وَلَا يَحْزُنْكَ الَّذِيْنَ يُسَارِعُوْنَ فِى الْكُفْرِۚ اِنَّهُمْ لَنْ يَّضُرُّوا اللّٰهَ شَيْـًٔا ۗ يُرِيْدُ اللّٰهُ اَلَّا يَجْعَلَ لَهُمْ حَظًّا فِى الْاٰخِرَةِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيْمٌۚ
wa lā yaḥzunkal-lażīna yusāri‘ūna fil-kufr(i), innahum lay yaḍurrullāha syai'ā(n), yurīdullāhu allā yaj‘ala lahum ḥaẓẓan fil-ākhirati wa lahum ‘ażābun ‘aẓīm(un).
आरू ऐन्हऽ लोगऽ के चिंता नै करऽ जे आसानी स॑ काफिर होय क॑ वापस आबै छै, वास्तव म॑ वू अल्लाह क॑ कनिको नुकसान नै पहुँचै छै । अल्लाह हुनका सब के परलोक में हिस्सा (इनाम) नै देताह, आ हुनका सब के बहुत पैघ सजा भेटतनि।
۞ يٰٓاَيُّهَا الرَّسُوْلُ لَا يَحْزُنْكَ الَّذِيْنَ يُسَارِعُوْنَ فِى الْكُفْرِ مِنَ الَّذِيْنَ قَالُوْٓا اٰمَنَّا بِاَفْوَاهِهِمْ وَلَمْ تُؤْمِنْ قُلُوْبُهُمْ ۛ وَمِنَ الَّذِيْنَ هَادُوْا ۛ سَمّٰعُوْنَ لِلْكَذِبِ سَمّٰعُوْنَ لِقَوْمٍ اٰخَرِيْنَۙ لَمْ يَأْتُوْكَ ۗ يُحَرِّفُوْنَ الْكَلِمَ مِنْۢ بَعْدِ مَوَاضِعِهٖۚ يَقُوْلُوْنَ اِنْ اُوْتِيْتُمْ هٰذَا فَخُذُوْهُ وَاِنْ لَّمْ تُؤْتَوْهُ فَاحْذَرُوْا ۗوَمَنْ يُّرِدِ اللّٰهُ فِتْنَتَهٗ فَلَنْ تَمْلِكَ لَهٗ مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔا ۗ اُولٰۤىِٕكَ الَّذِيْنَ لَمْ يُرِدِ اللّٰهُ اَنْ يُّطَهِّرَ قُلُوْبَهُمْ ۗ لَهُمْ فِى الدُّنْيَا خِزْيٌ ۖوَّلَهُمْ فِى الْاٰخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيْمٌ
yā ayyuhar-rasūlu lā yaḥzunkal-lażīna yusāri‘ūna fil-kufri minal-lażīna qālū āmannā bi'afwāhihim wa lam tu'min qulūbuhum - wa minal-lażīna hādū - sammā‘ūna lil-każibi sammā‘ūna liqaumin ākharīna lam ya'tūk(a), yuḥarrifūnal-kalima mim ba‘di mawāḍi‘ih(ī), yaqūlūna in ūtītum hāżā fa khużhu wa illam tu'tauhu faḥżarū, wa may yuridillāhu fitnatahū falan tamlika lahū minallāhi syai'ā(n), ulā'ikal-lażīna lam yuridillāhu ay yuṭahhira qulūbahum, lahum fid-dun-yā khizyuw wa lahum fil-ākhirati ‘ażābun ‘aẓīm(un).
