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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)



विषय - Haji Kemuliaan makkah Kemuliaan Masjidil Haram

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कुल आयत : 42
125
Q.S अल-बकराह (2:125)

وَاِذْ جَعَلْنَا الْبَيْتَ مَثَابَةً لِّلنَّاسِ وَاَمْنًاۗ وَاتَّخِذُوْا مِنْ مَّقَامِ اِبْرٰهٖمَ مُصَلًّىۗ وَعَهِدْنَآ اِلٰٓى اِبْرٰهٖمَ وَاِسْمٰعِيْلَ اَنْ طَهِّرَا بَيْتِيَ لِلطَّاۤىِٕفِيْنَ وَالْعٰكِفِيْنَ وَالرُّكَّعِ السُّجُوْدِ

wa iż ja‘alnal-baita maṡābatal lin-nāsi wa amnā(n), wattakhiżū mim maqāmi ibrāhīma muṣallā(n), wa ‘ahidnā ilā ibrāhīma wa ismā‘īla an ṭahhirā baitiya liṭ-ṭā'ifīna wal-‘ākifīna war-rukka‘is-sujūd(i).

अर (याद राखजो), जद म्हे घर (काबा) नै लोगां रै वास्तै एक भेळप री जगां अर सुरक्षित जगां बणायो। अर इब्राहिम रै मकाम नै नमाज री जगां बणाओ। अर म्हे अब्राहम अर इस्माइल नै हुकम दियो है, "तवाफ करण आळा, इकतिकफ करण आळा, प्रणाम करण आळा अर सजदा करण आळा रै वास्तै म्हारा घर नै साफ करो!"


125
Q.S अल-बकराह (2:125)

وَاِذْ جَعَلْنَا الْبَيْتَ مَثَابَةً لِّلنَّاسِ وَاَمْنًاۗ وَاتَّخِذُوْا مِنْ مَّقَامِ اِبْرٰهٖمَ مُصَلًّىۗ وَعَهِدْنَآ اِلٰٓى اِبْرٰهٖمَ وَاِسْمٰعِيْلَ اَنْ طَهِّرَا بَيْتِيَ لِلطَّاۤىِٕفِيْنَ وَالْعٰكِفِيْنَ وَالرُّكَّعِ السُّجُوْدِ

wa iż ja‘alnal-baita maṡābatal lin-nāsi wa amnā(n), wattakhiżū mim maqāmi ibrāhīma muṣallā(n), wa ‘ahidnā ilā ibrāhīma wa ismā‘īla an ṭahhirā baitiya liṭ-ṭā'ifīna wal-‘ākifīna war-rukka‘is-sujūd(i).

अर (याद राखजो), जद म्हे घर (काबा) नै लोगां रै वास्तै एक भेळप री जगां अर सुरक्षित जगां बणायो। अर इब्राहिम रै मकाम नै नमाज री जगां बणाओ। अर म्हे अब्राहम अर इस्माइल नै हुकम दियो है, "तवाफ करण आळा, इकतिकफ करण आळा, प्रणाम करण आळा अर सजदा करण आळा रै वास्तै म्हारा घर नै साफ करो!"


126
Q.S अल-बकराह (2:126)

وَاِذْ قَالَ اِبْرٰهٖمُ رَبِّ اجْعَلْ هٰذَا بَلَدًا اٰمِنًا وَّارْزُقْ اَهْلَهٗ مِنَ الثَّمَرٰتِ مَنْ اٰمَنَ مِنْهُمْ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۗ قَالَ وَمَنْ كَفَرَ فَاُمَتِّعُهٗ قَلِيْلًا ثُمَّ اَضْطَرُّهٗٓ اِلٰى عَذَابِ النَّارِ ۗ وَبِئْسَ الْمَصِيْرُ

wa iż qāla ibrāhīmu rabbij‘al hāżā baladan āminaw warzuq ahlahū minaṡ-ṡamarāti man āmana minhum billāhi wal-yaumil-ākhir(i), qāla wa man kafara fa umatti‘uhū qalīlan ṡumma aḍṭarruhū ilā ‘ażābin-nār(i), wa bi'sal-maṣīr(u).

अर (याद राखो) जद अब्राहम प्रार्थना करी, "हे म्हारा प्रभु, इण (मक्का री धरती) नै एक सुरक्षित धरती बणाओ अर इणरै रैवासियां ​​नै फल रै रूप में रोजी रोटी दो, यानी अल्लाह अर आखरी दिन माथै विस्वास करण वाळा लोगां नै," उण (अल्लाह) कह्यो, "अर काफिर नै मैं अस्थाई सुख दूंला, फेर मैं उणनै नरक री सजा में मजबूर करूंला अर उण सबसूं बुरी जगां माथै पाछो जाऊंला।"


127
Q.S अल-बकराह (2:127)

وَاِذْ يَرْفَعُ اِبْرٰهٖمُ الْقَوَاعِدَ مِنَ الْبَيْتِ وَاِسْمٰعِيْلُۗ رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۗ اِنَّكَ اَنْتَ السَّمِيْعُ الْعَلِيْمُ

wa iż yarfa‘u ibrāhīmul-qawā‘ida minal-baiti wa ismā‘īl(u), rabbanā taqabbal minnā, innaka antas-samī‘ul-‘alīm(u).

अर (याद करो) जद इब्राहिम इस्माइल रै सागै मंदिर री नींवां खड़ी करी, (प्रार्थना करतां थकां) "म्हारा प्रभु, म्हारै सूं (दान) स्वीकार करो। साचाणी, थै सर्वसुणबाळा, सर्वज्ञ हो।"


144
Q.S अल-बकराह (2:144)

قَدْ نَرٰى تَقَلُّبَ وَجْهِكَ فِى السَّمَاۤءِۚ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبْلَةً تَرْضٰىهَا ۖ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۗ وَحَيْثُ مَا كُنْتُمْ فَوَلُّوْا وُجُوْهَكُمْ شَطْرَهٗ ۗ وَاِنَّ الَّذِيْنَ اُوْتُوا الْكِتٰبَ لَيَعْلَمُوْنَ اَنَّهُ الْحَقُّ مِنْ رَّبِّهِمْ ۗ وَمَا اللّٰهُ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُوْنَ

qad narā taqallubaka wajhika fis-samā'(i), fa lanuwalliyannaka qiblatan tarḍāhā, fawalli wajhaka syaṭral-masjidil-ḥarām(i), wa ḥaiṡumā kuntum fawallū wujūhakum syaṭrah(ū), wa innal-lażīna ūtul-kitāba laya‘lamūna annahul-ḥaqqu mir rabbihim, wa mallāhu bigāfilin ‘ammā ya‘malūn(a).

