وَلُوْطًا اِذْ قَالَ لِقَوْمِهٖٓ اَتَأْتُوْنَ الْفَاحِشَةَ مَا سَبَقَكُمْ بِهَا مِنْ اَحَدٍ مِّنَ الْعٰلَمِيْنَ
wa lūṭan iż qāla liqaumihī ata'tūnal-fāḥisyata mā sabaqakum bihā min aḥadim minal-‘ālamīn(a).
आ (हम सभ सेहो) लूत केँ पठौलनि, जखन ओ अपन लोक सभ सँ कहलथिन, "अहाँ सभ घृणित काज किएक क' रहल छी, जे अहाँ सभ सँ पहिने (एहि संसार मे) केओ नहि केने अछि)।
اِنَّكُمْ لَتَأْتُوْنَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِّنْ دُوْنِ النِّسَاۤءِۗ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُوْنَ
innakum lata'tūnar-rijāla syahwatam min dūnin-nisā'(i), bal antum qaumum musrifūn(a).
सत्ते, अहाँ स्त्रीगणक लेल नहि, पुरुषक प्रति अपन कामना प्रकट केने छी। अहाँ सचमुच एकटा ओवररीचिंग लोक छी।”
وَجَاۤءَهٗ قَوْمُهٗ يُهْرَعُوْنَ اِلَيْهِۗ وَمِنْ قَبْلُ كَانُوْا يَعْمَلُوْنَ السَّيِّاٰتِۗ قَالَ يٰقَوْمِ هٰٓؤُلَاۤءِ بَنَاتِيْ هُنَّ اَطْهَرُ لَكُمْ فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَلَا تُخْزُوْنِ فِيْ ضَيْفِيْۗ اَلَيْسَ مِنْكُمْ رَجُلٌ رَّشِيْدٌ
wa jā'ahū qaumuhū yuhra‘ūna ilaih(i), wa min qablu kānū ya‘malūnas-sayyi'āt(i), qāla yā qaumi hā'ulā'i banātī hunna aṭharu lakum fattaqullāha wa lā tukhzūni fī ḍaifī, alaisa minkum rajulur rasyīd(un).
हुनकर लोक तुरन्त हुनका लग आबि गेलाह। आ प्राचीन काल सँ सदिखन घृणित काज करैत आबि रहल छथि | लूत कहलकै, "हे हमर लोक! ई सब हमर (जमीन) बेटी सब अछि, ई सब अहाँ सब लेल बेसी पवित्र अछि, तेँ अल्लाह सँ डरू आ हमर मेहमान के खिलाफ हमर (नाम) के बेइज्जत नहि करू। की अहाँ सब मे कियो एहन नहि अछि जे चतुर अछि?"
قَالُوْا لَقَدْ عَلِمْتَ مَا لَنَا فِيْ بَنٰتِكَ مِنْ حَقٍّۚ وَاِنَّكَ لَتَعْلَمُ مَا نُرِيْدُ
qālū laqad ‘alimta mā lanā fī banātika min ḥaqq(in), wa innaka lata‘lamu mā nurīd(u).
ओ सभ उत्तर देलक, “सत्ते, अहाँ सभ जनैत छी जे हमरा सभ केँ अहाँक बेटी सभक प्रति कोनो इच्छा (काम) नहि अछि, आ अहाँ सभ केँ अवश्य बुझल अछि जे हम सभ (वास्तव मे) की चाहैत छी।”
وَجَاۤءَ اَهْلُ الْمَدِيْنَةِ يَسْتَبْشِرُوْنَ
wa jā'a ahlul-madīnati yastabsyirūn(a).
आ शहरक लोक सभ हर्ष सँ (पाहुनक आगमनक कारण) (लूतक घर) आबि गेलाह।
قَالَ اِنَّ هٰٓؤُلَاۤءِ ضَيْفِيْ فَلَا تَفْضَحُوْنِۙ
qāla inna hā'ulā'i ḍaifī falā tafḍaḥūn(i).
ओ (लूत) कहलनि, “सत्ते, ओ सभ हमर पाहुन छथि, तेँ हमरा बदनाम नहि करू,
وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَلَا تُخْزُوْنِ
wattaqullāha wa lā tukhzūn(i).
आ अल्लाह सँ डरू आ हमरा अपमान नहि करू।"
قَالُوْٓا اَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعٰلَمِيْنَ
qālū awalam nanhaka ‘anil-‘ālamīn(a).
(ओ सभ) कहलथिन, “की हम सभ अहाँकेँ मनुक्खक (रक्षा)सँ मना नहि केलहुँ?”
لَعَمْرُكَ اِنَّهُمْ لَفِيْ سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُوْنَ
la‘amruka innahum lafī sakratihim ya‘mahūn(a).
(अल्लाह कहलनि) "अहाँक उम्र (मुहम्मद) सँ, सचमुच, ओ सब नशा (गुमराह) मे झूलैत छथि।"
وَلُوْطًا اٰتَيْنٰهُ حُكْمًا وَّعِلْمًا وَّنَجَّيْنٰهُ مِنَ الْقَرْيَةِ الَّتِيْ كَانَتْ تَّعْمَلُ الْخَبٰۤىِٕثَ ۗاِنَّهُمْ كَانُوْا قَوْمَ سَوْءٍ فٰسِقِيْنَۙ
wa lūṭan ātaināhu ḥumkaw wa ‘ilmaw wa najjaināhu minal-qaryatil-latī kānat ta‘malul-khabā'iṡ(a), innahum kānū qauma sau'in fāsiqīn(a).
