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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Bangsa-bangsa terdahulu Nabi-nabi Kisah-kisah para rasul Nabi Musa AS Awal kenabian Musa as.

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कुल आयत : 35
114
Q.S अल-अ'रफ (7:114)

قَالَ نَعَمْ وَاِنَّكُمْ لَمِنَ الْمُقَرَّبِيْنَ

qāla na‘am wa innakum laminal-muqarrabīn(a).

ओ (फिरोन) उत्तर देलथिन, "हँ, वास्तव मे अहाँ ओहि लोक मे अवश्य छी जे (हमर) नजदीक छथि।"


10
Q.S ता-हा (20:10)

اِذْ رَاٰ نَارًا فَقَالَ لِاَهْلِهِ امْكُثُوْٓا اِنِّيْٓ اٰنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّيْٓ اٰتِيْكُمْ مِّنْهَا بِقَبَسٍ اَوْ اَجِدُ عَلَى النَّارِ هُدًى

iż ra'ā nāran fa qāla li'ahlihimkuṡū innī ānastu nāral la‘allī ātīkum minhā biqabasin au ajidu ‘alan-nāri hudā(n).

जखन ओ (मूसा) आगि देखलनि त' अपन परिवार सँ कहलनि, "(एतय) रहू, सचमुच हम आगि देखैत छी, आशा अछि जे हम अहाँ सभ लग कनि लौ आनि सकब नहि त' आगि'क जगह पर मार्गदर्शन भेटत."


11
Q.S ता-हा (20:11)

فَلَمَّآ اَتٰىهَا نُوْدِيَ يٰمُوْسٰٓى ۙ

falammā atāhā nūdiya yā mūsā.

तेँ जखन ओ हुनका लग (आगि केर स्थान पर) आयल छलाह तखन हुनका बजाओल गेलनि, “हे मूसा!


12
Q.S ता-हा (20:12)

اِنِّيْٓ اَنَا۠ رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَۚ اِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى ۗ

innī ana rabbuka fakhla‘ na‘laika innaka bil-wādil-muqaddasi ṭuwā(n).

सत्ते हम अहाँक भगवान छी, तेँ अहाँक दुनू शाप छोड़ि दियौक। कारण सचमुच अहाँ पवित्र घाटी मे छी तुवा।


13
Q.S ता-हा (20:13)

وَاَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوْحٰى

wa anakhtartuka fastami‘ limā yūḥā.

आ हम अहाँ सभ केँ चुनने छी, तेँ सुनू जे की प्रकट होयत (अहाँ सभ केँ)।


14
Q.S ता-हा (20:14)

اِنَّنِيْٓ اَنَا اللّٰهُ لَآ اِلٰهَ اِلَّآ اَنَا۠ فَاعْبُدْنِيْۙ وَاَقِمِ الصَّلٰوةَ لِذِكْرِيْ

innanī anallāhu lā ilāha illā ana fa‘budnī, wa aqimiṣ-ṣalāta liżikrī.

सचमुच हम अल्लाह छी, हमरा अलावा कोनो देवता नहि छथि, ताहि लेल हमर इबादत करू आ हमरा याद करबाक लेल नमाज करू।


15
Q.S ता-हा (20:15)

اِنَّ السَّاعَةَ اٰتِيَةٌ اَكَادُ اُخْفِيْهَا لِتُجْزٰى كُلُّ نَفْسٍۢ بِمَا تَسْعٰى

innas-sā‘ata ātiyatun akādu ukhfīhā litujzā kullu nafsim bimā tas‘ā.

सत्ते घड़ी आबि रहल अछि, हम एकरा गुप्त राखब जाहि सँ सबहक प्रतिफल ओकर कमाई के हिसाब सँ भेटय।


16
Q.S ता-हा (20:16)

فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَنْ لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوٰىهُ فَتَرْدٰى

falā yaṣuddannaka ‘anhā mal lā yu'minu bihā wattaba‘a hawāhu fa tardā.

तेँ (प्रलयंदिन) सँ ओहि लोक सभ सँ नहि मोड़ब जे एहि मे विश्वास नहि करैत छथि आ हुनकर इच्छाक पालन करयवला लोक सभ, जाहि सँ अहाँक नाश भ' जाइत अछि |"


18
Q.S ता-हा (20:18)

قَالَ هِيَ عَصَايَۚ اَتَوَكَّؤُا عَلَيْهَا وَاَهُشُّ بِهَا عَلٰى غَنَمِيْ وَلِيَ فِيْهَا مَاٰرِبُ اُخْرٰى

qāla hiya ‘aṣāy(a), atwakka'u ‘alaihā wa ahusysyu bihā ‘alā ganamī wa liya fīhā ma'āribu ukhrā.

