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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Para Malaikat (rukun iman no.2) Sifat Malaikat Selalu taat, tidak pernah durhaka

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कुल आयत : 5
49
Q.S अन-नहल (16:49)

وَلِلّٰهِ يَسْجُدُ مَا فِى السَّمٰوٰتِ وَمَا فِى الْاَرْضِ مِنْ دَاۤبَّةٍ وَّالْمَلٰۤىِٕكَةُ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُوْنَ

wa lillāhi yasjudu mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍi min dābbatiw wal-malā'ikatu wa hum yastakbirūn(a).

आरू जे कुछ आकाश आरू धरती पर छै, वू खाली अल्लाह के सामने सजदा करै छै, यानी सब चलैत (जीवंत) जीव आरू (साथ ही) फरिश्ता, आरू वू (फरिश्ता) घमंड नै करै छै।


50
Q.S अन-नहल (16:50)

يَخَافُوْنَ رَبَّهُمْ مِّنْ فَوْقِهِمْ وَيَفْعَلُوْنَ مَا يُؤْمَرُوْنَ ࣖ ۩

yakhāfūna rabbahum min fauqihim wa yaf‘alūna mā yu'marūn(a).

ओ सभ भगवान् सँ डरैत छथि जे हुनका सभ पर (अधिकार रखैत छथि) आ जे आज्ञा देल गेल अछि तकरा पूरा करैत छथि |


19
Q.S अल-अनबिया (21:19)

وَلَهٗ مَنْ فِى السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِۗ وَمَنْ عِنْدَهٗ لَا يَسْتَكْبِرُوْنَ عَنْ عِبَادَتِهٖ وَلَا يَسْتَحْسِرُوْنَ ۚ

wa lahū man fis-samāwāti wal-arḍ(i), wa man ‘indahū lā yastakbirūna ‘an ‘ibādatihī wa lā yastaḥsirūn(a).

आ आकाश आ पृथ्वी पर जे छथि, हुनकर छथि। आ (स्वर्गदूत) जे हुनकर कात मे छथि, हुनका मे हुनकर पूजा करबाक अहंकार नहि होइत छनि आ (संगहि) थकान नहि होइत छनि |


20
Q.S अल-अनबिया (21:20)

يُسَبِّحُوْنَ الَّيْلَ وَالنَّهَارَ لَا يَفْتُرُوْنَ

yusabbiḥūnal-laila wan-nahāra wa lā yafturūn(a).

ओ सभ (स्वर्गदूत) राति-दिन अविराम महिमामंडन करैत छथि |


6
Q.S अत-तहरीम (66:6)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا قُوْٓا اَنْفُسَكُمْ وَاَهْلِيْكُمْ نَارًا وَّقُوْدُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُ عَلَيْهَا مَلٰۤىِٕكَةٌ غِلَاظٌ شِدَادٌ لَّا يَعْصُوْنَ اللّٰهَ مَآ اَمَرَهُمْ وَيَفْعَلُوْنَ مَا يُؤْمَرُوْنَ

yā ayyuhal-lażīna āmanū qū anfusakum wa ahlīkum nāraw waqūduhan-nāsu wal-ḥijāratu ‘alaihā malā'ikatun gilāẓun syidādul lā ya‘ṣūnallāha mā amarahum wa yaf‘alūna mā yu'marūn(a).

हे विश्वास करनिहार! अपना आ अपन परिवार के ओहि नरक के आगि स बचाउ जकर ईंधन लोक आ पाथर अछि; रक्षक रूक्ष आरू कठोर स्वर्गदूत छै, जे अल्लाह केरऽ हुक्म म॑ ओकरऽ आज्ञा नै मान॑ छै आरू हमेशा जे कहलऽ जाय छै, वू करै छै ।