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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Bangsa-bangsa terdahulu Tugas para Nabi Menyeru kepada jalan Allah Seruan para nabi untuk mengesakan Allah

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कुल आयत : 125
83
Q.S अल-बकराह के ह (2:83)

وَاِذْ اَخَذْنَا مِيْثَاقَ بَنِيْٓ اِسْرَاۤءِيْلَ لَا تَعْبُدُوْنَ اِلَّا اللّٰهَ وَبِالْوَالِدَيْنِ اِحْسَانًا وَّذِى الْقُرْبٰى وَالْيَتٰمٰى وَالْمَسٰكِيْنِ وَقُوْلُوْا لِلنَّاسِ حُسْنًا وَّاَقِيْمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَۗ ثُمَّ تَوَلَّيْتُمْ اِلَّا قَلِيْلًا مِّنْكُمْ وَاَنْتُمْ مُّعْرِضُوْنَ

wa iż akhażnā mīṡāqa banī isrā'īla lā ta‘budūna illallāha wa bil-wālidaini iḥsānaw wa żil-qurbā wal-yatāmā wal-masākīni wa qūlū lin-nāsi ḥusnaw wa aqīmuṣ-ṣalāta wa ātuz-zakāh(ta), ṡumma tawallaitum illā qalīlam minkum wa antum mu‘riḍūn(a).

आ (याद रखीं) जब हमनी के इजराइल के संतान से वादा लेले रहनी जा कि "अल्लाह के अलावा दोसरा के इबादत मत करीं, आ माता-पिता, रिश्तेदार, अनाथ आ गरीबन के साथे भलाई करीं। आ लोग से बढ़िया बात करीं, नमाज करीं आ जकात करीं।" लेकिन तब रउआ मुड़ गईनी (इंकार कईनी), सिवाय रउआ के एगो छोट हिस्सा के, आ रउआ (अभी भी) असहमत रहनी।


91
Q.S अल-बकराह के ह (2:91)

وَاِذَا قِيْلَ لَهُمْ اٰمِنُوْا بِمَآ اَنْزَلَ اللّٰهُ قَالُوْا نُؤْمِنُ بِمَآ اُنْزِلَ عَلَيْنَا وَيَكْفُرُوْنَ بِمَا وَرَاۤءَهٗ وَهُوَ الْحَقُّ مُصَدِّقًا لِّمَا مَعَهُمْ ۗ قُلْ فَلِمَ تَقْتُلُوْنَ اَنْۢبِيَاۤءَ اللّٰهِ مِنْ قَبْلُ اِنْ كُنْتُمْ مُّؤْمِنِيْنَ

wa iżā qīla lahum āminū bimā anzalallāhu qālū nu'minu bimā unzila ‘alainā wa yakfurūna bimā warā'ah(ū), wa huwal-ḥaqqu muṣaddiqal limā ma‘ahum, qul falima taqtulūna ambiyā'allāhi min qablu in kuntum mu'minīn(a).

आ जब ओह लोग से कहल जाला कि "अल्लाह जवन उतारले बाड़न (कुरान) पर विश्वास करीं" त ऊ लोग जवाब देला कि "हमनी के ओह बात पर विश्वास करीं जवन हमनी पर उतारल गइल बा." आ ऊ लोग ओकरा बाद जवन आवेला ओकरा से इनकार कर देला, भलही (कुरान) ऊ सच्चाई होखे जवन ओह लोग का साथे जवन बा ओकरा के जायज ठहरावेला. कह (मुहम्मद) "अगर आप मुसलमान रहनी त पहिले अल्लाह के नबी के काहें मारले रहनी?"


131
Q.S अल-बकराह के ह (2:131)

اِذْ قَالَ لَهٗ رَبُّهٗٓ اَسْلِمْۙ قَالَ اَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعٰلَمِيْنَ

iż qāla lahū rabbuhū aslim, qāla aslamtu lirabbil-‘ālamīn(a).

(याद) जब भगवान ओकरा (इब्राहिम) से कहले रहले कि, “समर्पण कर दीं!” उ जवाब देले, "हम सब लोक के प्रभु के समर्पण करतानी।"


132
Q.S अल-बकराह के ह (2:132)

وَوَصّٰى بِهَآ اِبْرٰهٖمُ بَنِيْهِ وَيَعْقُوْبُۗ يٰبَنِيَّ اِنَّ اللّٰهَ اصْطَفٰى لَكُمُ الدِّيْنَ فَلَا تَمُوْتُنَّ اِلَّا وَاَنْتُمْ مُّسْلِمُوْنَ ۗ

wa waṣṣā bihā ibrāhīmu banīhi wa ya‘qūb(u), yā baniyya innallāhaṣṭafā lakumud-dīna falā tamūtunna illā wa antum muslimūn(a).

इब्राहीम इ (वचन) अपना बेटा के वसीयत कईले, जईसे याकूब कईले रहले। "हे हमार लइकन! साँचहू अल्लाह रउरा खातिर ई धर्म चुनले बाड़न, एहसे जबले रउरा मुसलमान ना होखब तबले मत मरी."


133
Q.S अल-बकराह के ह (2:133)

اَمْ كُنْتُمْ شُهَدَاۤءَ اِذْ حَضَرَ يَعْقُوْبَ الْمَوْتُۙ اِذْ قَالَ لِبَنِيْهِ مَا تَعْبُدُوْنَ مِنْۢ بَعْدِيْۗ قَالُوْا نَعْبُدُ اِلٰهَكَ وَاِلٰهَ اٰبَاۤىِٕكَ اِبْرٰهٖمَ وَاِسْمٰعِيْلَ وَاِسْحٰقَ اِلٰهًا وَّاحِدًاۚ وَنَحْنُ لَهٗ مُسْلِمُوْنَ

am kuntum syuhadā'a iż ḥaḍara ya‘qūbal-maut(u), iż qāla libanīhi mā ta‘budūna mim ba‘dī, qālū na‘budu ilāhaka wa ilāha ābā'ika ibrāhīma wa ismā‘īla wa isḥāqa ilāhaw wāḥidā(n), wa naḥnu lahū muslimūn(a).

का रउवां गवाह रहनी जब याकूब के मौत भइल, जब उ अपना बेटा लोग से कहले, "हमरा मरला के बाद रउवां का पूजा करब?" उ लोग जवाब देले, "हमनी के तोहार भगवान अवुरी तोहार पुरखन के भगवान, अर्थात अब्राहम, इस्माइल अवुरी इसहाक, (अर्थात) सर्वशक्तिमान भगवान के पूजा करब अवुरी हमनी के (केवल) उनुका सोझा आत्मसमर्पण करब।"


135
Q.S अल-बकराह के ह (2:135)

وَقَالُوْا كُوْنُوْا هُوْدًا اَوْ نَصٰرٰى تَهْتَدُوْا ۗ قُلْ بَلْ مِلَّةَ اِبْرٰهٖمَ حَنِيْفًا ۗوَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

wa qālū kūnū hūdan au naṣārā tahtadū, qul bal millata ibrāhīma ḥanīfā(n), wa mā kāna minal-musyrikīn(a).