आपां थारो चेहरो (मुहम्मद) नै अक्सर आकास कानी देखता देखां हां, सो आपां थानै उण किबला कानी ले जावांला जिणनै थै पसंद करो हो। तो आपरो मुंडो ग्रैंड मस्जिद री तरफ करौ। अर जठै भी हो, आपरो मुंडो उण कानी कर दो। अर साचाणी जिका लोगां नै किताब (तोरा अर सुसमाचार) दीरीजी है, वै जाणै है कै (किबला रो हस्तांतरण) बां रै प्रभु री तरफ सूं सांच है। अर अल्लाह बां रै काम सूं अनजान कोनी है।


149
Q.S अल-बकराह (2:149)

وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۗ وَاِنَّهٗ لَلْحَقُّ مِنْ رَّبِّكَ ۗ وَمَا اللّٰهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُوْنَ

wa min ḥaiṡu kharajta fawalli wajhaka syaṭral-masjidil-ḥarām(i), wa innahū lal-ḥaqqu mir rabbik(a), wa mallāhu bigāfilin ‘ammā ta‘malūn(a).

अर जठै भी थै (मुहम्मद) बारै आवो, आपरो मुंडो भव्य मस्जिद कानी करो, वाकई ओ थारै प्रभु रो फरमान है। अल्लाह थारै काम सूं अनजान कोनी है।


150
Q.S अल-बकराह (2:150)

وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۗ وَحَيْثُ مَا كُنْتُمْ فَوَلُّوْا وُجُوْهَكُمْ شَطْرَهٗ ۙ لِئَلَّا يَكُوْنَ لِلنَّاسِ عَلَيْكُمْ حُجَّةٌ اِلَّا الَّذِيْنَ ظَلَمُوْا مِنْهُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْنِيْ وَلِاُتِمَّ نِعْمَتِيْ عَلَيْكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَهْتَدُوْنَۙ

wa min ḥaiṡu kharajta fa walli wajhaka syaṭral-masjidil-ḥarām(i), wa ḥaiṡumā kuntum fawallū wujūhakum syaṭrah(ū), li'allā yakūna lin-nāsi ‘alaikum ḥujjatun illal-lażīna ẓalamū minhum, falā takhsyauhum wakhsyaunī, wa li'utimma ni‘matī ‘alaikum wa la‘allakum tahtadūn(a).

अर जठै भी थै (मुहम्मद) बारै आवो, आपरो मुंडो भव्य मस्जिद कानी कर दो। अर जठै भी थै हो, आपरो मुंडो उण कानी मोड़ो, जिणसूं मिनखां रै वास्तै (थारो विरोध करण रो) कोई कारण नीं रैवै, सिवाय बां रै मांय सूं गलत काम करणियां रै। बां सूं मत डरो, पण म्हारै सूं डरो, जिणसूं म्हैं थारै माथै आपरा आशीर्वाद पूरा कर सकूं अर थनै मार्गदर्शन मिल सकै।


191
Q.S अल-बकराह (2:191)

وَاقْتُلُوْهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوْهُمْ وَاَخْرِجُوْهُمْ مِّنْ حَيْثُ اَخْرَجُوْكُمْ وَالْفِتْنَةُ اَشَدُّ مِنَ الْقَتْلِ ۚ وَلَا تُقٰتِلُوْهُمْ عِنْدَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ حَتّٰى يُقٰتِلُوْكُمْ فِيْهِۚ فَاِنْ قٰتَلُوْكُمْ فَاقْتُلُوْهُمْۗ كَذٰلِكَ جَزَاۤءُ الْكٰفِرِيْنَ

waqtulūhum ḥaiṡu ṡaqiftumūhum wa akhrijūhum min ḥaiṡu akhrajūkum wal-fitnatu asyaddu minal-qatl(i), wa lā tuqātilūhum ‘indal-masjidil-ḥarāmi ḥattā yuqātilūkum fīh(i), fa'in qātalūkum faqtulūhum, każālika jazā'ul-kāfirīn(a).

अर जठै थै बांनै पावो बठै ई बांनै मार दो अर जठै बां थानै काढ्या है बठै सूं बांनै काढो। अर बदनामी हत्या सूं भी ज्यादा क्रूर है। अर पवित्र मस्जिद रै मांय बां सूं मत लड़ो, जद तांई कै वै थारै सूं वठै नीं लड़ै। जे वे थारै सूं लड़ै है तो बां सूं लड़ो। काफिरां रै वास्तै ओ ईज इनाम है।


191
Q.S अल-बकराह (2:191)

وَاقْتُلُوْهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوْهُمْ وَاَخْرِجُوْهُمْ مِّنْ حَيْثُ اَخْرَجُوْكُمْ وَالْفِتْنَةُ اَشَدُّ مِنَ الْقَتْلِ ۚ وَلَا تُقٰتِلُوْهُمْ عِنْدَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ حَتّٰى يُقٰتِلُوْكُمْ فِيْهِۚ فَاِنْ قٰتَلُوْكُمْ فَاقْتُلُوْهُمْۗ كَذٰلِكَ جَزَاۤءُ الْكٰفِرِيْنَ

waqtulūhum ḥaiṡu ṡaqiftumūhum wa akhrijūhum min ḥaiṡu akhrajūkum wal-fitnatu asyaddu minal-qatl(i), wa lā tuqātilūhum ‘indal-masjidil-ḥarāmi ḥattā yuqātilūkum fīh(i), fa'in qātalūkum faqtulūhum, każālika jazā'ul-kāfirīn(a).

अर जठै थै बांनै पावो बठै ई बांनै मार दो अर जठै बां थानै काढ्या है बठै सूं बांनै काढो। अर बदनामी हत्या सूं भी ज्यादा क्रूर है। अर पवित्र मस्जिद रै मांय बां सूं मत लड़ो, जद तांई कै वै थारै सूं वठै नीं लड़ै। जे वे थारै सूं लड़ै है तो बां सूं लड़ो। काफिरां रै वास्तै ओ ईज इनाम है।


194
Q.S अल-बकराह (2:194)

اَلشَّهْرُ الْحَرَامُ بِالشَّهْرِ الْحَرَامِ وَالْحُرُمٰتُ قِصَاصٌۗ فَمَنِ اعْتَدٰى عَلَيْكُمْ فَاعْتَدُوْا عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا اعْتَدٰى عَلَيْكُمْ ۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاعْلَمُوْٓا اَنَّ اللّٰهَ مَعَ الْمُتَّقِيْنَ

asy-syahrul-ḥarāmu bisy-syahril-ḥarāmi wal-ḥurumātu qiṣāṣ(un), famani‘tadā ‘alaikum fa‘tadū ‘alaihi bimiṡli ma‘tadā ‘alaikum, wattaqullāha wa‘lamū annallāha ma‘al-muttaqīn(a).

