قُلْنَا اهْبِطُوْا مِنْهَا جَمِيْعًا ۚ فَاِمَّا يَأْتِيَنَّكُمْ مِّنِّيْ هُدًى فَمَنْ تَبِعَ هُدَايَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُوْنَ
qulnahbiṭū minhā jamī‘ā(n), fa'immā ya'tiyannakum minnī hudan faman tabi‘a hudāya falā khaufun ‘alaihim wa lā hum yaḥzanūn(a).
हम कहलियनि, "अहाँ सभ, स्वर्ग सँ उतरू! तखन जँ हमर मार्गदर्शन सही मे अहाँ सभ लग आबि जायत, तखन जे कियो हमर मार्गदर्शनक पालन करत, ओकरा लेल कोनो डर नहि होयत आ ने ओ सभ दुखी होयत।"
لَّعَنَهُ اللّٰهُ ۘ وَقَالَ لَاَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيْبًا مَّفْرُوْضًاۙ
la‘anahullāh(u), wa qāla la'attakhiżanna min ‘ibādika naṣībam mafrūḍā(n).
जेकरा अल्लाह गारी देलकै, आरू (शैतान) कहलकै, "हम तोरऽ दासऽ स॑ एगो निश्चित हिस्सा जरूर लेबै,
قَالَ فَاهْبِطْ مِنْهَا فَمَا يَكُوْنُ لَكَ اَنْ تَتَكَبَّرَ فِيْهَا فَاخْرُجْ اِنَّكَ مِنَ الصّٰغِرِيْنَ
qāla fahbiṭ minhā famā yakūnu laka an tatakabbara fīhā fakhruj innaka minaṣ-ṣāgirīn(a).
(अल्लाह) कहलनि, "तखन ओहि सँ (स्वर्ग) सँ उतरू; कारण, अहाँ केँ एहि मे घमंड नहि करबाक चाही। बाहर निकलू! सचमुच, अहाँ नीच प्राणी मे सँ एक छी।"
قَالَ اَنْظِرْنِيْٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ
qāla anẓirnī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).
(शैतान) उत्तर देलक, “हमरा एकटा छूट दिअ, जाबत धरि ओ सभ जीबि उठत।”
قَالَ اِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِيْنَ
qāla innaka minal-munẓarīn(a).
(अल्लाह) कहलनि, "सत्य अछि, अहाँ ओहि मे सँ छी जिनका समयक निलंबन देल गेल अछि |"
قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْءُوْمًا مَّدْحُوْرًا ۗ لَمَنْ تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَاَمْلَـَٔنَّ جَهَنَّمَ مِنْكُمْ اَجْمَعِيْنَ
qālakhruj minhā maż'ūmam madḥūrā(n), laman tabi‘aka minhum la'amla'anna jahannama minkum ajma‘īn(a).
(अल्लाह) कहलनि, "ओतय सँ (स्वर्ग) सँ अपमानित आ निष्कासित क' क' निकलू! सचमुच, जे कियो अहाँक पाछाँ चलत, हम अहाँ सभक संग नरक अवश्य भरब।"
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَاِنَّكَ رَجِيْمٌۙ
qāla fakhruj minhā fa innaka rajīm(un).
ओ (अल्लाह) कहलनि, “तखन जन्नत सँ बाहर निकलू, कारण अहाँ शापित छी।
وَّاِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ اِلٰى يَوْمِ الدِّيْنِ
wa inna ‘alaikal-la‘nata ilā yaumid-dīn(i).
आ सत्ते, कयामतक दिन धरि अहाँ सभ पर शाप रहत।”
قَالَ رَبِّ فَاَنْظِرْنِيْٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ
qāla rabbi fa anẓirnī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).
ओ (शैतान) कहलनि, "हे हमर प्रभु, (जँ एहन अछि) तखन हमरा ओहि दिन धरि देरी दिअ जाबत धरि (मनुष्य) जीबि उठत।"
قَالَ فَاِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِيْنَۙ
qāla fa innaka minal-munẓarīn(a).
अल्लाह कहैत छथि, "(ठीक छै) तखन सचमुच अहाँ ओहि मे सँ छी जिनका देरी देल गेल अछि,
اِلٰى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُوْمِ
ilā yaumil-waqtil-ma‘lūm(i).
निर्धारित दिन (प्रलय) तक।”
قَالَ اذْهَبْ فَمَنْ تَبِعَكَ مِنْهُمْ فَاِنَّ جَهَنَّمَ جَزَاۤؤُكُمْ جَزَاۤءً مَّوْفُوْرًا
qālażhab faman tabi‘aka minhum fa inna jahannama jazā'ukum jazā'am maufūrā(n).
ओ (अल्लाह) कहलनि, “जाउ, मुदा जे कियो अहाँक पाछाँ चलत, तखन सचमुच, नरक अहाँक इनाम होयत, पर्याप्त प्रतिशोधक रूप मे।
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَاِنَّكَ رَجِيْمٌۖ
qāla fakhruj minhā fa'innaka rajīm(un).
(अल्लाह) कहलनि, "तखन स्वर्ग सँ बाहर निकलू! सत्ते, अहाँ शापित प्राणी छी।"
وَّاِنَّ عَلَيْكَ لَعْنَتِيْٓ اِلٰى يَوْمِ الدِّيْنِ
wa inna ‘alaika la‘natī ilā yaumid-dīn(i).
आ सत्ते, हमर अभिशाप अहाँ सभ पर न्यायक दिन धरि रहैत अछि।”
قَالَ رَبِّ فَاَنْظِرْنِيْٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ
qāla rabbi fa'anẓirnī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).
(इब्लिस) कहलकै, "हे हमर प्रभु, हमरा ताबत धरि निलंबित क' दियौक जाबत धरि ओ सभ जीबि उठत।"
قَالَ فَاِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِيْنَۙ
qāla fa'innaka minal-munẓarīn(a).
(अल्लाह) कहलनि, "तखन सचमुच अहाँ ओहि मे सँ छी जिनका छूट देल जाइत छनि,
اِلٰى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُوْمِ
ilā yaumil-waqtil-ma‘lūm(i).
निर्धारित दिन (न्याय के दिन) तक।”