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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Hari Kiamat (rukun iman no.5) Tanda Kiamat Orang-orang berperangai buruk diangkat sebagai pemimpin dan mengabaikan orang pilihan

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124
Q.S अल-बकराह (2:124)

۞ وَاِذِ ابْتَلٰٓى اِبْرٰهٖمَ رَبُّهٗ بِكَلِمٰتٍ فَاَتَمَّهُنَّ ۗ قَالَ اِنِّيْ جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ اِمَامًا ۗ قَالَ وَمِنْ ذُرِّيَّتِيْ ۗ قَالَ لَا يَنَالُ عَهْدِى الظّٰلِمِيْنَ

wa iżibtalā ibrāhīma rabbuhū bikalimātin fa atammahunn(a), qāla innī jā‘iluka lin-nāsi imāmā(n), qāla wa min żurriyyatī, qāla lā yanālu ‘ahdiẓ-ẓālimīn(a).

अर (याद राखजो), जद अब्राहम नै उणरै प्रभु रै द्वारा थोड़ै वाक्यां रै साथै परख्यो गयो हो, तो बो बांनै पूरी तरह सूं निभायो हो। उण (अल्लाह) कह्यो, "वास्तव में, मैं थानै सगळी मिनखां रो नेता बणायो है।" उण (इब्राहिम) कह्यो, "अर (अर) म्हारै टाबरां अर पोतां सूं भी?" अल्लाह कहै है, "(सच है, पण) म्हारो वचन गलत लोगां माथै लागू कोनी होवै।"


247
Q.S अल-बकराह (2:247)

وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ اِنَّ اللّٰهَ قَدْ بَعَثَ لَكُمْ طَالُوْتَ مَلِكًا ۗ قَالُوْٓا اَنّٰى يَكُوْنُ لَهُ الْمُلْكُ عَلَيْنَا وَنَحْنُ اَحَقُّ بِالْمُلْكِ مِنْهُ وَلَمْ يُؤْتَ سَعَةً مِّنَ الْمَالِۗ قَالَ اِنَّ اللّٰهَ اصْطَفٰىهُ عَلَيْكُمْ وَزَادَهٗ بَسْطَةً فِى الْعِلْمِ وَالْجِسْمِ ۗ وَاللّٰهُ يُؤْتِيْ مُلْكَهٗ مَنْ يَّشَاۤءُ ۗ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَلِيْمٌ

wa qāla lahum nabiyyuhum innallāha qad ba‘aṡa lakum ṭālūta malikā(n), qālū annā yakūnu lahul-mulku ‘alainā wa naḥnu aḥaqqu bil-mulki minhu wa lam yu'ta sa‘atam minal-māl(i), qāla innallāhaṣṭafāhu ‘alaikum wa zādahū basṭatan fil-‘ilmi wal-jism(i), wallāhu yu'tī mulkahū may yasyā'(u), wallāhu wāsi‘un ‘alīm(un).

अर बांका नबी बांनै कह्यो, "वाकई अल्लाह थारो राजा बणायो है।" बां जवाब दियो, "जद म्हांनै उणसूं बेसी राज रा हकदार हा अर उणनै घणो धन नीं दियो गयो हो, तलुत म्हारै माथै राज कियां कर सक्यो?" (नबी) जवाब दियो, "अल्लाह उणनै थारै वास्तै (राजा बणाबा रै वास्तै) चुण्यो है अर थानै श्रेष्ठ ज्ञान अर शारीरिक क्षमतावां दी है।" अल्लाह आपरो राज्य जिणनै चावै उणनै देवै है अर अल्लाह सर्वव्यापी अर सर्वज्ञ है।


16
Q.S अल-इसरा (17:16)

وَاِذَآ اَرَدْنَآ اَنْ نُّهْلِكَ قَرْيَةً اَمَرْنَا مُتْرَفِيْهَا فَفَسَقُوْا فِيْهَا فَحَقَّ عَلَيْهَا الْقَوْلُ فَدَمَّرْنٰهَا تَدْمِيْرًا

wa iżā aradnā an nuhlika qaryatan amarnā mutrafīhā fa fasaqū fīhā fa ḥaqqa ‘alaihal-qaulu fa dammarnāhā tadmīrā(n).

अर जे आपां किणी देस नै तबाह करणो चावां तो आपां उण देस मांय ठाठ-बाट मांय रैवण आळा लोगां नै हुकम देवांला (अल्लाह री आज्ञा मानै), पण जे वै उण देस मांय अवज्ञा करैला तो बां माथै (म्हारी सजा) रा सबद लागू हुवैला, तो आपां उण देस नै पूरी तरै सूं तबाह कर देवांला।


34
Q.S अल-मुमिनून (23:34)

وَلَىِٕنْ اَطَعْتُمْ بَشَرًا مِّثْلَكُمْ اِنَّكُمْ اِذًا لَّخٰسِرُوْنَ ۙ

wa la'in aṭa‘tum basyaram miṡlakum innakum iżal lakhāsirūn(a).

अर साची, जे थै थारै जिसा मिनखां री बात मानोला तो थै निश्चित रूप सूं हार जावोला।


50
Q.S अल-कसास (28:50)

فَاِنْ لَّمْ يَسْتَجِيْبُوْا لَكَ فَاعْلَمْ اَنَّمَا يَتَّبِعُوْنَ اَهْوَاۤءَهُمْۗ وَمَنْ اَضَلُّ مِمَّنِ اتَّبَعَ هَوٰىهُ بِغَيْرِ هُدًى مِّنَ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِى الْقَوْمَ الظّٰلِمِيْنَ ࣖ

fa illam yastajībū laka fa‘lam annamā yattabi‘ūna ahwā'ahum, wa man aḍallu mimmanittaba‘a hawāhu bigairi hudam minallāh(i), innallāha lā yahdil-qaumaẓ-ẓālimīn(a).

तो जे वे (थारी चुनौती) रो जवाब कोनी देवै है, तो जाण ल्यो कै वे फगत आपरी इच्छावां रो पालन कर रैया है। अर अल्लाह सूं जरा भी मार्गदर्शन प्राप्त किये बिना आपरी इच्छावां रै पाछै चालण आळा सूं ज्यादा भटक कुण है? साची, अल्लाह गलत काम करण आळा नै मार्गदर्शन कोनी करै।