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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Hari Kiamat (rukun iman no.5) Syafaat Syafaat untuk mengangkat derajat di surga

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109
Q.S ता-हा (20:109)

يَوْمَىِٕذٍ لَّا تَنْفَعُ الشَّفَاعَةُ اِلَّا مَنْ اَذِنَ لَهُ الرَّحْمٰنُ وَرَضِيَ لَهٗ قَوْلًا

yauma'iżil lā tanfa‘usy-syafā‘atu illā man ażina lahur-raḥmānu wa raḍiya lahū qaulā(n).

ओहि दिन बिनती (सहायता) के कोनो उपयोग नै होइत छैक, सिवाय ओहि लोक के जिनका परमात्मा परमात्मा अनुमति देने छथि, आ जिनकर वचन के ओ मंजूर करैत छथि |


28
Q.S अल-अनबिया (21:28)

يَعْلَمُ مَا بَيْنَ اَيْدِيْهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُوْنَۙ اِلَّا لِمَنِ ارْتَضٰى وَهُمْ مِّنْ خَشْيَتِهٖ مُشْفِقُوْنَ

ya‘lamū mā baina aidīhim wa mā khalfahum wa lā yasyfa‘ūna illā limanirtaḍā wa hum min khasy-yatihī musyfiqūn(a).

ओ (अल्लाह) सब किछु जनैत छथि जे हुनका (फरिश्ता) आ पाछू अछि, आ ओ सब बिनती नहि करैत छथि सिवाय जिनका (अल्लाह) चाहैत छथि, आ ओ सब सदिखन सावधान रहैत छथि, कारण ओ हुनका स डरैत छथि।