हे रसूल (मुहम्मद) ! दुखी नहि होउ, कारण ओ सभ अपन अविश्वास मे प्रतिस्पर्धा क' रहल छथि। अर्थात ओ (पाखंडी) जे मुँह सँ कहैत छथि, "हम सभ विश्वास कएने छी," भले ओकर हृदय एखन धरि विश्वास नहि कएने हो, आ संगहि यहूदी सभ जे वास्तव मे (समाचार) झूठ सुनब पसिन करैत छथि आ वास्तव मे दोसर लोकक (वचन) सुनब पसिन करैत छथि जे कहियो अहाँ लग नहि आयल छथि। ओ सभ शब्द (तोराह) केँ ओकर असली अर्थ सँ बदलि देलक। ओ सभ कहलक, "जँ ई अहाँ केँ देल गेल अछि (जे बदलल गेल अछि) त' स्वीकार करू, आ जँ अहाँ केँ किछु एहन देल गेल अछि जे ई नहि अछि, तखन सावधान रहू।" जेकरा अल्लाह ओकरा भटकय देबय चाहैत छथि, अहाँ अल्लाह सँ (ओकर मदद करय लेल) कोनो बात केँ कनिको मना नहि क' सकब। ओ एहन लोक छथि जिनका भगवान आब हुनकर हृदय शुद्ध नहि करय चाहैत छथि । एहि संसार मे हुनका लोकनि केँ अपमानित कयल जायत आ परलोक मे हुनका लोकनि केँ बहुत पैघ दण्ड होयतनि |
قُلْ يٰٓاَهْلَ الْكِتٰبِ لَسْتُمْ عَلٰى شَيْءٍ حَتّٰى تُقِيْمُوا التَّوْرٰىةَ وَالْاِنْجِيْلَ وَمَآ اُنْزِلَ اِلَيْكُمْ مِّنْ رَّبِّكُمْ ۗوَلَيَزِيْدَنَّ كَثِيْرًا مِّنْهُمْ مَّآ اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَّبِّكَ طُغْيَانًا وَّكُفْرًاۚ فَلَا تَأْسَ عَلَى الْقَوْمِ الْكٰفِرِيْنَ
qul yā ahlal-kitābi lastum ‘alā syai'in ḥattā tuqīmut-taurāta wal-injīla wa mā unzila ilaikum mir rabbikum, wa layazīdanna kaṡīram minhum mā unzila ilaika mir rabbika ṭugyānaw wa kufrā(n), falā ta'sa ‘alal-qaumil-kāfirīn(a).
कहू (मुहम्मद), "हे किताब के लोग! तोरा कनिको धार्मिक नै मानल जाइत अछि जाबे तक तोराह, सुसमाचार आ (कुरान) के शिक्षा के पालन नै करब जे तोहर प्रभु अहाँ सब पर उतारने छथि।" आ जे अहाँक प्रभु अहाँ पर प्रकट केने छथि से निश्चित रूप सँ हुनका सभ मे सँ बहुतो केँ बेसी आज्ञाकारी आ बेसी अवज्ञाकारी बना देत, तेँ जे अविश्वास करैत छथि हुनका सँ निराश नहि होउ।
قَدْ نَعْلَمُ اِنَّهٗ لَيَحْزُنُكَ الَّذِيْ يَقُوْلُوْنَ فَاِنَّهُمْ لَا يُكَذِّبُوْنَكَ وَلٰكِنَّ الظّٰلِمِيْنَ بِاٰيٰتِ اللّٰهِ يَجْحَدُوْنَ
qad na‘lamu innahū layaḥzunukal-lażī yaqūlūna fa innahum lā yukażżibūnaka wa lākinnaẓ-ẓālimīna bi'āyātillāhi yajhadūn(a).
सचमुच, हम सब जनैत छी जे ओ सब जे कहैत छथि से अहाँ (मुहम्मद) के दुखी करैत अछि, (दुःखी नहि होउ) कियाक त वास्तव में ओ सब अहाँ स झूठ नै बाजि रहल छथि, मुदा अन्यायी लोक अल्लाह के आयत स इनकार क रहल छथि।
وَاِنْ كَانَ كَبُرَ عَلَيْكَ اِعْرَاضُهُمْ فَاِنِ اسْتَطَعْتَ اَنْ تَبْتَغِيَ نَفَقًا فِى الْاَرْضِ اَوْ سُلَّمًا فِى السَّمَاۤءِ فَتَأْتِيَهُمْ بِاٰيَةٍ ۗوَلَوْ شَاۤءَ اللّٰهُ لَجَمَعَهُمْ عَلَى الْهُدٰى فَلَا تَكُوْنَنَّ مِنَ الْجٰهِلِيْنَ
wa in kāna kabura ‘alaika i‘rāḍuhum fa inistaṭa‘ta an tabtagiya nafaqan fil-arḍi au sullaman fis-samā'i fa ta'tiyahum bi'āyah(tin), wa lau syā'allāhu lajama‘ahum ‘alal-hudā falā takūnanna minal-jāhilīn(a).
