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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak dan Adab Akhlak Akhlak Mulia Taqwa Mengagungkan syi'ar Allah tanda ketakwaan hati

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कुल आयत : 5
2
Q.S अल-मैदाह (5:2)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تُحِلُّوْا شَعَاۤىِٕرَ اللّٰهِ وَلَا الشَّهْرَ الْحَرَامَ وَلَا الْهَدْيَ وَلَا الْقَلَاۤىِٕدَ وَلَآ اٰۤمِّيْنَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ يَبْتَغُوْنَ فَضْلًا مِّنْ رَّبِّهِمْ وَرِضْوَانًا ۗوَاِذَا حَلَلْتُمْ فَاصْطَادُوْا ۗوَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَاٰنُ قَوْمٍ اَنْ صَدُّوْكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ اَنْ تَعْتَدُوْاۘ وَتَعَاوَنُوْا عَلَى الْبِرِّ وَالتَّقْوٰىۖ وَلَا تَعَاوَنُوْا عَلَى الْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِ ۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ ۗاِنَّ اللّٰهَ شَدِيْدُ الْعِقَابِ

yā ayyuhal-lażīna āmanū lā tuḥillū sya‘ā'irallāhi wa lasy-syahral-ḥarāma wa lal-hadya wa lal-qalā'ida wa lā āmmīnal-baital-ḥarāma yabtagūna faḍlam mir rabbihim wa riḍwānā(n), wa iżā ḥalaltum faṣṭādū, wa lā yajrimannakum syana'ānu qaumin an ṣaddūkum ‘anil- asjidil-ḥarāmi an ta‘tadū, wa ta‘āwanū ‘alal-birri wat-taqwā, wa lā ta‘āwanū ‘alal-iṡmi wal-‘udwān(i), wattaqullāh(a), innallāha syadīdul-‘iqāb(i).

हे विश्वास करनिहार! अल्लाह के पवित्र सिद्धांत के उल्लंघन नै करू, आ हरम महीना के (इज्जत के उल्लंघन) नै करू, हदीयू (बलिदान के जानवर) आ कलाईद (चिह्नित बलिदान के जानवर) के (परेशान नै करू), आ बैतुलहरम में आबय वाला लोक के (साथ) परेशान नै करू; ओ सभ अपन प्रभुक कृपा आ प्रसन्नताक खोज करैत छथि | मुदा जँ इहराम पूरा क' लेने छी तखन शिकार भ' सकैत अछि। कोनो लोक के प्रति (अपन) घृणा नै होबय दियौक कियाक त ओ अहाँ के पवित्र मस्जिद स बाहर निकलय स रोकैत अछि, अहाँ के अपन सीमा स बाहर (हुनका दिस) जेबाक लेल प्रोत्साहित करैत अछि | आ धर्म आ धर्मपरायणता (करबा मे) अहाँक सहायता करू, आ पाप आ वैरभाव करबा मे अहाँक सहायता नहि करू। अल्लाह स डरू, सचमुच अल्लाह सजा मे बहुत कठोर छथि।


30
Q.S अल-हज (22:30)

ذٰلِكَ وَمَنْ يُّعَظِّمْ حُرُمٰتِ اللّٰهِ فَهُوَ خَيْرٌ لَّهٗ عِنْدَ رَبِّهٖۗ وَاُحِلَّتْ لَكُمُ الْاَنْعَامُ اِلَّا مَا يُتْلٰى عَلَيْكُمْ فَاجْتَنِبُوا الرِّجْسَ مِنَ الْاَوْثَانِ وَاجْتَنِبُوْا قَوْلَ الزُّوْرِ ۙ

Żālika wa may yu‘aẓẓim ḥurumātillāhi fa huwa khairul lahū ‘inda rabbih(ī), wa uḥillat lakumul-an‘āmu illā mā yutlā ‘alaikum fajtanibur-rijsa minal-auṡāni wajtanibū qaulaz-zūr(i).

