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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Al-Qur'an Adab membaca Al-Qur’an Menghayati bacaan Al-Qur'an

आयत खोज परिणाम :
कुल आयत : 7
82
Q.S अन-निसा के बा (4:82)

اَفَلَا يَتَدَبَّرُوْنَ الْقُرْاٰنَ ۗ وَلَوْ كَانَ مِنْ عِنْدِ غَيْرِ اللّٰهِ لَوَجَدُوْا فِيْهِ اخْتِلَافًا كَثِيْرًا

afalā yatadabbarūnal-qur'ān(a), wa lau kāna min ‘indi gairillāhi lawajadū fīhikhtilāfan kaṡīrā(n).

त का उ लोग कुरान के कदर (अध्ययन) ना करेले? अगर (कुरान) अल्लाह से ना रहित त ओह लोग के एह में बहुत विरोधाभासी बात जरूर मिलित।


54
Q.S अल-कहफ के ह (18:54)

وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِيْ هٰذَا الْقُرْاٰنِ لِلنَّاسِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍۗ وَكَانَ الْاِنْسَانُ اَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا

wa laqad ṣarrafnā fī hāżal-qur'āni lin-nāsi min kulli maṡal(in), wa kānal-insānu akṡara syai'in jadalā(n).

आ साँचहू हमनी के एह कुरान में लोग के एकरा के बार-बार कई तरह के दृष्टांत से समझवले बानी जा। लेकिन इंसान ही सबसे जादा बहस करेला।


68
Q.S अल-मु'मिनुन के ह (23:68)

اَفَلَمْ يَدَّبَّرُوا الْقَوْلَ اَمْ جَاۤءَهُمْ مَّا لَمْ يَأْتِ اٰبَاۤءَهُمُ الْاَوَّلِيْنَ ۖ

afalam yaddabbarul-qaula am jā'ahum mā lam ya'ti ābā'ahumul-awwalīn(a).

त का उ लोग (अल्लाह) के वचन प खरा ना उतरेले, चाहे उनुका लगे कुछ अयीसन आईल बा जवन कि पहिले कबो उनुका पुरखा के लगे ना आईल रहे?


73
Q.S अल-फुरकान के ह (25:73)

وَالَّذِيْنَ اِذَا ذُكِّرُوْا بِاٰيٰتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوْا عَلَيْهَا صُمًّا وَّعُمْيَانًا

wal-lażīna iżā żukkirū bi'āyāti rabbihim lam yakhirrū ‘alaihā ṣummaw wa ‘umyānā(n).

आ जे लोग जब अपना प्रभु के आयत से चेतावल जाला त बहिर आ आन्हर के व्यवहार ना करेला,


24
Q.S मुहम्मद के ह (47:24)

اَفَلَا يَتَدَبَّرُوْنَ الْقُرْاٰنَ اَمْ عَلٰى قُلُوْبٍ اَقْفَالُهَا

afalā yatadabbarūnal-qur'āna am ‘alā qulūbin aqfāluhā.

त का उ लोग कुरान के कदर ना करेले कि दिल में ताला लागल बा?


21
Q.S अल-हशर के ह (59:21)

لَوْ اَنْزَلْنَا هٰذَا الْقُرْاٰنَ عَلٰى جَبَلٍ لَّرَاَيْتَهٗ خَاشِعًا مُّتَصَدِّعًا مِّنْ خَشْيَةِ اللّٰهِ ۗوَتِلْكَ الْاَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُوْنَ

lau anzalnā hāżal-qur'āna ‘alā jabalil lara'aitahū khāsyi‘am mutaṣaddi‘am min khasy-yatillāh(i), wa tilkal-amṡālu naḍribuhā lin-nāsi la‘allahum yatafakkarūn(a).

अगर हम एह कुरान के कवनो पहाड़ पर भेज देब त रउरा एकरा के अल्लाह के डर से झुकल आ बंटल जरूर देखब. आ हमनी के ई दृष्टांत लोग खातिर बनवले बानी जा ताकि उ लोग सोच सके।


4
Q.S अल-मुज्जम्मिल के ह (73:4)

اَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ الْقُرْاٰنَ تَرْتِيْلًاۗ

au zid ‘alaihi wa rattilil-qur'āna tartīlā(n).

या (आधा) से अधिका, आ धीरे-धीरे कुरान पढ़ीं।