हराम महीना हराम महीना रै साथै, अर (विरुद्ध) किणी चीज रो सम्मान करियो जावै है (कानून) किसा लागू होवै है। इण वास्तै, कोई भी थारै माथै हमलो करैला, उणरै हिसाब सूं उण माथै हमलो करैला। अल्लाह सूं डरो अर जाण ल्यो कै अल्लाह सूं डरबाळा लोगां रै सागै अल्लाह है।


196
Q.S अल-बकराह (2:196)

وَاَتِمُّوا الْحَجَّ وَالْعُمْرَةَ لِلّٰهِ ۗ فَاِنْ اُحْصِرْتُمْ فَمَا اسْتَيْسَرَ مِنَ الْهَدْيِۚ وَلَا تَحْلِقُوْا رُءُوْسَكُمْ حَتّٰى يَبْلُغَ الْهَدْيُ مَحِلَّهٗ ۗ فَمَنْ كَانَ مِنْكُمْ مَّرِيْضًا اَوْ بِهٖٓ اَذًى مِّنْ رَّأْسِهٖ فَفِدْيَةٌ مِّنْ صِيَامٍ اَوْ صَدَقَةٍ اَوْ نُسُكٍ ۚ فَاِذَآ اَمِنْتُمْ ۗ فَمَنْ تَمَتَّعَ بِالْعُمْرَةِ اِلَى الْحَجِّ فَمَا اسْتَيْسَرَ مِنَ الْهَدْيِۚ فَمَنْ لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلٰثَةِ اَيَّامٍ فِى الْحَجِّ وَسَبْعَةٍ اِذَا رَجَعْتُمْ ۗ تِلْكَ عَشَرَةٌ كَامِلَةٌ ۗذٰلِكَ لِمَنْ لَّمْ يَكُنْ اَهْلُهٗ حَاضِرِى الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۗ وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاعْلَمُوْٓا اَنَّ اللّٰهَ شَدِيْدُ الْعِقَابِ ࣖ

wa atimmul-ḥajja wal-‘umrata lillāh(i), fa'in uḥṣirtum famastaisara minal-hady(i), wa lā taḥliqū ru'ūsakum ḥattā yablugal-hadyu maḥillah(ū), faman kāna minkum marīḍan au bihī ażam mir ra'sihī fafidyatum min ṣiyāmin au ṣadaqatin au nusuk(in), fa'iżā amintum, faman tamatta‘a bil-‘umrati ilal-ḥajji famastaisara minal-hady(i), famal lam yajid faṣiyāmu ṡalāṡati ayyāmin fil-ḥajji wa sab‘atin iżā raja‘tum, tilka ‘asyaratun kāmilah(tun), żālika limal lam yakun ahluhū ḥāḍiril-masjidil-ḥarām(i), wattaqullāha wa‘lamū annallāha syadīdul-‘iqāb(i).

अर अल्लाह रै वास्तै हज अर उमरा पूरा करो। पण जे थैं (दुश्मनां सूं) घिर गिया हो, तो (वध) उण हड्यू नै जिको आसानी सूं मिल जावै है, अर हड्यू रै वध री जगां पूगण सूं पैली आपरो माथो मत मुंडवाओ। जे थारै मांय सूं कोई बीमार है या उणरै सिर मांय कोई दिक्कत है (अर वो दाढ़ी बणावै है) तो उणनै फिदिया करणो जरूरी है, यानी रोजा राखणो, भिक्षा देणो या बलिदान करणो। जे थैं सुरक्षित हो तो जको भी हज सूं पैली उमरा करैला, उणनै (वध करणो पड़ैला) हड्यू जो आसानी सूं मिल जावै है। पण जे उणनै ओ नीं मिलै तो उणनै हज (मौसम) रै मांय तीन दिन अर थारै पाछा आवा रै सात (दिन) बाद रोजा राखणो पड़सी। ओ कुल दस (दिन) है। इणीज भांत, बां लोगां रै वास्तै जिका रा परिवार ग्रैंड मस्जिद रै कनै नीं रैवै। अल्लाह सूं डरो अर जाण ल्यो कै अल्लाह री सजा घणी कठोर है।


217
Q.S अल-बकराह (2:217)

يَسْـَٔلُوْنَكَ عَنِ الشَّهْرِ الْحَرَامِ قِتَالٍ فِيْهِۗ قُلْ قِتَالٌ فِيْهِ كَبِيْرٌ ۗ وَصَدٌّ عَنْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَكُفْرٌۢ بِهٖ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَاِخْرَاجُ اَهْلِهٖ مِنْهُ اَكْبَرُ عِنْدَ اللّٰهِ ۚ وَالْفِتْنَةُ اَكْبَرُ مِنَ الْقَتْلِ ۗ وَلَا يَزَالُوْنَ يُقَاتِلُوْنَكُمْ حَتّٰى يَرُدُّوْكُمْ عَنْ دِيْنِكُمْ اِنِ اسْتَطَاعُوْا ۗ وَمَنْ يَّرْتَدِدْ مِنْكُمْ عَنْ دِيْنِهٖ فَيَمُتْ وَهُوَ كَافِرٌ فَاُولٰۤىِٕكَ حَبِطَتْ اَعْمَالُهُمْ فِى الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِ ۚ وَاُولٰۤىِٕكَ اَصْحٰبُ النَّارِۚ هُمْ فِيْهَا خٰلِدُوْنَ

yas'alūnaka ‘anisy-syahril-ḥarāmi qitālin fīh(i), qul qitālun fīhi kabīr(un), wa ṣaddun ‘an sabīlillāhi wa kufrum bihī wal-masjidil-ḥarām(i), wa ikhrāju ahlihī minhu akbaru ‘indallāh(i), wal-fitnatu akbaru minal-qatl(i), wa lā yazālūna yuqātilūnakum ḥattā yaruddūkum ‘an dīnikum inistaṭā‘ū, wa may yartadid minkum ‘an dīnihī fa yamut wa huwa kāfirun fa ulā'ika ḥabiṭat a‘māluhum fid-dun-yā wal-ākhirah(ti), wa ulā'ika aṣḥābun-nār(i), hum fīhā khālidūn(a).

बां थानै (मुहम्मद) हराम रै महीनै रै मांय लड़बा रै बारै मांय पूछ्यो। कैवो, "उण महीनै मांय लड़णो एक मोटो (पाप) है। पण (लोगां नै) अल्लाह रै मारग सूं रोकणो, उणरी आज्ञा नीं मानणो, (लोगां नै) मस्जिद मांय प्रवेश करण सूं रोकणो अर लोगां नै उणरै आसै-पासै सूं बारै काढणो, अल्लाह री नजर मांय बडो (पाप) है। जदकै बदनामी हत्या सूं भी क्रूर है। जद तांई वे थारै धरम सूं दास नीं है, वे थारै सूं लड़णो बंद नीं करैला। सक्षम। थारै मांय सूं कोई भी आपरै धरम सूं धर्मत्याग कर देवै है अर पछै वो अविश्वास रै मांय मर जावै है, तो वे इण दुनिया अर परलोक मांय व्यर्थ है, अर वे नरक रा वासी है, वे सदा रै वास्तै वठै ई रैवेला।"


96
Q.S अली इमरान (3:96)

اِنَّ اَوَّلَ بَيْتٍ وُّضِعَ لِلنَّاسِ لَلَّذِيْ بِبَكَّةَ مُبٰرَكًا وَّهُدًى لِّلْعٰلَمِيْنَۚ

inna awwala baitiw wuḍi‘a lin-nāsi lal-lażī bibakkata mubārakaw wa hudal lil-‘ālamīn(a).