आ ऊ लोग कहल कि, "तू (विश्वासी) यहूदी होखऽ भा ईसाई, तोहनी के मार्गदर्शन जरूर मिली।" कहऽ, "(ना!) लेकिन (हमनी के) अब्राहम के सीधा धर्म के पालन करेनी जा अउर उ परमेश्वर के साथी करे वाला लोग में से ना हउवें।"


136
Q.S अल-बकराह के ह (2:136)

قُوْلُوْٓا اٰمَنَّا بِاللّٰهِ وَمَآ اُنْزِلَ اِلَيْنَا وَمَآ اُنْزِلَ اِلٰٓى اِبْرٰهٖمَ وَاِسْمٰعِيْلَ وَاِسْحٰقَ وَيَعْقُوْبَ وَالْاَسْبَاطِ وَمَآ اُوْتِيَ مُوْسٰى وَعِيْسٰى وَمَآ اُوْتِيَ النَّبِيُّوْنَ مِنْ رَّبِّهِمْۚ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ اَحَدٍ مِّنْهُمْۖ وَنَحْنُ لَهٗ مُسْلِمُوْنَ

qūlū āmannā billāhi wa mā unzila ilainā wa mā unzila ilā ibrāhīma wa ismā‘īla wa isḥāqa wa ya‘qūba wal-asbāṭi wa mā ūtiya mūsā wa ‘īsā wa mā ūtiyan-nabiyyūna mir rabbihim, lā nufarriqu baina aḥadim minhum wa naḥnu lahū muslimūn(a).

कहऽ कि, "हमनी के अल्लाह में आ जवन हमनी पर उतारल गइल बा, आ इब्राहीम, इस्माइल, इसहाक, याकूब आ ओह लोग के वंशज पर जवन उतारल गइल बा, आ मूसा आ ईसा के जवन दिहल गइल रहे आ जवन नबी लोग के ओह लोग के प्रभु से दिहल गइल रहे, ओकरा में विश्वास करेनी जा। हमनी के ओहमें से कवनो के बीच कवनो भेद ना करेनी जा, आ हमनी के उनुका सोझा आत्मसमर्पण कर देनी जा।"


137
Q.S अल-बकराह के ह (2:137)

فَاِنْ اٰمَنُوْا بِمِثْلِ مَآ اٰمَنْتُمْ بِهٖ فَقَدِ اهْتَدَوْا ۚوَاِنْ تَوَلَّوْا فَاِنَّمَا هُمْ فِيْ شِقَاقٍۚ فَسَيَكْفِيْكَهُمُ اللّٰهُ ۚوَهُوَ السَّمِيْعُ الْعَلِيْمُ ۗ

fa'in āmanū bimiṡli mā āmantum bihī faqadihtadau, wa in tawallau fa'innamā hum fī syiqāq(in), fasayakfīkahumullāh(u), wa huwas-samī‘ul-‘alīm(u).

त अगर उ लोग जईसे रउवा मानत बानी ओइसन विश्वास कईले रहित त सचमुच उ लोग के मार्गदर्शन मिलित। लेकिन अगर उ लोग मुड़ गईले, त सचमुच उ लोग (रउरा से दुश्मनी में बाड़े), त अल्लाह आपके (मुहम्मद) के उनुका खाती (अपना मदद से) काफी करीहे। आ ऊ सर्वश्रवण वाला, सर्वज्ञ हवें।


213
Q.S अल-बकराह के ह (2:213)

كَانَ النَّاسُ اُمَّةً وَّاحِدَةً ۗ فَبَعَثَ اللّٰهُ النَّبِيّٖنَ مُبَشِّرِيْنَ وَمُنْذِرِيْنَ ۖ وَاَنْزَلَ مَعَهُمُ الْكِتٰبَ بِالْحَقِّ لِيَحْكُمَ بَيْنَ النَّاسِ فِيْمَا اخْتَلَفُوْا فِيْهِ ۗ وَمَا اخْتَلَفَ فِيْهِ اِلَّا الَّذِيْنَ اُوْتُوْهُ مِنْۢ بَعْدِ مَا جَاۤءَتْهُمُ الْبَيِّنٰتُ بَغْيًا ۢ بَيْنَهُمْ ۚ فَهَدَى اللّٰهُ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لِمَا اخْتَلَفُوْا فِيْهِ مِنَ الْحَقِّ بِاِذْنِهٖ ۗ وَاللّٰهُ يَهْدِيْ مَنْ يَّشَاۤءُ اِلٰى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيْمٍ

kānan-nāsu ummataw wāḥidah(tan), fa ba‘aṡallāhun-nabiyyīna mubasysyirīna wa munżirīn(a), wa anzala ma‘ahumul-kitāba bil-ḥaqqi liyaḥkuma bainan-nāsi fīmakhtalafū fīh(i), wa makhtalafa fīhi illal-lażīna ūtūhu mim ba‘di mā jā'athumul-bayyinātu bagyam bainahum, fahadallāhul-lażīna āmanū limakhtalafū fīhi minal-ḥaqqi bi'iżnih(ī), wallāhu yahdī may yasyā'u ilā ṣirāṭim mustaqīm(in).

इंसान (पहिले) एक लोग रहे। तब अल्लाह नबी (नबी) के भेजले कि उ खुशखबरी अवुरी चेतावनी देवे। आ उ लोग के साथे सच्चाई वाला किताब भेजले, ताकि लोग के बीच ओह मामिला के बारे में फैसला कर सके जवना में उ लोग विवाद करत रहे। आ जे मतभेद करेला ऊ खाली ऊ लोग होला जेकरा के (किताब) दिहल गइल बा, साफ सबूत ओकरा लगे चहुँपला का बाद, आपस में ईर्ष्या का चलते. त अल्लाह अपना मर्जी से ओह सच्चाई के बारे में विश्वास करे वाला लोग के मार्गदर्शन करेले, जवना के बारे में उ लोग विवाद करेला। अल्लाह जेकरा के चाहसु ओकरा के सीधा राह पर ले आवेले।


51
Q.S अली इमरान के ह (3:51)

اِنَّ اللّٰهَ رَبِّيْ وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوْهُ ۗهٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيْمٌ

innallāha rabbī wa rabbukum fa‘budūh(u), hāżā ṣirāṭum mustaqīm(un).

साँचहू अल्लाह हमार रब आ राउर रब हउवें एहसे उनुकर इबादत करीं. इहे सीधा रास्ता ह.”


