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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Kisah-kisah dan perumpamaan dalam Al Qur'an Kisah-kisah Al Qur'an Kisah penciptaan manusia Sifat manusia Manusia keras kepala

आयत खोज परिणाम :
कुल आयत : 54
143
Q.S अल-अन'अम के ह (6:143)

ثَمٰنِيَةَ اَزْوَاجٍۚ مِنَ الضَّأْنِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْمَعْزِ اثْنَيْنِۗ قُلْ ءٰۤالذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ اَمِ الْاُنْثَيَيْنِ اَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ اَرْحَامُ الْاُنْثَيَيْنِۗ نَبِّـُٔوْنِيْ بِعِلْمٍ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

Ṡamāniya azwāj(in), minaḍ-ḍa'niṡnaini wa minal-ma‘ziṡnain(i), qul āżżakaraini ḥarrama amil-unṡayaini ammasytamalat ‘alaihi arḥāmul-unṡayain(i), nabbi'ūnī bi‘ilmin in kuntum ṣādiqīn(a).

जोड़ी में आठ गो खेत के जानवर बाड़ें (चार जोड़ी); एक जोड़ी भेड़ आ एगो जोड़ी बकरी। कह दीं कि, "अल्लाह के ओर से दुगो नर चाहे दु महिला के बीच का मना कईल गईल बा चाहे दुनो मादा के गर्भ में का बा? हमरा के ज्ञान के आधार प समझाईं, जदी आप सच्चा बानी।"


71
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:71)

قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُمْ مِّنْ رَّبِّكُمْ رِجْسٌ وَّغَضَبٌۗ اَتُجَادِلُوْنَنِيْ فِيْٓ اَسْمَاۤءٍ سَمَّيْتُمُوْهَآ اَنْتُمْ وَاٰبَاۤؤُكُمْ مَّا نَزَّلَ اللّٰهُ بِهَا مِنْ سُلْطٰنٍۗ فَانْتَظِرُوْٓا اِنِّيْ مَعَكُمْ مِّنَ الْمُنْتَظِرِيْنَ

qāla qad waqa‘a ‘alaikum mir rabbikum rijsuw wa gaḍab(un), atujādilūnanī fī asmā'in sammaitumūhā antum wa ābā'ukum mā nazzalallāhu bihā min sulṭān(in), fantaẓirū innī ma‘akum minal-muntaẓirīn(a).

उ (हुद) जवाब देले, "वास्तव में भगवान के ओर से नफरत अवुरी क्रोध आपके प आई। का आप हमरा से ओ नाम (मूर्ति) प बहस कईल चाहतानी, जवन कि आप अवुरी आपके पुरखा खुद बनवले बाड़े, भले ही अल्लाह ओकरा खाती जानकारी नईखन बतवले? जदी अयीसन बा त इंतजार करीं! सचमुच हमहूँ आपके संगे बानी, जवन कि इंतजार करतारे।"


6
Q.S अल-अनफल के ह (8:6)

يُجَادِلُوْنَكَ فِى الْحَقِّ بَعْدَمَا تَبَيَّنَ كَاَنَّمَا يُسَاقُوْنَ اِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنْظُرُوْنَ ۗ

yujādilūnaka fil-ḥaqqi ba‘da mā tabayyana ka'annamā yusāqūna ilal-mauti wa hum yanẓurūn(a).

उ लोग सच्चाई के साफ होखला के बाद (कि उ लोग जीत जईहे) के बारे में आपके (मुहम्मद) से विवाद करेले, जईसे कि उ लोग (मौत के कारण के देखत) देखत मौत के ओर धकेलल जात होखे।


15
Q.S योना के ह (10:15)

وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنٰتٍۙ قَالَ الَّذِيْنَ لَا يَرْجُوْنَ لِقَاۤءَنَا ائْتِ بِقُرْاٰنٍ غَيْرِ هٰذَآ اَوْ بَدِّلْهُ ۗ قُلْ مَا يَكُوْنُ لِيْٓ اَنْ اُبَدِّلَهٗ مِنْ تِلْقَاۤئِ نَفْسِيْ ۚاِنْ اَتَّبِعُ اِلَّا مَا يُوْحٰٓى اِلَيَّ ۚ اِنِّيْٓ اَخَافُ اِنْ عَصَيْتُ رَبِّيْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيْمٍ

wa iżā tutlā ‘alaihim āyātunā bayyināt(in), qālal-lażīna lā yarjūna liqā'ana'ti biqur'ānin gairi hāżā au baddilh(u), qul mā yakūnu lī an ubaddilahū min tilqā'i nafsī, in attabi‘u illā mā yūḥā ilayy(a), innī akhāfu in ‘aṣaitu rabbī ‘ażāba yaumin ‘aẓīm(in).