साची, मिनखां रै वास्तै बणायो गयो पैलो घर (पूजा रो) बक्का (मक्का) रै मांय (बैतुल्लाह) हो जिणनै आशीर्वाद मिल्यो अर सगळा जगतां रै वास्तै मार्गदर्शक बणग्यो।


97
Q.S अली इमरान (3:97)

فِيْهِ اٰيٰتٌۢ بَيِّنٰتٌ مَّقَامُ اِبْرٰهِيْمَ ەۚ وَمَنْ دَخَلَهٗ كَانَ اٰمِنًا ۗ وَلِلّٰهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ اِلَيْهِ سَبِيْلًا ۗ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعٰلَمِيْنَ

fīhi āyātum bayyinātum maqāmu ibrāhīm(a), wa man dakhalahū kāna āminā(n), wa lillāhi ‘alan-nāsi ḥijjul-baiti manistaṭā‘a ilaihi sabīlā(n), wa man kafara fa innallāha ganiyyun ‘anil-‘ālamīn(a).

बठै साफ-साफ संकेत है, (इणां मांय सूं) इब्राहिम रो स्टेशन। जो भी इण मांय प्रवेश करैला (बैतुल्लाह) सुरक्षित रैवेला। अर (इण मांय सूं) अल्लाह रै प्रति मिनख री जिम्मेदारी बैतुल्लाह री तीर्थयात्रा करणी है, यानी बां लोगां रै वास्तै जिका बठै जा सकै है। कोई भी हज री फरज सूं इनकार करै है, तो ओ जाण लेवै है कै अल्लाह सगळी दुनियां सूं सबसूं अमीर है (किणी भी चीज री जरूरत कोनी है)।


97
Q.S अली इमरान (3:97)

فِيْهِ اٰيٰتٌۢ بَيِّنٰتٌ مَّقَامُ اِبْرٰهِيْمَ ەۚ وَمَنْ دَخَلَهٗ كَانَ اٰمِنًا ۗ وَلِلّٰهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ اِلَيْهِ سَبِيْلًا ۗ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعٰلَمِيْنَ

fīhi āyātum bayyinātum maqāmu ibrāhīm(a), wa man dakhalahū kāna āminā(n), wa lillāhi ‘alan-nāsi ḥijjul-baiti manistaṭā‘a ilaihi sabīlā(n), wa man kafara fa innallāha ganiyyun ‘anil-‘ālamīn(a).

बठै साफ-साफ संकेत है, (इणां मांय सूं) इब्राहिम रो स्टेशन। जो भी इण मांय प्रवेश करैला (बैतुल्लाह) सुरक्षित रैवेला। अर (इण मांय सूं) अल्लाह रै प्रति मिनख री जिम्मेदारी बैतुल्लाह री तीर्थयात्रा करणी है, यानी बां लोगां रै वास्तै जिका बठै जा सकै है। कोई भी हज री फरज सूं इनकार करै है, तो ओ जाण लेवै है कै अल्लाह सगळी दुनियां सूं सबसूं अमीर है (किणी भी चीज री जरूरत कोनी है)।


2
Q.S अल-मैदा (5:2)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تُحِلُّوْا شَعَاۤىِٕرَ اللّٰهِ وَلَا الشَّهْرَ الْحَرَامَ وَلَا الْهَدْيَ وَلَا الْقَلَاۤىِٕدَ وَلَآ اٰۤمِّيْنَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ يَبْتَغُوْنَ فَضْلًا مِّنْ رَّبِّهِمْ وَرِضْوَانًا ۗوَاِذَا حَلَلْتُمْ فَاصْطَادُوْا ۗوَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَاٰنُ قَوْمٍ اَنْ صَدُّوْكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ اَنْ تَعْتَدُوْاۘ وَتَعَاوَنُوْا عَلَى الْبِرِّ وَالتَّقْوٰىۖ وَلَا تَعَاوَنُوْا عَلَى الْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِ ۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ ۗاِنَّ اللّٰهَ شَدِيْدُ الْعِقَابِ

yā ayyuhal-lażīna āmanū lā tuḥillū sya‘ā'irallāhi wa lasy-syahral-ḥarāma wa lal-hadya wa lal-qalā'ida wa lā āmmīnal-baital-ḥarāma yabtagūna faḍlam mir rabbihim wa riḍwānā(n), wa iżā ḥalaltum faṣṭādū, wa lā yajrimannakum syana'ānu qaumin an ṣaddūkum ‘anil- asjidil-ḥarāmi an ta‘tadū, wa ta‘āwanū ‘alal-birri wat-taqwā, wa lā ta‘āwanū ‘alal-iṡmi wal-‘udwān(i), wattaqullāh(a), innallāha syadīdul-‘iqāb(i).

हे विस्वास करण आळा! अल्लाह रै पवित्र सिद्धांतां रो उल्लंघन मत करो, अर हराम महीनां री इज्जत रो उल्लंघन मत करो, हड्यू (बलिदान रा पशु) अर कलाईद (चिन्हित बलिदान रा पशु) नै (बलिदान रा पशु) नै (परेशान) मत करो, अर बैतुलहराम रै दौरा करण आळा लोगां नै (भी) परेशान मत करो; वे आपरै प्रभु री किरपा अर प्रसन्नता री तलाश करै है। पण जे थै इहराम पूरा कर लियो है तो थै शिकार कर सको हो। किणी लोगां रै प्रति (आपरी) नफरत मत होवै क्यूंकै वे आपनै पवित्र मस्जिद सूं बारै निकळण सूं रोकै है, आपनै आपरी सीमावां सूं परे (उणां रै प्रति) जावण सारू प्रेरित करै। अर धर्म अर धर्मपरायणता करण में थारी मदद करैला अर पाप अर दुश्मनी करण में थारी मदद नीं करैला। अल्लाह सूं डरो, साची में अल्लाह री सजा घणी कठोर है।


97
Q.S अल-मैदा (5:97)

۞ جَعَلَ اللّٰهُ الْكَعْبَةَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ قِيٰمًا لِّلنَّاسِ وَالشَّهْرَ الْحَرَامَ وَالْهَدْيَ وَالْقَلَاۤىِٕدَ ۗذٰلِكَ لِتَعْلَمُوْٓا اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا فِى السَّمٰوٰتِ وَمَا فِى الْاَرْضِۙ وَاَنَّ اللّٰهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيْمٌ

ja‘alallāhul-ka‘batal-baital-ḥarāma qiyāmal lin-nāsi wasy-syahral-ḥarāma wal-hadya wal-qalā'id(a), żālika lita‘lamū annallāha ya‘lamu mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ(i), wa annallāha bikulli syai'in ‘alīm(un).

