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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Sejarah Sejarah Awal Mula Islam Di Mekkah Penghinaan Kaum Quraisy Penyiksaan terhadap orang mukmin yang lemah

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कुल आयत : 6
75
Q.S अन-निसा के बा (4:75)

وَمَا لَكُمْ لَا تُقَاتِلُوْنَ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَالْمُسْتَضْعَفِيْنَ مِنَ الرِّجَالِ وَالنِّسَاۤءِ وَالْوِلْدَانِ الَّذِيْنَ يَقُوْلُوْنَ رَبَّنَآ اَخْرِجْنَا مِنْ هٰذِهِ الْقَرْيَةِ الظَّالِمِ اَهْلُهَاۚ وَاجْعَلْ لَّنَا مِنْ لَّدُنْكَ وَلِيًّاۚ وَاجْعَلْ لَّنَا مِنْ لَّدُنْكَ نَصِيْرًا

wa mā lakum lā tuqātilūna fī sabīlillāhi wal-mustaḍ‘afīna minar-rijāli wan-nisā'i wal-wildānil-lażīna yaqūlūna rabbanā akhrijnā min hāżihil-qaryatiẓ-ẓālimi ahluhā, waj‘al lanā mil ladunka waliyyā(n), waj‘al lanā mil ladunka naṣīrā(n).

आ काहे ना रउरा अल्लाह के राह में लड़ल चाहत बानी आ कमजोरन के (रक्षा) करे के चाहत बानी, चाहे ऊ मरद होखे, मेहरारू भा लइका जे प्रार्थना करेलें कि "हमार रब, हमनी के एह भूमि (मक्का) से बाहर निकाल दीं जवना के निवासी अन्यायी बाड़े. हमनी के अपना तरफ से एगो रक्षक दीं, आ अपना तरफ से एगो सहायक दीं."


41
Q.S एन-नहल के बा (16:41)

وَالَّذِيْنَ هَاجَرُوْا فِى اللّٰهِ مِنْۢ بَعْدِ مَا ظُلِمُوْا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِى الدُّنْيَا حَسَنَةً ۗوَلَاَجْرُ الْاٰخِرَةِ اَكْبَرُۘ لَوْ كَانُوْا يَعْلَمُوْنَۙ

wal-lażīna hājarū fillāhi mim ba‘di mā ẓulimū lanubawwi'annahum fid-dun-yā ḥasanah(tan), wa la'ajrul-ākhirati akbar(u), lau kānū ya‘lamūn(a).

आ जे लोग अन्याय भइला के बाद अल्लाह के खातिर प्रवास करेला, हमनी के ओह लोग के दुनिया में एगो बढ़िया जगह जरूर देब जा। आ परलोक में इनाम जरूर अधिका होई, अगर उ लोग जानत रहित।


110
Q.S एन-नहल के बा (16:110)

ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِيْنَ هَاجَرُوْا مِنْۢ بَعْدِ مَا فُتِنُوْا ثُمَّ جَاهَدُوْا وَصَبَرُوْاۚ اِنَّ رَبَّكَ مِنْۢ بَعْدِهَا لَغَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ ࣖ

Ṡumma inna rabbaka lil-lażīna hājarū mim ba‘di mā futinū ṡumma jāhadū wa ṣabarū, inna rabbaka mim ba‘dihā lagafūrur raḥīm(un).

तब राउर रब (रक्षक) ओह लोग खातिर जे परीक्षा भोगला के बाद पलायन करेला, तब उ लोग जिहाद खातिर प्रयास करेला आ धैर्य राखेला, सचमुच, ओकरा बाद राउर रब सही मायने में क्षमाशील, दयालु हवे।


8
Q.S अल-हशर के ह (59:8)

لِلْفُقَرَاۤءِ الْمُهٰجِرِيْنَ الَّذِيْنَ اُخْرِجُوْا مِنْ دِيَارِهِمْ وَاَمْوَالِهِمْ يَبْتَغُوْنَ فَضْلًا مِّنَ اللّٰهِ وَرِضْوَانًا وَّيَنْصُرُوْنَ اللّٰهَ وَرَسُوْلَهٗ ۗ اُولٰۤىِٕكَ هُمُ الصّٰدِقُوْنَۚ

lil-fuqarā'il-muhājirīnal-lażīna ukhrijū min diyārihim wa amwālihim yabtagūna faḍlam minallāhi wa riḍwānaw wa yanṣurūnallāha wa rasūlah(ū), ulā'ika humuṣ-ṣādiqūn(a).

