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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Takdir (rukun iman no.5) Tawakkal Keutamaan tawakkal di dunia dan akhirat

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कुल आयत : 9
159
Q.S अली इमरान (3:159)

فَبِمَا رَحْمَةٍ مِّنَ اللّٰهِ لِنْتَ لَهُمْ ۚ وَلَوْ كُنْتَ فَظًّا غَلِيْظَ الْقَلْبِ لَانْفَضُّوْا مِنْ حَوْلِكَ ۖ فَاعْفُ عَنْهُمْ وَاسْتَغْفِرْ لَهُمْ وَشَاوِرْهُمْ فِى الْاَمْرِۚ فَاِذَا عَزَمْتَ فَتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ ۗ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُتَوَكِّلِيْنَ

fabimā raḥmatim minallāhi linta lahum, wa lau kunta faẓẓan galīẓal-qalbi lanfaḍḍū min ḥaulik(a), fa‘fu ‘anhum wastagfir lahum wa syāwirhum fil-amr(i), fa iżā ‘azamta fa tawakkal ‘alallāh(i), innallāha yuḥibbul-mutawakkilīn(a).

अस्तु, अल्लाहक कृपाक बदौलत अहाँ (मुहम्मद) हुनका लोकनिक प्रति कोमल छलहुँ । जँ अहाँ कठोर काज करब आ रूक्ष हृदय अछि तँ ओ सभ निश्चित रूपसँ अहाँक आसपासक लोकसँ दूरी बना लेताह । तेँ हुनका सभ केँ क्षमा करू आ हुनका सभक लेल क्षमा माँगू, आ एहि विषय मे हुनका सभ सँ परामर्श करू। तखन जखन अहाँ अपन मन बना लेब तखन अल्लाह पर भरोसा करू। सचमुच अल्लाह ओहि लोक स प्रेम करैत छथि जे हुनका पर भरोसा रखैत छथि।


160
Q.S अली इमरान (3:160)

اِنْ يَّنْصُرْكُمُ اللّٰهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمْ ۚ وَاِنْ يَّخْذُلْكُمْ فَمَنْ ذَا الَّذِيْ يَنْصُرُكُمْ مِّنْۢ بَعْدِهٖ ۗ وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُوْنَ

iy yanṣurkumullāhu falā gāliba lakum, wa iy yakhżulkum faman żal-lażī yanṣurukum mim ba‘dih(ī), wa ‘alallāhi falyatawakkalil-mu'minūn(a).

जँ अल्लाह अहाँक मदद करताह त' कियो अहाँ पर विजय नहि पाबि सकैत अछि; मुदा जँ अल्लाह अहाँकेँ छोड़ि दैत छथि तँ तकर बाद अहाँक मदद के कऽ सकैत अछि? अतः मुसलमान केवल अल्लाह पर भरोसा करय।


11
Q.S अल-मैदाह (5:11)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوا اذْكُرُوْا نِعْمَتَ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ اِذْ هَمَّ قَوْمٌ اَنْ يَّبْسُطُوْٓا اِلَيْكُمْ اَيْدِيَهُمْ فَكَفَّ اَيْدِيَهُمْ عَنْكُمْۚ وَاتَّقُوا اللّٰهَ ۗوَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُوْنَ ࣖ

yā ayyuhal-lażīna āmanużkurū ni‘matallāhi ‘alaikum iż hamma qaumun ay yabsuṭū ilaikum aidiyahum fa kaffa aidiyahum ‘ankum, wattaqullāh(a), wa ‘alallāhi falyatawakkalil-mu'minūn(a).

हे विश्वास करनिहार! अहाँ पर अल्लाह के एहसान (देल गेल) याद करू, जखन कोनो लोक के इरादा छल जे अहाँ पर अपन हाथ स हमला करी, तखन अल्लाह हुनकर हाथ अहाँ स रोकि लेलक। आ अल्लाह स डरू, आ सिर्फ अल्लाह पर विश्वास करय वाला के भरोसा करबाक चाही।


2
Q.S अल-अनफल (8:2)

اِنَّمَا الْمُؤْمِنُوْنَ الَّذِيْنَ اِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَجِلَتْ قُلُوْبُهُمْ وَاِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ اٰيٰتُهٗ زَادَتْهُمْ اِيْمَانًا وَّعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُوْنَۙ

innamal-mu'minūnal-lażīna iżā żukirallāhu wajilat qulūbuhum wa iżā tuliyat ‘alaihim āyātuhū zādathum īmānaw wa ‘alā rabbihim yatawakkalūn(a).

