فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُوْلٍ حَسَنٍ وَّاَنْۢبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنًاۖ وَّكَفَّلَهَا زَكَرِيَّا ۗ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهَا زَكَرِيَّا الْمِحْرَابَۙ وَجَدَ عِنْدَهَا رِزْقًا ۚ قَالَ يٰمَرْيَمُ اَنّٰى لَكِ هٰذَا ۗ قَالَتْ هُوَ مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ ۗ اِنَّ اللّٰهَ يَرْزُقُ مَنْ يَّشَاۤءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ
fataqabbalahā rabbuhā biqabūlin ḥasaniw wa ambatahā nabātan ḥasanā(n), wa kaffalahā zakariyyā, kullamā dakhala ‘alaihā zakariyyal-miḥrāba wajada ‘indahā rizqā(n), qāla yā maryama annā laki hāżā, qālat huwa min ‘indillāh(i), innallāha yarzuqu may yasyā'u bigairi ḥisāb(in).
अतः ओ (अल्लाह) हुनका नीक स्वीकृति के संग स्वीकार केलनि, नीक वृद्धि के संग हुनकर पालन-पोषण केलनि आ हुनकर देखभाल जकरयाह के सौंप देलनि | जकरिया जखन-जखन मिहराब (पूजाक लेल विशेष कोठली) मे हुनका देखय अबैत छलाह, हुनका बगल मे भोजन भेटैत छलनि | ओ बजलाह, "हे मरियम! ई बात कत' सँ भेटल?" ओ (मरियम) उत्तर देलनि, “ई अल्लाह सँ अछि।” सचमुच अल्लाह जेकरा चाहै छै ओकरा बिना कोनो गणना के रोजी-रोटी दै छै।
ذٰلِكَ مِنْ اَنْۢبَاۤءِ الْغَيْبِ نُوْحِيْهِ اِلَيْكَ ۗوَمَا كُنْتَ لَدَيْهِمْ اِذْ يُلْقُوْنَ اَقْلَامَهُمْ اَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَۖ وَمَا كُنْتَ لَدَيْهِمْ اِذْ يَخْتَصِمُوْنَ
Żālika min ambā'il-gaibi nūḥīhi ilaik(a), wa mā kunta ladaihim iż yulqūna aqlāmahum ayyuhum yakfulu maryam(a), wa mā kunta ladaihim iż yakhtaṣimūn(a).
ई किछु अनदेखल खबर अछि जे हम अहाँ (मुहम्मद) केँ प्रकट केने रही, भले अहाँ हुनका सभक संग नहि छलहुँ जखन ओ सभ अपन कलम फेकैत छलाह (चिंता खींचय लेल) जे हुनका सभ मे सँ कोन पर मरियम राखत। आ जखन ओ सभ झगड़ा करैत छल तखन अहाँ हुनका सभक संग नहि छलहुँ ।
وَاذْكُرْ فِى الْكِتٰبِ مَرْيَمَۘ اِذِ انْتَبَذَتْ مِنْ اَهْلِهَا مَكَانًا شَرْقِيًّا ۙ
ważkur fil-kitābi maryam(a), iżintabażat min ahlihā makānan syarqiyyā(n).
आरू (मुहम्मद) क॑ किताब (अल-कुरान) म॑ मरियम केरऽ कहानी सुनाबै, (अर्थात) जब॑ वू खुद क॑ अपनऽ परिवार स॑ पूरब (बैतुलमकदीस) केरऽ जगह प॑ निर्वासित करी लेलकै,
فَاتَّخَذَتْ مِنْ دُوْنِهِمْ حِجَابًاۗ فَاَرْسَلْنَآ اِلَيْهَا رُوْحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّا
fattakhażat min dūnihim ḥijābā(n), fa arsalnā ilaihā rūḥanā fa tamaṡṡala lahā basyaran sawiyyā(n).
तखन ओ हुनका सभ सँ घूंघट (जे हुनकर रक्षा करैत छल) लगा देलनि। तखन हम सभ अपन आत्मा (जिब्रिल) हुनका लग पठौलनि, तेँ ओ हुनका समक्ष पूर्ण मानवीय रूप मे प्रकट भेलाह |
قَالَتْ اَنّٰى يَكُوْنُ لِيْ غُلٰمٌ وَّلَمْ يَمْسَسْنِيْ بَشَرٌ وَّلَمْ اَكُ بَغِيًّا
qālat annā yakūnu lī gulāmuw wa lam yamsasnī basyaruw wa lam aku bagiyyā(n).
ओ (मर्याम) बजलीह, “हमरा बेटा कोना होयत जखन कि हमरा कहियो कोनो पुरुष हाथ नहि लगौने अछि आ हम कोनो अपतिव्रता स्त्री नहि छी!”
يٰٓاُخْتَ هٰرُوْنَ مَا كَانَ اَبُوْكِ امْرَاَ سَوْءٍ وَّمَا كَانَتْ اُمُّكِ بَغِيًّا ۖ
yā ukhta hārūna kāna abūkimra'a sau'iw wa mā kānat ummuki bagiyyā(n).
हे हारून (मर्याम) के बहिन! अहाँक पिता कोनो अधलाह नहि छथि आ अहाँक माय व्यभिचारी नहि छथि |"
وَالَّتِيْٓ اَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيْهَا مِنْ رُّوْحِنَا وَجَعَلْنٰهَا وَابْنَهَآ اٰيَةً لِّلْعٰلَمِيْنَ
wal-latī aḥṣanat farjahā fa nafakhnā fīhā mir rūḥinā wa ja‘alnāhā wabnahā āyatal lil-‘ālamīn(a).
आ (मरियमक कथा मोन राखू) जे अपन इज्जत बनौने छलीह, तखन हम सभ हमरा सभसँ (हुनकर आत्मा) ओकरा (शरीर) मे साँस लेलहुँ; हम हुनका आ हुनकर बच्चा सब के सब दुनिया के लेल (अल्लाह के महानता के) निशानी बना देलहुं।