اِنَّ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَالَّذِيْنَ هَاجَرُوْا وَجَاهَدُوْا فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ ۙ اُولٰۤىِٕكَ يَرْجُوْنَ رَحْمَتَ اللّٰهِ ۗوَاللّٰهُ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ
innal-lażīna āmanū wal-lażīna hājarū wa jāhadū fī sabīlillāh(i), ulā'ika yarjūna raḥmatallāh(i), wallāhu gafūrur raḥīm(un).
सचमुच, जे विश्वास करै छै, आरू जे प्रवास करै छै आरू अल्लाह के रास्ता में प्रयास करै छै, वू ही अल्लाह के दया के आशा करै छै। अल्लाह क्षमाशील, परम दयालु छथि।
فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ اَنِّيْ لَآ اُضِيْعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنْكُمْ مِّنْ ذَكَرٍ اَوْ اُنْثٰى ۚ بَعْضُكُمْ مِّنْۢ بَعْضٍ ۚ فَالَّذِيْنَ هَاجَرُوْا وَاُخْرِجُوْا مِنْ دِيَارِهِمْ وَاُوْذُوْا فِيْ سَبِيْلِيْ وَقٰتَلُوْا وَقُتِلُوْا لَاُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّاٰتِهِمْ وَلَاُدْخِلَنَّهُمْ جَنّٰتٍ تَجْرِيْ مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهٰرُۚ ثَوَابًا مِّنْ عِنْدِ اللّٰهِ ۗ وَاللّٰهُ عِنْدَهٗ حُسْنُ الثَّوَابِ
fastajāba lahum rabbuhum annī lā uḍī‘u ‘amala ‘āmilim minkum min żakarin au unṡā, ba‘ḍukum mim ba‘ḍ(in), fal-lażīna hājarū wa ukhrijū min diyārihim wa ūżū fī sabīlī wa qātalū wa qutilū la'ukaffiranna ‘anhum sayyi'ātihim wa la udkhilannahum jannātin tajrī min taḥtihal-anhār(u), ṡawābam min ‘indillāh(i), wallāhu ‘indahū ḥusnuṡ-ṡawāb(i).
तेँ हुनका लोकनिक प्रभु हुनका लोकनिक आग्रह (ई कहैत) केँ पूरा कयलनि, "सत्ते, हम अहाँ सभ मे सँ कियो नीक काज करय बला काज केँ बर्बाद नहि करैत छी, चाहे ओ पुरुष हो वा स्त्री, (कारण) अहाँ सभ मे सँ किछु गोटे दोसर सँ (वंशज) छी। तेँ जे लोकनि प्रवास कयलनि, आ अपन घर सँ निकालि देल गेलाह, आ हमर बाट मे नुकसान पहुँचल गेलाह, आ लड़लनि, आ मारल गेलाह, हम हुनका सभक दुष्कर्म केँ अवश्य लिखि क' नीचाँक गाछी मे प्रवेश देबनि।" जे नदी बहैत अछि, अल्लाह के इनाम के रूप में आ अल्लाह के संग एकटा नीक इनाम अछि।"
اَلَّذِيْنَ يَتَّبِعُوْنَ الرَّسُوْلَ النَّبِيَّ الْاُمِّيَّ الَّذِيْ يَجِدُوْنَهٗ مَكْتُوْبًا عِنْدَهُمْ فِى التَّوْرٰىةِ وَالْاِنْجِيْلِ يَأْمُرُهُمْ بِالْمَعْرُوْفِ وَيَنْهٰىهُمْ عَنِ الْمُنْكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبٰتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبٰۤىِٕثَ وَيَضَعُ عَنْهُمْ اِصْرَهُمْ وَالْاَغْلٰلَ الَّتِيْ كَانَتْ عَلَيْهِمْۗ فَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا بِهٖ وَعَزَّرُوْهُ وَنَصَرُوْهُ وَاتَّبَعُوا النُّوْرَ الَّذِيْٓ اُنْزِلَ مَعَهٗٓ ۙاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْمُفْلِحُوْنَ ࣖ
al-lażīna yattabi‘ūnar-rasūlan nabiyyal-ummiyyal-lażī yajidūnahū maktūban ‘indahum fit-taurāti wal-injīli ya'muruhum bil-ma‘rūfi wa yanhāhum ‘anil-munkari wa yuḥillu lahumuṭ-ṭayyibāti wa yuḥarrimu ‘alaihimul-khabā'iṡa wa yaḍa‘u ‘anhum iṣrahum wal-aglālal-latī kānat ‘alaihim, fal-lażīna āmanū bihī wa ‘azzarūhu wa naṣarūhu wattaba‘un nūral-lażī unzila ma‘ah(ū), ulā'ika humul-mufliḥūn(a).