आ जब हमनी के आयत ओह लोग के साफ-साफ पढ़ल गइल त जे लोग हमनी से मिले के उमेद ना करत रहे ऊ लोग कहल कि "एह कुरान के अलावा कवनो किताब ले आईं भा ओकरा जगहा बदल दीं." कह (मुहम्मद) "हमरा खातिर एकरा के अपना मर्जी से बदलल उचित नइखे। हम तबे पालन करेनी जवन हमरा पर उतारल गइल बा। हम सही मायने में बड़ दिन (कयामत) के सजा से डेरात बानी अगर हम अपना रब के आज्ञा ना मानेनी।"


8
Q.S ओढ़नी (11:8)

وَلَىِٕنْ اَخَّرْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ اِلٰٓى اُمَّةٍ مَّعْدُوْدَةٍ لَّيَقُوْلُنَّ مَا يَحْبِسُهٗ ۗ اَلَا يَوْمَ يَأْتِيْهِمْ لَيْسَ مَصْرُوْفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِمْ مَّا كَانُوْا بِهٖ يَسْتَهْزِءُوْنَ ࣖ

wa la'in akhkharnā ‘anhumul-‘ażāba ilā ummatim ma‘dūdatil layaqūlunna mā yaḥbisuh(ū), alā yauma ya'tīhim laisa maṣrūfan ‘anhum wa ḥāqa bihim mā kānū bihī yastahzi'ūn(a).

आ साँचहू अगर हमनी का ओह लोग पर होखे वाला यातना के तय समय ले टार देत रहीं जा त ऊ लोग कहत रहुवे कि "का रोकत बा?" जान लीं कि जब सजा ओह लोग पर आवेला त ओकरा से ओह लोग से ना बचल जा सके. इनका चारो ओर (अदजब) बा जवना के मजाक उड़ावत रहले।


32
Q.S ओढ़नी (11:32)

قَالُوْا يٰنُوْحُ قَدْ جَادَلْتَنَا فَاَ كْثَرْتَ جِدَالَنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصّٰدِقِيْنَ

qālū yā nūḥu qad jādaltanā fa akṡarta jidālanā fa'tinā bimā ta‘idunā in kunta minaṣ-ṣādiqīn(a).

ऊ लोग कहल, "हे नुह! साँचहू, तू हमनी से बहस कइले बाड़ू, आ हमनी का खिलाफ आपन तर्क लमहर कर दिहले बाड़ू, एहसे हमनी पर ऊ सजा ले आवऽ जवना के तू धमकी देले रहलू, अगर तू सच्चा लोग में से बाड़ू."


15
Q.S इब्राहिम के ह (14:15)

وَاسْتَفْتَحُوْا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيْدٍۙ

wastaftaḥū wa khāba kullu jabbārin ‘anīd(in).

आ मनमाना आ जिद्द करे वाला सब लोग के जीत आ नाश के मांग कइले।


4
Q.S एन-नहल के बा (16:4)

خَلَقَ الْاِنْسَانَ مِنْ نُّطْفَةٍ فَاِذَا هُوَ خَصِيْمٌ مُّبِيْنٌ

khalaqal-insāna min nuṭfatin fa iżā huwa khaṣīmum mubīn(un).

ऊ आदमी के वीर्य से बनवले रहले, ओकरा के असली डिबंकर में बदल देले रहले।


54
Q.S अल-कहफ के ह (18:54)

وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِيْ هٰذَا الْقُرْاٰنِ لِلنَّاسِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍۗ وَكَانَ الْاِنْسَانُ اَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا

wa laqad ṣarrafnā fī hāżal-qur'āni lin-nāsi min kulli maṡal(in), wa kānal-insānu akṡara syai'in jadalā(n).