एहन अछि (भगवानक आज्ञा)। आ जे कियो अल्लाह (हुरुमत) के नजरि में सम्मानजनक चीज के महिमामंडन करैत अछि तखन ओकर प्रभु के नजर में ओकरा लेल नीक अछि। आ अहाँ सभक लेल सभ माल-जालक अनुमति अछि, सिवाय ओहि पशु सभक जे अहाँ सभ केँ स्पष्ट कयल गेल अछि (निषिद्ध) तेँ अशुद्ध मूर्ति सभक (पूजा) सँ परहेज करू आ झूठ-वाणी सँ परहेज करू।


32
Q.S अल-हज (22:32)

ذٰلِكَ وَمَنْ يُّعَظِّمْ شَعَاۤىِٕرَ اللّٰهِ فَاِنَّهَا مِنْ تَقْوَى الْقُلُوْبِ

Żālika wa may yu‘aẓẓim sya‘ā'irallāhi fa innahā min taqwal-qulūb(i).

एहन अछि (भगवानक आज्ञा)। आ जे कियो अल्लाह के निशानी के महिमामंडन करैत अछि, तखन सचमुच ई हृदय के धर्मपरायणता स उत्पन्न होइत अछि।


36
Q.S अल-हज (22:36)

وَالْبُدْنَ جَعَلْنٰهَا لَكُمْ مِّنْ شَعَاۤىِٕرِ اللّٰهِ لَكُمْ فِيْهَا خَيْرٌۖ فَاذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلَيْهَا صَوَاۤفَّۚ فَاِذَا وَجَبَتْ جُنُوْبُهَا فَكُلُوْا مِنْهَا وَاَطْعِمُوا الْقَانِعَ وَالْمُعْتَرَّۗ كَذٰلِكَ سَخَّرْنٰهَا لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

wal-budna ja‘alnāhā lakum min sya‘ā'irillāhi lakum fīhā khair(un), fażkurusmallāhi ‘alaihā ṣawāff(a), fa iżā wajabat junūbuhā fa kulū minhā wa aṭ‘imul-qāni‘a wal-mu‘tarr(a), każālika sakhkharnāhā lakum la‘allakum tasykurūn(a).

आ हम अहाँ सब लेल ई ऊंट सब के अल्लाह के धर्म के संदेश के हिस्सा बना देने छी, अहाँ सब के एहि सब स बहुत नीक चीज प्राप्त होयत। त अल्लाह के नाम (जखन अहाँ एकरा कत्ल करय जा रहल छी) ठाढ़ भ क (आ पैर बान्हल अछि) कहू। तखन जखन ओ खसल (मरि गेल) तखन ओकर किछु खाउ आ जे व्यक्ति लग अछि ताहि सँ संतुष्ट (नहि पूछैत अछि) आ जे पूछैत अछि ओकरा खुआ दियौक। एहि तरहेँ हम सभ (ऊँट सभ केँ) अहाँक अधीन कयल, जाहि सँ अहाँ सभ कृतज्ञ भ' सकब।


37
Q.S अल-हज (22:37)

لَنْ يَّنَالَ اللّٰهَ لُحُوْمُهَا وَلَا دِمَاۤؤُهَا وَلٰكِنْ يَّنَالُهُ التَّقْوٰى مِنْكُمْۗ كَذٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمْ لِتُكَبِّرُوا اللّٰهَ عَلٰى مَا هَدٰىكُمْ ۗ وَبَشِّرِ الْمُحْسِنِيْنَ

lay yanālallāha luḥūmuhā wa lā dimā'uhā wa lākiy yanāluhut-taqwā minkum, każālika sakhkharahā lakum litukabbirullāha ‘alā mā hadākum, wa basysyiril-muḥsinīn(a).

(बलिदान जानवर के) मांस आ ओकर खून अल्लाह के पास कहियो नै पहुंचत, मुदा जे हुनका तक पहुंचैत अछि ओ अछि अहाँक धर्मपरायणता। एहि तरहेँ ओ एकरा अहाँ सभक अधीन कयलनि जाहि सँ अहाँ सभ अल्लाह केर महिमामंडन क' सकब जे ओ अहाँ सभ केँ देलनि अछि। आ नीक काज करनिहार केँ नीक खबरि पहुँचाउ।