(अर्थात) जे रसूलुल्लाह, नबी जे उम्मी (पढ़ि-लिखि नहि सकैत छथि) छथि जिनकर (नाम) हुनका सभ केँ ओहि तौराह आ सुसमाचार मे लिखल भेटैत छनि जे हुनका सभ लग छनि, जे हुनका सभ केँ उचित करबाक आज्ञा दैत छथि आ जे गलत काज केँ मना करैत छथि, आ जे हुनका सभक लेल नीक जे किछु अछि तकरा अनुमति दैत छथि आ हुनका सभक लेल जे किछु अधलाह अछि, तकरा सभ केँ मना करैत छथि, आ हुनका सभ पर जे बोझ आ बेड़ी अछि ताहि सँ मुक्त करैत छथि | रहल बात जे हुनका पर विश्वास करैत छथि, हुनकर महिमामंडन करैत छथि, हुनकर मदद करैत छथि आ हुनका (कुरान) पर जे चमकदार इजोत आयल छल, ओकर पालन करैत छथि, ओ भाग्यशाली लोक छथि |
اِنَّ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَهَاجَرُوْا وَجَاهَدُوْا بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَالَّذِيْنَ اٰوَوْا وَّنَصَرُوْٓا اُولٰۤىِٕكَ بَعْضُهُمْ اَوْلِيَاۤءُ بَعْضٍۗ وَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَلَمْ يُهَاجِرُوْا مَا لَكُمْ مِّنْ وَّلَايَتِهِمْ مِّنْ شَيْءٍ حَتّٰى يُهَاجِرُوْاۚ وَاِنِ اسْتَنْصَرُوْكُمْ فِى الدِّيْنِ فَعَلَيْكُمُ النَّصْرُ اِلَّا عَلٰى قَوْمٍۢ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ مِّيْثَاقٌۗ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ بَصِيْرٌ
innal-lażīna āmanū wa hājarū wa jāhadū bi'amwālihim wa anfusihim fī sabīlillāhi wal-lażīna āwaw wa naṣarū ulā'ika ba‘ḍuhum auliyā'u ba‘ḍ(in), wal-lażīna āmanū wa lam yuhājirū mā lakum miw walāyatihim min syai'in ḥattā yuhājirū, wa inistanṣarūkum fid-dīni fa ‘alaikumun naṣru illā ‘alā qaumim bainakum wa bainahum mīṡāq(un), wallāhu bimā ta‘malūna baṣīr(un).
सचमुच, जे लोग विश्वास करै छै आरू प्रवास करै छै आरू अपनऽ धन आरू आत्मा के साथ अल्लाह के रास्ता में प्रयास करै छै आरू जे (मुहाजिरीन के) आश्रय दै छै आरू सहायता करै छै, वू एक-दूसरा के रक्षा करै छै। आ (जेकरा लेल) जे विश्वास करैत छथि मुदा प्रवास नहि केने छथि, हुनका सभक रक्षा करबाक अहाँक कोनो दायित्व नहि अछि, जाबत धरि ओ प्रवास नहि करैत छथि | (मुदा) जँ ओ सभ अहाँसँ धर्म (रक्षा)मे मददि माँगैत छथि तँ अहाँकेँ ओहि लोककेँ छोड़ि मददि देबाक बाध्यता अछि जे अहाँ आ हुनका सभक बीच समझौता कएने छथि। आ अल्लाह अहाँक काजक सर्वदर्शी छथि।
وَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَهَاجَرُوْا وَجَاهَدُوْا فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَالَّذِيْنَ اٰوَوْا وَّنَصَرُوْٓا اُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْمُؤْمِنُوْنَ حَقًّاۗ لَهُمْ مَّغْفِرَةٌ وَّرِزْقٌ كَرِيْمٌ
wal-lażīna āmanū wa hājarū wa jāhadū fī sabīlillāhi wal-lażīna āwaw wa naṣarū ulā'ika humul-mu'minūna ḥaqqā(n), lahum magfirtuw wa rizqun karīm(un).
