وَقَالُوْا لَنْ نُّؤْمِنَ لَكَ حَتّٰى تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْاَرْضِ يَنْۢبُوْعًاۙ
wa qālū lan nu'mina laka ḥattā tafjura lanā minal-arḍi yambū‘ā(n).
आ ओ सभ कहलक, "हम सभ अहाँ (मुहम्मद) पर विश्वास नहि करब जाबत धरि अहाँ हमरा सभक लेल धरती सँ पानिक झरना नहि पठा देब।
اَوْ تَكُوْنَ لَكَ جَنَّةٌ مِّنْ نَّخِيْلٍ وَّعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الْاَنْهٰرَ خِلٰلَهَا تَفْجِيْرًاۙ
au takūna laka jannatum min nakhīliw wa ‘inabin fa tufajjiral-anhāra khilālahā tafjīrā(n).
वा अहाँक खजूर आ अंगूरक गाछी अछि, तखन अहाँ ओहि मे सँ तेजी सँ बहय बला नदी केँ बहय दैत छी,
اَوْ تُسْقِطَ السَّمَاۤءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفًا اَوْ تَأْتِيَ بِاللّٰهِ وَالْمَلٰۤىِٕكَةِ قَبِيْلًاۙ
au tusqiṭas-samā'a kamā za‘amta ‘alainā kisafan au ta'tiya billāhi wal-malā'ikati qabīlā(n).
या अहाँ हमरा सब पर आकाश के टुकड़ा-टुकड़ा में गिरा दैत छी, जेना अहाँ कहैत छी, या (पहिने) अहाँ अल्लाह आ स्वर्गदूत सब के हमरा सब स आमने सामने लाबैत छी,
اَوْ يَكُوْنَ لَكَ بَيْتٌ مِّنْ زُخْرُفٍ اَوْ تَرْقٰى فِى السَّمَاۤءِ ۗوَلَنْ نُّؤْمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتّٰى تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتٰبًا نَّقْرَؤُهٗۗ قُلْ سُبْحَانَ رَبِّيْ هَلْ كُنْتُ اِلَّا بَشَرًا رَّسُوْلًا ࣖ
au yakūna laka baitum min zukhrufin au tarqā fis-samā'(i), wa lan nu'mina liruqiyyika ḥattā tunazzila ‘alainā kitāban naqra'uh(ū), qul subḥāna rabbī hal kuntu illā basyarar rasūlā(n).
या तोरा सोना के घर (निर्मित) छै, या तोहें स्वर्ग में चढ़ै छियै। आरू हम्में तोरोॅ स्वर्गारोहण पर विश्वास नै करबै जबेॅ तलक तोहें हमरा सिनी के पास पढ़ै लेली एगो किताब नै भेजबै।" कहू (मुहम्मद), "हमरऽ प्रभु के महिमा होय, की हम्में खाली एगो इंसान नै छियै जे दूत छै?"
اَفَمَنْ كَانَ مُؤْمِنًا كَمَنْ كَانَ فَاسِقًاۗ لَا يَسْتَوٗنَ
afaman kāna mu'minan kaman kāna fāsiqā(n), lā yastawūn(a).
त की विश्वासी दुष्ट लोक (अविश्वासी) जकाँ अछि? एके रंग नहि छथि।
يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اِنْ جَاۤءَكُمْ فَاسِقٌۢ بِنَبَاٍ فَتَبَيَّنُوْٓا اَنْ تُصِيْبُوْا قَوْمًاۢ بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوْا عَلٰى مَا فَعَلْتُمْ نٰدِمِيْنَ
yā ayyuhal-lażīna āmanū in jā'akum fāsiqum binaba'in fa tabayyanū an tuṣībū qaumam bijahālatin fa tuṣbiḥū ‘alā mā fa‘altum nādimīn(a).
हे विश्वास करनिहार! जँ कोनो दुष्ट व्यक्ति अहाँ लग कोनो खबरि ल' क' अबैत अछि त' ओकर सत्यताक पता लगाउ, जाहि सँ अज्ञानता सँ कोनो लोक केँ नुकसान नहि पहुँचाबी, आ तखन अहाँ जे काज केलहुँ ताहि पर पछतावा नहि करू।
وَاعْلَمُوْٓا اَنَّ فِيْكُمْ رَسُوْلَ اللّٰهِ ۗ لَوْ يُطِيْعُكُمْ فِيْ كَثِيْرٍ مِّنَ الْاَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ حَبَّبَ اِلَيْكُمُ الْاِيْمَانَ وَزَيَّنَهٗ فِيْ قُلُوْبِكُمْ وَكَرَّهَ اِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوْقَ وَالْعِصْيَانَ ۗ اُولٰۤىِٕكَ هُمُ الرّٰشِدُوْنَۙ
wa‘lamū anna fīkum rasūlallāh(i), lau yuṭī‘ukum fī kaṡīrim minal-amri la‘anittum wa lākinnallāha ḥabbaba ilaikumul-īmāna wa zayyanahū fī qulūbikum wa karraha ilaikumul-kufra wal-fusūqa wal-‘iṣyān(a), ulā'ika humur-rāsyidūn(a).
