وَاِذَا سَمِعُوْا مَآ اُنْزِلَ اِلَى الرَّسُوْلِ تَرٰٓى اَعْيُنَهُمْ تَفِيْضُ مِنَ الدَّمْعِ مِمَّا عَرَفُوْا مِنَ الْحَقِّۚ يَقُوْلُوْنَ رَبَّنَآ اٰمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشّٰهِدِيْنَ
wa iżā sami‘ū mā unzila ilar-rasūli tarā a‘yunahum tafīḍu minad-dam‘i mimmā ‘arafū minal-ḥaqq(i), yaqūlūna rabbanā āmannā faktubnā ma‘asy-syāhidīn(a).
आरू जबेॅ वू सब सुनलकै कि (कुरान) रसूलुल्लाह (मुहम्मद) के सामने जे कुछ उतारलऽ गेलऽ छेलै, त॑ तोहें देखलकै कि ओकरऽ आँखऽ सें नोर बहा रहलऽ छै, कैन्हेंकि वू सच्चाई के कारण छेलै जेकरा वू (अपनऽ किताबऽ सें) जानत॑ छेलै, कहै छेलै, "हे प्रभु, हम्में विश्वास करी लेल॑ छियै, ई लेली हमरा सिनी क॑ वू लोगऽ के साथ रिकॉर्ड में डालऽ जे (कुरान केरऽ सच्चाई आरू मुहम्मद केरऽ पैगम्बर केरऽ) गवाह छै ।
وَتَضْحَكُوْنَ وَلَا تَبْكُوْنَۙ
wa taḍḥakūna wa lā tabkūn(a).
आ अहाँ हँसैत छी आ कानैत नहि छी,