आरू जे लोग विश्वास करै छै आरू प्रवास करै छै आरू अल्लाह के रास्ता पर प्रयास करै छै, आरू जे लोग (मुहाजिरीन के) आश्रय दै छै आरू सहायता करै छै, वू सच्चा मुसलमान छै। क्षमा आ उदात्त पोषण (अनुग्रह) प्राप्त करैत छथि |
وَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا مِنْۢ بَعْدُ وَهَاجَرُوْا وَجَاهَدُوْا مَعَكُمْ فَاُولٰۤىِٕكَ مِنْكُمْۗ وَاُولُوا الْاَرْحَامِ بَعْضُهُمْ اَوْلٰى بِبَعْضٍ فِيْ كِتٰبِ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيْمٌ ࣖ
wal-lażīna āmanū mim ba‘du wa hājarū wa jāhadū ma‘akum fa ulā'ika minkum, wa ulul-arḥāmi ba‘ḍuhum aulā biba‘ḍin fī kitābillāh(i), innallāha bikulli syai'in ‘alīm(un).
आ जे ओकर बाद विश्वास केलक, फेर प्रवास केलक आ अहाँक संग जेहाद लड़लक, ओ सब अहाँक ग्रुप मे अछि। किछु लोक जे रिश्तेदार छथि हुनका अल्लाह के किताब के अनुसार एक दोसरा के प्रति (जे रिश्तेदार नहिं छथि हुनका सं बेसी) बेसी अधिकार छनि. सचमुच अल्लाह सब किछु के सर्वज्ञ छैथ।
اَلَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَهَاجَرُوْا وَجَاهَدُوْا فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْۙ اَعْظَمُ دَرَجَةً عِنْدَ اللّٰهِ ۗوَاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْفَاۤىِٕزُوْنَ
allażīna āmanū wa hājarū wa jāhadū fī sabīlillāhi bi'amwālihim wa anfusihim, a‘ẓamu darajatan ‘indallāh(i), wa ulā'ika humul-fā'izūn(a).
जे लोग विश्वास करै छै आरू प्रवास करै छै आरू अपनऽ धन आरू आत्मा के साथ अल्लाह के रास्ता पर प्रयास करै छै, वू अल्लाह के नजर म॑ उच्च पद के छै । ओ सभ जीतैत छथि।
يُبَشِّرُهُمْ رَبُّهُمْ بِرَحْمَةٍ مِّنْهُ وَرِضْوَانٍ وَّجَنّٰتٍ لَّهُمْ فِيْهَا نَعِيْمٌ مُّقِيْمٌۙ
yubasysyiruhum rabbuhum biraḥmatim minhu wa riḍwāniw wa jannātil lahum fīhā na‘īmum muqīm(un).
