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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak dan Adab Akhlak Akhlak Mulia Bersyukur

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कुल आयत : 21
152
Q.S अल-बकराह के ह (2:152)

فَاذْكُرُوْنِيْٓ اَذْكُرْكُمْ وَاشْكُرُوْا لِيْ وَلَا تَكْفُرُوْنِ ࣖ

fażkurūnī ażkurkum wasykurū lī wa lā takfurūn(i).

त हमरा के याद करीं, हम तोहरा के याद करब। हमरा के धन्यवाद दीं आ हमरा पर अविश्वास मत करीं।


172
Q.S अल-बकराह के ह (2:172)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا كُلُوْا مِنْ طَيِّبٰتِ مَا رَزَقْنٰكُمْ وَاشْكُرُوْا لِلّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ اِيَّاهُ تَعْبُدُوْنَ

yā ayyuhal-lażīna āmanū kulū min ṭayyibāti mā razaqnākum wasykurū lillāhi in kuntum iyyāhu ta‘budūn(a).

हे विश्वास करे वाला लोग! हमनी के जवन अच्छा रिज़्ज़ट देले बानी जा, ओकरा में से खाईं अवुरी अल्लाह के शुक्रगुजार करीं, अगर आप सिर्फ उनुकर इबादत करीं।


239
Q.S अल-बकराह के ह (2:239)

فَاِنْ خِفْتُمْ فَرِجَالًا اَوْ رُكْبَانًا ۚ فَاِذَآ اَمِنْتُمْ فَاذْكُرُوا اللّٰهَ كَمَا عَلَّمَكُمْ مَّا لَمْ تَكُوْنُوْا تَعْلَمُوْنَ

fa'in khiftum farijālan au rukbānā(n), fa'iżā amintum fażkurullāha kamā ‘allamakum mā lam takūnū ta‘lamūn(a).

अगर डर (खतरा) बा त चलत-चलत भा सवारी करत नमाज करीं। फिर जब रउआ सुरक्षित होखब त अल्लाह (नमाज) के याद करीं, काहे कि उ रउआ के उहे सिखवले बाड़े जवन रउआ ना जानत रहनी।


43
Q.S अली इमरान के ह (3:43)

يٰمَرْيَمُ اقْنُتِيْ لِرَبِّكِ وَاسْجُدِيْ وَارْكَعِيْ مَعَ الرّٰكِعِيْنَ

yā maryamuqnutī lirabbiki wasjudī warka‘ī ma‘ar-rāki‘īn(a).

हे मरियम ! अपना प्रभु के आज्ञा मानीं, प्रणाम करे वाला लोग के साथे सजदा करीं आ प्रणाम करीं।"


123
Q.S अली इमरान के ह (3:123)

وَلَقَدْ نَصَرَكُمُ اللّٰهُ بِبَدْرٍ وَّاَنْتُمْ اَذِلَّةٌ ۚ فَاتَّقُوا اللّٰهَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

wa laqad naṣarakumullāhu bibadriw wa antum ażillah(tun), fattaqullāha la‘allakum tasykurūn(a).

आ साँचहू बदर के लड़ाई में अल्लाह रउरा के मदद कइले, भले रउरा कमजोर रहीं. एह से अल्लाह से डेराईं, ताकि आप उनकर आभारी रहीं।


144
Q.S अली इमरान के ह (3:144)

وَمَا مُحَمَّدٌ اِلَّا رَسُوْلٌۚ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِ الرُّسُلُ ۗ اَفَا۟ىِٕنْ مَّاتَ اَوْ قُتِلَ انْقَلَبْتُمْ عَلٰٓى اَعْقَابِكُمْ ۗ وَمَنْ يَّنْقَلِبْ عَلٰى عَقِبَيْهِ فَلَنْ يَّضُرَّ اللّٰهَ شَيْـًٔا ۗوَسَيَجْزِى اللّٰهُ الشّٰكِرِيْنَ

wa mā muḥammadun illā rasūl(un), qad khalat min qablihir-rusul(u), afa'im māta au qutilanqalabtum ‘alā a‘qābikum, wa may yanqalib ‘alā ‘aqibaihi falay yaḍurrallāha syai'ā(n), wa sayajzillāhusy-syākirīn(a).

