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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak dan Adab Akhlak Akhlak Mulia Berserah diri

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कुल आयत : 4
72
Q.S ता-हा के बा (20:72)

قَالُوْا لَنْ نُّؤْثِرَكَ عَلٰى مَا جَاۤءَنَا مِنَ الْبَيِّنٰتِ وَالَّذِيْ فَطَرَنَا فَاقْضِ مَآ اَنْتَ قَاضٍۗ اِنَّمَا تَقْضِيْ هٰذِهِ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا ۗ

qālū lan nu'ṡiraka ‘alā mā jā'anā minal-bayyināti wal-lażī faṭaranā faqḍi mā anta qāḍ(in), innamā taqḍī hāżihil-ḥayātad-dun-yā.

उ लोग (जादूगर) कहले कि, "हमनी के साफ सबूत (चमत्कार) के आधार प आपके सोझा ना चुनब (सबमिट) करब, जवन कि हमनी के लगे आईल बा अवुरी (अल्लाह) के आधार प जवन हमनी के रचले बाड़े। एहसे तय करीं कि आप का फैसला कईल चाहतानी। असल में आप सिर्फ ए दुनिया के जीवन के फैसला क सकतानी।"


50
Q.S ऐश-शु'आरा के बा (26:50)

قَالُوْا لَا ضَيْرَ ۖاِنَّآ اِلٰى رَبِّنَا مُنْقَلِبُوْنَ ۚ

qālū lā ḍair(a), innā ilā rabbinā munqalibūn(a).

उ लोग कहलस कि हमनी के कवनो डर के बात नईखे, काहेकी हमनी के अपना प्रभु के लगे वापस आ जाईब।


38
Q.S अज-जुमार के ह (39:38)

وَلَىِٕنْ سَاَلْتَهُمْ مَّنْ خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ لَيَقُوْلُنَّ اللّٰهُ ۗ قُلْ اَفَرَءَيْتُمْ مَّا تَدْعُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ اِنْ اَرَادَنِيَ اللّٰهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كٰشِفٰتُ ضُرِّهٖٓ اَوْ اَرَادَنِيْ بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكٰتُ رَحْمَتِهٖۗ قُلْ حَسْبِيَ اللّٰهُ ۗعَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُوْنَ

wa la'in sa'altahum man khalaqas-samāwāti wal-arḍa layaqūlunnallāh(u), qul afara'aitum mā tad‘ūna min dūnillāhi in arādaniyallāhu biḍurrin hal hunna kāsyifātu ḍurrihī au arādanī biraḥmatin hal hunna mumsikātu raḥmatih(ī), qul ḥasbiyallāh(u), ‘alaihi yatawakkalul-mutawakkilūn(a).

आ साँचहू अगर रउरा ओह लोग से पूछब कि "आकाश आ धरती के बनवले बा?" उ लोग जरूर जवाब दिहे कि "अल्लाह।" कहऽ कि, "तब का रउवा जानत बानी कि रउवा अल्लाह के अलावा का इबादत करेनी, अगर अल्लाह हमरा पर आपदा ले आवे के चाहत बाड़े त का उ लोग आपदा के दूर करे में सक्षम होईहे, चाहे अल्लाह हमरा प रहम करे के चाहत बाड़े त का उ लोग उनुकर दया रोक सकतारे?" कह दीं कि "हमरा खातिर अल्लाह काफी बाड़े। जे भरोसा राखेला उ उनुका के अधीन हो जाला।"


44
Q.S गफीर के नाम से जानल जाला (40:44)

فَسَتَذْكُرُوْنَ مَآ اَقُوْلُ لَكُمْۗ وَاُفَوِّضُ اَمْرِيْٓ اِلَى اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ بَصِيْرٌ ۢبِالْعِبَادِ

fa satażkurūna mā aqūlu lakum, wa ufawwiḍu amrī ilallāh(i), innallāha baṣīrum bil-‘ibād(i).

तब कबो तोहरा याद आ जाई कि हम जवन बतवले रहनी। आ हम आपन काम अल्लाह के सौंप देनी। दरअसल, अल्लाह अपना सेवकन के सर्वदर्शी हवे।"