अल्लाह काबा नै एक पवित्र घर बणायो है जठै मिनख भेळा हुवै है। इणीज भांत हराम रा महीना, हड्यू अर कलाईद। आ बात इण वास्तै है कै थनै ठाह लाग जावै कै अल्लाह जाणै है कै आकास मांय कांई है अर धरती माथै कांई है अर अल्लाह सगळी बातां नै जाणै है।


34
Q.S अल-अनफाल (8:34)

وَمَا لَهُمْ اَلَّا يُعَذِّبَهُمُ اللّٰهُ وَهُمْ يَصُدُّوْنَ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَمَا كَانُوْٓا اَوْلِيَاۤءَهٗۗ اِنْ اَوْلِيَاۤؤُهٗٓ اِلَّا الْمُتَّقُوْنَ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُوْنَ

wa mā lahum allā yu‘ażżibahumullāhu wa hum yaṣuddūna ‘anil-masjidil-ḥarāmi wa mā kānū auliyā'ah(ū), in auliyā'uhū illal-muttaqūna wa lākinna akṡarahum lā ya‘lamūn(a).

अर अल्लाह बांनै सजा क्यूं कोनी देवै भलांई बै (लोगां नै) भव्य मस्जिद (दर्शन) सूं रोकै है अर बै लोग नीं है जिणनै इणनै नियंत्रित करण रो अधिकार है? इणनै नियंत्रित करण रो अधिकार फगत वै लोग है जिका पुण्यवान है, पण घणकरा लोगां नै ओ नीं मालूम है।


35
Q.S अल-अनफाल (8:35)

وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمْ عِنْدَ الْبَيْتِ اِلَّا مُكَاۤءً وَّتَصْدِيَةًۗ فَذُوْقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنْتُمْ تَكْفُرُوْنَ

wa mā kāna ṣalātuhum ‘indal-baiti illā mukā'aw wa taṣdiyah(tan), fa żūqul-‘ażāba bimā kuntum takfurūn(a).

अर बैतुल्लाह रै आसै-पासै बांरी प्रार्थनावां सीटी अर ताळियां बजावण रै अलावा कीं नीं ही। तो आपरै अविश्वास रै कारण हुयोड़ी सजा नै महसूस करो।


5
Q.S अट-तवबाह (9:5)

فَاِذَا انْسَلَخَ الْاَشْهُرُ الْحُرُمُ فَاقْتُلُوا الْمُشْرِكِيْنَ حَيْثُ وَجَدْتُّمُوْهُمْ وَخُذُوْهُمْ وَاحْصُرُوْهُمْ وَاقْعُدُوْا لَهُمْ كُلَّ مَرْصَدٍۚ فَاِنْ تَابُوْا وَاَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتَوُا الزَّكٰوةَ فَخَلُّوْا سَبِيْلَهُمْۗ اِنَّ اللّٰهَ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

fa iżansalakhal-asyhurul-ḥurumu faqtulul-musyrikīna ḥaiṡu wajattumūhum wa khużūhum waḥṣurūhum waq‘udū lahum kulla marṣad(in), fa in tābū wa aqāmuṣ-ṣalāta wa ātawuz-zakāta fa khallū sabīlahum, innallāha gafūrur raḥīm(un).

जद हराम रा महीना खत्म हो जावैला, तो जठै भी थै मुशरिकावां नै पाओ, बां सूं लड़ो, बांनै पकड़ो अर बांनै घेर ल्यो, अर बां माथै निजर राखो। जे वे पश्चाताप करै है अर नमाज करै है अर जकात देवै है तो बांनै आजादी दे दो। साची, अल्लाह माफ करण आळो अर घणो दयालु है।


7
Q.S अट-तवबाह (9:7)

كَيْفَ يَكُوْنُ لِلْمُشْرِكِيْنَ عَهْدٌ عِنْدَ اللّٰهِ وَعِنْدَ رَسُوْلِهٖٓ اِلَّا الَّذِيْنَ عَاهَدْتُّمْ عِنْدَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِۚ فَمَا اسْتَقَامُوْا لَكُمْ فَاسْتَقِيْمُوْا لَهُمْ ۗاِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِيْنَ

kaifa yakūnu lil-musyrikīna ‘ahdun ‘indallāhi wa ‘inda rasūlihī illal-lażīna ‘āhattum ‘indal-masjidil-ḥarām(i), famastaqāmū lakum fastaqīmū lahum, innallāha yuḥibbul-muttaqīn(a).

मुशरिकावां रै साथै अल्लाह अर उणरै रसूल रै साथै कोई समझौतो (सुरक्षित) कियां हो सकै है, सिवाय उण लोगां रै जिणरै साथै थै ग्रैंड मस्जिद (हुदैबिया) रै कनै (उणां रै साथै) समझौतो करियो है, सो जद तांई वे थारै सागै ईमानदारी सूं काम करैला, थनै भी बां रै सागै ईमानदारी सूं काम करणो चाइजै। साची, अल्लाह उण लोगां सूं प्यार करै है जका धर्मात्मा है।


19
Q.S अट-तवबाह (9:19)

۞ اَجَعَلْتُمْ سِقَايَةَ الْحَاۤجِّ وَعِمَارَةَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ كَمَنْ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَجَاهَدَ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ ۗ لَا يَسْتَوٗنَ عِنْدَ اللّٰهِ ۗوَاللّٰهُ لَا يَهْدِى الْقَوْمَ الظّٰلِمِيْنَۘ

aja‘altum siqāyatal-ḥājji wa ‘imāratal-masjidil-ḥarāmi kaman āmana billāhi wal-yaumil-ākhiri wa jāhada fī sabīlillāh(i), lā yastawūna ‘indallāh(i), wallāhu lā yahdil-qaumaẓ-ẓālimīn(a).

कांई थै बां (लोगां नै) जिका हज करण आळा नै पेय पदार्थ देवै है अर ग्रैंड मस्जिद री देखभाळ करै है, बां लोगां रै बराबर है जिका अल्लाह अर आखिरी दिन माथै विस्वास करै है अर अल्लाह रै मारग माथै प्रयास करै है? वे अल्लाह रै सामी बराबर कोनी है। अल्लाह अन्यायी लोगां नै मार्गदर्शन कोनी देवै।


28
Q.S अट-तवबाह (9:28)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اِنَّمَا الْمُشْرِكُوْنَ نَجَسٌ فَلَا يَقْرَبُوا الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ بَعْدَ عَامِهِمْ هٰذَا ۚوَاِنْ خِفْتُمْ عَيْلَةً فَسَوْفَ يُغْنِيْكُمُ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِهٖٓ اِنْ شَاۤءَۗ اِنَّ اللّٰهَ عَلِيْمٌ حَكِيْمٌ

yā ayyuhal-lażīna āmanū innamal-musyrikūna najasun falā yaqrabul-masjidal-ḥarāma ba‘da ‘āmihim hāżā, wa in khiftum ‘ailatan fa saufa yugnīkumullāhu min faḍlihī in syā'(a), innallāha ‘alīmun ḥakīm(un).