आ मुहम्मद खाली एगो रसूलुल्लाह रहले; एकरा से पहिले कई गो प्रेरित लोग के निधन हो चुकल रहे। अगर उ मर जाई भा मारल जाई त का रउवा पीछे मुड़ जाईब (धर्मत्यागी)? जे पीछे मुड़ जाई उ अल्लाह के तनिको नुकसान ना करी। अल्लाह ओह लोग के इनाम दिहे जे आभारी होई।


145
Q.S अली इमरान के ह (3:145)

وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ اَنْ تَمُوْتَ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِ كِتٰبًا مُّؤَجَّلًا ۗ وَمَنْ يُّرِدْ ثَوَابَ الدُّنْيَا نُؤْتِهٖ مِنْهَاۚ وَمَنْ يُّرِدْ ثَوَابَ الْاٰخِرَةِ نُؤْتِهٖ مِنْهَا ۗ وَسَنَجْزِى الشّٰكِرِيْنَ

wa mā kāna linafsin an tamūta illā bi'iżnillāhi kitābam mu'ajjalā(n), wa may yurid ṡawābad-dun-yā nu'tihī minhā, wa may yurid ṡawābal-ākhirati nu'tihī minhā, wa sanajzisy-syākirīn(a).

आ हर जीव अल्लाह के अनुमति के छोड़ के ना मर पाई, पहिले से तय समय के रूप में। जेकरा दुनिया के इनाम के इच्छा होई, हमनी के ओकरा के उ (संसारिक) इनाम जरूर देब जा, अवुरी जे परलोक के इनाम के इच्छा करी, ओकरा के हमनी के उ (परलोक) इनाम देब, अवुरी जे कृतज्ञ बा, ओकरा के हमनी के इनाम देब।


6
Q.S अल-मैदाह के ह (5:6)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اِذَا قُمْتُمْ اِلَى الصَّلٰوةِ فَاغْسِلُوْا وُجُوْهَكُمْ وَاَيْدِيَكُمْ اِلَى الْمَرَافِقِ وَامْسَحُوْا بِرُءُوْسِكُمْ وَاَرْجُلَكُمْ اِلَى الْكَعْبَيْنِۗ وَاِنْ كُنْتُمْ جُنُبًا فَاطَّهَّرُوْاۗ وَاِنْ كُنْتُمْ مَّرْضٰٓى اَوْ عَلٰى سَفَرٍ اَوْ جَاۤءَ اَحَدٌ مِّنْكُمْ مِّنَ الْغَاۤىِٕطِ اَوْ لٰمَسْتُمُ النِّسَاۤءَ فَلَمْ تَجِدُوْا مَاۤءً فَتَيَمَّمُوْا صَعِيْدًا طَيِّبًا فَامْسَحُوْا بِوُجُوْهِكُمْ وَاَيْدِيْكُمْ مِّنْهُ ۗمَا يُرِيْدُ اللّٰهُ لِيَجْعَلَ عَلَيْكُمْ مِّنْ حَرَجٍ وَّلٰكِنْ يُّرِيْدُ لِيُطَهِّرَكُمْ وَلِيُتِمَّ نِعْمَتَهٗ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

yā ayyuhal-lażīna āmanū iżā qumtum ilaṣ-ṣalāti fagsilū wujūhakum wa aidiyakum ilal-marāfiqi wamsaḥū biru'ūsikum wa arjulakum ilal-ka‘bain(i), wa in kuntum junuban faṭṭahharū, wa in kuntum marḍā au ‘alā safarin au jā'a aḥadum minkum minal-gā'iṭi au lāmastumun-nisā'a falam tajidū mā'an fa tayammamū ṣa‘īdan ṭayyiban famsaḥū biwujūhikum wa aidīkum minh(u), mā yurīdullāhu liyaj‘ala ‘alaikum min ḥarajiw wa lākiy yurīdu liyuṭahhirakum wa liyutimma na‘matahū ‘alaikum la‘allakum tasykurūn(a).