आ साँचहू हमनी के एह कुरान में लोग के एकरा के बार-बार कई तरह के दृष्टांत से समझवले बानी जा। लेकिन इंसान ही सबसे जादा बहस करेला।


55
Q.S अल-कहफ के ह (18:55)

وَمَا مَنَعَ النَّاسَ اَنْ يُّؤْمِنُوْٓا اِذْ جَاۤءَهُمُ الْهُدٰى وَيَسْتَغْفِرُوْا رَبَّهُمْ اِلَّآ اَنْ تَأْتِيَهُمْ سُنَّةُ الْاَوَّلِيْنَ اَوْ يَأْتِيَهُمُ الْعَذَابُ قُبُلًا

wa mā mana‘an-nāsa ay yu'minū iż jā'ahumul-hudā wa yastagfirū rabbahum illā an ta'tiyahum sunnatul-awwalīna au ya'tiyahumul-‘ażābu qubulā(n).

आ अइसन कवनो चीज (कुछ भी) नइखे जवन लोग के विश्वास करे से रोके जब उनकरा लगे हिदायता आ गइल होखे आ अपना रब से माफी माँगे, सिवाय (इंतजार करे के इच्छा) के (अल्लाह के नियम जवन कि लागू रहल बा) पिछला लोग पर आवे के भा ओह लोग पर असली सजा के आवे के।


66
Q.S मरियम के ह (19:66)

وَيَقُوْلُ الْاِنْسَانُ ءَاِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ اُخْرَجُ حَيًّا

wa yaqūlul-insānu a'iżā mā mittu lasaufa ukhraju ḥayyā(n).

आ लोग (अविश्वासी) कहेला कि "का ई साँच बा कि जब हम मरब त एक दिन हम सचमुच फेर से जिंदा होखब?"


51
Q.S ता-हा के बा (20:51)

قَالَ فَمَا بَالُ الْقُرُوْنِ الْاُوْلٰى

qāla famā bālul-qurūnil-ūlā.

उ (फिरौन) कहले, "त प्राचीन लोग के हालत का रहे?"


134
Q.S ता-हा के बा (20:134)

وَلَوْ اَنَّآ اَهْلَكْنٰهُمْ بِعَذَابٍ مِّنْ قَبْلِهٖ لَقَالُوْا رَبَّنَا لَوْلَآ اَرْسَلْتَ اِلَيْنَا رَسُوْلًا فَنَتَّبِعَ اٰيٰتِكَ مِنْ قَبْلِ اَنْ نَّذِلَّ وَنَخْزٰى

wa lau annā ahlaknāhum bi‘ażābim min qablihī laqālū rabbanā lau lā arsalta ilainā rasūlan fa nattabi‘a āyātika min qabli an nażilla wa nakhzā.

आ अगर हमनी के ओह लोग के पहिले के यातना से नाश कर देले रहतीं जा (कुरान उतारल गइल बा) त ऊ लोग कहित कि "हमार रब, तू हमनी के लगे कवनो दूत काहे ना भेजनी, ताकि हमनी के घृणित आ नीच बने से पहिले तोहार आयत के पालन करीं जा?"


2
Q.S अल-अंबिया के ह (21:2)

مَا يَأْتِيْهِمْ مِّنْ ذِكْرٍ مِّنْ رَّبِّهِمْ مُّحْدَثٍ اِلَّا اسْتَمَعُوْهُ وَهُمْ يَلْعَبُوْنَ ۙ

mā ya'tīhim min żikrim mir rabbihim muḥdaṡin illastama‘ūhu wa hum yal‘abūn(a).

हर बेर जब भगवान से कवनो नया श्लोक ओह लोग के सामने आवेला त ऊ लोग ओकरा के खेलत-खेलत सुनत रहेला.


3
Q.S अल-अंबिया के ह (21:3)

لَاهِيَةً قُلُوْبُهُمْۗ وَاَسَرُّوا النَّجْوَىۖ الَّذِيْنَ ظَلَمُوْاۖ هَلْ هٰذَآ اِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْۚ اَفَتَأْتُوْنَ السِّحْرَ وَاَنْتُمْ تُبْصِرُوْنَ

lāhiyatan qulūbuhum, wa asarrun-najwal-lażīna ẓalamū, hal hāżā illā basyarum miṡlukum, afa ta'tūnas-siḥra wa antum tubṣirūn(a).

