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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ अल्लाह (आस्था का स्तंभ क्रमांक 1) भगवान के नाम और गुण ख़ुदा की क़ुदरत और अस्माउल हुस्ना अल गफूर जो क्षमा देता है

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कुल श्लोक : 5
110
Q.S एक-निसा (4:110)

وَمَنْ يَّعْمَلْ سُوْۤءًا اَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهٗ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اللّٰهَ يَجِدِ اللّٰهَ غَفُوْرًا رَّحِيْمًا

wa may ya‘mal sū'an au yaẓlim nafsahū ṡumma yastagfirillāha yajidillāha gafūrar raḥīmā(n).

और जो कोई बुराई करता है या अपनी आत्मा पर अत्याचार करता है, फिर अल्लाह से माफी माँगता है, वह अल्लाह को अति क्षमाशील, दयालु पाएगा।


119
Q.S एक Nahl (16:119)

ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِيْنَ عَمِلُوا السُّوْۤءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابُوْا مِنْۢ بَعْدِ ذٰلِكَ وَاَصْلَحُوْٓا اِنَّ رَبَّكَ مِنْۢ بَعْدِهَا لَغَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ ࣖ

Ṡumma inna rabbaka lil-lażīna ‘amilus-sū'a bijahālatin ṡumma tābū mim ba‘di żālika wa aṣlaḥū inna rabbaka mim ba‘dihā lagafūrur raḥīm(un).

फिर निश्चित रूप से तुम्हारा रब उन लोगों के लिए (माफ करने वाला है) जो नादानी में गलती करते हैं, फिर उसके बाद तौबा करते हैं और अपने आप को सुधारते हैं, निश्चित रूप से तुम्हारा रब उसके बाद बहुत माफ करने वाला, बहुत मेहरबान है।


53
Q.S अज़-ज़ुमर (39:53)

۞ قُلْ يٰعِبَادِيَ الَّذِيْنَ اَسْرَفُوْا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوْا مِنْ رَّحْمَةِ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ يَغْفِرُ الذُّنُوْبَ جَمِيْعًا ۗاِنَّهٗ هُوَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ

qul yā ‘ibādiyal-lażīna asrafū ‘alā anfusihim lā taqnaṭū mir raḥmatillāh(i), innallāha yagfiruż-żunūba jamī‘ā(n), innahū huwal-gafūrur-raḥīm(u).

कहो, 'ऐ मेरे बन्दों जो अपनी जानों पर ज़्यादती कर चुके! अल्लाह की रहमत से मायूस न हो। निश्चित रूप से, अल्लाह सारे गुनाहों को माफ करता है। निश्चित रूप से, वही बहुत माफ करने वाला, बहुत रहम करने वाला है।


3
Q.S ग़ाफिर (40:3)

غَافِرِ الذَّنْۢبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَدِيْدِ الْعِقَابِ ذِى الطَّوْلِۗ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ ۗاِلَيْهِ الْمَصِيْرُ

gāfiriż-żambi wa qābilit-taubi syadīdil-‘iqābi żiṭ-ṭaul(i), lā ilāha illā huw(a), ilaihil-maṣīr(u).

जो गुनाहों को माफ करता है और तौबा क़बूल करता है और उसकी सजा सख्त है; जो मेहरबानी का मालिक है। उसके सिवा कोई माबूद नहीं। उसी की ओर (सब) लौटाए जाएँगे।


2
Q.S अल-मुल्क (67:2)

ۨالَّذِيْ خَلَقَ الْمَوْتَ وَالْحَيٰوةَ لِيَبْلُوَكُمْ اَيُّكُمْ اَحْسَنُ عَمَلًاۗ وَهُوَ الْعَزِيْزُ الْغَفُوْرُۙ

allażī khalaqal-mauta wal-ḥayāta liyabluwakum ayyukum aḥsanu ‘amalā(n), wa huwal-‘azīzul-gafūr(u).

जिसने मौत और ज़िंदगी को पैदा किया, ताकि वह तुम्हारी आज़माइश करे कि तुममें से कौन अपने कर्मों में सबसे बेहतर है। और वह बहुत शक्तिशाली, बहुत माफ करने वाला है।