(लूट के सामान भी) ओह गरीब लोग खातिर बा जे पलायन कइले रहे जेकरा के अपना गृहनगर से निकाल दिहल गइल रहे आ अल्लाह से कृपा आ (उनकर) प्रसन्नता के मांग करे खातिर आ (उनकर) अल्लाह आ उनकर रसूलुल्लाह के (धर्म के) मदद करे के चक्कर में आपन संपत्ति छोड़ के चल गइल रहे। उहे लोग सच्चा लोग हवे।


1
Q.S अल-मुमतहानाह के ह (60:1)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تَتَّخِذُوْا عَدُوِّيْ وَعَدُوَّكُمْ اَوْلِيَاۤءَ تُلْقُوْنَ اِلَيْهِمْ بِالْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوْا بِمَا جَاۤءَكُمْ مِّنَ الْحَقِّۚ يُخْرِجُوْنَ الرَّسُوْلَ وَاِيَّاكُمْ اَنْ تُؤْمِنُوْا بِاللّٰهِ رَبِّكُمْۗ اِنْ كُنْتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَادًا فِيْ سَبِيْلِيْ وَابْتِغَاۤءَ مَرْضَاتِيْ تُسِرُّوْنَ اِلَيْهِمْ بِالْمَوَدَّةِ وَاَنَا۠ اَعْلَمُ بِمَآ اَخْفَيْتُمْ وَمَآ اَعْلَنْتُمْۗ وَمَنْ يَّفْعَلْهُ مِنْكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاۤءَ السَّبِيْلِ

yā ayyuhal-lażīna āmanū lā tattakhiżū ‘aduwwī wa ‘aduwwakum auliyā'a tulqūna ilaihim bil-mawaddati wa qad kafarū bimā jā'akum minal-ḥaqq(i), yukhrijūnar-rasūla wa iyyākum an tu'minū billāhi rabbikum, in kuntum kharajtum jihādan fī sabīlī wabtigā'a marḍātī tusirrūna ilaihim bil-mawaddah(ti), wa ana a‘lamu bimā akhfaitum wa mā a‘lantum, wa may yaf‘alhu minkum faqad ḍalla sawā'as-sabīl(i).

हे विश्वास करे वाला लोग! हमरा दुश्मनन आ अपना दुश्मनन के वफादार दोस्त मत बनाईं जेहसे कि रउरा ओह लोग के (मुहम्मद के खबर) पहुँचा दीं, करुणा से; भले ही उ लोग ओह सच्चाई के नकार देले होखस जवन तोहरा तक पहुंचावल गईल रहे। उ लोग रसूलुल्लाह अवुरी आपके खुद के बाहर क देले, काहेंकी आप अपना रब अल्लाह प विश्वास कईले रहनी। अगर रउआ सचमुच हमरा रास्ता खातिर प्रयास करे खातिर निकलत बानी आ हमार सुख खोजत बानी (अइसन मत करीं)। रउरा ओह लोग के (मुहम्मद के खबर) गुप्त रूप से, करुणा से बतावत बानी आ हम बेहतर जानत बानी कि रउरा का छिपावत बानी आ का उजागर करत बानी. आ तोहनी में से जे अइसन करी त साँचहू ऊ सीधा राह से भटक गइल बा.


9
Q.S अल-मुमतहानाह के ह (60:9)

اِنَّمَا يَنْهٰىكُمُ اللّٰهُ عَنِ الَّذِيْنَ قَاتَلُوْكُمْ فِى الدِّيْنِ وَاَخْرَجُوْكُمْ مِّنْ دِيَارِكُمْ وَظَاهَرُوْا عَلٰٓى اِخْرَاجِكُمْ اَنْ تَوَلَّوْهُمْۚ وَمَنْ يَّتَوَلَّهُمْ فَاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الظّٰلِمُوْنَ

innamā yanhākumullāhu ‘anil-lażīna qātalūkum fid-dīni wa akhrajūkum min diyārikum wa ẓāharū ‘alā ikhrājikum an tawallauhum, wa may yatawallahum fa'ulā'ika humuẓ-ẓālimūn(a).

दरअसल अल्लाह त खाली ओह लोग के दोस्त बनावे से मना कर देले बाड़न जे धर्म के मामिला में रउरा से लड़त बा आ रउरा के रउरा गृहनगर से निकालत बा आ (दूसरन के) रउरा के निकाले में मदद करत बा. जे ओह लोग के दोस्त मान लेला, उहे गलत करे वाला।