इनकर दिल लापरवाही के हालत में बा। आ गलत करे वाला लोग आपन बातचीत छिपावेला: "ई (मुहम्मद) खाली रउरा जइसन इंसान ह. का रउरा जादू देखत घरी मान लिहले रहीं?"


5
Q.S अल-अंबिया के ह (21:5)

بَلْ قَالُوْٓا اَضْغَاثُ اَحْلَامٍۢ بَلِ افْتَرٰىهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌۚ فَلْيَأْتِنَا بِاٰيَةٍ كَمَآ اُرْسِلَ الْاَوَّلُوْنَ

bal qālū aḍgāṡu aḥlāmim baliftarāhu bal huwa syā‘ir(un), falya'tinā bi'āyatin kamā ursilal-awwalūn(a).

इहाँ तक कि उ लोग कहले कि, “(कुरान) भ्रमित सपना के फल ह, चाहे उनुका (मुहम्मद के) मनगढ़ंत के नतीजा ह, चाहे इहाँ तक कि उ सिर्फ कवि हवे, उ हमनी के एगो निशानी (सबूत) ले आवे, जईसे कि पहिले भेजल गईल रसूलन।”


6
Q.S अल-अंबिया के ह (21:6)

مَآ اٰمَنَتْ قَبْلَهُمْ مِّنْ قَرْيَةٍ اَهْلَكْنٰهَاۚ اَفَهُمْ يُؤْمِنُوْنَ

mā āmanat qablahum min qaryatin ahlaknāhā, afahum yu'minūn(a).

ओह लोग से पहिले के एगो देश के निवासी, जवना के हमनी के नष्ट कर देले रहनी जा, उ लोग विश्वास ना कईले (भले हमनी के सबूत भेजले बानी जा)। का उ लोग विश्वास करीहे?


38
Q.S अल-अंबिया के ह (21:38)

وَيَقُوْلُوْنَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

wa yaqūlūna matā hāżal-wa‘du in kuntum ṣādiqīn(a).

आ ऊ लोग कहेला कि “कब वादा (आ जाई), अगर रउरा सच्चा बानी?”


55
Q.S अल-अंबिया के ह (21:55)

قَالُوْٓا اَجِئْتَنَا بِالْحَقِّ اَمْ اَنْتَ مِنَ اللّٰعِبِيْنَ

qālū aji'tanā bil-ḥaqqi am anta minal-lā‘ibīn(a).

उ लोग कहलस कि तू हमनी के लगे सच्चाई लेके आईल बाड़ू कि खेलत बाड़ू?


93
Q.S अल-अंबिया के ह (21:93)

وَتَقَطَّعُوْٓا اَمْرَهُمْ بَيْنَهُمْۗ كُلٌّ اِلَيْنَا رٰجِعُوْنَ ࣖ

wa taqaṭṭa‘ū amrahum bainahum, kullun ilainā rāji‘ūn(a).

लेकिन उ लोग अपना (धार्मिक) मामला में आपस में बंटल रहले। ओहमें से हर एक (सब समूह) हमनी के लगे वापस आ जाई।


3
Q.S अल-हज के ह (22:3)

وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يُّجَادِلُ فِى اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَّيَتَّبِعُ كُلَّ شَيْطٰنٍ مَّرِيْدٍۙ

wa minan-nāsi may yujādilu fillāhi bigairi ‘ilmiw wa yattabi‘u kulla syaiṭānim marīd(in).

आ इंसानन में अइसनो लोग बा जे बिना ज्ञान के अल्लाह का बारे में बहस करेला आ खाली बहुते दुष्ट शैतान के पालन करेला.


8
Q.S अल-हज के ह (22:8)

وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يُّجَادِلُ فِى اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَّلَا هُدًى وَّلَا كِتٰبٍ مُّنِيْرٍ ۙ

wa minan-nāsi may yujādilu fillāhi bigairi ‘ilmiw wa lā hudaw wa lā kitābim munīr(in).

