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Q.S अन-नहल (16:120)
اِنَّ اِبْرٰهِيْمَ كَانَ اُمَّةً قَانِتًا لِّلّٰهِ حَنِيْفًاۗ وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَۙ
inna ibrāhīma kāna ummatan qānital lillāhi ḥanīfā(n), wa lam yaku minal-musyrikīn(a).
सचमुच इब्राहिम एकटा इमाम (जेकरा उदाहरण के रूप में प्रयोग कयल जा सकैत अछि), अल्लाह आ हनीफ के आज्ञाकारी छलाह | आ ओ मुश्रिक (अल्लाह के साथ साझीदार) में नै छैथ,
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Q.S अल-मु'मिनुन (23:59)
وَالَّذِيْنَ هُمْ بِرَبِّهِمْ لَا يُشْرِكُوْنَ ۙ
wal-lażīna hum birabbihim lā yusyrikūn(a).
आ जे अपन प्रभुक संगति नहि करैत छथि,