लूत के, हम बुद्धि आ ज्ञान देलियनि, आ हम हुनका (ओहि सजा के) बचा लेलियनि जे घृणित काज करैत छल। सत्ते, ओ सभ दुष्ट आ दुष्ट लोक छथि।
اَتَأْتُوْنَ الذُّكْرَانَ مِنَ الْعٰلَمِيْنَ ۙ
ata'tūnaż-żukrāna minal-‘ālamīn(a).
अहाँ मनुक्खक बीच पुरुषक संपर्क किएक करैत छी (समलैंगिक काज करबाक लेल),
وَتَذَرُوْنَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِّنْ اَزْوَاجِكُمْۗ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ عَادُوْنَ
wa tażarūna mā khalaqa lakum rabbukum min azwājikum, bal antum qamun ‘ādūn(a).
आ अहाँ (ओहि महिला) केँ छोड़ि दैत छी, जिनका भगवान् अपन पत्नी बनेबाक लेल बनौने छथि? अहाँ सत्ते सीमा पार करय बला लोक छी।”
قَالَ اِنِّيْ لِعَمَلِكُمْ مِّنَ الْقَالِيْنَ ۗ
qāla innī li‘amalikum minal-qālīn(a).
ओ (लुत) कहलनि, "हमरा अहाँक काज सँ बहुत घृणा अछि।"
وَلُوْطًا اِذْ قَالَ لِقَوْمِهٖٓ اَتَأْتُوْنَ الْفَاحِشَةَ وَاَنْتُمْ تُبْصِرُوْنَ
wa lūṭan iż qāla liqaumihī ata'tūnal-fāḥisyata wa antum tubṣirūn(a).
आ (याद करू) लूतक कथा, जखन ओ अपन लोक सभ सँ कहलथिन, "अहाँ सभ (अनैतिक काजक घृणित) देखैत छी, तखनो अहाँ सभ फहिसिया (घृणित) काज किएक करैत छी?"
اَىِٕنَّكُمْ لَتَأْتُوْنَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِّنْ دُوْنِ النِّسَاۤءِ ۗبَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُوْنَ
a'innakum lata'tūnar-rijāla syahwatam min dūnin-nisā'(i), bal antum qaumun tajhalūn(a).
अहाँ अपन कामवासना (पूर्ति) लेल पुरुषक लग किएक पहुँचैत छी, स्त्रीगणक (संपर्क) के बजाय? सचमुच, अहाँ एकटा एहन लोक छी जे (अपन काजक परिणाम) नहि जनैत अछि ।
وَلُوْطًا اِذْ قَالَ لِقَوْمِهٖٓ اِنَّكُمْ لَتَأْتُوْنَ الْفَاحِشَةَ ۖمَا سَبَقَكُمْ بِهَا مِنْ اَحَدٍ مِّنَ الْعٰلَمِيْنَ
wa lūṭan iż qāla liqaumihī innakum lata'tūnal-fāḥisyata mā sabaqakum bihā min aḥadim minal-‘ālamīn(a).
आ (याद राखू) जखन लूत अपन लोक सभ सँ कहलखिन, "अहाँ सभ सचमुच एकटा एहन बहुत घिनौना काज (समलैंगिकता) केने छी जे अहाँ सँ पहिने के लोक मे सँ कियो नहि केने छल।"
اَىِٕنَّكُمْ لَتَأْتُوْنَ الرِّجَالَ وَتَقْطَعُوْنَ السَّبِيْلَ ەۙ وَتَأْتُوْنَ فِيْ نَادِيْكُمُ الْمُنْكَرَ ۗفَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهٖٓ اِلَّآ اَنْ قَالُوا ائْتِنَا بِعَذَابِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصّٰدِقِيْنَ
a'innakum lata'tūnar-rijāla wa taqṭa‘ūnas-sabīl(a), wa ta'tūna fī nādīkumul-munkar(a), famā kāna jawāba qaumihī illā an qālu'tinā bi‘ażābillāhi in kunta minaṣ-ṣādiqīn(a).
की अहाँ सभक लेल पुरुख लग जाउ, ठकब आ अपन सभा स्थल पर अधलाह करब उचित अछि?” त॑ हुनकऽ लोगऽ के जवाब दोसरऽ नै छेलै कि ई कहना छेलै कि "हमरा सिनी क॑ अल्लाह केरऽ सजा आनऽ, अगर तोहें धर्मी लोगऽ म॑ स॑ एक छियै त॑।"
وَلَقَدْ رَاوَدُوْهُ عَنْ ضَيْفِهٖ فَطَمَسْنَآ اَعْيُنَهُمْ فَذُوْقُوْا عَذَابِيْ وَنُذُرِ
wa laqad rāwadūhu ‘an ḍaifihī fa ṭamasnā a‘yunahum fa żūqū ‘ażābī wa nużur(i).
आ सत्ते, ओ सभ ओकरा अपन पाहुन (हुनका सभ केँ) (ओकरा सभ केँ सौंपबाक लेल) मना लेलक, तखन हम सभ ओकर सभक आँखि आन्हर क' देलियैक, तेँ हमर सजा आ हमर चेतावनी केँ महसूस करू!
وَجَاۤءَ فِرْعَوْنُ وَمَنْ قَبْلَهٗ وَالْمُؤْتَفِكٰتُ بِالْخَاطِئَةِۚ
wa jā'a fir‘aunu wa man qablahū wal-mu'tafikātu bil-khāṭi'ah(ti).
तखन फिरौन आ हुनका सँ पहिने के लोक आ (ओहि शहरक निवासी) जे शहर सभ पैघ गलतीक कारणेँ उल्टा भ' गेल छल, से आबि गेलाह।