आ इंसानन में अइसनो लोग बा जे अल्लाह के बारे में बिना ज्ञान के, बिना हिदायत के आ बिना कवनो किताब (अववाह) के बहस करेला जवन आत्मज्ञान प्रदान करेला।


46
Q.S अल-हज के ह (22:46)

اَفَلَمْ يَسِيْرُوْا فِى الْاَرْضِ فَتَكُوْنَ لَهُمْ قُلُوْبٌ يَّعْقِلُوْنَ بِهَآ اَوْ اٰذَانٌ يَّسْمَعُوْنَ بِهَاۚ فَاِنَّهَا لَا تَعْمَى الْاَبْصَارُ وَلٰكِنْ تَعْمَى الْقُلُوْبُ الَّتِيْ فِى الصُّدُوْرِ

afalam yasīrū fil-arḍi fa takūna lahum qulūbuy ya‘qilūna bihā au āżānuy yasma‘ūna bihā, fa innahā lā ta‘mal-abṣāru wa lākin ta‘mal-qulūbul-latī fiṣ-ṣudūr(i).

त का ऊ लोग कबो धरती पर ना चलल, ताकि उनकर दिल (कारण) समझ सके, उनकर कान सुन सके? असल में आँख ना आन्हर होला बाकिर जवन आन्हर बा ऊ छाती में दिल ह.


4
Q.S अल-मु'मिनुन के ह (23:4)

وَالَّذِيْنَ هُمْ لِلزَّكٰوةِ فٰعِلُوْنَ ۙ

wal-lażīna hum liz-zakāti fā‘ilūn(a).

आ जकात देबे वाला लोग के,


35
Q.S अल-मु'मिनुन के ह (23:35)

اَيَعِدُكُمْ اَنَّكُمْ اِذَا مِتُّمْ وَكُنْتُمْ تُرَابًا وَّعِظَامًا اَنَّكُمْ مُّخْرَجُوْنَ ۖ

aya‘idukum annakum iżā mittum wa kuntum turābaw wa ‘iẓāman annakum mukhrajūn(a).

का उ रउवा से वादा कईले बाड़े कि जब रउवा मरब आ धूल आ हड्डी बनब त रउवा के असल में (रउरा कब्र से) बाहर निकालल जाई?


203
Q.S ऐश-शु'आरा के बा (26:203)

فَيَقُوْلُوْا هَلْ نَحْنُ مُنْظَرُوْنَ ۗ

fa yaqūlū hal naḥnu munẓarūn(a).

तब ऊ लोग कहल कि, “का हमनी के देरी दिहल जा रहल बा?”


18
Q.S अल-'अंकबूत के ह (29:18)

وَاِنْ تُكَذِّبُوْا فَقَدْ كَذَّبَ اُمَمٌ مِّنْ قَبْلِكُمْ ۗوَمَا عَلَى الرَّسُوْلِ اِلَّا الْبَلٰغُ الْمُبِيْنُ

wa in tukażżibū faqad każżaba umamum min qablikum, wa mā ‘alar-rasūli illal-balāgul-mubīn(u).

आ अगर रउरा (काफिर) झूठ बोलत बानी त साँचहू रउरा से पहिले के लोग भी झूठ बोलत रहे (दूत)। आ प्रेरित के दायित्व खाली (भगवान के धर्म) के साफ-साफ बतावे के बा।"


24
Q.S अल-'अंकबूत के ह (29:24)

فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهٖٓ اِلَّآ اَنْ قَالُوا اقْتُلُوْهُ اَوْ حَرِّقُوْهُ فَاَنْجٰىهُ اللّٰهُ مِنَ النَّارِۗ اِنَّ فِيْ ذٰلِكَ لَاٰيٰتٍ لِّقَوْمٍ يُّؤْمِنُوْنَ

famā kāna jawāba qaumihī illā an qaluqtulūhu au ḥarriqūhu fa anjāhullāhu minan-nār(i), inna fī żālika la'āyātil liqaumiy yu'minūn(a).

