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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Allah (rukun iman no.1) Nama dan Sifat Allah Sifat Allah dan asmaul husna Al Muizz Yang Maha Memuliakan

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कुल आयत : 3
26
Q.S अली इमरान के ह (3:26)

قُلِ اللّٰهُمَّ مٰلِكَ الْمُلْكِ تُؤْتِى الْمُلْكَ مَنْ تَشَاۤءُ وَتَنْزِعُ الْمُلْكَ مِمَّنْ تَشَاۤءُۖ وَتُعِزُّ مَنْ تَشَاۤءُ وَتُذِلُّ مَنْ تَشَاۤءُ ۗ بِيَدِكَ الْخَيْرُ ۗ اِنَّكَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ

qulillāhumma mālikal-mulki tu'til-mulka man tasyā'u wa tanzi‘ul-mulka mim man tasyā'(u), wa tu‘izzu man tasyā'u wa tużillu man tasyā'(u), biyadikal-khair(u), innaka ‘alā kulli syai'in qadīr(un).

कह (मुहम्मद), "हे सत्ता के स्वामी, तू जेकरा मन करे ओकरा के सत्ता दे देनी, आ जेकरा मन करे ओकरा से सत्ता छीन लेनी। जेकरा मन करे ओकरा के ऊपर उठावेनी आ जेकरा मन करे ओकरा के अपमानित करेनी। तोहरा हाथ में सब भलाई बा। साँचहू तू सब कुछ पर सर्वशक्तिमान बाड़ू।"


18
Q.S अल-हज के ह (22:18)

اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ يَسْجُدُ لَهٗ مَنْ فِى السَّمٰوٰتِ وَمَنْ فِى الْاَرْضِ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ وَالنُّجُوْمُ وَالْجِبَالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوَاۤبُّ وَكَثِيْرٌ مِّنَ النَّاسِۗ وَكَثِيْرٌ حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُۗ وَمَنْ يُّهِنِ اللّٰهُ فَمَا لَهٗ مِنْ مُّكْرِمٍۗ اِنَّ اللّٰهَ يَفْعَلُ مَا يَشَاۤءُ ۩ۗ

alam tara annallāha yasjudu lahū man fis-samāwāti wa man fil-arḍi wasy-syamsu wal-qamaru wan-nujūmu wal-jibālu wasy-syajaru wad-dawābbu wa kaṡīrum minan-nās(i), wa kaṡīrun ḥaqqa ‘alaihil-‘ażāb(u), wa may yuhinillāhu famā lahū mim mukrim(in), innallāha yaf‘alu mā yasyā'(u).

का रउवां नइखीं जानत कि जे भी आसमान में बा आ जे धरती पर बा उ अल्लाह के प्रणाम करेला, साथ ही सूरज, चाँद, तारा, पहाड़, पेड़, रेंगत जानवर आ कई लोग के भी? लेकिन बहुत (लोग) सजा के हकदार बाड़े। अल्लाह जेकर अपमान करी ओकरा के केहू महिमा ना करी। साँचहू अल्लाह जवन मन करेला उहे करेला।


10
Q.S फातिर के बा (35:10)

مَنْ كَانَ يُرِيْدُ الْعِزَّةَ فَلِلّٰهِ الْعِزَّةُ جَمِيْعًاۗ اِلَيْهِ يَصْعَدُ الْكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالْعَمَلُ الصَّالِحُ يَرْفَعُهٗ ۗوَالَّذِيْنَ يَمْكُرُوْنَ السَّيِّاٰتِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيْدٌ ۗوَمَكْرُ اُولٰۤىِٕكَ هُوَ يَبُوْرُ

man kāna yurīdul-‘izzata falillāhil-‘izzatu jamī‘ā(n), ilaihi yaṣ‘adul-kalimuṭ-ṭayyibu wal-‘amaluṣ-ṣāliḥu yarfa‘uh(ū), wal-lażīna yamkurūnas-sayyi'āti lahum ‘ażābun syadīd(un), wa makru ulā'ika huwa yabūr(u).

जे महिमा के चाहत बा, तब (जान) सब महिमा अल्लाह के ह। उहे खातिर नीमन बात उठी, आ उ नीमन काम के ऊपर उठाई। रहल बात बुराई के साजिश रचे वाला के त बहुत कड़ा सजा मिल जाई, अवुरी उनुकर बुरा योजना नष्ट हो जाई।