52
Q.S अली इमरान के ह (3:52)

۞ فَلَمَّآ اَحَسَّ عِيْسٰى مِنْهُمُ الْكُفْرَ قَالَ مَنْ اَنْصَارِيْٓ اِلَى اللّٰهِ ۗ قَالَ الْحَوَارِيُّوْنَ نَحْنُ اَنْصَارُ اللّٰهِ ۚ اٰمَنَّا بِاللّٰهِ ۚ وَاشْهَدْ بِاَنَّا مُسْلِمُوْنَ

falammā aḥassa ‘īsā minhumul-kufra qāla man anṣārī ilallāh(i), qālal-ḥawāriyyūna naḥnu anṣārullāh(i), āmannā billāh(i), wasyhad bi'annā muslimūn(a).

त जब ईसा के ओह लोग के (इजराइल के संतान) के आज्ञा ना माने के एहसास भइल त ऊ कहले कि, "अल्लाह के धर्म के (स्थापत करे) के मददगार के होई?" हरियुन (वफादार दोस्त) जवाब दिहले, "हम अल्लाह के (धार्मिक) मददगार हई। हमनी के अल्लाह में विश्वास करेनी, अवुरी गवाह बानी कि हमनी के मुसलमान हई।"


64
Q.S अली इमरान के ह (3:64)

قُلْ يٰٓاَهْلَ الْكِتٰبِ تَعَالَوْا اِلٰى كَلِمَةٍ سَوَاۤءٍۢ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ اَلَّا نَعْبُدَ اِلَّا اللّٰهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهٖ شَيْـًٔا وَّلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا اَرْبَابًا مِّنْ دُوْنِ اللّٰهِ ۗ فَاِنْ تَوَلَّوْا فَقُوْلُوا اشْهَدُوْا بِاَنَّا مُسْلِمُوْنَ

qul yā ahlal-kitābi ta‘ālau ilā kalimatin sawā'im bainanā wa bainakum allā na‘buda illallāha wa lā nusyrika bihī syai'aw wa lā yattakhiża ba‘ḍunā ba‘ḍan arbābam min dūnillāh(i), fa in tawallau fa qūlusyhadū bi'annā muslimūn(a).

(हे मुहम्मद) कहऽ, "हे किताब के लोग! हमनी आ रउआ लोग के बीच एगो अइसन शब्द पर आ जाईं जवन हमनी के आ रउआ लोग के बीच आम बा: कि हमनी के अल्लाह के अलावा केहू के इबादत ना करीं जा आ उनुका से केहू के शरीफ ना करीं जा, आ हमनी के अल्लाह के अलावा केहू के मालिक ना मानीं जा। अगर उ लोग मुड़ जाव त (उनका से) कह दीं कि "गवाही दीं कि हमनी के मुसलमान हईं जा।"


67
Q.S अली इमरान के ह (3:67)

مَاكَانَ اِبْرٰهِيْمُ يَهُوْدِيًّا وَّلَا نَصْرَانِيًّا وَّلٰكِنْ كَانَ حَنِيْفًا مُّسْلِمًاۗ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

wa mā kāna ibrāhīmu yahūdiyyaw wa lā naṣrāniyyaw wa lākin kāna ḥanīfam muslimā(n), wa mā kāna minal-musyrikīn(a).

इब्राहिम ना त यहूदी रहले ना ईसाई, लेकिन उ सीधा आदमी रहले, मुसलमान रहले अवुरी उ मुश्रिक में से ना रहले।


68
Q.S अली इमरान के ह (3:68)

اِنَّ اَوْلَى النَّاسِ بِاِبْرٰهِيْمَ لَلَّذِيْنَ اتَّبَعُوْهُ وَهٰذَا النَّبِيُّ وَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا ۗ وَاللّٰهُ وَلِيُّ الْمُؤْمِنِيْنَ

inna aulan-nāsi bi'ibrāhīma lal-lażīnattaba‘ūhu wa hāżan-nabiyyu wal-lażīna āmanū, wallāhu waliyyul-mu'minīn(a).

इब्राहीम के सबसे नजदीक के लोग उ लोग हवे जे उनकर पालन करेला, आ ई नबी (मुहम्मद), आ उ लोग जे विश्वास करेला। अल्लाह विश्वास करे वाला लोग के रक्षक हवे


79
Q.S अली इमरान के ह (3:79)

مَا كَانَ لِبَشَرٍ اَنْ يُّؤْتِيَهُ اللّٰهُ الْكِتٰبَ وَالْحُكْمَ وَالنُّبُوَّةَ ثُمَّ يَقُوْلَ لِلنَّاسِ كُوْنُوْا عِبَادًا لِّيْ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ وَلٰكِنْ كُوْنُوْا رَبَّانِيّٖنَ بِمَا كُنْتُمْ تُعَلِّمُوْنَ الْكِتٰبَ وَبِمَا كُنْتُمْ تَدْرُسُوْنَ ۙ

mā kāna libasyarin ay yu'tiyahullāhul-kitāba wal-ḥukma wan-nubuwwata ṡumma yaqūla lin-nāsi kūnū ‘ibādal lī min dūnillāhi wa lākin kūnū rabbāniyyīna bimā kuntum tu‘allimūnal-kitāba wa bimā kuntum tadrusūn(a).

जवना आदमी के अल्लाह किताब देले बाड़े, ओकरा के बुद्धि अवुरी नबी के संगे-संगे, इ संभव नईखे कि उ लोग से कहे कि, “हमरा इबादगी बनो, अल्लाह के इबादगी ना” लेकिन (उ कहतारे कि) “अल्लाह के सेवक बनी, काहेंकी आप किताब के सिखावेनी अवुरी काहेंकी आप एकर अध्ययन करतानी!”


80
Q.S अली इमरान के ह (3:80)

وَلَا يَأْمُرَكُمْ اَنْ تَتَّخِذُوا الْمَلٰۤىِٕكَةَ وَالنَّبِيّٖنَ اَرْبَابًا ۗ اَيَأْمُرُكُمْ بِالْكُفْرِ بَعْدَ اِذْ اَنْتُمْ مُّسْلِمُوْنَ ࣖ

wa lā ya'murakum an tattakhiżul-malā'ikata wan-nabiyyīna arbābā(n), aya'murukum bil-kufri ba‘da iż antum muslimūn(a).

आ ना (ना ओकरा खातिर संभव बा) कि ऊ रउरा के स्वर्गदूत आ भविष्यवक्ता के भगवान बनावे के आदेश दे सके. का उ (उचित) बा कि उ रउआ के मुसलमान बनला के बाद काफिर बने के कहे?


85
Q.S अली इमरान के ह (3:85)

وَمَنْ يَّبْتَغِ غَيْرَ الْاِسْلَامِ دِيْنًا فَلَنْ يُّقْبَلَ مِنْهُۚ وَهُوَ فِى الْاٰخِرَةِ مِنَ الْخٰسِرِيْنَ

wa may yabtagi gairal-islāmi dīnan falay yuqbala minh(u), wa huwa fil-ākhirati minal khāsirīn(a).

आ जे इस्लाम के अलावा कवनो दोसर धर्म के तलाश करी ओकरा के स्वीकार ना कइल जाई आ परलोक में ऊ हारल लोग में शामिल होखी.