हे विश्वास करे वाला लोग! जब रउवा नमाज पढ़े के होखे त कोहनी तक आपन चेहरा आ हाथ धो लीं, आ आपन माथा झाड़ के आ गोड़ (धो के) टखने तक (वुधु) करीं। अगर जुनब बानी त नहा लीं। आ अगर रउरा बेमार बानी भा यात्रा पर बानी भा शौचालय से लवटत बानी भा कवनो मेहरारू के छूवत बानी त अगर पानी ना मिलल त बढ़िया (शुद्ध) धूल से तयमुम करीं; ओकरा (धूल) से आपन चेहरा आ हाथ पोंछ लीं। अल्लाह रउरा खातिर काम मुश्किल ना बनावल चाहत बाड़न बाकिर रउरा के साफ कइल चाहत बाड़न आ रउरा पर आपन बरकत पूरा कइल चाहत बाड़न, जेहसे कि रउरा आभारी रहीं.


89
Q.S अल-मैदाह के ह (5:89)

لَا يُؤَاخِذُكُمُ اللّٰهُ بِاللَّغْوِ فِيْٓ اَيْمَانِكُمْ وَلٰكِنْ يُّؤَاخِذُكُمْ بِمَا عَقَّدْتُّمُ الْاَيْمَانَۚ فَكَفَّارَتُهٗٓ اِطْعَامُ عَشَرَةِ مَسٰكِيْنَ مِنْ اَوْسَطِ مَا تُطْعِمُوْنَ اَهْلِيْكُمْ اَوْ كِسْوَتُهُمْ اَوْ تَحْرِيْرُ رَقَبَةٍ ۗفَمَنْ لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلٰثَةِ اَيَّامٍ ۗذٰلِكَ كَفَّارَةُ اَيْمَانِكُمْ اِذَا حَلَفْتُمْ ۗوَاحْفَظُوْٓا اَيْمَانَكُمْ ۗ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمْ اٰيٰتِهٖ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

lā yu'ākhiżukumullāhu bil-lagwi fī aimānikum wa lākiy yu'ākhiżukum bimā ‘aqqattumul-aimān(a), fa kaffāratuhū iṭ‘āmu ‘asyarati masākīna min ausaṭi mā tuṭ‘imūna ahlīkum au kiswatuhum au taḥrīru raqabah(tin), famal lam yajid fa ṣiyāmu ṡalāṡati ayyām(in), żālika kaffāratu aimānikum iżā ḥalaftum, waḥfaẓū aimānakum, każālika yubayyinullāhu lakum āyātihī la‘allakum tasykurūn(a).

अल्लाह रउरा के रउरा अनजाने में कइल मन्नत (कसम के) के चलते सजा ना देला, बलुक रउरा जानबूझ के किरिया खाए के चलते सजा देला, एहसे कफरत (कपरा तूड़ला प जुर्माना) दस गरीब लोग के खाना खियावल बा, यानी कि आप आमतौर प अपना परिवार के जवन खाना देवेनी, ओकरा से, चाहे कपड़ा देवे के चाहे कवनो नौकर के मुक्त करे के। जे अइसन करे में असमर्थ बा, तब (दुर्भाग्य से) तीन दिन तक उपवास। किरिया खइला पर राउर किरिया के स्वभाव इहे होला। आ आपन किरिया पूरा करीं. एह तरह से अल्लाह रउआ के आपन नियम समझावेले ताकि रउआ (उनुका) के आभारी होखीं।


58
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:58)

وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهٗ بِاِذْنِ رَبِّهٖۚ وَالَّذِيْ خَبُثَ لَا يَخْرُجُ اِلَّا نَكِدًاۗ كَذٰلِكَ نُصَرِّفُ الْاٰيٰتِ لِقَوْمٍ يَّشْكُرُوْنَ ࣖ

wal-baladuṭ-ṭayyibu yakhruju nabātuhū bi'iżni rabbih(ī), wal-lażī khabuṡa lā yakhruju illā nakidā(n), każālika nuṣarriful-āyāti liqaumiy yasykurūn(a).