सचमुच, जे विश्वास करै छै, वू वू छै, जेकरऽ दिल अल्लाह केरऽ नाम लेन॑ पर काँप जाय छै, आरू जब॑ ओकरा आयत केरऽ आयत पढ़लऽ जाय छै त॑ ओकरऽ ईमान बढ़ी जाय छै (मजबूत होय जाय छै) आरू वू खाली अल्लाह प॑ भरोसा करै छै ।


99
Q.S अन-नहल (16:99)

اِنَّهٗ لَيْسَ لَهٗ سُلْطٰنٌ عَلَى الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُوْنَ

innahū laisa lahū sulṭānun ‘alal-lażīna āmanū wa ‘alā rabbihim yatawakkalūn(a).

सचमुच, शैतान के कोनो प्रभाव नै पड़तै जे लोग परमेश् वर पर विश्वास करै छै आरू ओकरा पर भरोसा करै छै।


58
Q.S अल-'अंकबुत (29:58)

وَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ لَنُبَوِّئَنَّهُمْ مِّنَ الْجَنَّةِ غُرَفًا تَجْرِيْ مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهٰرُ خٰلِدِيْنَ فِيْهَاۗ نِعْمَ اَجْرُ الْعٰمِلِيْنَۖ

wal-lażīna āmanū wa ‘amiluṣ-ṣāliḥāti lanubawwi'annahum minal-jannati gurafan tajrī min taḥtihal-anhāru khālidīna fīhā, ni‘ma ajrul-‘āmilīn(a).

आ जे विश्वास करैत छथि आ नीक काज करैत छथि, हुनका सभ केँ हम सभ ऊँच स्थान पर (स्वर्ग मे) राखब, जकर नीचाँ नदी बहैत अछि, ओ सभ ओहि मे अनन्त काल धरि रहत। सत्कर्म करय वाला के लेल जे नीक फल अछि,


59
Q.S अल-'अंकबुत (29:59)

الَّذِيْنَ صَبَرُوْا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُوْنَ

al-lażīna ṣabarū wa ‘alā rabbihim yatawakkalūn(a).

(अर्थात) जे धैर्य रखैत छथि आ अपन प्रभु पर भरोसा रखैत छथि |


36
Q.S ऐश-शूरा (42:36)

فَمَآ اُوْتِيْتُمْ مِّنْ شَيْءٍ فَمَتَاعُ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا ۚوَمَا عِنْدَ اللّٰهِ خَيْرٌ وَّاَبْقٰى لِلَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُوْنَۚ

famā ūtītum min syai'in fa matā‘ul-ḥayātid-dun-yā, wa mā ‘indallāhi khairuw wa abqā lil-lażīna āmanū wa ‘alā rabbihim yatawakkalūn(a).

जे किछु (सुख) अहाँ केँ देल गेल अछि, से एहि संसार मे जीवनक सुख थिक। जखन कि जे (सुख) अल्लाह के पास अछि ओ विश्वास करय वाला के लेल नीक आओर शाश्वत अछि, आओर ओ सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करैत छथिन्ह.


3
Q.S एट-तलक (65:3)

وَّيَرْزُقْهُ مِنْ حَيْثُ لَا يَحْتَسِبُۗ وَمَنْ يَّتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ فَهُوَ حَسْبُهٗ ۗاِنَّ اللّٰهَ بَالِغُ اَمْرِهٖۗ قَدْ جَعَلَ اللّٰهُ لِكُلِّ شَيْءٍ قَدْرًا

wa yarzuqhu min ḥaiṡu lā yaḥtasib(u), wa may yatawakkal ‘alallāhi fa huwa ḥasbuh(ū), innallāha bāligu amrih(ī), qad ja‘alallāhu likulli syai'in qadrā(n).

आ ओ ओकरा ओहि दिशासँ रोजी-रोटी देलक जकर आशा ओकरा नहि छलैक। आ जे कियो अल्लाह पर भरोसा करत, अल्लाह ओकर (जरूरत) जरूर पूरा करत। सचमुच अल्लाह अपन काज के अंजाम दैत छथि। सचमुच अल्लाह सब किछु के रियायत केने छथि।