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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Hari Kiamat (rukun iman no.5) Syafaat Rahmat Allah yang lebih besar dari dosa-dosa manusia
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कुल आयत : 3
110
Q.S अन-निसा (4:110)

وَمَنْ يَّعْمَلْ سُوْۤءًا اَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهٗ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اللّٰهَ يَجِدِ اللّٰهَ غَفُوْرًا رَّحِيْمًا

wa may ya‘mal sū'an au yaẓlim nafsahū ṡumma yastagfirillāha yajidillāha gafūrar raḥīmā(n).

आ जे कियो कोनो अपराध आ अपना पर अन्याय करत, तखन अल्लाह सँ माफी मांगत, ओकरा अल्लाह परम क्षमाशील, परम दयालु जरूर भेटतैक।


70
Q.S अल-फुरकान (25:70)

اِلَّا مَنْ تَابَ وَاٰمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَاُولٰۤىِٕكَ يُبَدِّلُ اللّٰهُ سَيِّاٰتِهِمْ حَسَنٰتٍۗ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُوْرًا رَّحِيْمًا

illā man tāba wa āmana wa ‘amila ‘amalan ṣāliḥan fa ulā'ika yubaddilullāhu sayyi'ātihim ḥasanāt(in), wa kānallāhu gafūrar raḥīmā(n).

सिवाय ओहि लोकक जे पश्चाताप करैत छथि आ विश्वास करैत छथि आ नीक काज करैत छथि; तखन अल्लाह हुनकर बुराई के जगह नीक के बदलि देलखिन्ह. अल्लाह क्षमाशील, परम दयालु छथि।


53
Q.S अज-जुमार (39:53)

۞ قُلْ يٰعِبَادِيَ الَّذِيْنَ اَسْرَفُوْا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوْا مِنْ رَّحْمَةِ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ يَغْفِرُ الذُّنُوْبَ جَمِيْعًا ۗاِنَّهٗ هُوَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ

qul yā ‘ibādiyal-lażīna asrafū ‘alā anfusihim lā taqnaṭū mir raḥmatillāh(i), innallāha yagfiruż-żunūba jamī‘ā(n), innahū huwal-gafūrur-raḥīm(u).

कहू, "हे हमर सेवक जे अपन सीमा स बाहर भ जाइत छथि! अल्लाह के दया स निराश नहि होउ। सचमुच अल्लाह सबहक पाप माफ करैत छथि। सचमुच ओ परम क्षमाशील, परम दयालु छथि।"