ओ (मूसा) कहलनि, “ई हमर लाठी अछि, हम एहि पर आराम करैत छी, आ एकरा संग अपन बकरी सभक लेल खटखटाबैत छी, आ हमरा लेल एखनो बेसी लाभ अछि।”


19
Q.S ता-हा (20:19)

قَالَ اَلْقِهَا يٰمُوْسٰى

qāla alqihā yā mūsā.

ओ (अल्लाह) कहलनि, "हे मूसा, ओकरा फेकि दियौक!"


20
Q.S ता-हा (20:20)

فَاَلْقٰىهَا فَاِذَا هِيَ حَيَّةٌ تَسْعٰى

fa alqāhā fa iżā hiya ḥayyatun tas‘ā.

तखन (मूसा) लाठी फेकि देलक, आ अचानक ओ साँप बनि गेल जे जल्दी-जल्दी रेंगैत छल।


21
Q.S ता-हा (20:21)

قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْۗ سَنُعِيْدُهَا سِيْرَتَهَا الْاُوْلٰى

qāla khużhā wa lā takhaf, sanu‘īduhā sīratahal-ūlā.

ओ (अल्लाह) कहलनि, "ओकरा पकड़ू आ नहि डेराउ, हम ओकरा अपन मूल अवस्था मे वापस क' देब,


22
Q.S ता-हा (20:22)

وَاضْمُمْ يَدَكَ اِلٰى جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاۤءَ مِنْ غَيْرِ سُوْۤءٍ اٰيَةً اُخْرٰىۙ

waḍmum yadaka ilā janāḥika takhruj baiḍā'a min gairi sū'in āyatan ukhrā.

आ बगलक नीचाँ हाथ राखि दियौक, ओ बिना कोनो दोषक उज्जर (प्रकाशित) निकलत, एकटा आओर चमत्कार जकाँ,


23
Q.S ता-हा (20:23)

لِنُرِيَكَ مِنْ اٰيٰتِنَا الْكُبْرٰى ۚ

linuriyaka min āyātinal-kubrā.

ताकि हम अहाँ सभ केँ (किछु) अपन पैघ चिन्ह देखा सकब,


24
Q.S ता-हा (20:24)

اِذْهَبْ اِلٰى فِرْعَوْنَ اِنَّهٗ طَغٰى ࣖ

iżhab ilā fir‘auna innahū ṭagā.

फिरौन लग जाउ; ओ सचमुच रेखा पार क’ गेल छथि।”


10
Q.S ऐश-शु'आरा (26:10)

وَاِذْ نَادٰى رَبُّكَ مُوْسٰٓى اَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظّٰلِمِيْنَ ۙ

wa iż nādā rabbuka mūsā ani'til-qaumaẓ-ẓālimīn(a).

आ (याद करू) जखन अहाँक प्रभु मूसा केँ (अपन वचन सँ) बजौलनि, "अन्यायिक लोक लग आउ,


21
Q.S ऐश-शु'आरा (26:21)

فَفَرَرْتُ مِنْكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ لِيْ رَبِّيْ حُكْمًا وَّجَعَلَنِيْ مِنَ الْمُرْسَلِيْنَ

fa farartu minkum lammā khiftukum fa wahaba lī rabbī ḥukmaw wa ja‘alanī minal-mursalīn(a).

तखन हम अहाँ सँ डरैत छलहुँ ताहि लेल अहाँ सँ भागि गेलहुँ, तखन हमर प्रभु हमरा ज्ञान प्रदान कयलनि आ हमरा दूत मे सँ एक बना देलनि |


7
Q.S अन-नामल (27:7)

اِذْ قَالَ مُوْسٰى لِاَهْلِهٖٓ اِنِّيْٓ اٰنَسْتُ نَارًاۗ سَاٰتِيْكُمْ مِّنْهَا بِخَبَرٍ اَوْ اٰتِيْكُمْ بِشِهَابٍ قَبَسٍ لَّعَلَّكُمْ تَصْطَلُوْنَ

iż qāla mūsā li'ahlihī innī ānastu nārā(n), sa'ātīkum minhā bikhabarin au ātīkum bisyihābin qabasil la‘allakum taṣṭalūn(a).

