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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Takdir (rukun iman no.5) Keimanan kepada takdir Takdir tidak menghalangi untuk berbuat kebaikan

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कुल आयत : 8
112
Q.S अल-बकराह (2:112)

بَلٰى مَنْ اَسْلَمَ وَجْهَهٗ لِلّٰهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ فَلَهٗٓ اَجْرُهٗ عِنْدَ رَبِّهٖۖ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُوْنَ ࣖ

balā man aslama wajhahū lillāhi wa huwa muḥsinun falahū ajruhū ‘inda rabbih(i), wa lā khaufun ‘alaihim wa lā hum yaḥzanūn(a).

नीं! जो कोई भी खुद नै अल्लाह रै सामी पूरी तरह सूं समर्पित कर देवै है अर वो भलाई करै है, उणनै आपरै प्रभु रै कनै इनाम मिलैला अर बां सूं कोई डर कोनी है अर बां नै दुख कोनी हुवैला।


91
Q.S अट-तवबाह (9:91)

لَيْسَ عَلَى الضُّعَفَاۤءِ وَلَا عَلَى الْمَرْضٰى وَلَا عَلَى الَّذِيْنَ لَا يَجِدُوْنَ مَا يُنْفِقُوْنَ حَرَجٌ اِذَا نَصَحُوْا لِلّٰهِ وَرَسُوْلِهٖۗ مَا عَلَى الْمُحْسِنِيْنَ مِنْ سَبِيْلٍ ۗوَاللّٰهُ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌۙ

laisa ‘alaḍ-ḍu‘afā'i wa lā ‘alal-marḍā wa lā ‘alal-lażīna lā yajidūna mā yunfiqūna ḥarajun iżā naṣaḥū lillāhi wa rasūlih(ī), mā ‘alal-muḥsinīna min sabīl(in), wallāhu gafūrur raḥīm(un).

कमजोर, बीमार अर बां लोगां रै वास्तै कोई पाप कोनी है (युद्ध में नीं जावण रो) जिका खर्चा नीं करैला, जे वै अल्लाह अर उणरै रसूल रै प्रति ईमानदार है। भलाई करण आळा लोगां नै दोष देवण रो कोई कारण कोनी है। अर अल्लाह माफ करण आळो अर दयालु है,


22
Q.S अर-राद (13:22)

وَالَّذِيْنَ صَبَرُوا ابْتِغَاۤءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَاَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاَنْفَقُوْا مِمَّا رَزَقْنٰهُمْ سِرًّا وَّعَلَانِيَةً وَّيَدْرَءُوْنَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ اُولٰۤىِٕكَ لَهُمْ عُقْبَى الدَّارِۙ

wal-lażīna ṣabarubtigā'a wajhi rabbihim wa aqāmuṣ-ṣalāta wa anfaqū mimmā razaqnāhum sirraw wa ‘alāniyataw wa yadra'ūna bil-ḥasanatis-sayyi'ata ulā'ika lahum ‘uqbad-dār(i).

अर जका लोग धीरज राखै है क्यूंकै वै आपरै प्रभु री प्रसन्नता री आस राखै है, प्रार्थना करै है अर आपां जिणनै दियो है उण रो एक हिस्सो चुपचाप या खुलेआम खर्च करै है अर बुराई नै भलाई रै साथै नकार देवै है, वो ईज मिनख है जिणनै (अच्छो) अंत मिलै है।


6
Q.S अल-'अंकाबुत (29:6)

وَمَنْ جَاهَدَ فَاِنَّمَا يُجَاهِدُ لِنَفْسِهٖ ۗاِنَّ اللّٰهَ لَغَنِيٌّ عَنِ الْعٰلَمِيْنَ

wa man jāhada fa'innamā yujāhidu linafsih(ī), innallāha laganiyyun ‘anil-‘ālamīn(a).

अर जो भी जेहाद रै वास्तै प्रयास करै है, उणरो जिहाद साची में खुद रै वास्तै है। साची, अल्लाह सगळा जगत सूं सबसूं अमीर है (किणी भी चीज री जरूरत कोनी है)।


69
Q.S अल-'अंकाबुत (29:69)

وَالَّذِيْنَ جَاهَدُوْا فِيْنَا لَنَهْدِيَنَّهُمْ سُبُلَنَاۗ وَاِنَّ اللّٰهَ لَمَعَ الْمُحْسِنِيْنَ ࣖ

wal-lażīna jāhadū fīnā lanahdiyannahum subulanā, wa innallāha lama‘al-muḥsinīn(a).

अर जका लोग म्हारै वास्तै (मंजूरी लेबा री कोशिश करै है), म्हे बांनै म्हारी राह दिखास्यां। अर साची, अल्लाह भलाई करण आळा लोगां रै सागै है।


40
Q.S ऐश शूरा (42:40)

وَجَزٰۤؤُا سَيِّئَةٍ سَيِّئَةٌ مِّثْلُهَا ۚفَمَنْ عَفَا وَاَصْلَحَ فَاَجْرُهٗ عَلَى اللّٰهِ ۗاِنَّهٗ لَا يُحِبُّ الظّٰلِمِيْنَ

wa jazā'u sayyi'atin sayyi'atum miṡluhā, faman ‘afā wa aṣlaḥa fa ajruhū ‘alallāh(i), innahū lā yuḥibbuẓ-ẓālimīn(a).

अर बुराई रो इनाम उचित बुराई है, पण जो भी माफ करैला अर भलाई करैला (बुराई करण आळा लोगां रै सागै) तो इनाम अल्लाह री तरफ सूं होसी। साची, वो अन्यायी लोगां नै पसंद कोनी करै।


8
Q.S अल-मुमताहनाह (60:8)

لَا يَنْهٰىكُمُ اللّٰهُ عَنِ الَّذِيْنَ لَمْ يُقَاتِلُوْكُمْ فِى الدِّيْنِ وَلَمْ يُخْرِجُوْكُمْ مِّنْ دِيَارِكُمْ اَنْ تَبَرُّوْهُمْ وَتُقْسِطُوْٓا اِلَيْهِمْۗ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُقْسِطِيْنَ

lā yanhākumullāhu ‘anil-lażīna lam yuqātilūkum fid-dīni wa lam yukhrijūkum min diyārikum an tabarrūhum wa tuqsiṭū ilaihim, innallāha yuḥibbul-muqsiṭīn(a).

अल्लाह थानै बां लोगां रै सागै भलाई अर निष्पक्षता सूं मना कोनी करै जिका थानै धर्म रै मामलां मांय नीं लड़ै अर थानै थारै गृहनगर सूं नीं काढै। साची, अल्लाह उण लोगां सूं प्यार करै है जका न्याय करै है।


5
Q.S अल-लैल (92:5)

فَاَمَّا مَنْ اَعْطٰى وَاتَّقٰىۙ

fa ammā man a‘ṭā wattaqā.

तो जो भी अल्लाह रै रास्ते में आपरी धन-दौलत देवै है अर धर्मी है,