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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Sejarah Akhlak Nabi Muhammad Shalallahu alaihi wassalam Budi Pekerti Kaum Muhajirin Kemiskinan dan kesulitan di awal Islam

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कुल आयत : 4
214
Q.S अल-बकराह के ह (2:214)

اَمْ حَسِبْتُمْ اَنْ تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ وَلَمَّا يَأْتِكُمْ مَّثَلُ الَّذِيْنَ خَلَوْا مِنْ قَبْلِكُمْ ۗ مَسَّتْهُمُ الْبَأْسَاۤءُ وَالضَّرَّاۤءُ وَزُلْزِلُوْا حَتّٰى يَقُوْلَ الرَّسُوْلُ وَالَّذِيْنَ اٰمَنُوْا مَعَهٗ مَتٰى نَصْرُ اللّٰهِ ۗ اَلَآ اِنَّ نَصْرَ اللّٰهِ قَرِيْبٌ

am ḥasibtum an tadkhulul-jannata wa lammā ya'tikum maṡalul-lażīna khalau min qablikum, massathumul-ba'sā'u waḍ-ḍarrā'u wa zulzilū ḥattā yaqūlar-rasūlu wal-lażīna āmanū ma‘ahū matā naṣrullāh(i), alā inna naṣrallāhi qarīb(un).

या रउवा लागत बा कि रउवा जन्नत में प्रवेश करब जबकि अइसन (परीक्षा) अभी तक रउवा लगे नइखे आइल जवन रउवा से पहिले गुजरल लोग के लगे आईल रहे। उ लोग गरीबी, दुख से त्रस्त रहले अवुरी (विविध परीक्षा से) हिल गईले, जब तक कि रसूलुल्लाह अवुरी उनुका संगे इमानदार लोग ना कहले कि, "अल्लाह के मदद कब आई?" निश्चित रूप से अल्लाह के मदद नजदीक बा।


26
Q.S अल-अनफल के ह (8:26)

وَاذْكُرُوْٓا اِذْ اَنْتُمْ قَلِيْلٌ مُّسْتَضْعَفُوْنَ فِى الْاَرْضِ تَخَافُوْنَ اَنْ يَّتَخَطَّفَكُمُ النَّاسُ فَاٰوٰىكُمْ وَاَيَّدَكُمْ بِنَصْرِهٖ وَرَزَقَكُمْ مِّنَ الطَّيِّبٰتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُوْنَ

ważkurū iż antum qalīlum mustaḍ‘afūna fil-arḍi takhāfūna ay yatakhaṭṭafakumun-nāsu fa āwākum wa ayyadakum binaṣrihī wa razaqakum minaṭ-ṭayyibāti la‘allakum tasykurūn(a).

आ याद रखीं, जब रउआ (मुहाजिरीन) अभी भी (मुहाजिरीन) कम संख्या में रहनी, धरती (मक्का) पर दबावल रहनी, आ रउआ डर रहे कि (मक्का के) लोग रउआ के अपहरण कर ली, तब उ रउआ के रहे खातिर जगह (मदीना) देले रहले आ रउआ के अपना मदद से मजबूत बना दिहले रहले आ रउआ के अच्छा रोजी-रोटी देले रहले ताकि रउआ आभारी रहीं।


10
Q.S अल-हदीद के ह (57:10)

وَمَا لَكُمْ اَلَّا تُنْفِقُوْا فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَلِلّٰهِ مِيْرَاثُ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِۗ لَا يَسْتَوِيْ مِنْكُمْ مَّنْ اَنْفَقَ مِنْ قَبْلِ الْفَتْحِ وَقَاتَلَۗ اُولٰۤىِٕكَ اَعْظَمُ دَرَجَةً مِّنَ الَّذِيْنَ اَنْفَقُوْا مِنْۢ بَعْدُ وَقَاتَلُوْاۗ وَكُلًّا وَّعَدَ اللّٰهُ الْحُسْنٰىۗ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ خَبِيْرٌ ࣖ

wa mā lakum allā tunfiqū fī sabīlillāhi wa lillāhi mīrāṡus-samāwāti wal-arḍ(i), lā yastawī minkum man anfaqa min qablil-fatḥi wa qātal(a), ulā'ika a‘ẓamu darajatam minal-lażīna anfaqū mim ba‘du wa qātalū, wa kullaw wa‘adallāhul-ḥusnā, wallāhu bimā ta‘malūna khabīr(un).

आ रउरा आपन धन अल्लाह के राह में काहे ना खरचत बानी, जब आकाश आ धरती के सगरी विरासत अल्लाह के ह. इ उहे नईखे जवन कि आपके बीच (अल्लाह के राह में आपन धन) खर्च करेले अवुरी (मक्का के) फतह से पहिले लड़त बाड़े। (अपना धन) खर्च करे वाला आ ओकरा बाद लड़ाई करे वाला लोग से ओह लोग के रैंक अधिका होला. आ अल्लाह ओहमें से हर केहू के बेहतर (इनाम) देबे के वादा कइलन. आ अल्लाह रउरा जवन करेनी ओकरा से वाकिफ बाड़े.


8
Q.S अद-दुहा के बा (93:8)

وَوَجَدَكَ عَاۤىِٕلًا فَاَغْنٰىۗ

wa wajadaka ‘ā'ilan fa agnā.

आ ऊ रउरा के जरूरतमंद के रूप में पावलन, तब ऊ रउरा के पर्याप्तता दे दिहलन.