त उनुका लोग (इब्राहिम) के ओर से कवनो जवाब ना मिलल, एकरा अलावे इ कहल कि "ओकरा के मार दीं चाहे जरा द" तब अल्लाह उनुका के आग से बचा लेले। दरअसल, एह में निश्चित रूप से (अल्लाह के महानता के) निशानी बा जे विश्वास करे वाला लोग खातिर बा।


29
Q.S अल-'अंकबूत के ह (29:29)

اَىِٕنَّكُمْ لَتَأْتُوْنَ الرِّجَالَ وَتَقْطَعُوْنَ السَّبِيْلَ ەۙ وَتَأْتُوْنَ فِيْ نَادِيْكُمُ الْمُنْكَرَ ۗفَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهٖٓ اِلَّآ اَنْ قَالُوا ائْتِنَا بِعَذَابِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصّٰدِقِيْنَ

a'innakum lata'tūnar-rijāla wa taqṭa‘ūnas-sabīl(a), wa ta'tūna fī nādīkumul-munkar(a), famā kāna jawāba qaumihī illā an qālu'tinā bi‘ażābillāhi in kunta minaṣ-ṣādiqīn(a).

का ई उचित बा कि रउरा मरदन के लगे जाके अपना सभा स्थल में धोखा आ बुराई करीं?” त उनुका लोग के जवाब कवनो दोसर ना रहे कि, "हमनी के अल्लाह के सजा ले आव, अगर तू सत्कार में से एक बानी।"


20
Q.S लुकमान के ह (31:20)

اَلَمْ تَرَوْا اَنَّ اللّٰهَ سَخَّرَ لَكُمْ مَّا فِى السَّمٰوٰتِ وَمَا فِى الْاَرْضِ وَاَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهٗ ظَاهِرَةً وَّبَاطِنَةً ۗوَمِنَ النَّاسِ مَنْ يُّجَادِلُ فِى اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَّلَا هُدًى وَّلَا كِتٰبٍ مُّنِيْرٍ

alam tarau annallāha sakhkhara lakum mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍi wa asbaga ‘alaikum ni‘amahū ẓāhirataw wa bāṭinah(tan), wa minan-nāsi may yujādilu fillāhi bigairi ‘ilmiw wa lā hudaw wa lā kitābim munīr(in).

का रउवां इ ना देखले बानी कि अल्लाह रउवा (फायदा) खातिर आसमान में जवन बा आ धरती पर बा ओकरा के अपना वश में कर लेले बाड़े आ रउवा खातिर शारीरिक आ मानसिक रूप से आपन बरकत के सिद्ध कर देले बाड़े। लेकिन इंसान में अयीसन लोग बाड़े जवन कि बिना ज्ञान चाहे मार्गदर्शन के अवुरी बिना कवनो किताब के अल्लाह के (एकता) प विवाद करेले, जवन कि आत्मज्ञान देवे।


21
Q.S लुकमान के ह (31:21)

وَاِذَا قِيْلَ لَهُمُ اتَّبِعُوْا مَآ اَنْزَلَ اللّٰهُ قَالُوْا بَلْ نَتَّبِعُ مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ اٰبَاۤءَنَاۗ اَوَلَوْ كَانَ الشَّيْطٰنُ يَدْعُوْهُمْ اِلٰى عَذَابِ السَّعِيْرِ

wa iżā qīla lahumuttabi‘ū mā anzalallāhu qālū bal nattabi‘u mā wajadnā ‘alaihi ābā'anā, awalau kānasy-syaiṭānu yad‘ūhum ilā ‘ażābis-sa‘īr(i).

आ जब ओह लोग से कहल जाला कि "अल्लाह जवन उतारले बाड़न ओकर पालन करीं!" उ लोग जवाब देले, "(ना), लेकिन हमनी के (केवल) अपना पुरखा से सीखल रिवाज के पालन करेनी जा।" का उ लोग (अपना पुरखा के पीछे चली) भले ही शैतान असल में ओह लोग के आग (नरक) जरावे के सजा खातिर बोलावत होखे?


28
Q.S अस-सजदाह के बा (32:28)

وَيَقُوْلُوْنَ مَتٰى هٰذَا الْفَتْحُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

wa yaqūlūna matā hāżal-fatḥu in kuntum ṣādiqīn(a).

आ ऊ लोग पूछेला कि “अगर रउरा सच्चा बानी त जीत कब (आइ)?”