हे विस्वास करण आळा! असल म्हैं, मुशरक अशुद्ध (अशुद्ध आत्मा) है, इण वास्तै बांनै इण साल रै बाद भव्य मस्जिद रै कनै नीं जाणो चाइजै। अर जे थनै गरीब होबा री चिंता है (क्यूंकै काफिर नीं आवै) तो अल्लाह थानै आपरी किरपा सूं धन देसी, जे वो चावैला। साची, अल्लाह सर्वज्ञ अर सर्वज्ञ है।


37
Q.S इब्राहिम (14:37)

رَبَّنَآ اِنِّيْٓ اَسْكَنْتُ مِنْ ذُرِّيَّتِيْ بِوَادٍ غَيْرِ ذِيْ زَرْعٍ عِنْدَ بَيْتِكَ الْمُحَرَّمِۙ رَبَّنَا لِيُقِيْمُوا الصَّلٰوةَ فَاجْعَلْ اَفْـِٕدَةً مِّنَ النَّاسِ تَهْوِيْٓ اِلَيْهِمْ وَارْزُقْهُمْ مِّنَ الثَّمَرٰتِ لَعَلَّهُمْ يَشْكُرُوْنَ

rabbanā innī askantu min żurriyyatī biwādin gairi żī zar‘in ‘inda baitikal-muḥarram(i), rabbanā liyuqīmuṣ-ṣalāta faj‘al af'idatam minan-nāsi tahwī ilaihim warzuqhum minaṡ-ṡamarāti la‘allahum yasykurūn(a).

हे प्रभु, साचाणी म्हैं आपरै केई वंशजां नै एक घाटी रै मांय राख दियो है जठै थारै (बैतुल्लाह) रै घर रै कनै कोई फसलां कोनी है, जिणरो आदर है, हे प्रभु (अर्थात) ताकि वे प्रार्थना कर सकै, इण वास्तै केई लोगां रै दिल नै बां रै प्रति झुकाओ अर बां नै फळां सूं रोजी रोटी देवो, उम्मीद है कै वे आभारी होवैला।


37
Q.S इब्राहिम (14:37)

رَبَّنَآ اِنِّيْٓ اَسْكَنْتُ مِنْ ذُرِّيَّتِيْ بِوَادٍ غَيْرِ ذِيْ زَرْعٍ عِنْدَ بَيْتِكَ الْمُحَرَّمِۙ رَبَّنَا لِيُقِيْمُوا الصَّلٰوةَ فَاجْعَلْ اَفْـِٕدَةً مِّنَ النَّاسِ تَهْوِيْٓ اِلَيْهِمْ وَارْزُقْهُمْ مِّنَ الثَّمَرٰتِ لَعَلَّهُمْ يَشْكُرُوْنَ

rabbanā innī askantu min żurriyyatī biwādin gairi żī zar‘in ‘inda baitikal-muḥarram(i), rabbanā liyuqīmuṣ-ṣalāta faj‘al af'idatam minan-nāsi tahwī ilaihim warzuqhum minaṡ-ṡamarāti la‘allahum yasykurūn(a).

हे प्रभु, साचाणी म्हैं आपरै केई वंशजां नै एक घाटी रै मांय राख दियो है जठै थारै (बैतुल्लाह) रै घर रै कनै कोई फसलां कोनी है, जिणरो आदर है, हे प्रभु (अर्थात) ताकि वे प्रार्थना कर सकै, इण वास्तै केई लोगां रै दिल नै बां रै प्रति झुकाओ अर बां नै फळां सूं रोजी रोटी देवो, उम्मीद है कै वे आभारी होवैला।


1
Q.S अल-इसरा (17:1)

سُبْحٰنَ الَّذِيْٓ اَسْرٰى بِعَبْدِهٖ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ اِلَى الْمَسْجِدِ الْاَقْصَا الَّذِيْ بٰرَكْنَا حَوْلَهٗ لِنُرِيَهٗ مِنْ اٰيٰتِنَاۗ اِنَّهٗ هُوَ السَّمِيْعُ الْبَصِيْرُ

subḥānal-lażī asrā bi‘abdihī lailam minal-masjidil ḥarāmi ilal-masjidil-aqṣal-lażī bāraknā ḥaulahū linuriyahū min āyātinā, innahū huwas-samī‘ul-baṣīr(u).

अल्लाह री महिमा, जिको आपरै सेवक (मुहम्मद) नै रात नै भव्य मस्जिद सूं अकसा मस्जिद तांई लेग्यो, जिणनै आपां उणरै आसै-पासै आशीर्वाद दियो है, ताकि आपां उणनै आपणी केई चिन्ह (महानता) दिखा सकां। साचाणी, वो सर्वसुणबाळो अर सर्वदेखबाळो है।


7
Q.S अल-इसरा (17:7)

اِنْ اَحْسَنْتُمْ اَحْسَنْتُمْ لِاَنْفُسِكُمْ ۗوَاِنْ اَسَأْتُمْ فَلَهَاۗ فَاِذَا جَاۤءَ وَعْدُ الْاٰخِرَةِ لِيَسٗۤـُٔوْا وُجُوْهَكُمْ وَلِيَدْخُلُوا الْمَسْجِدَ كَمَا دَخَلُوْهُ اَوَّلَ مَرَّةٍ وَّلِيُتَبِّرُوْا مَا عَلَوْا تَتْبِيْرًا

in aḥsantum aḥsantum li'anfusikum, wa in asa'tum fa lahā, fa iżā jā'a wa‘dul-ākhirati liyasū'ū wujūhakum wa liyadkhulal-masjida kamā dakhalūhu awwala marratiw wa liyutabbirū mā ‘alau tatbīrā(n).

जे थै भलो करो हो (मतलब) तो थै खुद रै वास्तै भलो करो हो। अर जे थै बुराई करो हो तो (बुराई रो नुकसान) थारै वास्तै है। जद दूजी सजा (अपराध) आवै है, (म्हे थारा दुश्मनां नै खड़ा करां) थारै चेहरै नै बदनाम करण सारू तो वे मस्जिद (अकसा मस्जिद) मांय प्रवेश करै है, जियां कै जद वे पैली बार मांय प्रवेश करियो हो अर वे जिण चीज माथै नियंत्रण राखै है उणनै नष्ट कर देवै है।


25
Q.S अल-हज (22:25)

اِنَّ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا وَيَصُدُّوْنَ عَنْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ الَّذِيْ جَعَلْنٰهُ لِلنَّاسِ سَوَاۤءً ۨالْعَاكِفُ فِيْهِ وَالْبَادِۗ وَمَنْ يُّرِدْ فِيْهِ بِاِلْحَادٍۢ بِظُلْمٍ نُّذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ اَلِيْمٍ ࣖ

innal-lażīna kafarū wa yaṣuddūna ‘an sabīlillāhi wal-masjidil-ḥarāmil-lażī ja‘alnāhu lin-nāsi sawā'anil-‘ākifu fīhi wal-bād(i), wa may yurid fīhi bi'ilḥādim biẓulmin nużiqhu min ‘ażābin alīm(in).