(मोन राखू) जखन मूसा अपन परिवार केँ कहलकै, "सत्ते, हम आगि देखलहुँ। हम अहाँ सभ लग एकर खबरि अनब, वा अहाँ सभ केँ आगि केर मशाल (मशाल) आनि देब जाहि सँ अहाँ सभ गरम भ' सकब (आगि लग अपन शरीर केँ गरम क' सकब)।


8
Q.S अन-नामल (27:8)

فَلَمَّا جَاۤءَهَا نُوْدِيَ اَنْۢ بُوْرِكَ مَنْ فِى النَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَاۗ وَسُبْحٰنَ اللّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَ

falammā jā'ahā nūdiya am būrika man fin-nāri wa man ḥaulahā, wa subḥānallāhi rabbil-‘ālamīn(a).

अतः जखन ओ ओतय (आगि केर स्थान) पहुँचलाह तखन हुनका बजाओल गेलनि, "धन्य अछि जे आगि लग अछि, आ जे ओकर चारू कात अछि। महिमा सब संसारक मालिक अल्लाह केर हो।"


9
Q.S अन-नामल (27:9)

يٰمُوْسٰٓى اِنَّهٗٓ اَنَا اللّٰهُ الْعَزِيْزُ الْحَكِيْمُ ۙ

yā mūsā innahū anallāhul-‘azīzul-ḥakīm(u).

(अल्लाह कहलनि) "हे मूसा! सचमुच हम अल्लाह छी, परम शक्तिशाली, परम बुद्धिमान।"


10
Q.S अन-नामल (27:10)

وَاَلْقِ عَصَاكَ ۗفَلَمَّا رَاٰهَا تَهْتَزُّ كَاَنَّهَا جَاۤنٌّ وَّلّٰى مُدْبِرًا وَّلَمْ يُعَقِّبْۗ يٰمُوْسٰى لَا تَخَفْۗ اِنِّيْ لَا يَخَافُ لَدَيَّ الْمُرْسَلُوْنَ ۖ

wa alqi ‘aṣāk(a), falammā ra'āhā tahtazzu ka'annahā jānnuw wallā mudbiraw wa lam yu‘aqqib, yā mūsā lā takhaf, innī lā yakhāfu ladayyal-mursalūn(a).

आ अपन लाठी नीचाँ फेकि दियौक!” त जखन (लाठी साँप बनि गेल आ) मूसा ओकरा तेज साँप जकाँ चलैत देखलक तऽ ओ दौड़ल आ पाछू घुमि गेलाह बिना पाछू घुमि कऽ देखलनि।


12
Q.S अन-नामल (27:12)

وَاَدْخِلْ يَدَكَ فِيْ جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاۤءَ مِنْ غَيْرِ سُوْۤءٍۙ فِيْ تِسْعِ اٰيٰتٍ اِلٰى فِرْعَوْنَ وَقَوْمِهٖۚ اِنَّهُمْ كَانُوْا قَوْمًا فٰسِقِيْنَ

wa adkhil yadaka fī jaibika takhruj baiḍā'a min gairi sū'(in), fī tis‘i āyātin ilā fir‘auna wa qaumih(ī), innahum kānū qauman fāsiqīn(a).

आ अपन कमीजक गरदनि मे हाथ राखि दियौक, ओ बिना कोनो दोषक उज्जर (चमकैत) निकलत। (ई दुनू चमत्कार) मे फिरौन आ ओकर लोकक लेल नौ तरहक चमत्कार (जेकरा व्याख्या कयल जायत) शामिल अछि | ओ सभ सत्ते दुष्ट लोक छथि।”


29
Q.S अल-कासास (28:29)

۞ فَلَمَّا قَضٰى مُوْسَى الْاَجَلَ وَسَارَ بِاَهْلِهٖٓ اٰنَسَ مِنْ جَانِبِ الطُّوْرِ نَارًاۗ قَالَ لِاَهْلِهِ امْكُثُوْٓا اِنِّيْٓ اٰنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّيْٓ اٰتِيْكُمْ مِّنْهَا بِخَبَرٍ اَوْ جَذْوَةٍ مِّنَ النَّارِ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُوْنَ

falammā qaḍā mūsal-ajala wa sāra bi'ahlihī ānasa min jānibiṭ-ṭūri nārā(n), qāla li'ahlihimkuṡū innī ānastu nāral la‘allī ātīkum minhā bikhabarin au jażwatim minan-nāri la‘allakum taṣṭalūn(a).