95
Q.S अली इमरान के ह (3:95)

قُلْ صَدَقَ اللّٰهُ ۗ فَاتَّبِعُوْا مِلَّةَ اِبْرٰهِيْمَ حَنِيْفًاۗ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

qul ṣadaqallāh(u), fattabi‘ū millata ibrāhīma ḥanīfā(n), wa mā kāna minal-musyrikīn(a).

कह (मुहम्मद) "ई साँच बा (सब कुछ जवन) अल्लाह कहत बाड़े।" त इब्राहीम के सीधा धर्म के पालन करीं, त उ मुश्रिकन में नईखन।


193
Q.S अली इमरान के ह (3:193)

رَبَّنَآ اِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُّنَادِيْ لِلْاِيْمَانِ اَنْ اٰمِنُوْا بِرَبِّكُمْ فَاٰمَنَّا ۖرَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوْبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّاٰتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْاَبْرَارِۚ

rabbanā innanā sami‘nā munādiyay yunādī lil-īmāni an āminū birabbikum fa āmannā, rabbanā fagfir lanā żunūbanā wa kaffir ‘annā sayyi'ātinā wa tawaffanā ma‘al-abrār(i).

हे हमनी के प्रभु, साँचहू हमनी के ओह लोग के सुनले बानी जा जे विश्वास के आह्वान करत रहे, (अर्थात), "अपना प्रभु पर विश्वास करऽ," त हमनी के भी विश्वास कइनी जा। हे हमनी के प्रभु, हमनी के पाप माफ क के हमनी के गलती के मिटा द, अवुरी जे भक्त बाड़े, ओकरा संगे हमनी के मार दे।


125
Q.S अन-निसा के बा (4:125)

وَمَنْ اَحْسَنُ دِيْنًا مِّمَّنْ اَسْلَمَ وَجْهَهٗ لِلّٰهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ وَّاتَّبَعَ مِلَّةَ اِبْرٰهِيْمَ حَنِيْفًا ۗوَاتَّخَذَ اللّٰهُ اِبْرٰهِيْمَ خَلِيْلًا

wa man aḥsanu dīnam mimman aslama wajhahū lillāhi wa huwa muḥsinuw wattaba‘a millata ibrāhīma ḥanīfā(n), wattakhażallāhu ibrāhīma khalīlā(n).

आ अइसन आदमी से बढ़िया धर्म केकर बा जे ईमानदारी से अल्लाह के अधीन हो जाला, जबकि अच्छा काम करत होखे, आ इब्राहीम के सीधा धर्म के पालन करेला? आ अल्लाह इब्राहीम के (अपना) प्रिय बने खातिर चुनले बाड़न।


72
Q.S अल-मैदाह के ह (5:72)

لَقَدْ كَفَرَ الَّذِيْنَ قَالُوْٓا اِنَّ اللّٰهَ هُوَ الْمَسِيْحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۗوَقَالَ الْمَسِيْحُ يٰبَنِيْٓ اِسْرَاۤءِيْلَ اعْبُدُوا اللّٰهَ رَبِّيْ وَرَبَّكُمْ ۗاِنَّهٗ مَنْ يُّشْرِكْ بِاللّٰهِ فَقَدْ حَرَّمَ اللّٰهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَمَأْوٰىهُ النَّارُ ۗوَمَا لِلظّٰلِمِيْنَ مِنْ اَنْصَارٍ

laqad kafaral-lażīna qālū innallāha huwal-masīḥubnu maryam(a), wa qālal-masīḥu yā banī isrā'īla‘budullāha rabbī wa rabbakum, innahū may yusyrik billāhi faqad ḥarramallāhu ‘alaihil-jannata wa ma'wāhun nār(u), wa mā liẓ-ẓālimīna min anṣār(in).

सचहूँ जे लोग कहत बा कि "वास्तव में अल्लाह मरियम के बेटा मसीहा हउवें, ऊ लोग काफिर हो गइल बा." भले ही अल-मसीह (खुद) कहले रहले कि, "हे इजराइल के संतान! अल्लाह, हमार रब अवुरी अपना रब के पूजा करीं।" दरअसल, जे अल्लाह के साथ (कुछ भी चीज़) करेला, त सचमुच अल्लाह ओकरा से स्वर्ग के मना क देले बाड़े अवुरी ओकर जगह नरक बा। आ अन्यायी लोग खातिर कवनो सहायक नइखे.


117
Q.S अल-मैदाह के ह (5:117)

مَا قُلْتُ لَهُمْ اِلَّا مَآ اَمَرْتَنِيْ بِهٖٓ اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ رَبِّيْ وَرَبَّكُمْ ۚوَكُنْتُ عَلَيْهِمْ شَهِيْدًا مَّا دُمْتُ فِيْهِمْ ۚ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِيْ كُنْتَ اَنْتَ الرَّقِيْبَ عَلَيْهِمْ ۗوَاَنْتَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَهِيْدٌ

mā qultu lahum illā mā amartanī bihī ani‘budullāha rabbī wa rabbakum, wa kuntu ‘alaihim syahīdam mā dumtu fīhim, falammā tawaffaitanī kunta antar-raqība ‘alaihim, wa anta ‘alā kulli syai'in syahīd(un).

हम ओह लोग से कबो ना कहनी सिवाय ओह बात के जवन रउरा हमरा के (अर्थात) कहले रहीं कि "अल्लाह, हमरा रब आ अपना रब के पूजा करीं" आ हम ओह लोग का खिलाफ गवाह रहनी, जबले हम ओह लोग में रहनी. त तोहरा हमरा से गुजरला के बाद तू ही ओह लोग के देखरेख करत रहलू। आ तूँ सब चीजन के गवाह हउअ।


14
Q.S अल-अन'अम के ह (6:14)

قُلْ اَغَيْرَ اللّٰهِ اَتَّخِذُ وَلِيًّا فَاطِرِ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ وَهُوَ يُطْعِمُ وَلَا يُطْعَمُ ۗ قُلْ اِنِّيْٓ اُمِرْتُ اَنْ اَكُوْنَ اَوَّلَ مَنْ اَسْلَمَ وَلَا تَكُوْنَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

qul agairallāhi attakhiżu waliyyan fāṭiris-samāwāti wal-arḍi wa huwa yuṭ‘imu wa lā yuṭ‘am(u), qul innī umirtu an akūna awwala man aslama wa lā takūnanna minal-musyrikīn(a).