आ ई जानि लिअ जे अहाँ सभ मे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सेहो छथि। जँ ओ अहाँक बात बहुतो बात मे मानितथि तऽ अहाँ विपत्ति मे पड़ि गेल रहितहुँ। लेकिन अल्लाह तोरा सब के इमान स प्रेम करौने छैथ आ ओकरा दिल में सुंदर बना देने छैथ आ अहां सब के अविश्वास, बुराई आ अवज्ञा स नफरत करौने छैथ। ई सभ सोझ बाट पर चलैत छथि ।
اَفَرَءَيْتَ الَّذِيْ تَوَلّٰىۙ
afa ra'aital-lażī tawallā.
त की अहाँ एहन लोक नहि देखैत छी जे (कुरान सँ) मुँह मोड़ि लैत अछि?
وَاَعْطٰى قَلِيْلًا وَّاَكْدٰى
wa a‘ṭā qalīlaw wa akdā.
आ कनि-मनि (जे प्रतिज्ञा कयल गेल छल) दैत छथि आ शेष केँ रोकि दैत छथि |
اَعِنْدَهٗ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرٰى
a‘indahū ‘ilmul-gaibi fahuwa yarā.
की ओकरा अदृश्यक ज्ञान छैक जाहि सँ ओ (ओकरा) देखि सकय?
اَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِيْ صُحُفِ مُوْسٰى
am lam yunabba' bimā fī ṣuḥufi mūsā.
या की (ओकरा) ई रिपोर्ट नै करलऽ गेलऽ छै कि (पवित्र पुस्तक जे मूसा के सामने प्रकट करलऽ गेलऽ छेलै) के पन्ना में की छै?
ذَرْنِيْ وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيْدًاۙ
Żarnī wa man khalaqtu waḥīdā(n).
जेकरा हम स्वयं बनौने छी, ओकर प्रति हमरा (अभिनय) दिअ,
وَّجَعَلْتُ لَهٗ مَالًا مَّمْدُوْدًاۙ
wa ja‘altu lahū mālam mamdūdā(n).
आ हम अहाँ सभ केँ प्रचुर सम्पत्ति दैत छी।
وَّبَنِيْنَ شُهُوْدًاۙ
wa banīna syuhūdā(n).
आ जे बच्चा सभ सदिखन हुनका संग रहैत अछि,
وَّمَهَّدْتُّ لَهٗ تَمْهِيْدًاۙ
wa mahhattu lahū tamhīdā(n).
आ हम अहाँ केँ (जीवनक) सबसँ व्यापक संभव स्थान दैत छी।
ثُمَّ يَطْمَعُ اَنْ اَزِيْدَۙ
Ṡumma yaṭma‘u an azīd(a).
तखन ओ सत्ते चाहैत छलाह जे हम एहि मे किछु आओर जोड़ि दी।
كَلَّاۗ اِنَّهٗ كَانَ لِاٰيٰتِنَا عَنِيْدًاۗ
kallā, innahū kāna li'āyātinā ‘anīdā(n).
नहि कए सकैत अछि! सचमुच, ओ हमर आयत (कुरान) के विरोध केने छथि।
سَاُرْهِقُهٗ صَعُوْدًاۗ
sa'urhiquhū ṣa‘ūdā(n).
हम ओकरा पर एकटा कठिन चढ़ाईक बोझ द' देब।
اِنَّهٗ فَكَّرَ وَقَدَّرَۙ
innahū fakkara wa qaddar(a).
सचमुच, ओ सोचने छथि आ निर्धारित केने छथि (जे ओ निर्धारित केने छलाह),
فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَۙ
faqutila kaifa qaddar(a).
तखन ओकरा पर धिक्कार! कोना निर्धारित करैत छथि ?
ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَۙ
Ṡumma qutila kaifa qaddar(a).
पुनः धिक्कार हुनका! कोना निर्धारित करैत छथि ?
ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَۙ
Ṡumma ‘abasa wa basar(a).
तखन खट्टा आ उदास चेहराक संग,
ثُمَّ اَدْبَرَ وَاسْتَكْبَرَۙ
Ṡumma adbara wastakbar(a).
तखन (सत्य सँ) मुँह घुमा कऽ घमंड केलक।
فَقَالَ اِنْ هٰذَآ اِلَّا سِحْرٌ يُّؤْثَرُۙ
faqāla in hāżā illā siḥruy yu'ṡar(u).
तखन ओ कहलनि, “ई (कुरान) मात्र जादू अछि जे (पुरान लोकनि सँ) सीखल गेल अछि |
اِنْ هٰذَآ اِلَّا قَوْلُ الْبَشَرِۗ
in hāżā illā qaulul-basyar(i).
ई सब तऽ मनुक्खक शब्द मात्र अछि।”
سَاُصْلِيْهِ سَقَرَ
sa'uṣlīhi saqar(a).
बाद मे, हम ओकरा (नरक) सकार मे राखि देब,
وَمَآ اَدْرٰىكَ مَا سَقَرُۗ
wa mā adrāka mā saqar(a).
आ की अहाँकेँ बुझल अछि जे (नरक) सकर की होइत अछि ?
قُلْ يٰٓاَيُّهَا الْكٰفِرُوْنَۙ
qul yā ayyuhal-kāfirūn(a).
कहू (मुहम्मद), “हे काफिर!