35
Q.S सबा के ह (34:35)

وَقَالُوْا نَحْنُ اَكْثَرُ اَمْوَالًا وَّاَوْلَادًاۙ وَّمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِيْنَ

wa qālū naḥnu akṡaru amwālaw wa aulādā(n), wa mā naḥnu bimu‘ażżabīn(a).

आ ऊ लोग कहल कि, "हमनी के लगे (तोहरा से) अधिका धन आ संतान बा आ हमनी के सजा ना मिली."


48
Q.S या-सिन के बा (36:48)

وَيَقُوْلُوْنَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

wa yaqūlūna matā hāżal-wa‘du in kuntum ṣādiqīn(a).

आ उ लोग (काफिर) कहले कि, "(कयामत के दिन) के वादा कब पूरा होई, जदी आप सच्चा बानी?"


77
Q.S या-सिन के बा (36:77)

اَوَلَمْ يَرَ الْاِنْسَانُ اَنَّا خَلَقْنٰهُ مِنْ نُّطْفَةٍ فَاِذَا هُوَ خَصِيْمٌ مُّبِيْنٌ

awalam yaral-insānu annā khalaqnāhu min nuṭfatin fa'iżā huwa khaṣīmum mubīn(un).

आ का आदमी ई नइखे देखत कि हमनी का ओकरा के शुक्राणु के बूंद से बनवले बानी जा, आ ऊ साफ दुश्मन निकलेला!


58
Q.S अज-जुमार के ह (39:58)

اَوْ تَقُوْلَ حِيْنَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ اَنَّ لِيْ كَرَّةً فَاَكُوْنَ مِنَ الْمُحْسِنِيْنَ

au taqūla ḥīna taral-‘ażāba lau anna lī karratan fa akūna minal-muḥsinīn(a).

या (कहीं) सजा देख के केहू ना कहे कि, 'अगर हम (दुनिया में) वापस आ सकत रहनी त हम निश्चित रूप से भलाई करे वाला लोग में से एक रहतीं।'


17
Q.S अल-अहकाफ के ह (46:17)

وَالَّذِيْ قَالَ لِوَالِدَيْهِ اُفٍّ لَّكُمَآ اَتَعِدَانِنِيْٓ اَنْ اُخْرَجَ وَقَدْ خَلَتِ الْقُرُوْنُ مِنْ قَبْلِيْۚ وَهُمَا يَسْتَغِيْثٰنِ اللّٰهَ وَيْلَكَ اٰمِنْ ۖاِنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّۚ فَيَقُوْلُ مَا هٰذَآ اِلَّآ اَسَاطِيْرُ الْاَوَّلِيْنَ

wal-lażī qāla liwālidaihi uffil lakumā ata‘idāninī an ukhraja wa qad khalatil qurūnu min qablī, wa humā yastagīṡānillāha wailaka āmin, inna wa‘dallāhi ḥaqq(un), fayaqūlu mā hāżā illā asāṭīrul-awwalīn(a).

आ ऊ आदमी जे अपना माई-बाबूजी से कहलस कि “आह.” का रउवां दुनु जाना हमरा के चेतवले रहनी कि हम (कबर से) जिंदा होखब, भले ही हमरा से पहिले के कई लोग के निधन हो गईल रहे? तब माता-पिता अल्लाह से मदद मंगले (कहत कि) "हाय तोहरा से, विश्वास करीं! सचमुच अल्लाह के वादा सही बा।" तब ऊ (बच्चा) कहले, "ई त बस प्राचीन लोग के परी कथा ह."


22
Q.S अल-अहकाफ के ह (46:22)

قَالُوْٓا اَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ اٰلِهَتِنَاۚ فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصّٰدِقِيْنَ

qālū aji'tanā lita'fikanā ‘an ālihatinā fa'tinā bimā ta‘idunā in kunta minaṣ-ṣādiqīn(a).