कह (मुहम्मद) "का हम अल्लाह के अलावा कवनो दोसर रक्षक ले जाईं जे आसमान आ धरती के बनवले बा, भले ऊ खिआवे आ ना खियावे?" कह दीं कि, "वास्तव में हमरा के आदेश दिहल गईल बा कि हम सबसे पहिले (अल्लाह के अधीन) होखब, अवुरी कबहूँ मुश्रिक के समूह में ना शामिल होखब।"


56
Q.S अल-अन'अम के ह (6:56)

قُلْ اِنِّيْ نُهِيْتُ اَنْ اَعْبُدَ الَّذِيْنَ تَدْعُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ ۗ قُلْ لَّآ اَتَّبِعُ اَهْوَاۤءَكُمْۙ قَدْ ضَلَلْتُ اِذًا وَّمَآ اَنَا۠ مِنَ الْمُهْتَدِيْنَ

qul innī nuhītu an a‘budal-lażīna tad‘ūna min dūnillāh(i), qul lā attabi‘u ahwā'akum, qad ḍalaltu iżaw wa mā ana minal-muhtadīn(a).

(हे मुहम्मद) कहऽ, "हमरा से अल्लाह के अलावा जवना देवता लोग के तू पूजत बाड़ू, उनके पूजा करे से मना बा।" कहऽ कि "हम तोहार इच्छा के पालन ना करब। अगर हम अयीसन करब त हम जरूर भटक जाईब, अवुरी हम ओह लोग में ना रहब, जेकरा के मार्गदर्शन कईल जाला।"


74
Q.S अल-अन'अम के ह (6:74)

۞ وَاِذْ قَالَ اِبْرٰهِيْمُ لِاَبِيْهِ اٰزَرَ اَتَتَّخِذُ اَصْنَامًا اٰلِهَةً ۚاِنِّيْٓ اَرٰىكَ وَقَوْمَكَ فِيْ ضَلٰلٍ مُّبِيْنٍ

wa iż qāla ibrāhīmu li'abīhi āzara atattakhiżu aṣnāman ālihah(tan), innī arāka wa qaumaka fī ḍalālim mubīn(in).

आ (याद) जब इब्राहिम अपना पिता अजर से कहले, "का तोहरा खातिर ओह मूर्तियन के देवता बनावल उचित बा? साँचहू हम तोहरा आ तोहरा लोग के साफ गलती में देखत बानी."


79
Q.S अल-अन'अम के ह (6:79)

اِنِّيْ وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِيْ فَطَرَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ حَنِيْفًا وَّمَآ اَنَا۠ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَۚ

innī wajjahtu wajhiya lil-lażī faṭaras-samāwāti wal-arḍa ḥanīfaw wa mā ana minal-musyrikīn(a).

हम आपन मुँह (अल्लाह) के ओर घुमावत बानी जे सच्चे धर्म के पूरा अधीनता (पालन) के साथ आसमान आ धरती के रचना कइले बाड़न, आ हम मुश्रिकन में से ना हईं।


161
Q.S अल-अन'अम के ह (6:161)

قُلْ اِنَّنِيْ هَدٰىنِيْ رَبِّيْٓ اِلٰى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيْمٍ ەۚ دِيْنًا قِيَمًا مِّلَّةَ اِبْرٰهِيْمَ حَنِيْفًاۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

qul innanī hadānī rabbī ilā ṣirāṭim mustaqīm(in), dīnan qiyamam millata ibrāhīma ḥanīfā(n), wa mā kāna minal-musyrikīn(a).

कह (मुहम्मद), "वास्तव में हमार रब हमरा के इब्राहीम के सीधा रास्ता, सच्चा धर्म, सीधा धर्म के ओर ले गईल बाड़े। उ (इब्राहिम) मुश्रिक में से नईखन।"


59
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:59)

لَقَدْ اَرْسَلْنَا نُوْحًا اِلٰى قَوْمِهٖ فَقَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗۗ اِنِّيْٓ اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيْمٍ

laqad arsalnā nūḥan ilā qaumihī fa qāla yā qaumi‘budullāha mā lakum min ilāhin gairuh(ū), innī akhāfu ‘alaikum ‘ażāba yaumin ‘aẓīm(in).

साँचहू हमनी के नूह के अपना लोग के लगे भेजले बानी जा, फिर उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं! उनुका सिवाय आपके खाती कवनो देवता (इबादत) नईखे। सचमुच हमरा डर बा कि भयानक दिन (कयामत) प आपके सजा के तड़प हो जाई।"


65
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:65)

۞ وَاِلٰى عَادٍ اَخَاهُمْ هُوْدًاۗ قَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗۗ اَفَلَا تَتَّقُوْنَ

wa ilā ‘ādin akhāḥum hūdā(n), qāla yā qaumi‘budullāha mā lakum min ilāhin gairuh(ū), afalā tattaqūn(a).

आ अद के लोग के (हम भेजनी) हुद, उनकर भाई। उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं! आपके खाती उनुका अलावे कवनो देवता (इबादत) नईखे। त आप अल्लाह से काहें नईखी डेरात?"


70
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:70)

قَالُوْٓا اَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اللّٰهَ وَحْدَهٗ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ اٰبَاۤؤُنَاۚ فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصّٰدِقِيْنَ

qālū aji'tanā lina‘budallāha waḥdahū wa nażara mā kāna ya‘budu ābā'unā, fa'tinā bimā ta‘idunā in kunta minaṣ ṣādiqīn(a).

उ लोग कहल कि, "का रउआ हमनी के लगे अकेले अल्लाह के इबादत करे आईल बानी अवुरी हमनी के पुरखा जवन इबादत करत रहले, ओकरा के छोड़ देले बानी? त हमनी के आपन धमकी साबित क दिही, जदी आप सच्चा बानी त!"


73
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:73)

وَاِلٰى ثَمُوْدَ اَخَاهُمْ صٰلِحًاۘ قَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗۗ قَدْ جَاۤءَتْكُمْ بَيِّنَةٌ مِّنْ رَّبِّكُمْۗ هٰذِهٖ نَاقَةُ اللّٰهِ لَكُمْ اٰيَةً فَذَرُوْهَا تَأْكُلْ فِيْٓ اَرْضِ اللّٰهِ وَلَا تَمَسُّوْهَا بِسُوْۤءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ اَلِيْمٌ

wa ilā ṡamūda akhāhum ṣāliḥā(n), qāla yā qaumi‘budullāha mā lakum min ilāhin gairuh(ū), qad jā'atkum bayyinatum mir rabbikum, hāżihī nāqatullāhi lakum āyatan fa żarūhā ta'kul fī arḍillāhi wa lā tamassūhā bisū'in fa ya'khużakum ‘ażābun alīm(un).

