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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Allah (rukun iman no.1) Nama dan Sifat Allah Sifat Allah dan asmaul husna Al Mumiitu Yang Maha Mematikan

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कुल आयत : 6
258
Q.S अल-बकराह (2:258)

اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذِيْ حَاۤجَّ اِبْرٰهٖمَ فِيْ رَبِّهٖٓ اَنْ اٰتٰىهُ اللّٰهُ الْمُلْكَ ۘ اِذْ قَالَ اِبْرٰهٖمُ رَبِّيَ الَّذِيْ يُحْيٖ وَيُمِيْتُۙ قَالَ اَنَا۠ اُحْيٖ وَاُمِيْتُ ۗ قَالَ اِبْرٰهٖمُ فَاِنَّ اللّٰهَ يَأْتِيْ بِالشَّمْسِ مِنَ الْمَشْرِقِ فَأْتِ بِهَا مِنَ الْمَغْرِبِ فَبُهِتَ الَّذِيْ كَفَرَ ۗوَاللّٰهُ لَا يَهْدِى الْقَوْمَ الظّٰلِمِيْنَۚ

alam tara ilal-lażī ḥājja ibrāhīma fī rabbihī an ātāhullāhul-mulk(a), iż qāla ibrāhīmu rabbiyal-lażī yuḥyī wa yumīt(u), qāla ana uḥyī wa umīt(u), qāla ibrāhīmu fa innallāha ya'tī bisy-syamsi minal-masyriqi fa'ti bihā minal-magribi fabuhital-lażī kafar(a), wallāhu lā yahdil-qaumaẓ-ẓālimīn(a).

की अहाँ के ओहि लोक पर ध्यान नहि गेल जे इब्राहीम के संग हुनकर प्रभु के बारे में बहस केने छल, कियाक त अल्लाह हुनका एकटा राज्य (शक्ति) देने छलाह | जखन अब्राहम कहलनि, “हमर प्रभु ओ छथि जे जीवन दैत छथि आ मृत्युक कारण बनैत छथि” तखन ओ कहलनि, “हम जीवन द’ सकैत छी आ मृत्यु सेहो द’ सकैत छी।” इब्राहिम कहलकै, "अल्लाह सूर्य के पूरब स॑ उठैलकै, त॑ ओकरा पश्चिम स॑ उठैलकै।" तेँ जे व्यक्ति अविश्वास करैत अछि ओ भ्रमित अछि । अल्लाह अपराधी के मार्गदर्शन नै करै छै।


56
Q.S योना (10:56)

هُوَ يُحْيٖ وَيُمِيْتُ وَاِلَيْهِ تُرْجَعُوْنَ

huwa yuḥyī wa yumītu wa ilaihi turja‘ūn(a).

ओएह छथि जे जीवन दैत छथि आ मृत्युक कारण बनैत छथि आ मात्र हुनके लग अहाँ वापस आबि जायब।


30
Q.S अज-जुमार (39:30)

اِنَّكَ مَيِّتٌ وَّاِنَّهُمْ مَّيِّتُوْنَ ۖ

innaka mayyituw wa innahum mayyitūn(a).

सचमुच, अहाँ (मुहम्मद) मरि जायब आ ओहो सभ (ओहो) मरि जेताह।


42
Q.S अज-जुमार (39:42)

اَللّٰهُ يَتَوَفَّى الْاَنْفُسَ حِيْنَ مَوْتِهَا وَالَّتِيْ لَمْ تَمُتْ فِيْ مَنَامِهَا ۚ فَيُمْسِكُ الَّتِيْ قَضٰى عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَيُرْسِلُ الْاُخْرٰىٓ اِلٰٓى اَجَلٍ مُّسَمًّىۗ اِنَّ فِيْ ذٰلِكَ لَاٰيٰتٍ لِّقَوْمٍ يَّتَفَكَّرُوْنَ

allāhu yatawaffal-anfusa ḥīna mautihā wal-latī lam tamut fī manāmihā, fayumsikul-latī qaḍā ‘alaihal-mauta wa yursilul-ukhrā ilā ajalim musammā(n), inna fī żālika la'āyātil liqaumiy yatafakkarūn(a).

अल्लाह (लोक) के मृत्यु के समय ओकर आत्मा आ (लोक) के आत्मा के ल लैत छैथ जे सुतैत काल नै मरैत छैथ; तेँ ओ (लोक) के आत्मा के बरकरार रखैत छथि जिनका लेल ओ मृत्यु के फरमान देने छथि आ दोसर के एकटा निर्धारित अवधि के लेल छोड़ि दैत छथि | सचमुच, एहि मे एकटा एहन लोक के लेल (अल्लाह के महानता के) निशानी अछि जे विचार करैत अछि।


68
Q.S गफीर (40:68)

هُوَ الَّذِيْ يُحْيٖ وَيُمِيْتُۚ فَاِذَا قَضٰىٓ اَمْرًا فَاِنَّمَا يَقُوْلُ لَهٗ كُنْ فَيَكُوْنُ ࣖ

huwal-lażī yuḥyī wa yumīt(u), fa'iżā qaḍā amran fa'innamā yaqūlu lahū kun fa yakūn(u).

ओएह एकरा चालू आ बंद करैत छथि। तेँ जखन ओ कोनो बात निर्धारित करय चाहैत छथि त' ओकरा मात्र कहैत छथि, "बहू!" त' से त' अछिए।


2
Q.S अल-मुल्क (67:2)

ۨالَّذِيْ خَلَقَ الْمَوْتَ وَالْحَيٰوةَ لِيَبْلُوَكُمْ اَيُّكُمْ اَحْسَنُ عَمَلًاۗ وَهُوَ الْعَزِيْزُ الْغَفُوْرُۙ

allażī khalaqal-mauta wal-ḥayāta liyabluwakum ayyukum aḥsanu ‘amalā(n), wa huwal-‘azīzul-gafūr(u).

जे मृत्यु आ जीवन के सृजन केलक, अहाँ के परीक्षा लेबय लेल, अहाँ सब में स के कर्म में नीक अछि। आ ओ सर्वशक्तिमान, परम क्षमाशील छथि।