आ जमीन बढ़िया बा, भगवान के अनुमति से पौधा भरपूर उगेला; आ खराब माटी, जवन फसल उगेला ऊ सुस्त हो जाले. एह तरह से हमनी के बेर-बेर (अपना महानता के) संकेत बतावेनी जा जे कृतज्ञ बा।


144
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:144)

قَالَ يٰمُوْسٰٓى اِنِّى اصْطَفَيْتُكَ عَلَى النَّاسِ بِرِسٰلٰتِيْ وَبِكَلَامِيْ ۖفَخُذْ مَآ اٰتَيْتُكَ وَكُنْ مِّنَ الشّٰكِرِيْنَ

qāla yā mūsā inniṣṭafaituka ‘alan-nāsi birisālātī wa bikalāmī, fa khuż mā ātaituka wa kum minasy-syākirīn(a).

(अल्लाह) कहले, "हे मूसा! सचमुच, हम रउआ के दोसरा लोग से (अपना समय में) चुनले बानी (पसंद) अपना संदेश अवुरी अपना बात के ढोवे खाती, एहसे हम जवन देले बानी ओकरा के मजबूती से पकड़ के राखी अवुरी शुक्रगुजार लोग में से रहीं।"


189
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:189)

۞ هُوَ الَّذِيْ خَلَقَكُمْ مِّنْ نَّفْسٍ وَّاحِدَةٍ وَّجَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا لِيَسْكُنَ اِلَيْهَاۚ فَلَمَّا تَغَشّٰىهَا حَمَلَتْ حَمْلًا خَفِيْفًا فَمَرَّتْ بِهٖ ۚفَلَمَّآ اَثْقَلَتْ دَّعَوَا اللّٰهَ رَبَّهُمَا لَىِٕنْ اٰتَيْتَنَا صَالِحًا لَّنَكُوْنَنَّ مِنَ الشّٰكِرِيْنَ

huwal-lażī khalaqakum min nafsiw wāḥidatiw waja‘ala minhā zaujahā liyaskuna ilaihā, falammā tagasysyāhā ḥamalat ḥamlan khafīfan fa marrat bih(ī), falammā aṡqalad da‘awallāha rabbahumā la'in ātaitanā ṣāliḥan lanakūnanna minasy-syākirīn(a).

उहे तोहरा के एक आत्मा (आदम) से बनवले बाड़े अवुरी ओकरा से उ आपन साथी बनवले बाड़े, ताकि उ ओकरा से खुश होखे। त ओकरा मिलावे के बाद (उनकर पत्नी) हल्का गर्भ गर्भवती हो गईली अवुरी उ (कुछ समय तक) हल्का महसूस करत रहली। फेर जब उनुका भारी लागल त दुनो (पति-पत्नी) अपना रब अल्लाह से पूछले (कहत कि, "अगर आप हमनी के एगो पुण्य संतान देब त बेशक हमनी के हमेशा शुक्रगुजार रहब।"


7
Q.S इब्राहिम के ह (14:7)

وَاِذْ تَاَذَّنَ رَبُّكُمْ لَىِٕنْ شَكَرْتُمْ لَاَزِيْدَنَّكُمْ وَلَىِٕنْ كَفَرْتُمْ اِنَّ عَذَابِيْ لَشَدِيْدٌ

wa iż ta'ażżana rabbukum la'in syakartum la'azīdannakum wa la'in kafartum inna ‘ażābī lasyadīd(un).