आ समुद के लोग के (हम भेजनी) उनकर भाई सालेह। उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं! उनुका अलावे आपके खाती कवनो भगवान (इबादत) नईखे। सचमुच आपके रब के ओर से आपके लगे एगो साफ सबूत आईल बा। अल्लाह के ओर से मिलल इ (क) ऊंट आपके खाती एगो निशानी बा। एकरा के अल्लाह के धरती प खाए दीं, ओकरा के नुकसान मत पहुंचाईं, ना त एकरा नतीजा में आपके दर्दनाक अतवार के सामना करे के पड़ी।"


85
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:85)

وَاِلٰى مَدْيَنَ اَخَاهُمْ شُعَيْبًاۗ قَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗۗ قَدْ جَاۤءَتْكُمْ بَيِّنَةٌ مِّنْ رَّبِّكُمْ فَاَوْفُوا الْكَيْلَ وَالْمِيْزَانَ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ اَشْيَاۤءَهُمْ وَلَا تُفْسِدُوْا فِى الْاَرْضِ بَعْدَ اِصْلَاحِهَاۗ ذٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ اِنْ كُنْتُمْ مُّؤْمِنِيْنَۚ

wa ilā madyana akhāhum syu‘aibā(n), qāla yā qaumi‘budullāha mā lakum min ilāhin gairuh(ū), qad jā'atkum bayyinatum mir rabbikum fa auful-kaila wal-mīzāna wa lā tabkhasun-nāsa asy-yā'ahum wa lā tufsidū fil-arḍi ba‘da iṣlāḥihā, żālikum khairul lakum in kuntum mu'minīn(a).

आ मद्यन के लोग के हमनी के (पेजनी जा) शुएब, उनकर आपन भाई। उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं। उनुका अलावे आपके खाती कवनो भगवान (इबादत) नईखन। सचमुच आपके रब के ओर से आपके सोझा साफ सबूत आईल बा। नाप अवुरी तराजू के सिद्ध करीं, अवुरी केहु के तनको नुकसान मत पहुंचाईं। धरती के ठीक से (रचल) के बाद ओकरा के नुकसान मत पहुंचाईं। इ आपके खाती बेहतर बा, जदी आप मुसलमान बानी।"


138
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:138)

وَجَاوَزْنَا بِبَنِيْٓ اِسْرَاۤءِيْلَ الْبَحْرَ فَاَتَوْا عَلٰى قَوْمٍ يَّعْكُفُوْنَ عَلٰٓى اَصْنَامٍ لَّهُمْ ۚقَالُوْا يٰمُوْسَى اجْعَلْ لَّنَآ اِلٰهًا كَمَا لَهُمْ اٰلِهَةٌ ۗقَالَ اِنَّكُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُوْنَ

wa jāwaznā bibanī isrā'īlal-baḥra fa atau ‘alā qaumiy ya‘kufūna ‘alā aṣnāmil lahum, qālū yā mūsaj‘al lanā ilāhan kamā lahum ālihah(tun), qāla innakum qaumun tajhalūn(a).

आ हमनी के ओह समुंदर (लाल सागर के उत्तरी हिस्सा) के पार इस्राएल के संतान के बचा लिहनी जा। जब उ लोग एगो अइसन लोग के लगे पहुंचले जवन मूर्ति के पूजा करत रहे त उ लोग (इस्राएल के संतान) कहले, "हे मूसा! हमनी खातिर एगो देवता (मूर्ति) बनाई, काहेंकी ओ लोग के कई गो देवता (मूर्ति) बाड़े।" (मूसा) जवाब दिहलन, “वास्तव में, तू लोग मूर्ख लोग हउअ।”


140
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:140)

قَالَ اَغَيْرَ اللّٰهِ اَبْغِيْكُمْ اِلٰهًا وَّهُوَ فَضَّلَكُمْ عَلَى الْعٰلَمِيْنَ

qāla agairallāhi abgīkum ilāhaw wa huwa faḍḍalakum ‘alal-‘ālamīn(a).

उ (मूसा) कहले कि, "का हमरा खाती अल्लाह के अलावे आपके खाती कवनो देवता के खोजल उचित बा, भले ही उहे आपके (ओह समय) सभ लोग से प्राथमिकता देले बाड़े।"


31
Q.S अत-तवबाह के बा (9:31)

اِتَّخَذُوْٓا اَحْبَارَهُمْ وَرُهْبَانَهُمْ اَرْبَابًا مِّنْ دُوْنِ اللّٰهِ وَالْمَسِيْحَ ابْنَ مَرْيَمَۚ وَمَآ اُمِرُوْٓا اِلَّا لِيَعْبُدُوْٓا اِلٰهًا وَّاحِدًاۚ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَۗ سُبْحٰنَهٗ عَمَّا يُشْرِكُوْنَ

ittakhażū aḥbārahum wa ruhbānahum arbābam min dūnillāhi wal-masīḥabna maryam(a), wa mā umirū illā liya‘budū ilāhaw wāḥidā(n), lā ilāha illā huw(a), subḥānahū ‘ammā yusyrikūn(a).

ऊ लोग धर्मात्मा लोग (यहूदी), आ ओह लोग के भिक्षु लोग (ईसाई) के अल्लाह के अलावा देवता बना दिहल, आ (इहो) मरियम के बेटा मसीहा के; भले ही ओह लोग के खाली सर्वशक्तिमान भगवान के पूजा करे के कहल गइल होखे; उनकरा अलावा कवनो देवता नइखे। एक दूसरा से जवन जोड़त बाड़े ओकरा से उनुकर महिमा होखे।


104
Q.S योना के ह (10:104)

قُلْ يٰٓاَيُّهَا النَّاسُ اِنْ كُنْتُمْ فِيْ شَكٍّ مِّنْ دِيْنِيْ فَلَآ اَعْبُدُ الَّذِيْنَ تَعْبُدُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ وَلٰكِنْ اَعْبُدُ اللّٰهَ الَّذِيْ يَتَوَفّٰىكُمْ ۖ وَاُمِرْتُ اَنْ اَكُوْنَ مِنَ الْمُؤْمِنِيْنَۙ

qul yā ayyuhan nāsu in kuntum fī syakkim min dīnī falā a‘budul-lażīna ta‘budūna min dūnillāhi wa lākin a‘budullāhal-lażī yatawaffākum, wa umirtu an akūna minal-mu'minīn(a).

कह (हे मुहम्मद) "हे इंसान! अगर रउआ अभी भी हमरा धर्म पर संदेह बा, त (जान लीं कि) हम अल्लाह के अलावा ओह लोग के इबादत ना करेनी जेकरा के रउआ इबादत करेनी, बल्कि हम अल्लाह के इबादत करेनी जे रउआ के मरवा दिहे, आ हमरा के इमानदारन में शामिल होखे के आदेश दिहल गइल बा।"


2
Q.S ओढ़नी (11:2)

اَلَّا تَعْبُدُوْٓا اِلَّا اللّٰهَ ۗاِنَّنِيْ لَكُمْ مِّنْهُ نَذِيْرٌ وَّبَشِيْرٌۙ

allā ta‘budū illallāh(a), innanī lakum minhu nażīruw wa basyīr(un).

