وَاِنِّيْ لَغَفَّارٌ لِّمَنْ تَابَ وَاٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا ثُمَّ اهْتَدٰى
wa innī lagaffārul liman tāba wa āmana wa ‘amila ṣāliḥan ṡummahtadā.
आ सच मे, हम ओहि लोकक लेल क्षमाशील छी जे पश्चाताप करैत अछि, विश्वास करैत अछि आ नीक काज करैत अछि, तखन मार्गदर्शन मे रहैत अछि।
رَبُّ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الْعَزِيْزُ الْغَفَّارُ
rabbus-samāwāti wal-arḍi wa mā bainahumal-‘azīzul-gaffār(u).
(अर्थात) आकाश आ पृथ्वी आ ओकर बीचक जे किछु अछि ओकर प्रभु परम पराक्रमी, परम क्षमाशील।”
۞ قُلْ يٰعِبَادِيَ الَّذِيْنَ اَسْرَفُوْا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوْا مِنْ رَّحْمَةِ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ يَغْفِرُ الذُّنُوْبَ جَمِيْعًا ۗاِنَّهٗ هُوَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ
qul yā ‘ibādiyal-lażīna asrafū ‘alā anfusihim lā taqnaṭū mir raḥmatillāh(i), innallāha yagfiruż-żunūba jamī‘ā(n), innahū huwal-gafūrur-raḥīm(u).
कहू, "हे हमर सेवक जे अपन सीमा स बाहर भ जाइत छथि! अल्लाह के दया स निराश नहि होउ। सचमुच अल्लाह सबहक पाप माफ करैत छथि। सचमुच ओ परम क्षमाशील, परम दयालु छथि।"
تَدْعُوْنَنِيْ لِاَكْفُرَ بِاللّٰهِ وَاُشْرِكَ بِهٖ مَا لَيْسَ لِيْ بِهٖ عِلْمٌ وَّاَنَا۠ اَدْعُوْكُمْ اِلَى الْعَزِيْزِ الْغَفَّارِ
tad‘ūnanī li'akfura billāhi wa usyrika bihī mā laisa lī bihī ‘ilmuw wa ana ad‘ūkum ilal-‘azīzil-gaffār(i).
(कियैक) अहाँ हमरा अल्लाह पर काफिर करबाक आ हुनका संग एहन बातक संग साझीदारी करबाक लेल आह्वान क’ रहल छी जकर हमरा कोनो ज्ञान नहि अछि, भले हम अहाँ केँ सर्वशक्तिमान, परम क्षमाशील मे (विश्वास करबाक लेल) बजा रहल छी?
فَقُلْتُ اسْتَغْفِرُوْا رَبَّكُمْ اِنَّهٗ كَانَ غَفَّارًاۙ
faqultustagfirū rabbakum innahū kāna gaffārā(n).
तेँ हम कहलियनि, "अपन प्रभु सँ क्षमा माँगू, सच मे ओ परम क्षमाशील छथि।