आ (याद राखीं) जब राउर रब घोषणा कइले रहले कि, "वास्तव में अगर तू आभारी बाड़ू त हम तोहरा पर (अनुग्रह) जरूर बढ़ा देब, लेकिन अगर तू (हमार एहसान) के नकारब त हमार सजा निश्चित रूप से बहुत भारी होई।"


121
Q.S एन-नहल के बा (16:121)

شَاكِرًا لِّاَنْعُمِهِ ۖاجْتَبٰىهُ وَهَدٰىهُ اِلٰى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيْمٍ

syākiral li'an‘umih(ī), ijtabāhu wa hadāhu ilā ṣirāṭim mustaqīm(in).

उ अपना आशीर्वाद खातिर आभारी बाड़े। अल्लाह ओकरा के चुनले बाड़े अवुरी सीधा रास्ता प ले गईल बाड़े।


40
Q.S एन-नामल के बा (27:40)

قَالَ الَّذِيْ عِنْدَهٗ عِلْمٌ مِّنَ الْكِتٰبِ اَنَا۠ اٰتِيْكَ بِهٖ قَبْلَ اَنْ يَّرْتَدَّ اِلَيْكَ طَرْفُكَۗ فَلَمَّا رَاٰهُ مُسْتَقِرًّا عِنْدَهٗ قَالَ هٰذَا مِنْ فَضْلِ رَبِّيْۗ لِيَبْلُوَنِيْٓ ءَاَشْكُرُ اَمْ اَكْفُرُۗ وَمَنْ شَكَرَ فَاِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهٖۚ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ رَبِّيْ غَنِيٌّ كَرِيْمٌ

qālal-lażī ‘indahū ‘ilmum minal-kitābi ana ātīka bihī qabla ay yartadda ilaika ṭarfuk(a), falammā ra'āhu mustaqirran ‘indahū qāla hāżā min faḍli rabbī, liyabluwanī a'asykuru am akfur(u), wa man syakara fa'innamā yasykuru linafsih(ī), wa man kafara fa'inna rabbī ganiyyun karīm(un).

जेकरा किताब से ज्ञान रहे, उ कहलस कि, "हम तोहरा आँख पलक झपकावे से पहिले सिंहासन ले आईब।" त जब उ (सुलेमान) अपना सोझा गद्दी देखले त कहले कि, "इ हमरा प्रभु के कृपा में से एगो बा कि उ हमरा के परखस, कि हम शुक्रगुजार बानी कि (उनुका बरकत से इनकार)। जे भी आभारी बा, त सचमुच उ अपना (भलाई) के शुक्रगुजार बा, अवुरी जे काफिर करेला, त सचमुच हमार प्रभु सबसे अमीर, सबसे महिमामंडित हवे।"


17
Q.S अल-कासास के ह (28:17)

قَالَ رَبِّ بِمَآ اَنْعَمْتَ عَلَيَّ فَلَنْ اَكُوْنَ ظَهِيْرًا لِّلْمُجْرِمِيْنَ

qāla rabbi bimā an‘amta ‘alayya falan akūna ẓahīral lil-mujrimīn(a).

उ (मूसा) कहले, "हे हमार प्रभु! जवन अनुग्रह तू हमरा प कईले बाड़ू, ओकरा से हम पापी लोग के सहायक ना बनब।"


73
Q.S अल-कासास के ह (28:73)

وَمِنْ رَّحْمَتِهٖ جَعَلَ لَكُمُ الَّيْلَ وَالنَّهَارَ لِتَسْكُنُوْا فِيْهِ وَلِتَبْتَغُوْا مِنْ فَضْلِهٖ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

wa mir raḥmatihī ja‘ala lakumul-laila wan-nahāra litaskunū fīhi wa litabtagū min faḍlihī wa la‘allakum tasykurūn(a).