भगवान् कृपा, भोग आ स्वर्ग द' क' हुनका सभ केँ प्रसन्न करैत छथि, ओहि मे अनन्त प्रसन्नता प्राप्त करैत छथि,
لَقَدْ تَّابَ اللّٰهُ عَلَى النَّبِيِّ وَالْمُهٰجِرِيْنَ وَالْاَنْصَارِ الَّذِيْنَ اتَّبَعُوْهُ فِيْ سَاعَةِ الْعُسْرَةِ مِنْۢ بَعْدِ مَا كَادَ يَزِيْغُ قُلُوْبُ فَرِيْقٍ مِّنْهُمْ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْۗ اِنَّهٗ بِهِمْ رَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ ۙ
laqat tāballāhu ‘alan-nabiyyi wal-muhājirīna wal-anṣāril-lażīnattaba‘ūhu fī sā‘atil-‘usrati mim ba‘di mā kāda yazīgu qulūbu farīqim minhum ṡumma tāba ‘alaihim, innahū bihim ra'ūfur raḥīm(un).
सचमुच अल्लाह नबी, मुहाजिरीन आ अंसार के पश्चाताप के स्वीकार क लेने छथि, जे कठिन समय में नबी के पाछे चलैत छलाह, हुनकर एकटा समूह के दिल लगभग मुड़ला के बाद, तखन अल्लाह हुनकर पश्चाताप स्वीकार क लेलनि। सचमुच अल्लाह हुनका सब पर परम कृपालु, दयालु छथि,
وَالَّذِيْنَ هَاجَرُوْا فِى اللّٰهِ مِنْۢ بَعْدِ مَا ظُلِمُوْا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِى الدُّنْيَا حَسَنَةً ۗوَلَاَجْرُ الْاٰخِرَةِ اَكْبَرُۘ لَوْ كَانُوْا يَعْلَمُوْنَۙ
wal-lażīna hājarū fillāhi mim ba‘di mā ẓulimū lanubawwi'annahum fid-dun-yā ḥasanah(tan), wa la'ajrul-ākhirati akbar(u), lau kānū ya‘lamūn(a).
आ जे अन्याय के बाद अल्लाह के खातिर प्रवास करत, हम ओकरा दुनिया में नीक जगह जरूर देब। आ परलोक मे फल अवश्य बेसी होयत, जँ हुनका लोकनि केँ ई बुझल रहैत।
الَّذِيْنَ صَبَرُوْا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُوْنَ
allażīna ṣabarū wa ‘alā rabbihim yatawakkalūn(a).
(अर्थात) जे धैर्य रखैत छथि आ केवल भगवान् पर भरोसा रखैत छथि |
ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِيْنَ هَاجَرُوْا مِنْۢ بَعْدِ مَا فُتِنُوْا ثُمَّ جَاهَدُوْا وَصَبَرُوْاۚ اِنَّ رَبَّكَ مِنْۢ بَعْدِهَا لَغَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ ࣖ
Ṡumma inna rabbaka lil-lażīna hājarū mim ba‘di mā futinū ṡumma jāhadū wa ṣabarū, inna rabbaka mim ba‘dihā lagafūrur raḥīm(un).
तखन अहाँक रब (रक्षक) जे परीक्षा भोगलाक बाद पलायन करैत छथि, तखन ओ जिहादक लेल प्रयासरत छथि आ धैर्य रखैत छथि, सचमुच, तकर बाद अहाँक प्रभु सचमुच क्षमाशील, दयालु छथि |
ۨالَّذِيْنَ اُخْرِجُوْا مِنْ دِيَارِهِمْ بِغَيْرِ حَقٍّ اِلَّآ اَنْ يَّقُوْلُوْا رَبُّنَا اللّٰهُ ۗوَلَوْلَا دَفْعُ اللّٰهِ النَّاسَ بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لَّهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَّصَلَوٰتٌ وَّمَسٰجِدُ يُذْكَرُ فِيْهَا اسْمُ اللّٰهِ كَثِيْرًاۗ وَلَيَنْصُرَنَّ اللّٰهُ مَنْ يَّنْصُرُهٗۗ اِنَّ اللّٰهَ لَقَوِيٌّ عَزِيْزٌ
allażīna ukhrijū min diyārihim bigairi ḥaqqin illā ay yaqūlū rabbunallāh(u), wa lau lā daf‘ullāhin-nāsa ba‘ḍahum biba‘ḍil lahuddimat ṣawāmi‘u wa biya‘uw wa ṣalawātuw wa masājidu yużkaru fīhasmullāhi kaṡīrā(n), wa layanṣurannallāhu may yanṣuruh(ū), innallāha laqawiyyun ‘azīz(un).
