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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - इसलाम इस्लाम का रद्द होना मुस्लिम उम्माह के पतन का कारण बनता है कब्र को समतल करना कब्रों पर नमाज़ पढ़ने पर रोक

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कुल श्लोक : 2
84
Q.S एट-तौबाह (9:84)

وَلَا تُصَلِّ عَلٰٓى اَحَدٍ مِّنْهُمْ مَّاتَ اَبَدًا وَّلَا تَقُمْ عَلٰى قَبْرِهٖۗ اِنَّهُمْ كَفَرُوْا بِاللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖ وَمَاتُوْا وَهُمْ فٰسِقُوْنَ

wa lā tuṣalli ‘alā aḥadim minhum māta abadaw wa lā taqum ‘alā qabrih(ī), innahum kafarū billāhi wa rasūlihī wa mātū wa hum fāsiqūn(a).

और तुम (मुहम्मद) उनमें से किसी मुनाफ़िक़ के लिए, जो मर जाए, कभी भी नमाज़ न पढ़ो और न ही उनकी कब्र पर खड़े होकर (दुआ करो)। निश्चय ही वे अल्लाह और उनके रसूल के प्रति काफ़िर थे और वे फ़ासिक हालत में मरे।


18
Q.S अल जिन्न (72:18)

وَّاَنَّ الْمَسٰجِدَ لِلّٰهِ فَلَا تَدْعُوْا مَعَ اللّٰهِ اَحَدًاۖ

wa annal-masājida lillāhi falā tad‘ū ma‘allāhi aḥadā(n).

और निश्चित रूप से मस्जिदें अल्लाह के लिए हैं। तो तुम उनके अंदर अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो।