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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Shalat Shalat wajib

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कुल आयत : 6
43
Q.S अल-बकराह के ह (2:43)

وَاَقِيْمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَ وَارْكَعُوْا مَعَ الرّٰكِعِيْنَ

wa aqīmuṣ-ṣalāta wa ātuz-zakāta warka‘ū ma‘ar-rāki‘īn(a).

आ नमाज करीं, जकात करीं, आ प्रणाम करे वालन के साथे प्रणाम करीं।


103
Q.S अन-निसा के बा (4:103)

فَاِذَا قَضَيْتُمُ الصَّلٰوةَ فَاذْكُرُوا اللّٰهَ قِيَامًا وَّقُعُوْدًا وَّعَلٰى جُنُوْبِكُمْ ۚ فَاِذَا اطْمَأْنَنْتُمْ فَاَقِيْمُوا الصَّلٰوةَ ۚ اِنَّ الصَّلٰوةَ كَانَتْ عَلَى الْمُؤْمِنِيْنَ كِتٰبًا مَّوْقُوْتًا

fa iżā qaḍaitumuṣ-ṣalāta fażkurullāha qiyāmaw wa qu‘ūdaw wa ‘alā junūbikum, fa iżaṭma'nantum fa aqīmuṣ-ṣalāh(ta), innaṣ-ṣalāta kānat ‘alal-mu'minīna kitābam mauqūtā(n).

एकरा अलावे जब आप (अपना) नमाज पूरा क लेब त खड़ा होखे के समय, बईठे के समय अवुरी लेट के समय अल्लाह के याद करीं। फिर जब रउवा सुरक्षित महसूस करीं त फिर नमाज (हमेशा के तरह) करीं। दरअसल, प्रार्थना विश्वासियन खातिर एगो समय निर्धारित दायित्व ह।


78
Q.S अल-इसरा के ह (17:78)

اَقِمِ الصَّلٰوةَ لِدُلُوْكِ الشَّمْسِ اِلٰى غَسَقِ الَّيْلِ وَقُرْاٰنَ الْفَجْرِۗ اِنَّ قُرْاٰنَ الْفَجْرِ كَانَ مَشْهُوْدًا

aqimiṣ-ṣalāta lidulūkisy-syamsi ilā gasaqil-laili wa qur'ānal-fajr(i), inna qur'ānal-fajri kāna masyhūdā(n).

सूरज डूबे के पल से लेके रात के अन्हार तक नमाज करीं आ (फजर के नमाज भी करीं)। दरअसल, सुबह के नमाज के गवाह (फरिश्ता लोग) रहे।


14
Q.S ता-हा के बा (20:14)

اِنَّنِيْٓ اَنَا اللّٰهُ لَآ اِلٰهَ اِلَّآ اَنَا۠ فَاعْبُدْنِيْۙ وَاَقِمِ الصَّلٰوةَ لِذِكْرِيْ

innanī anallāhu lā ilāha illā ana fa‘budnī, wa aqimiṣ-ṣalāta liżikrī.

साँचहू हम अल्लाह हईं, हमरा अलावे कवनो देवता नइखन एहसे हमार इबादत करीं आ हमरा के याद करे खातिर नमाज करीं.


17
Q.S अर-रम के बा (30:17)

فَسُبْحٰنَ اللّٰهِ حِيْنَ تُمْسُوْنَ وَحِيْنَ تُصْبِحُوْنَ

fa subḥānallāhi ḥīna tumsūna wa ḥīna tuṣbiḥūn(a).

त शाम के आ सबेरे (भोर) अल्लाह के महिमामंडन करीं,


18
Q.S अर-रम के बा (30:18)

وَلَهُ الْحَمْدُ فِى السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ وَعَشِيًّا وَّحِيْنَ تُظْهِرُوْنَ

wa lahul-ḥamdu fis-samāwāti wal-arḍi wa ‘asyiyyaw wa ḥīna tuẓhirūn(a).

आ आकाश में, धरती पर, रात में आ दुपहरिया में उनकर सब स्तुति होखे।