اِذْ تَمْشِيْٓ اُخْتُكَ فَتَقُوْلُ هَلْ اَدُلُّكُمْ عَلٰى مَنْ يَّكْفُلُهٗ ۗفَرَجَعْنٰكَ اِلٰٓى اُمِّكَ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ ەۗ وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنٰكَ مِنَ الْغَمِّ وَفَتَنّٰكَ فُتُوْنًا ەۗ فَلَبِثْتَ سِنِيْنَ فِيْٓ اَهْلِ مَدْيَنَ ەۙ ثُمَّ جِئْتَ عَلٰى قَدَرٍ يّٰمُوْسٰى
iż tamsyī ukhtuka fa taqūlu hal adullukum ‘alā may yakfuluh(ū), fa raja‘nāka ilā ummika kai taqarra ‘ainuhā wa lā taḥzan(a), wa qatalta nafsan fa najjaināka minal-gammi wa fatannāka futūnā(n), fa labiṡta sinīna fī ahli madyan(a), ṡumma ji'ta ‘alā qadariy yā mūsā.
(अर्थात) जखन अहाँक बहिन चलैत छलीह तखन ओ बजलीह (फिरौनाक परिवार केँ) 'की हम अहाँ केँ ओ व्यक्ति देखा सकैत छी जे हुनकर देखभाल करत?' तेँ हम अहाँकेँ अहाँक माय लग घुरा देलियनि, जाहिसँ हुनकर मोन प्रसन्न होथि आ ओ दुखी नहि होथि । आ अहाँ एक बेर ककरो मारि देलहुँ, तखन हम अहाँ केँ (बड़का) कठिनाइ सँ बचा लेलहुँ आ हम अहाँ केँ कतेको (कठिन) परीक्षा सँ परीक्षा देलहुँ; तखन अहाँ कतेको वर्ष मदयन लोकक बीच रहलहुँ, तखन अहाँ हे मूसा, निर्धारित समय पर आबि गेलहुँ,
۞ وَحَرَّمْنَا عَلَيْهِ الْمَرَاضِعَ مِنْ قَبْلُ فَقَالَتْ هَلْ اَدُلُّكُمْ عَلٰٓى اَهْلِ بَيْتٍ يَّكْفُلُوْنَهٗ لَكُمْ وَهُمْ لَهٗ نٰصِحُوْنَ
wa ḥarramnā ‘alaihil-marāḍi‘a min qablu faqālat hal adullukum ‘alā ahli baitiy yakfulūnahū lakum wa hum lahū nāṣiḥūn(a).
आ हम ओकरा (मूसा) ओहि महिला सभ केँ स्तनपान कराबय सँ रोकलहुँ जे (ओकरा) ओकरा सँ पहिने स्तनपान कराबय चाहैत छलीह; तखन ओ (मूसाक भाइ) कहलनि, "की हम अहाँ केँ एहन परिवार देखाबी जे अहाँक लेल हुनकर देखभाल करत आ ओ सभ हुनका संग नीक व्यवहार क' सकय?"
فَرَدَدْنٰهُ اِلٰٓى اُمِّهٖ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ وَلِتَعْلَمَ اَنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَّلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُوْنَ ࣖ
faradadnāhu ilā ummihī kai taqarra ‘ainuhā wa lā taḥzana wa lita‘lama anna wa‘dallāhi ḥaqquw wa lākinna akṡarahum lā ya‘lamūn(a).
त हम हुनका (मूसा) के हुनकर माय के पास वापस क देलियनि, ताकि हुनकर दिल खुश रहय आ दुखी नै होथि, आ ताकि हुनका पता चलय जे अल्लाह के वादा सही अछि, मुदा अधिकांश के पता नै छैन्ह।