اَمْ حَسِبْتُمْ اَنْ تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ وَلَمَّا يَعْلَمِ اللّٰهُ الَّذِيْنَ جَاهَدُوْا مِنْكُمْ وَيَعْلَمَ الصّٰبِرِيْنَ
am ḥasibtum an tadkhulul-jannata wa lammā ya‘lamillāhul-lażīna jāhadū minkum wa ya‘lamaṣ-ṣābirīn(a).
की अहाँ के लगैत अछि जे अहाँ जन्नत में प्रवेश करब जखन कि अल्लाह एखन धरि अहाँ सब में स ओहि के पता नै लगेने छथि जे मेहनत करैत छथि आ रोगी के पता लगाबैत छथि?
لَا يَسْتَوِى الْقٰعِدُوْنَ مِنَ الْمُؤْمِنِيْنَ غَيْرُ اُولِى الضَّرَرِ وَالْمُجٰهِدُوْنَ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْۗ فَضَّلَ اللّٰهُ الْمُجٰهِدِيْنَ بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْ عَلَى الْقٰعِدِيْنَ دَرَجَةً ۗ وَكُلًّا وَّعَدَ اللّٰهُ الْحُسْنٰىۗ وَفَضَّلَ اللّٰهُ الْمُجٰهِدِيْنَ عَلَى الْقٰعِدِيْنَ اَجْرًا عَظِيْمًاۙ
lā yastawil-qā‘idūna minal-mu'minīna gairu uliḍ-ḍarari wal-mujāhidūna fī sabīlillāhi bi'amwālihim wa anfusihim, faḍḍalallāhul-mujāhidīna bi amwālihim wa anfusihim ‘alal-qā‘idīna darajah(tan), wa kullaw wa‘adallāhul-ḥusnā, wa faḍḍalallāhul-mujāhidīna ‘alal-qā‘idīna ajran ‘aẓīmā(n).
एकटा मुसलमान जे बिना कोनो बहाना (बाधा) के बैसैत अछि (जे लड़ाई में भाग नै लैत अछि) आ अपन धन आ जान स अल्लाह के रास्ता में जेहाद के लेल प्रयासरत व्यक्ति के बीच एके बात नै छै। अल्लाह अपन धन आ आत्मा स जिहाद के लेल प्रयास करय वाला के दर्जा बैसय वाला (बिना बाधा के लड़ाई में शामिल नै करय वाला) के ऊपर बढ़ा देने छथिन्ह. प्रत्येक के साथ अल्लाह एक अच्छा (इनाम) (जन्नत) के वादा करै छै आरू अल्लाह न॑ जिहाद के लेलऽ प्रयास करै वाला लोगऽ प॑ ईसान करलकै, जे बड़ऽ इनाम के साथ बैठै छै,