तेँ जखन मूसा निर्धारित समय पूरा कयलनि आ ओ अपन परिवारक संग विदा भेलाह तखन पहाड़क ढलान पर आगि लागलनि। ओ अपन परिवार केँ कहलथिन, “रुकू (एतय), किएक त’ हमरा आगि देखाइ पड़ैत अछि, शायद हम अहाँ सभ केँ ओहि मे सँ किछु खबरि, वा कोनो चिंगारी आनि सकैत छी जाहि सँ अहाँ सभ अपना केँ गरम क’ सकब।”


30
Q.S अल-कासास (28:30)

فَلَمَّآ اَتٰىهَا نُوْدِيَ مِنْ شَاطِئِ الْوَادِ الْاَيْمَنِ فِى الْبُقْعَةِ الْمُبٰرَكَةِ مِنَ الشَّجَرَةِ اَنْ يّٰمُوْسٰىٓ اِنِّيْٓ اَنَا اللّٰهُ رَبُّ الْعٰلَمِيْنَ ۙ

falammā atāhā nūdiya min syāṭi'il wādil aimani fil buq‘atil mubārakati minasy syajarati ay yā mūsā innī anallāhu rabbul-‘ālamīn(a).

त जखन ओ (मूसा) आगि (स्थान) पर पहुँचलाह त हुनका घाटी के दाहिना कात (दिशा) स, एकटा गाछ स, एकटा धन्य भूमि के टुकड़ा पर बजाओल गेलनि, "हे मूसा! सचमुच, हम अल्लाह छी, सब दुनिया के मालिक छी!


31
Q.S अल-कासास (28:31)

وَاَنْ اَلْقِ عَصَاكَ ۗفَلَمَّا رَاٰهَا تَهْتَزُّ كَاَنَّهَا جَاۤنٌّ وَّلّٰى مُدْبِرًا وَّلَمْ يُعَقِّبْۗ يٰمُوْسٰىٓ اَقْبِلْ وَلَا تَخَفْۗ اِنَّكَ مِنَ الْاٰمِنِيْنَ

wa alqi ‘aṣāk(a), falammā ra'āhā tahtazzu ka'annahā jānnuw wallā mudbiraw wa lam yu‘aqqib, yā mūsā aqbil wa lā takhaf, innaka minal-āminīn(a).

आ अपन लाठी नीचाँ फेकि दियौक।" तेँ जखन ओ (मूसा) ओकरा (फुर्तीला) साँप जकाँ चलैत देखलक तऽ बिना पाछू तकने पाछू दौड़ि गेल (अल्लाह कहलनि), "हे मूसा! एतय आऊ आ डरब नहि। सत्ते, अहाँ सुरक्षित व्यक्ति छी।


32
Q.S अल-कासास (28:32)

اُسْلُكْ يَدَكَ فِيْ جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاۤءَ مِنْ غَيْرِ سُوْۤءٍ ۖوَّاضْمُمْ اِلَيْكَ جَنَاحَكَ مِنَ الرَّهْبِ فَذٰنِكَ بُرْهَانٰنِ مِنْ رَّبِّكَ اِلٰى فِرْعَوْنَ وَمَلَا۟ىِٕهٖۗ اِنَّهُمْ كَانُوْا قَوْمًا فٰسِقِيْنَ

usluk yadaka fī jaibika takhruj baiḍā'a min gairi sū'(in), waḍmum ilaika janāḥaka minar-rahbi fażānika burhānāni mir rabbika ilā fir‘auna wa mala'ih(ī), innahum kānū qauman fāsiqīn(a).

कमीज के गरदन में हाथ राखू, बिना कोनो दोष के उज्जर (चमकैत) निकलत, आ डरा गेल त हाथ छाती स पकड़ू। ई दू टा चमत्कार अछि जे अहाँक प्रभु (जेकर प्रदर्शन अहाँ करब) द्वारा फिरौन आ हुनकर अधिकारी सभ केँ कयल गेल अछि | सत्ते, ओ सभ दुष्ट लोक छथि।”


33
Q.S अल-कासास (28:33)

قَالَ رَبِّ اِنِّيْ قَتَلْتُ مِنْهُمْ نَفْسًا فَاَخَافُ اَنْ يَّقْتُلُوْنِ

qāla rabbi innī qataltu minhum nafsan fa'akhāfu ay yaqtulūn(i).

ओ (मूसा) कहलनि, “हे हमर प्रभु, हम सचमुच हुनकर समूहक ककरो मारि देने छी, तेँ हमरा डर अछि जे ओ हमरा मारि देत।


34
Q.S अल-कासास (28:34)

وَاَخِيْ هٰرُوْنُ هُوَ اَفْصَحُ مِنِّيْ لِسَانًا فَاَرْسِلْهُ مَعِيَ رِدْءًا يُّصَدِّقُنِيْٓ ۖاِنِّيْٓ اَخَافُ اَنْ يُّكَذِّبُوْنِ

wa akhī hārūnu huwa afṣaḥu minnī lisānan fa'arsilhu ma‘iya rid'ay yuṣaddiqunī, innī akhāfu ay yukażżibūn(i).

आ हमर भाइ हारून, ओ हमरासँ बेसी वाक्पटु छथि, तेँ हुनका हमरा संग हमर सहायकक रूपमे पठा दियौक जे हमर (कहानीक) पुष्टि करथि; सत्ते, हमरा डर अछि जे ओ सभ हमरा नकारत।”


35
Q.S अल-कासास (28:35)

قَالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِاَخِيْكَ وَنَجْعَلُ لَكُمَا سُلْطٰنًا فَلَا يَصِلُوْنَ اِلَيْكُمَا ۛبِاٰيٰتِنَا ۛ اَنْتُمَا وَمَنِ اتَّبَعَكُمَا الْغٰلِبُوْنَ

qāla sanasyuddu ‘aḍudaka bi'akhīka wa naj‘alu lakumā sulṭānan falā yaṣilūna ilaikumā - bi'āyātinā - antumā wa manittaba‘akumal-gālibūn(a).

ओ (अल्लाह) कहलनि, "हम अहाँ सभ केँ अहाँक भाइ सँ मजबूत करब (अहाँ सभक मदद करब) आ अहाँ दुनू गोटे केँ बहुत शक्ति देब, जाहि सँ ओ सभ अहाँ सभ लग नहि पहुँचि सकब; (अहाँ दुनू गोटे चलि जायब) हमर चमत्कार ल' क', अहाँ दुनू गोटे आ अहाँक पाछाँ चलयवला जीतब।"


46
Q.S अल-कासास (28:46)

وَمَا كُنْتَ بِجَانِبِ الطُّوْرِ اِذْ نَادَيْنَا وَلٰكِنْ رَّحْمَةً مِّنْ رَّبِّكَ لِتُنْذِرَ قَوْمًا مَّآ اَتٰىهُمْ مِّنْ نَّذِيْرٍ مِّنْ قَبْلِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُوْنَ

wa mā kunta bijānibiṭ-ṭūri iż nādainā wa lākir raḥmatam mir rabbika litunżira qaumam mā atāhum min nażīrim min qablika la‘allahum yatażakkarūn(a).

आरू तोहें (मुहम्मद) तुर (पहाड़) के पास नै छेलियै जबे हम्में (मूसा) के फोन करलियै, बल्कि (हम तोरा भेजने छेलियै) तोरऽ प्रभु के दया के रूप में, ताकि तोहें वू लोगऽ (कुरैश) के चेतावनी द॑ सकियै, जेकरा तोरा स॑ पहल॑ चेतावनी दै वाला सिनी के पास नै गेलऽ छेलै, ताकि वू सबक सीख॑ सक॑ ।


15
Q.S अन-नाजीअत (79:15)

هَلْ اَتٰىكَ حَدِيْثُ مُوْسٰىۘ

hal atāka ḥadīṡu mūsā.

की मूसाक कथा अहाँ (मुहम्मद) धरि पहुँचि गेल अछि?


16
Q.S अन-नाजीअत (79:16)

اِذْ نَادٰىهُ رَبُّهٗ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًىۚ

iż nādāhu rabbuhū bil-wādil-muqaddasi ṭuwā(n).

जखन परमेश् वर हुनका (मूसा) केँ पवित्र घाटी अर्थात तुवा घाटी मे बजौलनि;


17
Q.S अन-नाजीअत (79:17)

اِذْهَبْ اِلٰى فِرْعَوْنَ اِنَّهٗ طَغٰىۖ

iżhab ilā fir‘auna innahū ṭagā.

फिरौन लग जाउ! सचमुच, सीमा पार क' गेल छथि,


18
Q.S अन-नाजीअत (79:18)

فَقُلْ هَلْ لَّكَ اِلٰٓى اَنْ تَزَكّٰىۙ

fa qul hal laka ilā an tazakkā.

अस्तु (फिर'आउन सँ) कहू, "की अहाँ अपना केँ (त्रुटि सँ) शुद्ध करबाक इच्छा रखैत छी, .


19
Q.S अन-नाजीअत (79:19)

وَاَهْدِيَكَ اِلٰى رَبِّكَ فَتَخْشٰىۚ

wa ahdiyaka ilā rabbika fa takhsyā.

आ हम अहाँ केँ अहाँक प्रभुक बाट पर लऽ जायब जाहि सँ अहाँ हुनका सँ डेरा सकब?”