(अर्थात) जे बिना अधिकार के अपन घर स भगा देल जाइत अछि, केवल एहि लेल जे ओ कहैत अछि जे "हमर प्रभु अल्लाह छथि।" जँ अल्लाह किछु लोकक (हिंसा) केँ दोसरक माध्यम सँ नहि भगाबैत त' मठ, चर्च, आराधनालय, आ मस्जिद ध्वस्त भ' गेल रहैत जाहि मे अल्लाहक नामक बहुत चर्चा होइत छैक | अल्लाह हुनकर (धर्म) के मदद करय वाला के जरूर मदद करताह। सचमुच अल्लाह सर्वशक्तिमान, सर्वशक्तिमान छथि।
اَلَّذِيْنَ اِنْ مَّكَّنّٰهُمْ فِى الْاَرْضِ اَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتَوُا الزَّكٰوةَ وَاَمَرُوْا بِالْمَعْرُوْفِ وَنَهَوْا عَنِ الْمُنْكَرِۗ وَلِلّٰهِ عَاقِبَةُ الْاُمُوْرِ
allażīna im makkannāhum fil-arḍi aqāmuṣ-ṣalāta wa ātawuz-zakāta wa amarū bil-ma‘rūfi wa nahau ‘anil-munkar(i), wa lillāhi ‘āqibatul-umūr(i).
(अर्थात) वू लोग जे अगर हम ओकरा धरती पर पद देबै त॑ नमाज करी क॑ जकात करी क॑ सही काम करै के आदेश देतै आरू गलत के मना करी दै, आरू सब मामला अल्लाह के पास वापस आबी जाय छै ।
وَالَّذِيْنَ هَاجَرُوْا فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ ثُمَّ قُتِلُوْٓا اَوْ مَاتُوْا لَيَرْزُقَنَّهُمُ اللّٰهُ رِزْقًا حَسَنًاۗ وَاِنَّ اللّٰهَ لَهُوَ خَيْرُ الرّٰزِقِيْنَ
wal-lażīna hājarū fī sabīlillāhi ṡumma qutilū au mātū layarzuqannahumullāhu rizqan ḥasanā(n), wa innallāha lahuwa khairur-rāziqīn(a).
आ जे अल्लाह के रास्ता में प्रवास करैत छथि, तखन मारल जाइत छथि या मरैत छथि, सचमुच अल्लाह हुनका सौभाग्य (स्वर्ग) देताह | आ सचमुच अल्लाह उत्तम रोजी-रोटी के दाता छथि।
وَالَّذِيْنَ جَاۤءُوْ مِنْۢ بَعْدِهِمْ يَقُوْلُوْنَ رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِاِخْوَانِنَا الَّذِيْنَ سَبَقُوْنَا بِالْاِيْمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِيْ قُلُوْبِنَا غِلًّا لِّلَّذِيْنَ اٰمَنُوْا رَبَّنَآ اِنَّكَ رَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ ࣖ
wal-lażīna jā'ū mim ba‘dihim yaqūlūna rabbanagfir lanā wa li'ikhwāninal-lażīna sabaqūnā bil-īmāni wa lā taj‘al fī qulūbinā gillal lil-lażīna āmanū rabbanā innaka ra'ūfur raḥīm(un).
आ हुनका लोकनिक बाद जे लोकनि (मुहाजिरीन आ अंसार) आयल छलाह, ओ सभ प्रार्थना केलनि, "हे हमर प्रभु, हमरा सभ केँ आ हमरा सभ सँ पहिने विश्वास करय बला भाइ सभ केँ क्षमा करू, आ विश्वास करयवला सभक प्रति हमरा सभक हृदय मे दुर्भावना नहि पैदा करू। हे हमर प्रभु, वास्तव मे, अहाँ परम दयालु, परम दयालु छी।"