اِنَّ اَوَّلَ بَيْتٍ وُّضِعَ لِلنَّاسِ لَلَّذِيْ بِبَكَّةَ مُبٰرَكًا وَّهُدًى لِّلْعٰلَمِيْنَۚ
inna awwala baitiw wuḍi‘a lin-nāsi lal-lażī bibakkata mubārakaw wa hudal lil-‘ālamīn(a).
सचमुच, मनुष्य के लेल बनल पहिल घर (इबादत के), बक्का (मक्का) में (बैतुल्लाह) छल जे आशीर्वादित छल आ सब लोक के लेल मार्गदर्शक बनि गेल छल |
فِيْهِ اٰيٰتٌۢ بَيِّنٰتٌ مَّقَامُ اِبْرٰهِيْمَ ەۚ وَمَنْ دَخَلَهٗ كَانَ اٰمِنًا ۗ وَلِلّٰهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ اِلَيْهِ سَبِيْلًا ۗ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعٰلَمِيْنَ
fīhi āyātum bayyinātum maqāmu ibrāhīm(a), wa man dakhalahū kāna āminā(n), wa lillāhi ‘alan-nāsi ḥijjul-baiti manistaṭā‘a ilaihi sabīlā(n), wa man kafara fa innallāha ganiyyun ‘anil-‘ālamīn(a).
ओतय स्पष्ट संकेत अछि, (ओहि मे) इब्राहिम के स्टेशन। जे कियो एहि मे प्रवेश करत (बैतुल्लाह) सुरक्षित रहत। आरू (अल्लाह के प्रति) मानवीय फर्जऽ म॑ बैतुल्लाह केरऽ तीर्थ यात्रा करना छै, यानी वू लोगऽ लेली जे वहाँ यात्रा करै म॑ सक्षम छै । जे कियो हज (फजज) के नकारैत अछि, तखन ई जानि लिअ जे अल्लाह सब दुनिया स सबस बेसी धनिक छथि (कोनो चीज के जरूरत नै अछि)।
وَاِذْ قَالَ اِبْرٰهِيْمُ رَبِّ اجْعَلْ هٰذَا الْبَلَدَ اٰمِنًا وَّاجْنُبْنِيْ وَبَنِيَّ اَنْ نَّعْبُدَ الْاَصْنَامَ ۗ
wa iż qāla ibrāhīmu rabbij‘al hāżal-balada āminaw wajnubnī wa baniyya an na‘budal-aṣnām(a).
आ (याद राखू), जखन अब्राहम प्रार्थना केलनि, "हे भगवान, एहि देश (मक्का) केँ सुरक्षित देश बनाउ आ हमरा आ हमर बच्चा आ पोता-पोती केँ मूर्तिक पूजा सँ बचाउ।"
اِنَّمَآ اُمِرْتُ اَنْ اَعْبُدَ رَبَّ هٰذِهِ الْبَلْدَةِ الَّذِيْ حَرَّمَهَا وَلَهٗ كُلُّ شَيْءٍ وَّاُمِرْتُ اَنْ اَكُوْنَ مِنَ الْمُسْلِمِيْنَ ۙ
innamā umirtu an a‘buda rabba hāżihil-baldatil-lażī ḥarramahā wa lahū kullu syai'iw wa umirtu an akūna minal-muslimīn(a).
हमरा (मुहम्मद) के केवल एहि शहर (मक्का) के प्रभु के पूजा करबाक आज्ञा देल गेल अछि, जेकरा ओ ओहि में पवित्र केने छथि, आ सब किछु हुनकर अछि | आ हमरा मुसलमान मे सँ बनबाक आज्ञा देल गेल अछि,
وَقَالُوْٓا اِنْ نَّتَّبِعِ الْهُدٰى مَعَكَ نُتَخَطَّفْ مِنْ اَرْضِنَاۗ اَوَلَمْ نُمَكِّنْ لَّهُمْ حَرَمًا اٰمِنًا يُّجْبٰٓى اِلَيْهِ ثَمَرٰتُ كُلِّ شَيْءٍ رِّزْقًا مِّنْ لَّدُنَّا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُوْنَ
wa qālū in natabi‘il-hudā ma‘aka nutakhaṭṭaf min arḍinā, awalam numakkil lahum ḥaraman āminay yujbā ilaihi ṡamarātu kulli syai'ir rizqam mil ladunnā wa lākinna akṡarahum lā ya‘lamūn(a).
आ ओ सभ कहलथिन, "अहाँक निर्देशक पालन करब तँ हमरा सभ केँ अपन देश सँ निकालि देल जायत।" (अल्लाह कहलनि) की हम सभ हरम (पवित्र भूमि) केर सुरक्षित आ सुरक्षित भूमि मे हुनकर स्थितिक पुष्टि नहि केने छी, जतय ओ सभ हमरा दिस सँ (अहाँ सभक लेल) रोजी-रोटीक रूप मे सभ तरहक (पौधा) सँ फल अनैत छथि? मुदा बेसी गोटेकेँ नहि बुझल छनि।
اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّا جَعَلْنَا حَرَمًا اٰمِنًا وَّيُتَخَطَّفُ النَّاسُ مِنْ حَوْلِهِمْۗ اَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُوْنَ وَبِنِعْمَةِ اللّٰهِ يَكْفُرُوْنَ
awalam yarau annā ja‘alnā ḥaraman āminaw wa yutakhaṭṭafun-nāsu min ḥaulihim, afabil-bāṭili yu'minūna wa bini‘matillāhi yakfurūn(a).
की ओ सभ ई नहि देखैत छथि जे हम सभ (हुनकर भूमि) केँ सुरक्षित पवित्र स्थान बना देने छी, जखन कि ओकर चारू कात लोक एक-दोसर केँ लूटि रहल अछि? कियैक (सत्य स्पष्ट भेलाक बाद) ओ सभ एखनो झूठ मे विश्वास करैत छथि आ अल्लाह केर एहसान सँ इनकार करैत छथि?
لَآ اُقْسِمُ بِهٰذَا الْبَلَدِۙ
lā uqsimu bihāżal-balad(i).
हम एहि भूमि (मक्का) केर कसम खाइत छी,
وَهٰذَا الْبَلَدِ الْاَمِيْنِۙ
wa hāżal-baladil-amīn(i).
आ एहि सुरक्षित देश (मक्का) के लेल।