आ उनकर दया से ही उ रउवां खातिर रात आ दिन बनवले बाड़न, ताकि रउवां ओह में आराम करीं आ उनकर वरदान (दिन में) के खोज करीं आ रउवां उनकर धन्यवाद दीं।


17
Q.S अल-'अंकबूत के ह (29:17)

اِنَّمَا تَعْبُدُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ اَوْثَانًا وَّتَخْلُقُوْنَ اِفْكًا ۗاِنَّ الَّذِيْنَ تَعْبُدُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ لَا يَمْلِكُوْنَ لَكُمْ رِزْقًا فَابْتَغُوْا عِنْدَ اللّٰهِ الرِّزْقَ وَاعْبُدُوْهُ وَاشْكُرُوْا لَهٗ ۗاِلَيْهِ تُرْجَعُوْنَ

innamā ta‘budūna min dūnillāhi auṡānaw wa takhluqūna ifkā(n), innal-lażīna ta‘budūna min dūnillāhi lā yamlikūna lakum rizqan fabtagū ‘indallāhir-rizqa wa‘budūhu wasykurū lah(ū), ilaihi turja‘ūn(a).

साँचहू अल्लाह के अलावा जवन पूजत बानी ऊ खाली मूर्ति ह, आ झूठ बनावत बानी। साँचहू, जवना चीज के रउरा अल्लाह से अलगा करीलें ऊ रउरा के रोजी-रोटी के इंतजाम करे में सक्षम नइखे; त अल्लाह से रोजी-रोटी मांगीं, अवुरी उनुकर इबादत करीं अवुरी उनुकर शुक्रिया अदा करीं। खाली उनुका लगे तोहरा के वापस कर दिहल जाई।


12
Q.S लुकमान के ह (31:12)

وَلَقَدْ اٰتَيْنَا لُقْمٰنَ الْحِكْمَةَ اَنِ اشْكُرْ لِلّٰهِ ۗوَمَنْ يَّشْكُرْ فَاِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهٖۚ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ حَمِيْدٌ

wa laqad ātainā luqmānal-ḥikmata anisykur lillāh(i), wa may yasykur fa'innamā yasykuru linafsih(ī), wa man kafara fa'innallāha ganiyyun ḥamīd(un).

आ साँचहू हमनी के लुकमान के बुद्धि देले बानी जा, माने कि "अल्लाह के शुक्रगुजार रहीं! आ जे (अल्लाह) के शुक्रगुजार होखे, त साँचहू ऊ अपना खातिर शुक्रगुजार होला; आ जे आभारी (बदनाम) ना होखे, त साँचहू अल्लाह सबसे अमीर, सबसे तारीफ हउवें."


13
Q.S सबा के ह (34:13)

يَعْمَلُوْنَ لَهٗ مَا يَشَاۤءُ مِنْ مَّحَارِيْبَ وَتَمَاثِيْلَ وَجِفَانٍ كَالْجَوَابِ وَقُدُوْرٍ رّٰسِيٰتٍۗ اِعْمَلُوْٓا اٰلَ دَاوٗدَ شُكْرًا ۗوَقَلِيْلٌ مِّنْ عِبَادِيَ الشَّكُوْرُ

ya‘malūna lahū mā yasyā'u mim maḥārība wa tamāṡīla wa jifānin kal-jawābi wa qudūrir-rāsiyāt(in), i‘malū āla dāwūda syukrā(n), wa qalīlum min ‘ibādiyasy-syakūr(u).

उ लोग (जिन) सुलेमान खातिर जवन चाहत रहले ओकरा हिसाब से काम करत रहले, जवना में ऊँच-ऊँच इमारत, मूर्ति, प्लेट जवन (ओतना बड़) रहे, ओतना बड़ रहे, जवन कि कुंड अवुरी बर्तन (चूल्हा प) रह गईल रहे, (बनावल) शामिल रहे। ए दाऊद के परिवार (अल्लाह के) शुक्रगुजार करे के काम करीं। आ हमार बहुत कम सेवक आभारी बाड़े।


66
Q.S अज-जुमार के ह (39:66)

بَلِ اللّٰهَ فَاعْبُدْ وَكُنْ مِّنَ الشّٰكِرِيْنَ

balillāha fa‘bud wa kum minasy-syākirīn(a).

एहसे रउरा इबादत करे वाला के अल्लाह के छोड़ दीं अवुरी शुक्रगुजार लोग में से एक होखे दीं।"