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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ अल्लाह (आस्था का स्तंभ क्रमांक 1) भगवान के नाम और गुण सबसे उचित

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कुल श्लोक : 3
8
Q.S अल-मैदाह (5:8)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا كُوْنُوْا قَوَّامِيْنَ لِلّٰهِ شُهَدَاۤءَ بِالْقِسْطِۖ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَاٰنُ قَوْمٍ عَلٰٓى اَلَّا تَعْدِلُوْا ۗاِعْدِلُوْاۗ هُوَ اَقْرَبُ لِلتَّقْوٰىۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ ۗاِنَّ اللّٰهَ خَبِيْرٌۢ بِمَا تَعْمَلُوْنَ

yā ayyuhal-lażīna āmanū kūnū qawwāmīna lillāhi syuhadā'a bil-qisṭi wa lā yajrimannakum syana'ānu qamin ‘alā allā ta‘dilū, i‘dilū, huwa aqrabu lit-taqwā wattaqullāh(a), innallāha khabīrum bimā ta‘malūn(a).

ऐ ईमान वालों! अल्लाह के लिए इंसाफ़ के साथ खड़े होने वाले बनो, और गवाही में इंसाफ़ करो। और किसी क़ौम से तुम्हारी दुश्मनी तुम्हें नाइंसाफ़ी करने के लिए न उकसाए। इंसाफ़ करो, यह तक़वा के ज़्यादा क़रीब है। और अल्लाह से डरो, निश्चय ही, अल्लाह तुम्हारे कामों से पूरी तरह वाक़िफ़ है।


90
Q.S एक Nahl (16:90)

۞ اِنَّ اللّٰهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْاِحْسَانِ وَاِيْتَاۤئِ ذِى الْقُرْبٰى وَيَنْهٰى عَنِ الْفَحْشَاۤءِ وَالْمُنْكَرِ وَالْبَغْيِ يَعِظُكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُوْنَ

innallāha ya'muru bil-‘adli wal-iḥsāni wa ītā'i żil-qurbā wa yanhā ‘anil-faḥsyā'i wal-munkari wal-bagyi ya‘iẓukum la‘allakum tażakkarūn(a).

निश्चित रूप से अल्लाह इंसाफ़ करने, नेकी करने और रिश्तेदारों को देने का हुक्म देता है, और वह बुराई, ना-इंसाफी और ज़ुल्म से मना करता है। वह तुम्हें नसीहत देता है ताकि तुम सबक लो।


17
Q.S ग़ाफिर (40:17)

اَلْيَوْمَ تُجْزٰى كُلُّ نَفْسٍۢ بِمَا كَسَبَتْ ۗ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَ ۗاِنَّ اللّٰهَ سَرِيْعُ الْحِسَابِ

al-yauma tujzā kullu nafsim bimā kasabat, lā ẓulmal-yaum(a), innallāha sarī‘ul-ḥisāb(i).

आज हर शख्स को उसकी कमाई के मुताबिक़ जज़ा दी जाएगी। आज कोई ज़ुल्म नहीं होगा। निश्चित रूप से, अल्लाह बहुत जल्द हिसाब करने वाला है।