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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak dan Adab Akhlak Akhlak Buruk Kezaliman Maafnya orang yang teraniaya

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कुल आयत : 3
149
Q.S अन-निसा के बा (4:149)

اِنْ تُبْدُوْا خَيْرًا اَوْ تُخْفُوْهُ اَوْ تَعْفُوْا عَنْ سُوْۤءٍ فَاِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَفُوًّا قَدِيْرًا

in tubdū khairan au tukhfūhu au ta‘fū ‘an sū'in fa innallāha kāna ‘afuwwan qadīrā(n).

अगर रउआ कवनो गुण के घोषणा करीं, ओकरा के छिपावत बानी भा (दूसरा आदमी) के गलती के माफ कर देत बानी त साँचहू अल्लाह क्षमाशील, सर्वशक्तिमान हवें।


96
Q.S अल-मु'मिनुन के ह (23:96)

اِدْفَعْ بِالَّتِيْ هِيَ اَحْسَنُ السَّيِّئَةَۗ نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا يَصِفُوْنَ

idfa‘ bil-latī hiya aḥsanus-sayyi'ah(ta), naḥnu a‘lamu bimā yaṣifūn(a).

ओह लोग के बुरा काम के बेहतर तरीका से नकार दीं, हमनी के बेहतर तरीका से जानत बानी जा कि ऊ लोग (अल्लाह) के का जिम्मेदार ठहरावेला।


40
Q.S ऐश-शूरा के बा (42:40)

وَجَزٰۤؤُا سَيِّئَةٍ سَيِّئَةٌ مِّثْلُهَا ۚفَمَنْ عَفَا وَاَصْلَحَ فَاَجْرُهٗ عَلَى اللّٰهِ ۗاِنَّهٗ لَا يُحِبُّ الظّٰلِمِيْنَ

wa jazā'u sayyi'atin sayyi'atum miṡluhā, faman ‘afā wa aṣlaḥa fa ajruhū ‘alallāh(i), innahū lā yuḥibbuẓ-ẓālimīn(a).

आ कवनो बुराई के इनाम एगो उचित बुराई ह, लेकिन जे माफ करी अवुरी भलाई करी (बुराई करे वाला के) तब इनाम अल्लाह के ओर से होई। दरअसल, उ अन्यायी लोग के पसंद नईखन करत।