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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ अल्लाह (आस्था का स्तंभ क्रमांक 1) भगवान के नाम और गुण ख़ुदा की क़ुदरत और अस्माउल हुस्ना अल मुसव्विर जो उपस्थिति को आकार देता है

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कुल श्लोक : 6
6
Q.S अली इमरान (3:6)

هُوَ الَّذِيْ يُصَوِّرُكُمْ فِى الْاَرْحَامِ كَيْفَ يَشَاۤءُ ۗ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ الْعَزِيْزُ الْحَكِيْمُ

huwal-lażī yuṣawwirukum fil-arḥāmi kaifa yasyā'(u), lā ilāha illā huwal-‘azīzul-ḥakīm(u).

वही है जो तुम्हें गर्भ में जैसा चाहता है, वैसा आकार देता है। उसके सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। वह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी है।


64
Q.S ग़ाफिर (40:64)

اَللّٰهُ الَّذِيْ جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ قَرَارًا وَّالسَّمَاۤءَ بِنَاۤءً وَّصَوَّرَكُمْ فَاَحْسَنَ صُوَرَكُمْ وَرَزَقَكُمْ مِّنَ الطَّيِّبٰتِ ۗذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْ ۚ فَتَبٰرَكَ اللّٰهُ رَبُّ الْعٰلَمِيْنَ

allāhul-lażī ja‘ala lakumul-arḍa qarāraw was-samā'a binā'aw wa ṣawwarakum fa'aḥsana ṣuwarakum wa razaqakum minaṭ-ṭayyibāt(i), żālikumullāhu rabbukum, fatabārakallāhu rabbul-‘ālamīn(a).

अल्लाह ही वह है जिसने तुम्हारे लिए धरती को ठहरने की जगह बनाया और आकाश को छत बनाया, और तुम्हें बनाया फिर तुम्हारी सूरत को खूबसूरत किया और तुम्हें अच्छी चीज़ों से रिज़्क़ दिया। यही अल्लाह है, तुम्हारा रब, बहुत बरकत वाला है अल्लाह, सारे जहान का रब।


24
Q.S अल हश्र (59:24)

هُوَ اللّٰهُ الْخَالِقُ الْبَارِئُ الْمُصَوِّرُ لَهُ الْاَسْمَاۤءُ الْحُسْنٰىۗ يُسَبِّحُ لَهٗ مَا فِى السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِۚ وَهُوَ الْعَزِيْزُ الْحَكِيْمُ ࣖ

huwallāhul-khāliqul-bāri'ul-muṣawwiru lahul-asmā'ul-ḥusnā, yusabbiḥu lahū mā fis-samāwāti wal-arḍ(i), wa huwal-‘azīzul-ḥakīm(u).

वही अल्लाह है जो पैदा करने वाला, बनाने वाला, रूप देने वाला है, उसके लिए सबसे अच्छे नाम हैं। जो कुछ आकाशों और धरती में है, वह उसकी तस्बीह करता है। और वही बहुत शक्तिशाली, बहुत हिकमत वाला है।


3
Q.S अत-तगाबुन (64:3)

خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّ وَصَوَّرَكُمْ فَاَحْسَنَ صُوَرَكُمْۚ وَاِلَيْهِ الْمَصِيْرُ

khalaqas-samāwāti wal-arḍa bil-ḥaqqi wa ṣawwarakum fa'aḥsana ṣuwarakum, wa ilaihil-maṣīr(u).

उसने आकाशों और धरती को हक़ के साथ बनाया, उसने तुम्हारी शक्ल बनाई और तुम्हारी शक्ल को खूबसूरत किया, और उसी की ओर लौटना है।


6
Q.S अल-इन्फितार (82:6)

يٰٓاَيُّهَا الْاِنْسَانُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ الْكَرِيْمِۙ

yā ayyuhal-insānu mā garraka birabbikal-karīm(i).

ऐ इंसान! क्या चीज़ ने तुम्हें तुम्हारे महान रब के प्रति अवज्ञा करने के लिए बहकाया,


8
Q.S अल-इन्फितार (82:8)

فِيْٓ اَيِّ صُوْرَةٍ مَّا شَاۤءَ رَكَّبَكَۗ

fī ayyi ṣūratim mā syā'a rakkabak(a).

जो भी रूप वह चाहता, उसने तुम्हारे शरीर को संरचित किया।