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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ अल्लाह (आस्था का स्तंभ क्रमांक 1) भगवान के नाम और गुण अल रहीम

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कुल श्लोक : 9
1
Q.S अल फतिहाह (1:1)

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

bismillāhir-raḥmānir-raḥīm(i).

अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयालु, अत्यंत कृपाशील है।


2
Q.S अल फतिहाह (1:2)

اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَۙ

al-ḥamdu lillāhi rabbil-‘ālamīn(a).

सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे विश्व का पालनहार है।


3
Q.S अल फतिहाह (1:3)

الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِۙ

ar-raḥmānir-raḥīm(i).

जो अत्यंत दयालु, अत्यंत कृपाशील है।


37
Q.S अल Baqarah (2:37)

فَتَلَقّٰٓى اٰدَمُ مِنْ رَّبِّهٖ كَلِمٰتٍ فَتَابَ عَلَيْهِ ۗ اِنَّهٗ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيْمُ

fatalaqqā ādamu mir rabbihī kalimātin fatāba ‘alaih(i), innahū huwat-tawwābur- raḥīm(u).

फिर आदम ने अपने रब से कुछ शब्द सीखे, और उसने (अल्लाह ने) उनकी तौबा कबूल की। निश्चय ही, वह बहुत तौबा कबूल करने वाला, रहम करने वाला है।


143
Q.S अल Baqarah (2:143)

وَكَذٰلِكَ جَعَلْنٰكُمْ اُمَّةً وَّسَطًا لِّتَكُوْنُوْا شُهَدَاۤءَ عَلَى النَّاسِ وَيَكُوْنَ الرَّسُوْلُ عَلَيْكُمْ شَهِيْدًا ۗ وَمَا جَعَلْنَا الْقِبْلَةَ الَّتِيْ كُنْتَ عَلَيْهَآ اِلَّا لِنَعْلَمَ مَنْ يَّتَّبِعُ الرَّسُوْلَ مِمَّنْ يَّنْقَلِبُ عَلٰى عَقِبَيْهِۗ وَاِنْ كَانَتْ لَكَبِيْرَةً اِلَّا عَلَى الَّذِيْنَ هَدَى اللّٰهُ ۗوَمَا كَانَ اللّٰهُ لِيُضِيْعَ اِيْمَانَكُمْ ۗ اِنَّ اللّٰهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ

wa każālika ja‘alnākum ummataw wasaṭal litakūnū syuhadā'a ‘alan-nāsi wa yakūnar-rasūlu ‘alaikum syahīdā(n), wa mā ja‘alnal-qiblatal-latī kunta ‘alaihā illā lina‘lama may yattabi‘ur-rasūla mimmay yanqalibu ‘alā ‘aqibaih(i), wa in kānat lakabīratan illā ‘alal-lażīna hadallāh(u), wa mā kānallāhu liyuḍī‘a īmānakum, innallāha bin-nāsi lara'ūfur raḥīm(un).

और इस तरह हमने तुम (उम्मत इस्लाम) को 'उम्मत वस्त' (मध्य मार्ग की उम्मत) बनाया ताकि तुम इंसानों पर गवाह बनो और रसूल (मुहम्मद) तुम पर गवाह बने। और हमने उस किबले को, जिस पर तुम थे, केवल इसलिए बनाया ताकि हम जान सकें कि कौन रसूल का अनुसरण करता है और कौन पीछे हटता है। निश्चय ही, (किबले का बदलना) भारी था, सिवाय उन लोगों के लिए जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी। और अल्लाह तुम्हारा ईमान बेकार नहीं करेगा। निश्चय ही, अल्लाह इंसानों के लिए बहुत मेहरबान, रहम करने वाला है।


151
Q.S अल-आराफ़ (7:151)

قَالَ رَبِّ اغْفِرْ لِيْ وَلِاَخِيْ وَاَدْخِلْنَا فِيْ رَحْمَتِكَ ۖوَاَنْتَ اَرْحَمُ الرّٰحِمِيْنَ ࣖ

qāla rabbigfirlī wa li'akhī wa adkhilnā fī raḥmatik(a), wa anta arḥamur-rāḥimīn(a).

उसने (मूसा ने) दुआ की, 'ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे भाई को माफ़ कर और हमें अपनी रहमत में शामिल कर। तू सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है।'


117
Q.S एट-तौबाह (9:117)

لَقَدْ تَّابَ اللّٰهُ عَلَى النَّبِيِّ وَالْمُهٰجِرِيْنَ وَالْاَنْصَارِ الَّذِيْنَ اتَّبَعُوْهُ فِيْ سَاعَةِ الْعُسْرَةِ مِنْۢ بَعْدِ مَا كَادَ يَزِيْغُ قُلُوْبُ فَرِيْقٍ مِّنْهُمْ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْۗ اِنَّهٗ بِهِمْ رَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ ۙ

laqat tāballāhu ‘alan-nabiyyi wal-muhājirīna wal-anṣāril-lażīnattaba‘ūhu fī sā‘atil-‘usrati mim ba‘di mā kāda yazīgu qulūbu farīqim minhum ṡumma tāba ‘alaihim, innahū bihim ra'ūfur raḥīm(un).

निश्चय ही अल्लाह ने नबी, मुहाजिरों और अंसारों की तौबा स्वीकार की, जिन्होंने मुश्किल समय में नबी का साथ दिया, जब उनमें से कुछ लोगों के दिल लगभग भटक गए थे, फिर उसने उनकी तौबा स्वीकार की। निश्चय ही अल्लाह उनके प्रति बहुत दयालु, बहुत मेहरबान है।


53
Q.S यूसुफ (12:53)

۞ وَمَآ اُبَرِّئُ نَفْسِيْۚ اِنَّ النَّفْسَ لَاَمَّارَةٌ ۢ بِالسُّوْۤءِ اِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّيْۗ اِنَّ رَبِّيْ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

wa mā ubarri'u nafsī, innan-nafsa la'ammāratum bis-sū'i illā mā raḥima rabbī, inna rabbī gafūrur raḥīm(un).

और मैं अपने आप को (गुनाह से) बरी नहीं करता, क्योंकि नफ़्स हमेशा बुराई की तरफ़ उकसाता है, सिवाय इसके कि मेरे रब ने उस पर रहम किया हो। निश्चित रूप से मेरा रब माफ़ करने वाला, मेहरबान है।


32
Q.S उधम मचाना (41:32)

نُزُلًا مِّنْ غَفُوْرٍ رَّحِيْمٍ ࣖ

nuzulam min gafūrir raḥīm(in).

(यह) उस (अल्लाह) की मेहमाननवाज़ी है जो बहुत माफ़ करने वाला, बहुत मेहरबान है।