हां, जो लोग काफिर करै है अर जो (मिनखां नै) अल्लाह रै मारग अर पवित्र मस्जिद सूं बाधा डालै है जिणनै म्हे सगळा मिनखां रै वास्तै खोल दियो है, चायै वै बठै रैवै या बारै सूं आबाळा अर कोई भी जिको इण मांय अन्याय सूं बुराई करण री मंशा राखै, म्हे बांनै निश्चित रूप सूं एक दर्दनाक सजा भोगांला।


25
Q.S अल-हज (22:25)

اِنَّ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا وَيَصُدُّوْنَ عَنْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ الَّذِيْ جَعَلْنٰهُ لِلنَّاسِ سَوَاۤءً ۨالْعَاكِفُ فِيْهِ وَالْبَادِۗ وَمَنْ يُّرِدْ فِيْهِ بِاِلْحَادٍۢ بِظُلْمٍ نُّذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ اَلِيْمٍ ࣖ

innal-lażīna kafarū wa yaṣuddūna ‘an sabīlillāhi wal-masjidil-ḥarāmil-lażī ja‘alnāhu lin-nāsi sawā'anil-‘ākifu fīhi wal-bād(i), wa may yurid fīhi bi'ilḥādim biẓulmin nużiqhu min ‘ażābin alīm(in).

हां, जो लोग काफिर करै है अर जो (मिनखां नै) अल्लाह रै मारग अर पवित्र मस्जिद सूं बाधा डालै है जिणनै म्हे सगळा मिनखां रै वास्तै खोल दियो है, चायै वै बठै रैवै या बारै सूं आबाळा अर कोई भी जिको इण मांय अन्याय सूं बुराई करण री मंशा राखै, म्हे बांनै निश्चित रूप सूं एक दर्दनाक सजा भोगांला।


26
Q.S अल-हज (22:26)

وَاِذْ بَوَّأْنَا لِاِبْرٰهِيْمَ مَكَانَ الْبَيْتِ اَنْ لَّا تُشْرِكْ بِيْ شَيْـًٔا وَّطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّاۤىِٕفِيْنَ وَالْقَاۤىِٕمِيْنَ وَالرُّكَّعِ السُّجُوْدِ

wa iż bawwa'nā li'ibrāhīma makānal-baiti allā tusyrik bī syai'aw wa ṭahhir baitiya liṭ-ṭā'ifīna wal-qā'imīna war-rukka‘is-sujūd(i).

अर (याद राखजो), जद म्हे इब्राहिम नै अल्लाह रै घर में राख्या (कहता थका), "म्हारै साथै कोई भी चीज मत जोड़ो अर म्हारै घर नै तवाफ करणियां रै वास्तै शुद्ध करो, अर उपासना करणियां अर झुकणियां अर सजदा करणियां रै वास्तै।"


29
Q.S अल-हज (22:29)

ثُمَّ لْيَقْضُوْا تَفَثَهُمْ وَلْيُوْفُوْا نُذُوْرَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوْا بِالْبَيْتِ الْعَتِيْقِ

Ṡummal yaqḍū tafaṡafahum wal yūfū nużūrahum wal yaṭṭawwafū bil-baitil-‘atīq(i).

फेर, बांनै गंदगी (जो बांरै शरीर माथै है) नै हटावण दो, आपरी मन्नतां नै पूरी करणी चाइजै अर पुराणै घर रै आसै-पासै तवाफ करणो चाइजै (बैतुल्लाह)।


33
Q.S अल-हज (22:33)

لَكُمْ فِيْهَا مَنَافِعُ اِلٰٓى اَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ مَحِلُّهَآ اِلَى الْبَيْتِ الْعَتِيْقِ ࣖ

lakum fīhā manāfi‘u ilā ajalim musamman ṡumma maḥilluhā ilal-baitil-‘atīq(i).

थारै वास्तै (हड्यू जानवर) कई फायदा है, निर्धारित समय तांई, फेर वध री जगां बैतुल अतीक (बैतुल्लाह) रै आसै-पासै है।


91
Q.S अन-नामल (27:91)

اِنَّمَآ اُمِرْتُ اَنْ اَعْبُدَ رَبَّ هٰذِهِ الْبَلْدَةِ الَّذِيْ حَرَّمَهَا وَلَهٗ كُلُّ شَيْءٍ وَّاُمِرْتُ اَنْ اَكُوْنَ مِنَ الْمُسْلِمِيْنَ ۙ

innamā umirtu an a‘buda rabba hāżihil-baldatil-lażī ḥarramahā wa lahū kullu syai'iw wa umirtu an akūna minal-muslimīn(a).

म्हनैं (मुहम्मद) फगत इण धरती (मक्का) रै प्रभु री पूजा करण रो हुकम दियो गयो है जिणनैं उण पवित्र बणायो है अर सगळो कीं उणरो है। अर मन्नै मुसलमानां रै मांय रैवण रो हुकम दियो गयो हो।


57
Q.S अल-कसास (28:57)

وَقَالُوْٓا اِنْ نَّتَّبِعِ الْهُدٰى مَعَكَ نُتَخَطَّفْ مِنْ اَرْضِنَاۗ اَوَلَمْ نُمَكِّنْ لَّهُمْ حَرَمًا اٰمِنًا يُّجْبٰٓى اِلَيْهِ ثَمَرٰتُ كُلِّ شَيْءٍ رِّزْقًا مِّنْ لَّدُنَّا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُوْنَ

wa qālū in natabi‘il-hudā ma‘aka nutakhaṭṭaf min arḍinā, awalam numakkil lahum ḥaraman āminay yujbā ilaihi ṡamarātu kulli syai'ir rizqam mil ladunnā wa lākinna akṡarahum lā ya‘lamūn(a).

अर बां कैयो, "अगर आपां थारी बातां रो पालन करांला तो आपां नै आपणी देस सूं निकाळ दियो जावैला।" (अल्लाह कह्यो) कांई म्हे हराम (पवित्र भूमि) री सुरक्षित अर सुरक्षित धरती माथै बांरी स्थिति री पुष्टि नीं करी है, जठै वे म्हारी तरफ सूं (थारै वास्तै) रोजी-रोटी रै रूप मांय हर तरै रा (पौधा) रा फल लावै है? पण बां मांय सूं घणकरा नै ठा कोनी।


57
Q.S अल-कसास (28:57)

وَقَالُوْٓا اِنْ نَّتَّبِعِ الْهُدٰى مَعَكَ نُتَخَطَّفْ مِنْ اَرْضِنَاۗ اَوَلَمْ نُمَكِّنْ لَّهُمْ حَرَمًا اٰمِنًا يُّجْبٰٓى اِلَيْهِ ثَمَرٰتُ كُلِّ شَيْءٍ رِّزْقًا مِّنْ لَّدُنَّا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُوْنَ

wa qālū in natabi‘il-hudā ma‘aka nutakhaṭṭaf min arḍinā, awalam numakkil lahum ḥaraman āminay yujbā ilaihi ṡamarātu kulli syai'ir rizqam mil ladunnā wa lākinna akṡarahum lā ya‘lamūn(a).

