْتُمْ مِّنْ دُوْنِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

am yaqūlūnaftarāh(u), qul fa'tū bi‘asyri suwarim miṡlihī muftarayātiw wad‘ū manistaṭa‘tum min dūnillāhi in kuntum ṣādiqīn(a).

इहाँ तक कि उ लोग कहले कि, उ (मुहम्मद) कुरान बनवले बाड़े। कह दीं कि "(तब) एकरा जइसन दस सूर (कुरान) ले आईं जवन बनावल गइल बा, आ अपना में से केहू के भी आमंत्रित करीं जे अल्लाह के अलावा सक्षम होखे, अगर रउरा सच्चा लोग हईं."


1
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:1)

الۤرٰ ۗ تِلْكَ اٰيٰتُ الْكِتٰبِ الْمُبِيْنِۗ

alif lām rā, tilka āyātul-kitābil-mubīn(i).

अलिफ लम रा के बा। इ किताब (अल कुरान) के साफ आयत ह।


1
Q.S अर-रा'द के बा (13:1)

الۤمّۤرٰۗ تِلْكَ اٰيٰتُ الْكِتٰبِۗ وَالَّذِيْٓ اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَّبِّكَ الْحَقُّ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُوْنَ

alif lām mīm rā, tilka āyātul-kitāb(i), wal-lażī unzila ilaika mir rabbikal-ḥaqqu wa lākinna akṡaran-nāsi lā yu'minūn(a).

अलिफ लम मिम रा के बा। इहे किताब (अल-कुरान) के आयत ह। आ (किताब) जवन रउरा (मुहम्मद) पर रउरा रब से उतरल बा, ऊ साँच ह; बाकिर अधिकतर लोग (उनुका पर) विश्वास ना करेला.


1
Q.S इब्राहिम के ह (14:1)

الۤرٰ ۗ كِتٰبٌ اَنْزَلْنٰهُ اِلَيْكَ لِتُخْرِجَ النَّاسَ مِنَ الظُّلُمٰتِ اِلَى النُّوْرِ ەۙ بِاِذْنِ رَبِّهِمْ اِلٰى صِرَاطِ الْعَزِيْزِ الْحَمِيْدِۙ

alif lām rā, kitābun anzalnāhu ilaika litukhrijan-nāsa minaẓ-ẓulumāti ilan-nūr(i), bi'iżni rabbihim ilā ṣirāṭil-‘azīzil-ḥamīd(i).

अलिफ लम रा के बा। (ई) उ किताब ह जवन हमनी के रउआ (मुहम्मद) के पास भेजले बानी जा ताकि रउआ भगवान के अनुमति से लोग के अन्हार से बाहर निकाल के तेज रोशनी में ले आ सकेनी, (अर्थात) भगवान, सर्वशक्तिमान, परम प्रशंसनीय के रास्ता के ओर।


1
Q.S अल-हिजर के ह (15:1)

الۤرٰ ۗتِلْكَ اٰيٰتُ الْكِتٰبِ وَقُرْاٰنٍ مُّبِيْنٍ ۔

alif lām rā, tilka āyātul-kitābi wa qur'ānim mubīn(in).

अलिफ लम रा के बा। (ई सूरह) (कुछ) (बिल्कुल) किताब के आयत ह, यानी कि कुरान के (आयत) जवन सफाई देवेला।


88
Q.S अल-इसरा के ह (17:88)

قُلْ لَّىِٕنِ اجْتَمَعَتِ الْاِنْسُ وَالْجِنُّ عَلٰٓى اَنْ يَّأْتُوْا بِمِثْلِ هٰذَا الْقُرْاٰنِ لَا يَأْتُوْنَ بِمِثْلِهٖ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيْرًا

qul la'inijtama‘atil-insu wal-jinnu ‘alā ay ya'tū bimiṡli hāżal-qur'āni lā ya'tūna bimiṡlihī wa lau kāna ba‘ḍuhum liba‘ḍin ẓahīrā(n).

कह दीं कि "साचहूँ अगर इंसान आ जिन्न एकजुट होके एह कुरान से मिलत जुलत कुछ (जइसन) बना लेत त ऊ लोग अइसन कुछ ना बना पाईत, भलही ऊ लोग एक दोसरा के मदद करित."


1
Q.S मरियम के ह (19:1)

كۤهٰيٰعۤصۤ ۚ

kāf hā yā ‘aīn ṣād.

काफ ह या 'ऐन शाद


1
Q.S ता-हा के बा (20:1)

طٰهٰ ۚ

Ṭāhā.

थाहा


1
Q.S ऐश-शु'आरा के बा (26:1)

طٰسۤمّۤ

Ṭā sīm mīm.

था सिन मिम के बा


49
Q.S अल-कासास के ह (28:49)

قُلْ فَأْتُوْا بِكِتٰبٍ مِّنْ عِنْدِ اللّٰهِ هُوَ اَهْدٰى مِنْهُمَآ اَتَّبِعْهُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

qul fa'tū bikitābim min ‘indillāhi huwa ahdā minhumā attabi‘hu in kuntum ṣādiqīn(a).

कह (मुहम्मद) "अल्लाह के ओर से एगो किताब लेके आईं जवन दुनो (तोराह अवुरी कुरान) से जादे मार्गदर्शन करे, हम ओकर पालन करब, अगर आप सच्चा आदमी बानी।"


1
Q.S लुकमान के ह (31:1)

الۤمّۤ ۗ

alif lām mīm.