आ जँ हुनकर मुँह घुमब अहाँ (मुहम्मद) लेल कठिन अछि, तखन जँ अहाँ धरती मे छेद क' सकैत छी वा स्वर्ग मे सीढ़ी बना सकैत छी तखन अहाँ हुनका सभक लेल चमत्कार आनि सकैत छी, (तखन करू)। आ जँ अल्लाह चाहने रहितथि तँ हुनका सभकेँ निर्देशक पालन करौने रहितथि , तेँ अहाँकेँ कहियो ओहि मूर्ख मे नहि रहबाक चाही ।
اِسْتَغْفِرْ لَهُمْ اَوْ لَا تَسْتَغْفِرْ لَهُمْۗ اِنْ تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ سَبْعِيْنَ مَرَّةً فَلَنْ يَّغْفِرَ اللّٰهُ لَهُمْ ۗذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ كَفَرُوْا بِاللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖۗ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِى الْقَوْمَ الْفٰسِقِيْنَ ࣖ
istagfir lahum au lā tastagfir lahum, in tastagfir lahum sab‘īna marratan falay yagfirallāhu lahum, żālika bi'annahum kafarū billāhi wa rasūlih(ī), wallāhu lā yahdil-qaumal-fāsiqīn(a).
(ई त' वैह अछि) अहाँ (मुहम्मद) हुनका सभक लेल माफी माँगैत छी वा हुनका सभक लेल माफी नहि माँगैत छी । भले अहाँ हुनका सब लेल सत्तर बेर माफी मांगब मुदा अल्लाह हुनका सब के माफ नहि करताह। एकरऽ कारण छै कि वू अल्लाह आरू हुनकऽ रसूलुल्लाह प॑ काफर (काफर) करै छै । आ अल्लाह दुष्ट के मार्गदर्शन नै करै छै।
لَقَدْ جَاۤءَكُمْ رَسُوْلٌ مِّنْ اَنْفُسِكُمْ عَزِيْزٌ عَلَيْهِ مَا عَنِتُّمْ حَرِيْصٌ عَلَيْكُمْ بِالْمُؤْمِنِيْنَ رَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ
laqad jā'akum rasūlum min anfusikum ‘azīzun ‘alaihi mā ‘anittum ḥarīṣun ‘alaikum bil-mu'minīna ra'ūfur raḥīm(un).
सचमुच, अहाँक अपनहि लोकक एकटा दूत आबि गेल अछि, अहाँ जे दुख भोगि रहल छी से भारी अछि, (ओ) अहाँक लेल वास्तव मे (विश्वास आ उद्धार) चाहैत अछि, विश्वास करय बला लोकक प्रति दयालु आ दयालु अछि।
وَلَوْ شَاۤءَ رَبُّكَ لَاٰمَنَ مَنْ فِى الْاَرْضِ كُلُّهُمْ جَمِيْعًاۗ اَفَاَنْتَ تُكْرِهُ النَّاسَ حَتّٰى يَكُوْنُوْا مُؤْمِنِيْنَ
wa lau syā'a rabbuka la'āmana man fil-arḍi kulluhum jamī‘ā(n), afa anta tukrihun-nāsa ḥattā yakūnū mu'minīn(a).
आ जँ अहाँक प्रभु चाहैत रहितथि तँ पृथ्वी पर सभ लोक विश्वास कएने रहितथि । मुदा की अहाँ लोक केँ जबरदस्ती (चाहै छी) जाहि सँ ओ विश्वासी बनि जाय?
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ اِلٰى مَا مَتَّعْنَا بِهٖٓ اَزْوَاجًا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِيْنَ
lā tamuddanna ‘ainaika ilā mā matta‘nā bihī azwājam minhum wa lā taḥzan ‘alaihim wakhfiḍ janāḥaka lil-mu'minīn(a).