उ लोग जवाब देले, "का तू हमनी के देवता लोग से (पूजा) से मोड़ देवे खातिर हमनी के लगे आईल बाड़ू? तब हमनी के उ सजा ले आईं, जवना के तू हमनी के धमकी देले बाड़ू, जदी तू सच्चा लोग में से बाड़ू।"


32
Q.S एट-टूर के बा (52:32)

اَمْ تَأْمُرُهُمْ اَحْلَامُهُمْ بِهٰذَآ اَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُوْنَۚ

am ta'muruhum aḥlāmuhum bihāżā am hum qaumun ṭāgūn(a).

का ओह लोग के मन से ई आज्ञा दिहल गइल बा कि ऊ लोग एह (आरोप) के बोले भा सीमा के उल्लंघन करे वाला लोग ह?


25
Q.S अल-मुल्क के ह (67:25)

وَيَقُوْلُوْنَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

wa yaqūlūna matā hāżal-wa‘du in kuntum ṣādiqīn(a).

आ ऊ लोग कहल कि, “रउरा साँच कहब त धमकी कब आई?”


36
Q.S अल-कलाम के ह (68:36)

مَا لَكُمْۗ كَيْفَ تَحْكُمُوْنَۚ

mā lakum, kaifa taḥkumūn(a).

काहे (अइसन) कइनी? रउरा कइसे फैसला लेत बानी?


37
Q.S अल-कलाम के ह (68:37)

اَمْ لَكُمْ كِتٰبٌ فِيْهِ تَدْرُسُوْنَۙ

am lakum kitābun fīhi tadrusūn(a).

या रउवा लगे कवनो किताब (अल्लाह के उतारल) बा जवना के रउवा अध्ययन करेनी?


38
Q.S अल-कलाम के ह (68:38)

اِنَّ لَكُمْ فِيْهِ لَمَا تَخَيَّرُوْنَۚ

inna lakum fīhi lamā takhayyarūn(a).

असल में रउरा जवन कुछ बा ओकरा के चुन सकीलें.


39
Q.S अल-कलाम के ह (68:39)

اَمْ لَكُمْ اَيْمَانٌ عَلَيْنَا بَالِغَةٌ اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِۙ اِنَّ لَكُمْ لَمَا تَحْكُمُوْنَۚ

am lakum aimānun ‘alainā bāligatun ilā yaumil-qiyāmah(ti), inna lakum lamā taḥkumūn(a).

या का रउवां हमनी से (वादा के मजबूती से) किरिया मिलल बा, जवन कयामत के दिन तक लागू रही, ताकि रउवां (जइसन चाहत बानी) फैसला कर सकीले?


40
Q.S अल-कलाम के ह (68:40)

سَلْهُمْ اَيُّهُمْ بِذٰلِكَ زَعِيْمٌۚ

salhum ayyuhum biżālika za‘īm(un).

ओह लोग से पूछीं कि "ओकनी में से कवन (कहल गइल फैसला) खातिर जिम्मेदार बा?"


41
Q.S अल-कलाम के ह (68:41)

اَمْ لَهُمْ شُرَكَاۤءُۚ فَلْيَأْتُوْا بِشُرَكَاۤىِٕهِمْ اِنْ كَانُوْا صٰدِقِيْنَ

am lahum syurakā'(u), falya'tū bisyurakā'ihim in kānū ṣādiqīn(a).

भा ओह लोग के सहयोगी बाड़े? फेर अगर सच्चा लोग होखे त आपन सहयोगी ले आवे दीं.


18
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:18)

اِنَّهٗ فَكَّرَ وَقَدَّرَۙ

innahū fakkara wa qaddar(a).

सचमुच, उ (उ जवन तय कईले) के बारे में सोचले बाड़े अवुरी तय कईले बाड़े,


21
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:21)

ثُمَّ نَظَرَۙ

Ṡumma naẓar(a).

तब ऊ (चिंतन कइलन) सोचलसि कि


22
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:22)

ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَۙ

Ṡumma ‘abasa wa basar(a).

फेर खट्टा आ उदास चेहरा से,


52
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:52)

بَلْ يُرِيْدُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ اَنْ يُّؤْتٰى صُحُفًا مُّنَشَّرَةًۙ

bal yurīdu kullumri'im minhum ay yu'tā ṣuḥufam munasysyarah(tan).

इहाँ तक कि ओहमें से हर केहू चाहत बा कि ओकरा के खुला पन्ना (किताब के) दिहल जाव.