ताकि आप अल्लाह के अलावा केहु के इबादत ना करीं। सचमुच हम (मुहम्मद) एगो चेतावनी देवे वाला अवुरी उनुका से रउआ तक के खुशखबरी देवे वाला हई।


26
Q.S ओढ़नी (11:26)

اَنْ لَّا تَعْبُدُوْٓا اِلَّا اللّٰهَ ۖاِنِّيْٓ اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ اَلِيْمٍ

allā ta‘budū illallāh(a), innī akhāfu ‘alaikum ‘ażāba yaumin alīm(in).

ताकि आप अल्लाह के अलावा केहु के इबादत ना करीं। हमरा साँचहू डर बा कि रउरा बहुते दर्दनाक दिन पर सजा के चोट लाग जाई.”


50
Q.S ओढ़नी (11:50)

وَاِلٰى عَادٍ اَخَاهُمْ هُوْدًا ۗقَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗ ۗاِنْ اَنْتُمْ اِلَّا مُفْتَرُوْنَ

wa ilā ‘ādin akhāhum hūdā(n), qāla yā qaumi‘budullāha mā lakum min ilāhin gairuh(ū), in antum illā muftarūn(a).

आ अद के लोग के (हम भेजनी) उनकर भाई हुद। उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं, आपके अलावे कवनो देवता नईखन। (एतना समय) आप सिर्फ बात बना लेले बानी।"


61
Q.S ओढ़नी (11:61)

۞ وَاِلٰى ثَمُوْدَ اَخَاهُمْ صٰلِحًا ۘ قَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗ ۗهُوَ اَنْشَاَكُمْ مِّنَ الْاَرْضِ وَاسْتَعْمَرَكُمْ فِيْهَا فَاسْتَغْفِرُوْهُ ثُمَّ تُوْبُوْٓا اِلَيْهِ ۗاِنَّ رَبِّيْ قَرِيْبٌ مُّجِيْبٌ

wa ilā ṡamūda akhāhum ṣālihā(n), qāla yā qaumi‘budullāḥa mā lakum min ilāhin gairuh(ū), huwa ansya'akum minal-arḍi wasta‘marakum fīhā fastagfirūhu ṡumma tūbū ilaih(i), inna rabbī qarībum mujīb(un).

आ समुद के (हम भेजनी) ओह लोग के भाई सालेह। उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं, आपके अलावे कवनो भगवान नईखन। उ आपके धरती (माटी) से बनवले बाड़े अवुरी आपके समृद्ध कईले बाड़े, एहसे उनुका से माफी मांगी, फेर उनुका से पश्चाताप करीं। सचमुच हमार रब (उनुकर दया) बहुत नजदीक बाड़े अवुरी (अपना सेवकन के दुआ) के कबूल करतारे।"


84
Q.S ओढ़नी (11:84)

۞ وَاِلٰى مَدْيَنَ اَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۗقَالَ يٰقَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرُهٗ ۗوَلَا تَنْقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيْزَانَ اِنِّيْٓ اَرٰىكُمْ بِخَيْرٍ وَّاِنِّيْٓ اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيْطٍ

wa ilā madyana akhāhum syu‘aibā(n), qāla yā qaumi‘budullāha mā lakum min ilāhin gairuh(ū), wa lā tanquṣul-mikyāla wal-mīzāna innī arākum bikhairiw wa innī akhāfu ‘alaikum ‘ażāba yaumim muḥīṭ(in).

आ मद्यन के (लोग) के (हमनी के भेजनी) उनकर भाई शुएब। उ कहले कि, "हे हमार लोग! अल्लाह के इबादत करीं, आपके अलावे कवनो भगवान नईखन। अवुरी नाप अवुरी तराजू के कम मत करीं। सचमुच हम आपके हालत निमन (समृद्ध) में देखतानी। अवुरी सचमुच हमरा डर बा कि विनाश के दिन (कयामत) के दिन आपके सजा होई।


37
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:37)

قَالَ لَا يَأْتِيْكُمَا طَعَامٌ تُرْزَقٰنِهٖٓ اِلَّا نَبَّأْتُكُمَا بِتَأْوِيْلِهٖ قَبْلَ اَنْ يَّأْتِيَكُمَا ۗذٰلِكُمَا مِمَّا عَلَّمَنِيْ رَبِّيْۗ اِنِّيْ تَرَكْتُ مِلَّةَ قَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُوْنَ بِاللّٰهِ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ هُمْ كٰفِرُوْنَۙ

qāla lā ya'tīkumā ṭa‘āmun turzaqānihī illā nabba'tukumā bita'wīlihī qabla ay ya'tiyakumā, żālikumā mimmā ‘allamanī rabbī, innī taraktu millata qaumil lā yu'minūna billāhi wa hum bil-ākhirati hum kāfirūn(a).

उ (यूसुफ) कहले कि, "रउआ दुनो के जवन भी खाना दिहल जाई, हम तकविल के समझावे में कामयाब हो गईल बानी, (खाना) आपके लगे पहुंचे से पहिले। इहे भगवान हमरा के सिखवले के हिस्सा ह। असल में हम ओ लोग के धर्म छोड़ देले बानी, जवन कि अल्लाह में विश्वास ना करेले, असल में उ लोग परलोक में विश्वास ना करेले।"


38
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:38)

وَاتَّبَعْتُ مِلَّةَ اٰبَاۤءِيْٓ اِبْرٰهِيْمَ وَاِسْحٰقَ وَيَعْقُوْبَۗ مَا كَانَ لَنَآ اَنْ نُّشْرِكَ بِاللّٰهِ مِنْ شَيْءٍۗ ذٰلِكَ مِنْ فَضْلِ اللّٰهِ عَلَيْنَا وَعَلَى النَّاسِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُوْنَ

wattaba‘tu millata ābā'ī ibrāhīma wa isḥāqa wa ya‘qūb(a), mā kāna lanā an nusyrika billāhi min syai'(in), żālika min faḍlillāhi ‘alainā wa ‘alan-nāsi wa lākinna akṡaran-nāsi lā yasykurūn(a).

आ हम अपना पुरखन के धर्म के पालन करेनी: अब्राहम, इसहाक आ याकूब। हमनी के (नबी लोग) खातिर अल्लाह से कवनो चीज़ के शरीर बनावल उचित नईखे। ई अल्लाह के कृपा से हमनी पर आ इंसानन (सब) पर बा; बाकिर अधिकतर लोग आभारी ना होखे


39
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:39)

يٰصَاحِبَيِ السِّجْنِ ءَاَرْبَابٌ مُّتَفَرِّقُوْنَ خَيْرٌ اَمِ اللّٰهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُۗ

yā ṣāḥibayis-sijni a'arbābum mutafarriqūna khairun amillāhul-wāḥidul-qahhār(u).

हे जेल के दू गो कैदी लोग! कवन नीमन, विभिन्न देवता भा सर्वशक्तिमान, सर्वशक्तिमान भगवान?