अहाँ (मुहम्मद) कहियो अपन नजरि जीवनक सुख दिस नहि घुमाउ जे हम हुनका सभक किछु समूह (काफिर) केँ देने छी, आ हुनका सभक प्रति दुखी नहि रहू आ विश्वास करयवला सभक प्रति विनम्र नहि रहू।
اِنْ تَحْرِصْ عَلٰى هُدٰىهُمْ فَاِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِيْ مَنْ يُّضِلُّ وَمَا لَهُمْ مِّنْ نّٰصِرِيْنَ
in taḥriṣ ‘alā hudāhum fa innallāha lā yahdī may yuḍillu wa mā lahum min nāṣirīn(a).
यदि अहाँ (मुहम्मद) सचमुच आशा करैत छी जे हुनका सब के मार्गदर्शन भेटत त सचमुच अल्लाह हुनका सब के मार्गदर्शन नै करताह जिनका ओ गुमराह करैत छथि, आ हुनका सब के कोनो मददगार नै रहत।
وَاصْبِرْ وَمَا صَبْرُكَ اِلَّا بِاللّٰهِ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُ فِيْ ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُوْنَ
waṣbir wa mā ṣabruka illā billāhi wa lā taḥzan ‘alaihim wa lā taku fī ḍaiqim mimmā yamkurūn(a).
आ धैर्य राखू (मुहम्मद) आ अहाँक धीरज केवल अल्लाह के मदद स अछि आ हुनकर (कफर) के लेल दुखी नै रहू आ हुनकर योजना के धोखा के बारे में (साथे) संकीर्ण नै रहू।
فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلٰٓى اٰثَارِهِمْ اِنْ لَّمْ يُؤْمِنُوْا بِهٰذَا الْحَدِيْثِ اَسَفًا
fa la‘allaka bākhi‘un nafsaka ‘alā āṡārihim illam yu'minū bihāżal-ḥadīṡi asafā(n).
तखन शायद अहाँ (मुहम्मद) अपना के नुकसान पहुँचा देब कियाक त हुनकर मुड़ला के बाद अहाँ दुखी भ जायब, अगर ओ सब एहि जानकारी (कुरान) पर विश्वास नै करताह।
لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ اَلَّا يَكُوْنُوْا مُؤْمِنِيْنَ
la‘allaka bākhi‘un nafsaka allā yakūnū mu'minīn(a).
भ' सकैछ जे अहाँ (मुहम्मद) अपना केँ (दुख सँ) नष्ट क' देब, कारण ओ सभ (मक्काक लोक) विश्वास नहि करैत छथि।
وَاَنْذِرْ عَشِيْرَتَكَ الْاَقْرَبِيْنَ ۙ
wa anżir ‘asyīratakal-aqrabīn(a).
आ अपन निकटतम रिश्तेदार (मुहम्मद) के चेतावनी दियौ,
وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُنْ فِيْ ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُوْنَ
wa lā taḥzan ‘alaihim wa lā takun fī ḍaiqim mimmā yamkurūn(a).
आ हुनका सभक लेल दुखी नहि होउ, आ हुनका सभक धोखा देबयवला प्रयास सँ (अपन छाती) संकुचित नहि होउ।"
۞ قُلْ اِنَّمَآ اَعِظُكُمْ بِوَاحِدَةٍۚ اَنْ تَقُوْمُوْا لِلّٰهِ مَثْنٰى وَفُرَادٰى ثُمَّ تَتَفَكَّرُوْاۗ مَا بِصَاحِبِكُمْ مِّنْ جِنَّةٍۗ اِنْ هُوَ اِلَّا نَذِيْرٌ لَّكُمْ بَيْنَ يَدَيْ عَذَابٍ شَدِيْدٍ
qul innamā a‘iẓukum biwāḥidah(tin), an taqūmū lillāhi maṡnā wa furādā ṡumma tatafakkarū, mā biṣāḥibikum min jinnah(tin), in huwa illā nażīrul lakum baina yadai ‘ażābin syadīd(in).
