3
Q.S अल-कलाम (68:3)
وَاِنَّ لَكَ لَاَجْرًا غَيْرَ مَمْنُوْنٍۚ
wa inna laka la'ajran gaira mamnūn(in).
आ सचमुच अहाँ के एकटा पैघ इनाम जरूर भेटत जे कहियो खत्म नै होयत।
5
Q.S अद-दुहा (93:5)
وَلَسَوْفَ يُعْطِيْكَ رَبُّكَ فَتَرْضٰىۗ
wa lasaufa yu‘ṭīka rabbuka fa tarḍā.
आ सत्ते, एक दिन अहाँक प्रभु अहाँ पर अपन कृपा अवश्य करताह, जाहि सँ अहाँ तृप्त भ' जायब।
7
Q.S अद-दुहा (93:7)
وَوَجَدَكَ ضَاۤلًّا فَهَدٰىۖ
wa wajadaka ḍāllan fa hadā.
आ ओ अहाँ सभ केँ भ्रमित पाबि गेलाह, तेँ ओ अहाँ सभ केँ मार्गदर्शन देलनि
1
Q.S ऐश-शर्ह (94:1)
اَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَۙ
alam nasyraḥ laka ṣadrak(a).
की हम अहाँक छाती (मुहम्मद) के विस्तार नहि केने छी?
4
Q.S ऐश-शर्ह (94:4)
وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَۗ
wa rafa‘nā laka żikrak(a).
आ हम तोहर नाम तोहर लेल बढ़ौने छी।