40
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:40)

مَا تَعْبُدُوْنَ مِنْ دُوْنِهٖٓ اِلَّآ اَسْمَاۤءً سَمَّيْتُمُوْهَآ اَنْتُمْ وَاٰبَاۤؤُكُمْ مَّآ اَنْزَلَ اللّٰهُ بِهَا مِنْ سُلْطٰنٍۗ اِنِ الْحُكْمُ اِلَّا لِلّٰهِ ۗاَمَرَ اَلَّا تَعْبُدُوْٓا اِلَّآ اِيَّاهُ ۗذٰلِكَ الدِّيْنُ الْقَيِّمُ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُوْنَ

mā ta‘budūna min dūnihī illā asmā'an sammaitumūhā antum wa ābā'ukum mā anzalallāhu bihā min sulṭān(in), inil-ḥukmu illā lillāh(i), amara allā ta‘budū illā iyyāh(u), żālikad-dīnul-qayyimu wa lākinna akṡaran-nāsi lā ya‘lamūn(a).

उनुका अलावा रउरा जवन पूजत बानी ऊ खाली रउरा आविष्कारित नाम ह, रउरा आ रउरा पुरखा लोग के. अल्लाह इनका बारे में कवनो अधिकार नईखन भेजले। फैसला अकेले अल्लाह के ह। उ आज्ञा देले बाड़े कि तू उनुका अलावे केहु के पूजा मत करीं। उहे सही धर्म ह, लेकिन अधिकांश लोग के पता नईखे।


108
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:108)

قُلْ هٰذِهٖ سَبِيْلِيْٓ اَدْعُوْٓا اِلَى اللّٰهِ ۗعَلٰى بَصِيْرَةٍ اَنَا۠ وَمَنِ اتَّبَعَنِيْ ۗوَسُبْحٰنَ اللّٰهِ وَمَآ اَنَا۠ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

qul hāżihī sabīlī ad‘ū ilallāh(i), ‘alā baṣīratin ana wa manittaba‘anī, wa subḥānallāhi wa mā ana minal-musyrikīn(a).

कह (हे मुहम्मद) “हमार रास्ता इहे ह: हम अल्लाह के पुकारत बानी, हम आ हमरा पीछे चले वाला लोग के निश्चिंतता से, महिमा अल्लाह के होखे, आ हम मुश्रिकन में से ना हईं.”


36
Q.S अर-रा'द के बा (13:36)

وَالَّذِيْنَ اٰتَيْنٰهُمُ الْكِتٰبَ يَفْرَحُوْنَ بِمَآ اُنْزِلَ اِلَيْكَ وَمِنَ الْاَحْزَابِ مَنْ يُّنْكِرُ بَعْضَهٗ ۗ قُلْ اِنَّمَآ اُمِرْتُ اَنْ اَعْبُدَ اللّٰهَ وَلَآ اُشْرِكَ بِهٖ ۗاِلَيْهِ اَدْعُوْا وَاِلَيْهِ مَاٰبِ

wal-lażīna ātaināhumul-kitāba yafraḥūna bimā unzila ilaika wa minal-aḥzābi may yunkiru ba‘ḍah(ū), qul innamā umirtu an a‘budallāha wa lā usyrika bih(ī), ilaihi ad‘ū wa ilaihi ma'āb(i).

आ जेकरा के हमनी के किताब देले बानी जा, उ लोग रउआ (हे मुहम्मद) के सामने जवन उतारल गईल बा, ओकरा से खुश बाड़े, अवुरी कुछ (यहूदी अवुरी ईसाई) बाड़े जवन कि एकरा में से कुछ के नकारत बाड़े। कह दीं कि, "हमरा के खाली अल्लाह के इबादत करे के आदेश दिहल गईल बा अवुरी उनुका से कवनो बात ना करे के। उनुका लगे हम (लोग) के बोलावेनी अवुरी उनुका लगे लवटत बानी।"


35
Q.S इब्राहिम के ह (14:35)

وَاِذْ قَالَ اِبْرٰهِيْمُ رَبِّ اجْعَلْ هٰذَا الْبَلَدَ اٰمِنًا وَّاجْنُبْنِيْ وَبَنِيَّ اَنْ نَّعْبُدَ الْاَصْنَامَ ۗ

wa iż qāla ibrāhīmu rabbij‘al hāżal-balada āminaw wajnubnī wa baniyya an na‘budal-aṣnām(a).

आ (याद) जब इब्राहीम प्रार्थना कइलन कि, "हे भगवान, एह देश (मक्का) के सुरक्षित देश बनाईं आ हमरा आ हमरा लइकन आ पोतन के मूर्ति के पूजा करे से बचाईं।"


2
Q.S एन-नहल के बा (16:2)

يُنَزِّلُ الْمَلٰۤىِٕكَةَ بِالرُّوْحِ مِنْ اَمْرِهٖ عَلٰى مَنْ يَّشَاۤءُ مِنْ عِبَادِهٖٓ اَنْ اَنْذِرُوْٓا اَنَّهٗ لَآ اِلٰهَ اِلَّآ اَنَا۠ فَاتَّقُوْنِ

yunazzilul-malā'ikata bir-rūḥi min amrihī ‘alā may yasyā'u min ‘ibādihī an anżirū annahū lā ilāha illā ana fattaqūn(i).

उ अपना आज्ञा के संगे प्रकटीकरण ले आवे वाला स्वर्गदूतन भेजले, जेकरा के उ अपना सेवकन के बीच से चाहत रहले, (कह के), अर्थात, "(हमार सेवक के) याद दिआव कि हमरा अलावे कवनो देवता नईखन, एहसे तू हमरा से डेराए के चाही।"


36
Q.S एन-नहल के बा (16:36)

وَلَقَدْ بَعَثْنَا فِيْ كُلِّ اُمَّةٍ رَّسُوْلًا اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ وَاجْتَنِبُوا الطَّاغُوْتَۚ فَمِنْهُمْ مَّنْ هَدَى اللّٰهُ وَمِنْهُمْ مَّنْ حَقَّتْ عَلَيْهِ الضَّلٰلَةُ ۗ فَسِيْرُوْا فِى الْاَرْضِ فَانْظُرُوْا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِيْنَ

wa laqad ba‘aṡnā fī kulli ummatir rasūlan ani‘budullāha wajtanibuṭ-ṭāgūt(a), fa minhum man hadallāhu wa minhum man ḥaqqat ‘alaihiḍ-ḍalālah(tu), fa sīrū fil-arḍi fanẓurū kaifa kāna ‘āqibatul-mukażżibīn(a).

आ साँचहू हमनी के हर राष्ट्र में एगो दूत भेजले बानी जा (बोलावे खातिर), "अल्लाह के इबादत करीं, आ निंदा से दूर रहीं", तब ओहमें से अइसनो लोग बा जेकरा के अल्लाह के मार्गदर्शन मिलल बा आ अइसनो लोग बा जे गलती में बनल बा. त धरती पर चलीं आ देखीं कि इनकार करे वाला (प्रेरित) लोग के अंत कइसे होला।