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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Sejarah Sejarah Awal Mula Islam Di Mekkah Penghinaan Kaum Quraisy Orang musyrik mengejekan kaum muslimin

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कुल आयत : 7
212
Q.S अल-बकराह (2:212)

زُيِّنَ لِلَّذِيْنَ كَفَرُوا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا وَيَسْخَرُوْنَ مِنَ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا ۘ وَالَّذِيْنَ اتَّقَوْا فَوْقَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ۗ وَاللّٰهُ يَرْزُقُ مَنْ يَّشَاۤءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ

zuyyina lil-lażīna kafarul-ḥayātud-dun-yā wa yaskharūna minal-lażīna āmanū, wal-lażīnattaqau fauqahum yaumal-qiyāmah(ti), wallāhu yarzuqu may yasyā'u bigairi ḥisāb(in).

सांसारिक जीवन के अविश्वास करय वाला के नजर में सुन्दर बुझाइत अछि, आ विश्वास करय वाला के अपमान करैत अछि. भले ही पुण्यात्मा कयामत के दिन हुनका सब स ऊपर रहत। आरू अल्लाह जेकरा अपनऽ इच्छा छै ओकरा बिना कोनो गणना के रोजी-रोटी दै छै ।


7
Q.S सबा (34:7)

وَقَالَ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا هَلْ نَدُلُّكُمْ عَلٰى رَجُلٍ يُّنَبِّئُكُمْ اِذَا مُزِّقْتُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍۙ اِنَّكُمْ لَفِيْ خَلْقٍ جَدِيْدٍۚ

wa qālal-lażīna kafarū hal nadullukum ‘alā rajuliy yunabbi'ukum iżā muzziqtum kulla mumazzaq(in), innakum lafī khalqin jadīd(in).

आ काफिर सभ (अपन साथी सभ सँ) कहलक जे, “की हम सभ अहाँ सभ केँ एहन आदमी देखाबी जे अहाँ सभ केँ सूचित करत जे जखन अहाँक शरीर पूर्णतः नष्ट भऽ जायत तखन अहाँ सभ निश्चित रूप सँ नव सृष्टि मे जीबि उठब?


63
Q.S दुखद (38:63)

اَتَّخَذْنٰهُمْ سِخْرِيًّا اَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ الْاَبْصَارُ

attakhażnāhum sikhriyyan am zāgat ‘anhumul-abṣār(u).

पहिने मजाक उड़ाबैत छलहुँ, आकि आँखिक दृष्टि हमरा सभकेँ देखबासँ रोकैत छल?”


29
Q.S अल-मुताफिफिन (83:29)

اِنَّ الَّذِيْنَ اَجْرَمُوْا كَانُوْا مِنَ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا يَضْحَكُوْنَۖ

innal-lażīna ajramū kānū minal-lażīna āmanū yaḍḥakūn(a).

सचमुच पापी ओ छथि जे पहिने विश्वासी पर हँसैत छलाह।


30
Q.S अल-मुताफिफिन (83:30)

وَاِذَا مَرُّوْا بِهِمْ يَتَغَامَزُوْنَۖ

wa iżā marrū bihim yatagāmazūn(a).

आ जखन ओ सभ (विश्वासी) हुनका सभक आगू सँ गुजरैत छथि तखन एक-दोसर केँ आँखि मिचौने छथि।


31
Q.S अल-मुताफिफिन (83:31)

وَاِذَا انْقَلَبُوْٓا اِلٰٓى اَهْلِهِمُ انْقَلَبُوْا فَكِهِيْنَۖ

wa iżanqalabū ilā ahlihimunqalabū fakihīn(a).

आ जखन ओ सभ अपन लोक लग घुरि गेलाह तँ ओ सभ खुशी-खुशी घुरि गेलाह।


32
Q.S अल-मुताफिफिन (83:32)

وَاِذَا رَاَوْهُمْ قَالُوْٓا اِنَّ هٰٓؤُلَاۤءِ لَضَاۤلُّوْنَۙ

wa iżā ra'auhum qālū inna hā'ulā'i laḍāllūn(a).

आ जखन ओ सभ (विश्वासी सभ केँ) देखैत छथि तऽ कहैत छथि, "सत्ते ओ सभ सत्ते गुमराह लोक छथि।"