अलिफ लम मिम के ह।


11
Q.S लुकमान के ह (31:11)

هٰذَا خَلْقُ اللّٰهِ فَاَرُوْنِيْ مَاذَا خَلَقَ الَّذِيْنَ مِنْ دُوْنِهٖۗ بَلِ الظّٰلِمُوْنَ فِيْ ضَلٰلٍ مُّبِيْنٍ ࣖ

hāżā khalqullāhi fa arūnī māżā khalaqal-lażīna min dūnih(ī), baliẓ-ẓālimūna fī ḍalālim mubīn(in).

इ अल्लाह के रचना ह, त हमरा के देखाईं कि अल्लाह के अलावा (रउरा इबादत) के ओर से का बनावल गईल बा। दरअसल गलत करे वाला लोग के साफ गलती बा।


1
Q.S अस-सजदाह के बा (32:1)

الۤمّۤ ۗ

alif lām mīm.

अलिफ लम मिम के ह।


1
Q.S या-सिन के बा (36:1)

يٰسۤ ۚ

yā sīn.

यासीन


157
Q.S अस-सफ्त के ह (37:157)

فَأْتُوْا بِكِتٰبِكُمْ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

fa'tū bikitābikum in kuntum ṣādiqīn(a).

(तब) अगर रउरा सच्चा बानी त आपन किताब ले आईं।


1
Q.S दुखद बा (38:1)

صۤ ۗوَالْقُرْاٰنِ ذِى الذِّكْرِۗ

Ṣād, wal-qur'āni żiż-żikr(i).

शाद, कुरान के द्वारा जवना में चेतावनी बा।


1
Q.S फुसिलाट के बा (41:1)

حٰمۤ ۚ

Ḥā mīm.

हामिम


1
Q.S ऐश-शूरा के बा (42:1)

حٰمۤ ۚ

Ḥā mīm.

हामिम


2
Q.S ऐश-शूरा के बा (42:2)

عۤسۤقۤ ۗ

‘ain sīn qāf.

ऐनसिनकफ


1
Q.S अज-जुखरूफ के ह (43:1)

حٰمۤ ۚ

Ḥā mīm.

हामिम


1
Q.S अद-दुखान के ह (44:1)

حٰمۤ ۚ

Ḥā mīm.

हामिम


1
Q.S अल-जथियाह के ह (45:1)

حٰمۤ ۚ

Ḥā mīm.

हामिम


1
Q.S अल-अहकाफ के ह (46:1)

حٰمۤ ۚ

Ḥā mīm.

हामिम


4
Q.S अल-अहकाफ के ह (46:4)

قُلْ اَرَءَيْتُمْ مَّا تَدْعُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ اَرُوْنِيْ مَاذَا خَلَقُوْا مِنَ الْاَرْضِ اَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِى السَّمٰوٰتِ ۖائْتُوْنِيْ بِكِتٰبٍ مِّنْ قَبْلِ هٰذَآ اَوْ اَثٰرَةٍ مِّنْ عِلْمٍ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

qul ara'aitum mā tad‘ūna min dūnillāhi arūnī māżā khalaqū minal-arḍi am lahum syirkun fis-samāwāt(i), i'tūnī bikitābim min qabli hāżā au aṡāratim min ‘ilmin in kuntum ṣādiqīn(a).

(मुहम्मद) कहऽ, "अल्लाह के अलावा रउआ का इबादत करेनी, ओकरा बारे में (हमरा के) समझाईं; हमरा के देखाईं कि उ लोग धरती से का बनवले बा या उ लोग आकाश के (सृष्टि) में भाग लेले बा कि ना? हमरा खातिर उ किताब ले आईं जवन एकरा से पहिले रहे (कुरान) या (पुरान लोग के) ज्ञान के अवशेष, अगर रउआ सच्चा बानी।"


34
Q.S एट-टूर के बा (52:34)

فَلْيَأْتُوْا بِحَدِيْثٍ مِّثْلِهٖٓ اِنْ كَانُوْا صٰدِقِيْنَۗ

falya'tū biḥadīṡim miṡlihī in kānū ṣādiqīn(a).

त अगर उ लोग सच्चा होखे त ओकरा जइसन कुछ (कुरान) पैदा करे दीं।


37
Q.S एट-टूर के बा (52:37)

اَمْ عِنْدَهُمْ خَزَاۤىِٕنُ رَبِّكَ اَمْ هُمُ الْمُصَۣيْطِرُوْنَۗ

am ‘indahum khazā'inu rabbika am humul-musaiṭirūn(a).

भा ओह लोग के बगल में राउर प्रभु के खजाना बा कि ऊ लोग सत्ता में बा?


38
Q.S एट-टूर के बा (52:38)

اَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَّسْتَمِعُوْنَ فِيْهِۚ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُمْ بِسُلْطٰنٍ مُّبِيْنٍۗ

am lahum sullamuy yastami‘ūna fīh(i), falya'ti mustami‘uhum bisulṭānim mubīn(in).

भा ओह लोग के लगे (अदृश्य) सुने खातिर सीढ़ी (स्वर्ग) बा? तब ओह लोग के बीच सुने वाला लोग साफ प्रमाण लेके आवे।


1
Q.S अल-कलाम के ह (68:1)

نۤ ۚوَالْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُوْنَۙ

nūn, wal-qalami wa mā yasṭurūn(a).

नुन्ननन। कलम से आ जवन लिखेला ओकरा से,