अर बां कैयो, "अगर आपां थारी बातां रो पालन करांला तो आपां नै आपणी देस सूं निकाळ दियो जावैला।" (अल्लाह कह्यो) कांई म्हे हराम (पवित्र भूमि) री सुरक्षित अर सुरक्षित धरती माथै बांरी स्थिति री पुष्टि नीं करी है, जठै वे म्हारी तरफ सूं (थारै वास्तै) रोजी-रोटी रै रूप मांय हर तरै रा (पौधा) रा फल लावै है? पण बां मांय सूं घणकरा नै ठा कोनी।


67
Q.S अल-'अंकाबुत (29:67)

اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّا جَعَلْنَا حَرَمًا اٰمِنًا وَّيُتَخَطَّفُ النَّاسُ مِنْ حَوْلِهِمْۗ اَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُوْنَ وَبِنِعْمَةِ اللّٰهِ يَكْفُرُوْنَ

awalam yarau annā ja‘alnā ḥaraman āminaw wa yutakhaṭṭafun-nāsu min ḥaulihim, afabil-bāṭili yu'minūna wa bini‘matillāhi yakfurūn(a).

कांई बांनै ओ ध्यान कोनी दियो कै आपां (बांरै देस नै) एक पवित्र अर सुरक्षित भूमि बणा दियो है, भलांई उणरै आसै-पासै रा लोग एक-दूजै नै लूट रैया है। क्यूं (सच्चाई रै प्रकट होबा रै बाद) वे झूठ माथै विस्वास करै है अर अल्लाह री आशीर्वादां सूं इनकार करै है?


67
Q.S अल-'अंकाबुत (29:67)

اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّا جَعَلْنَا حَرَمًا اٰمِنًا وَّيُتَخَطَّفُ النَّاسُ مِنْ حَوْلِهِمْۗ اَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُوْنَ وَبِنِعْمَةِ اللّٰهِ يَكْفُرُوْنَ

awalam yarau annā ja‘alnā ḥaraman āminaw wa yutakhaṭṭafun-nāsu min ḥaulihim, afabil-bāṭili yu'minūna wa bini‘matillāhi yakfurūn(a).

कांई बांनै ओ ध्यान कोनी दियो कै आपां (बांरै देस नै) एक पवित्र अर सुरक्षित भूमि बणा दियो है, भलांई उणरै आसै-पासै रा लोग एक-दूजै नै लूट रैया है। क्यूं (सच्चाई रै प्रकट होबा रै बाद) वे झूठ माथै विस्वास करै है अर अल्लाह री आशीर्वादां सूं इनकार करै है?


25
Q.S अल-फात (48:25)

هُمُ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا وَصَدُّوْكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَالْهَدْيَ مَعْكُوْفًا اَنْ يَّبْلُغَ مَحِلَّهٗ ۚوَلَوْلَا رِجَالٌ مُّؤْمِنُوْنَ وَنِسَاۤءٌ مُّؤْمِنٰتٌ لَّمْ تَعْلَمُوْهُمْ اَنْ تَطَـُٔوْهُمْ فَتُصِيْبَكُمْ مِّنْهُمْ مَّعَرَّةٌ ۢبِغَيْرِ عِلْمٍ ۚ لِيُدْخِلَ اللّٰهُ فِيْ رَحْمَتِهٖ مَنْ يَّشَاۤءُۚ لَوْ تَزَيَّلُوْا لَعَذَّبْنَا الَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْهُمْ عَذَابًا اَلِيْمًا

humul-lażīna kafarū wa ṣaddūkum ‘anil-masjidil-ḥarāmi wal-hadya ma‘kūfan ay yabluga maḥillah(ū), wa lau lā rijālum mu'minūna wa nisā'um mu'minātul lam ta‘lamūhum an taṭa'ūhum fa tuṣībakum minhum ma‘arratum bigairi ‘ilm(in), liyudkhilallāhu fī raḥmatihī may yasyā'(u), lau tazayyalū la‘ażżabnal-lażīna kafarū minhum ‘ażāban alīmā(n).

वे काफिर है जका थानै मस्जिद मांय प्रवेश करण सूं रोकै है अर बलिदान रा जानवरां नै बांरी (वध) री जगां तांई पूगण सूं रोकै है। अर जे ओ तथ्य नीं होतो कै केई विस्वासी, मिनख अर लुगायां है जिणनै थे नीं जाणौ हो तो थे निश्चित रूप सूं उण लोगां नै मार देता जिका थानै परेशानी पैदा करै है अर थानै इण बात रो अंदाजो नीं हो। क्यूंकै अल्लाह आपरी दया मांय जिणनै चावै उणनै भी सामिल करणो चावै है। जे वे न्यारा हो जावै तो आपां निश्चित रूप सूं बां मांय सूं काफिर करण आळा नै एक दर्दनाक सजा देवांला।


27
Q.S अल-फात (48:27)

لَقَدْ صَدَقَ اللّٰهُ رَسُوْلَهُ الرُّءْيَا بِالْحَقِّ ۚ لَتَدْخُلُنَّ الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ اِنْ شَاۤءَ اللّٰهُ اٰمِنِيْنَۙ مُحَلِّقِيْنَ رُءُوْسَكُمْ وَمُقَصِّرِيْنَۙ لَا تَخَافُوْنَ ۗفَعَلِمَ مَا لَمْ تَعْلَمُوْا فَجَعَلَ مِنْ دُوْنِ ذٰلِكَ فَتْحًا قَرِيْبًا

laqad ṣadaqallāhu rasūlahur-ru'yā bil-ḥaqq(i), latadkhulunnal-masjidal-ḥarāma in syā'allāhu āminīn(a), muḥalliqīna ru'ūsakum wa muqaṣṣirīn(a), lā takhāfūn(a), fa‘alima mā lam ta‘lamū faja‘ala min dūni żālika fatḥan qarībā(n).

साची, अल्लाह आपरै रसूल नै उणरै सुपनै री सांच साबित करैला कै थै निश्चित रूप सूं पवित्र मस्जिद मांय प्रवेश करोला, अगर अल्लाह चावै तो सुरक्षित हालत मांय, थारै सिर रा बाल मुंडवा'र अर बांनै छोटा कर'र, जदकै थै डरपोक नीं हो। तो अल्लाह जाणै है कै थै कांई नीं जाणौ अर इणरै अलावा उणनै थानै एक निकट जीत दी है।


4
Q.S एट-टूर (52:4)

وَّالْبَيْتِ الْمَعْمُوْرِۙ

wal-baitil-ma‘mūr(i).

बैतुलमामूर (का'बा) रै वास्तै,


1
Q.S अल-फिल (105:1)

اَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِاَصْحٰبِ الْفِيْلِۗ

alam tara kaifa fa‘ala rabbuka bi'aṣḥābil-fīl(i).

कांई थै (मुहम्मद) ध्यान कोनी दियो कै थारा प्रभु हाथियां री सेना रै सागै कियां व्यवहार करियो है?


3
Q.S कुरैश (106:3)

فَلْيَعْبُدُوْا رَبَّ هٰذَا الْبَيْتِۙ

falya‘budū rabba hāżal-bait(i).

तो बांनै इण घर रै स्वामी (काबा) री पूजा करणी चाइजै।