कहब, "हम अहाँ केँ मात्र एकटा बात चेताबय चाहैत छी, अर्थात अहाँ दू-दू गोटे मे वा अलग-अलग अल्लाह केर सामना करू, तखन अहाँ (मुहम्मद के बारे मे) सोचू। अहाँक मित्र कनिको पागल नहि अछि। ओ कठोर सजा के (साक्षात्कार) सँ पहिने अहाँ लेल चेतावनी के अलावा किछु नहि अछि।"
وَسَوَاۤءٌ عَلَيْهِمْ ءَاَنْذَرْتَهُمْ اَمْ لَمْ تُنْذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُوْنَ
wa sawā'un ‘alaihim a'anżartahum am lam tunżirhum lā yu'minūn(a).
आ हुनका सभक लेल सेहो एहने अछि, अहाँ हुनका सभ केँ चेताबी वा नहि, ओहो सभ विश्वास नहि करताह।
اَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ الْعَذَابِۗ اَفَاَنْتَ تُنْقِذُ مَنْ فِى النَّارِ ۚ
afaman ḥaqqa ‘alaihi kalimatul-‘ażāb(i), afa'anta tunqiżu man fin-nār(i).
तखन की (की अहाँ ओकर भाग्य बदलय चाहैत छी) जे सजा भोगब निश्चित अछि? की अहाँ (मुहम्मद) ओहि लोक के बचा लेब जे नरक मे अछि?
ذٰلِكَ الَّذِيْ يُبَشِّرُ اللّٰهُ عِبَادَهُ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِۗ قُلْ لَّآ اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ اَجْرًا اِلَّا الْمَوَدَّةَ فِى الْقُرْبٰىۗ وَمَنْ يَّقْتَرِفْ حَسَنَةً نَّزِدْ لَهٗ فِيْهَا حُسْنًا ۗاِنَّ اللّٰهَ غَفُوْرٌ شَكُوْرٌ
Żālikal-lażī yubasysyirullāhu ‘ibādahul-lażīna āmanū wa ‘amiluṣ-ṣāliḥāt(i), qul lā as'alukum ‘alaihi ajran illal-mawaddata fil-qurbā, wa may yaqtarif ḥasanatan nazid lahū fīhā ḥusnā(n), innallāha gafūrun syakūr(un).
ओ (उपहार) अल्लाह द्वारा अपन सेवक के खुश करय लेल घोषित कयल गेल अछि जे विश्वास करैत छथि आ नीक काज करैत छथि | (मुहम्मद) कहू, "हम अपन आह्वानक बदला मे अहाँ सँ पारिवारिक स्नेह छोड़ि किछु नहि माँगैत छी |" आ जे नीक काज करत, ओकरा हम सभ भलाई जोड़ि देब। सचमुच अल्लाह परम क्षमाशील, परम आभारी छथि।
اَفَاَنْتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ اَوْ تَهْدِى الْعُمْيَ وَمَنْ كَانَ فِيْ ضَلٰلٍ مُّبِيْنٍ
afa anta tusmi‘uṣ-ṣumma au tahdil-‘umya wa man kāna fī ḍalālim mubīn(in).
त की अहाँ (मुहम्मद) बहीर व्यक्ति के सुनय में सक्षम छी, या (की) अहाँ एकटा एहन व्यक्ति के मार्गदर्शन द सकैत छी जे आन्हर अछि (हृदय में) आ ओहि व्यक्ति के जे स्पष्ट गलती में रहैत अछि?
نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا يَقُوْلُوْنَ وَمَآ اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِجَبَّارٍۗ فَذَكِّرْ بِالْقُرْاٰنِ مَنْ يَّخَافُ وَعِيْدِ ࣖ
naḥnu a‘lamu bimā yaqūlūna wa mā anta ‘alaihim bijabbār(in), fażakkir bil-qur'āni may yakhāfu wa‘īd(i).
हम सब बेसी जनैत छी जे ओ सब की कहैत छथि, आ अहाँ (मुहम्मद) हुनका सब पर जबरदस्ती नहि छी। त जे हमर चेतावनी स डरैत अछि ओकरा कुरान के माध्यम स चेतावनी दियौ।
فَاَنْتَ لَهٗ تَصَدّٰىۗ
fa anta lahū taṣaddā.
तखन अहाँ (मुहम्मद) हुनका दिस ध्यान दियौक,